en
Feedback
ब्रह्मचर्य

ब्रह्मचर्य

Open in Telegram

ब्रह्मचर्य ही जीवन है 🙏🏻 समूह का लिंक 👇👇 @brahmacharya1 🚩🚩🚩🚩🚩🚩 #ब्रह्मचर्य #आयुर्वेद #योग #मोटिवेशन #वेद #अध्यात्म #सनातन #ध्यान #साधना_उपासना #ज्ञान #धर्म #शांति ब्रह्मचर्य शक्ति (Brahmacharya Shakti), वीर्य रक्षा (Semen Retention)

Show more
6 453
Subscribers
+224 hours
+127 days
+3030 days
Attracting Subscribers
September '26
September '26
+73
in 3 channels
August '26
+177
in 1 channels
Get PRO
July '26
+213
in 0 channels
Get PRO
June '26
+189
in 0 channels
Get PRO
May '26
+240
in 0 channels
Get PRO
April '26
+169
in 10 channels
Get PRO
March '26
+73
in 2 channels
Get PRO
February '26
+114
in 0 channels
Get PRO
January '26
+156
in 0 channels
Get PRO
December '25
+142
in 0 channels
Get PRO
November '25
+166
in 1 channels
Get PRO
October '25
+152
in 1 channels
Get PRO
September '25
+216
in 1 channels
Get PRO
August '25
+241
in 0 channels
Get PRO
July '25
+193
in 0 channels
Get PRO
June '25
+156
in 2 channels
Get PRO
May '25
+202
in 1 channels
Get PRO
April '25
+185
in 2 channels
Get PRO
March '25
+205
in 2 channels
Get PRO
February '25
+218
in 1 channels
Get PRO
January '25
+493
in 3 channels
Get PRO
December '24
+634
in 5 channels
Get PRO
November '24
+539
in 2 channels
Get PRO
October '24
+478
in 1 channels
Get PRO
September '24
+489
in 2 channels
Get PRO
August '24
+470
in 2 channels
Get PRO
July '24
+259
in 4 channels
Get PRO
June '24
+279
in 1 channels
Get PRO
May '24
+316
in 3 channels
Get PRO
April '24
+343
in 3 channels
Get PRO
March '24
+334
in 2 channels
Get PRO
February '24
+233
in 5 channels
Get PRO
January '24
+229
in 3 channels
Get PRO
December '23
+161
in 2 channels
Get PRO
November '23
+38
in 2 channels
Get PRO
October '23
+61
in 1 channels
Get PRO
September '23
+27
in 0 channels
Get PRO
August '23
+13
in 0 channels
Get PRO
July '23
+19
in 0 channels
Get PRO
June '23
+25
in 0 channels
Get PRO
May '23
+22
in 0 channels
Get PRO
April '23
+19
in 0 channels
Get PRO
March '23
+11
in 0 channels
Get PRO
February '23
+10
in 0 channels
Get PRO
January '23
+32
in 0 channels
Get PRO
December '22
+30
in 0 channels
Get PRO
November '22
+30
in 0 channels
Get PRO
October '22
+31
in 0 channels
Get PRO
September '22
+50
in 0 channels
Get PRO
August '22
+53
in 0 channels
Get PRO
July '22
+93
in 0 channels
Get PRO
June '22
+46
in 0 channels
Get PRO
May '22
+118
in 0 channels
Get PRO
April '22
+52
in 0 channels
Get PRO
March '22
+55
in 0 channels
Get PRO
February '22
+55
in 0 channels
Get PRO
January '22
+307
in 0 channels
Get PRO
December '21
+218
in 0 channels
Get PRO
November '21
+37
in 0 channels
Get PRO
October '21
+27
in 0 channels
Get PRO
September '21
+16
in 0 channels
Get PRO
August '21
+30
