MANOJ MUNTASHIR TALKS❤️❤️
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कोशिश कस्मशिस में रेह गया ता उम्र, ना जी सका होके तेरा कभी मिले वक़्त तो करेंगे गुप्तगू --- ए ज़िंदगी Admin --- INDRAJEET KUMAR
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ये सर्द रात, ये तन्हाईया...... और उसकी यादें
एक तरफा आशिक़ के लिए,
इससे हसीन मौत क्या हो सकती है
मेरा प्रेम बस तुम्हे तुम्हारे एकांत में ही स्पर्श करेगा,
मेरे प्रेम को भी तुम्हारी मर्यादाओं का खयाल है।।
पंडिताईन .....🌹
काश उस दिन में नज़रे झुका लेता
काश उस दिन वो चेहरा ढक लेती
वो लम्हा थम सा गया था, सांसें रुक सी गई थी
जब उस भीर में मुझे वो मिली थी।।
उसके बारे में मेरा सक पर दुःख नही था,
दुःख तो इस बात का था की जो सोचा वो सच निकला
इस तरह याद आके आप हमे बेचैन ना किया करो,
खुले जुल्फो को मोहतरमा संवार लिया करो
आंखें नशीली, होठों का क्या कहना
मुस्कान अधर पे रख के खुद, हमे इल्ज़ाम ना दिया करो
ले गई हो ओ आंख जिससे में देख ता था
ले गई हो ओ दिल जो सिर्फ तेरे लिए धड़क ता था
जिस्मों कि बात नहीं, ये तुम्हे भी पता था
ऐन वक्त पे कुछ तो कहने देते
मेरे हिस्से कुछ तो रहने देते
मुस्कान अधर पर रख कर तुम
क्यों जाती हो सज कर तुम?
प्रेम नहीं, है तो हमे देखकर,
क्यों जाती हो हसकर तुम?
खाबो में तुम खयालों में तुम
जवाबों में तुम सवालों में तुम
सांस में तुम आंखों में तुम
नक्श में तुम निगाहों में तुम
तुम ही तुम, बस तुम ही तुम
दिन में तुम रात में तुम
मेरी हर बात में तुम
इज़हार में तुम इकरार में तुम
ये आंखें मेरी इंतज़ार में तुम
तुम ही तुम, बस तुम ही तुम
उस चाँद में तुम सितारों में तुम
फूलो में तुम बहारो में तुम
रुसवाई में तुम तन्हाई में तुम
मेरी हर एक अंगराई में तुम
तुम ही तुम, बस तुम ही तुम
कैसे कहूं एहसास में तुम एतबार में तुम
अंदर में तुम बाहर में तुम
लफ्जों में तुम लहज़ा में तुम
रंज में तुम लज्जा में तुम
तुम ही तुम,बस तुम ही तुम
राहत में तुम चाहत में तुम
सावन की बरसात में तुम
खयालात में तुम
मुलाकात में तुम
तुम ही तुम, बस तुम ही तुम
❤️❤️❤️❤️