in 0 channels
Get PRO
July '21
+69
in 0 channels
Get PRO
June '21
+161
in 0 channels
Get PRO
May '21
+48
in 0 channels
Get PRO
April '21
+45
in 0 channels
Get PRO
March '21
+99
in 0 channels
Get PRO
February '21
+354
in 0 channels
Date
Subscriber Growth
Mentions
Channels
11 September+1
10 September+6
09 September+6
08 September+8
07 September+2
06 September+4
05 September+5
04 September+9
03 September+13
02 September+10
01 September+9
Channel Posts
2
🙏 (प्रख्यात आर्यसंन्यासी स्वामी श्रद्धानन्द जी द्वारा लिखित ब्रह्मचर्यसंबंधिलेख) आजकल की सभ्य कहानेवाली पाश्चात्य जातियों के पूर्वज जिस समय अन्धकार में हाथ से रास्ता टटोल रहे थे और अपने अंग को वस्त्र से ढाँपना तक न जानते थे, उस समय आर्यावर्त में 'ब्रह्मचर्य' विषयक ज्ञान अपनी चरम सीमा तक पहुँच चुका था । मानवीय विकास के लिए ब्रह्मचर्य अत्यावश्यक समझा जाता था, विचार तथा क्रिया में विवाह को एक धार्मिक संस्कार समझा जाता था, और सन्तानोत्पत्ति गृहस्थ के तीन ऋणों में से एक ऋण समझा गया था। बृहदारण्यकोपनिषद् में गर्भाधान-विधि को अत्यन्त पवित्र यज्ञ कहा गया है। इसके अनुष्ठान के लिए अनेक नियमों की शृङ्खला बाँध दी गई है। मैक्समूलर जैसे उच्चकोटि के विद्वान् ने उक्त स्थल का आंग्लभाषा में अनुवाद नहीं किया, क्योंकि उसका विचार था कि वर्तमान सभ्य कहाने-वाले गन्दे संसार के लिए वे विचार इतने उच्च हैं कि उनका महत्त्व समझ में नहीं आ सकता । ब्रह्मचर्य के महत्त्व को समझने के लिए यूरोप तथा अमेरिका को पर्याप्त समय लगा है। थोड़े समय से वहाँ के विज्ञान तथा चिकित्सा से परिचय रखनेवाले विद्वानों ने अनुभव करना प्रारम्भ किया है कि ब्रह्मचर्य की नींव पर ही व्यक्ति तथा जाति के जीवन की भित्ति का निर्माण किया जा सकता है। पश्चिम में हर-एक को विचारों की आज़ादी है। उसी का परिणाम है कि इस थोड़े-से अरसे में इस विषय में उन्होंने अपने वैज्ञानिक अनुभवों तथा अन्वेषणों के आधार पर एक नवीन विद्या की भी आधार-शिला रख दी है, जिसका नाम 'युजेनिक्स' (सन्तति शास्त्र) है। 'ब्रह्मचर्य' एक व्यापक शब्द है, जिसमें 'युजेनिक्स भी शामिल है। वेदों के आदेश के अनुसार यह मानवीय जीवन का का प्रथम सोपान है, और यही उन्नति के मार्ग पर मनुष्य-समाज का पथ-प्रदर्शक है। इस युग में सबसे प्रथम ऋषि दयानन्द ने उँगली उठाकर वर्तमान सभ्यता की जड़ में लगे हुए घून की तरफ़ निर्देश करते हुए वाणी तथा आचरण द्वारा बतलाया था कि शारीरिक, मानसिक एवं आत्मिक ब्रह्मचर्य द्वारा ही मनुष्य समाज की रक्षा हो सकती है है। आज पाश्चात्य विद्वान् ऋषि दयानन्द के ब्रह्मचर्य-विषयक एक-एक शब्द की दाद दे रहे हैं। गुरुकुल-विश्वविद्यालय, काँगड़ी के आचार्य की हैसियत से मुझे पूरे १४ वर्ष तक सैकड़ों बालकों के जीवन के निरीक्षण तथा संचालन का उत्तरदायित्वपूर्ण अधिकार प्राप्त रहा है। मेरा अनुभव है कि प्रत्येक युवक की १३ से १८ वर्ष तक अवस्था अत्यन्त नाजुक होती है, परन्तु यदि आचार्य कुशलतापूर्वक इस समय के खतरों में से उसे निकाल ले जाय, तो बालक का जीवन बिगड़ने के स्थान पर शारीरिक तथा मानसिक शक्ति का खजाना बन सकता है। वास्तविक कार्य तभी होगा, जब आचार्य की देख-रेख में रहते हुए ब्रह्मचारियों के जीवन का निर्माण किया जायगा। गुरुकुल छोड़ने के बाद, संन्यास में प्रविष्ट होते समय, मेरा विचार था कि ब्रह्मचर्य-विषयक अपने अनुभवों को देश के विद्यार्थी-समाज तक पहुँचाऊँ। परन्तु 'मेरे मन कछु और है, विधना के मन और'- मैं अपने वास्तविक मार्ग से हटकर सामयिक घटनाओं की उलझन में पड़ गया। इस समय भारत के विद्यार्थी-समाज की सबसे बड़ी ज़रूरत यही है कि रहनुमा बनकर उसके वैयक्तिक जीवन को ठीक मार्ग पर चलाया जाय । मैं भारत के स्कूलों तथा कॉलेजों के अध्यापकों एवं आचार्यों से कहना चाहता हूँ कि वे अपने धर्म को पहचानें; स्वयं ब्रह्मचारी बनें, ताकि अपने छात्रों को ब्रह्मचारी बना सकें। वेद भगवान् का कथन है 'आचार्यो ब्रह्मचर्येण ब्रह्मचारिणमिच्छते' ब्रह्मचर्य धारण करके ही आचार्य छात्र को ब्रह्मचारी बना सकता है। मेरी यही हार्दिक प्रार्थना है कि 'त्वमेव माता च पिता त्वमेव' स्वरूपवाले भगवान् मातृ-भूमि के आचार्यों तथा शिष्यों को ज्योति-स्तम्भ होकर कर्तव्य-मार्ग प्रदर्शित करें ।]।•• श्रद्धानन्द संन्यासी जन्म-शताब्दी-कैम्प मथुरा २८ जनवरी, १६२५ [[साभार:- ब्रह्मचर्यसंदेश, प्रकाशक गोविंदराम हासनंद]] प्रस्तुति:- ध्रुवदेव, दर्शनयोग महाविद्यालय आर्यवन, रोजड, गुजरात
374
3
No text...
556
4
ऐसे उत्तम विचार प्रतिदिन पढ़ने हेतु जुड़ें हमारे व्हाट्सएप चैनल से: https://whatsapp.com/channel/0029Vai2I9l4inoxzf17142f
ऐसे उत्तम विचार प्रतिदिन पढ़ने हेतु जुड़ें हमारे व्हाट्सएप चैनल से: https://whatsapp.com/channel/0029Vai2I9l4inoxzf17142f
732
5
No text...
975
6
No text...
856
7
कौन इंद्रियों को वश में रख सकता है?
कौन इंद्रियों को वश में रख सकता है?
1 147
8
sticker.webp
1 268
9
वेदवेदाङ्गविज्ञानं बलं चाभ्यधिकं तथा। नृणां लोके दि कोऽन्योऽस्ति विशिष्टः केशवा दृते ॥ (महाभारत सभापर्व 38/19) वेद - वेदांगों
वेदवेदाङ्गविज्ञानं बलं चाभ्यधिकं तथा। नृणां लोके दि कोऽन्योऽस्ति विशिष्टः केशवा दृते ॥ (महाभारत सभापर्व 38/19) वेद - वेदांगों के तत्वज्ञ, सभी प्रकार के बलों में अद्वितीय, योगेश्वर भगवान् श्रीकृष्ण के जन्मदिवस जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएँ
1 246
10
No text...
1 495
11
sticker.webp
1 446
12
No text...
1 414
13
No text...
1 495
14
आध्यात्मिक जीवन चैनल को व्हाट्सएप पर फॉलो करें : https://whatsapp.com/channel/0029Vai2I9l4inoxzf17142f
1 482
15
ओ३म् हे परमेश्वर। आप सर्वव्यापक, सर्वज्ञ, सर्वशक्तिमान तथा न्यायकारी है। आपने ही मुझे यह जीवन प्रदान किया है। आपके कारण ही मैं विचारने, बोलने, तथा कर्मों को करने में समर्थ हूँ। प्रत्येक क्षण, मन, वाणी और शरीर से किए जाने वाले समस्त कर्मों को आप जानते है। आप से छुप कर मैं कोई भी काम नहीं कर सकता। आपकी अनुभूति मेरी बुद्धि में प्रत्येक क्षण बनी रहे जिससे मैं बुरे कर्मों से और उनके दुखरूप फल से बचकर सुख शांति को प्राप्त करूँ, ऐसी आपसे प्रार्थना है।
1 585
16
तेरा_मंगल_मेरा_मंगल_सबका_मंगल_होए_रे_.mp3
1 593
17
No text...
1 971
18
No text...
1 683
19
Screenshot_2026_0829_153418.png
1
20
No text...
1 797