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जय बाबाजी डेली न्यूज चैनल

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🚩*अमृत कथा*🚩 एक समय वैकुण्ठ धाम में भगवान श्री विष्णु और माता लक्ष्मी दिव्य सिंहासन पर विराजमान थे। चारों ओर शांति, आनंद और दिव्य प्रकाश फैला हुआ था। देवता, ऋषि और पार्षद प्रभु के दर्शन कर धन्य हो रहे थे। तभी माता लक्ष्मी ने मुस्कुराते हुए भगवान विष्णु से पूछा, "प्रभु, इस संसार में सबसे बड़ा धन क्या है? लोग मुझे धन की देवी कहते हैं, इसलिए हर कोई धन, सोना, वैभव और ऐश्वर्य मांगता है। क्या वास्तव में यही सबसे बड़ा सुख है?" भगवान विष्णु मंद-मंद मुस्कुराए, लेकिन उन्होंने तुरंत कोई उत्तर नहीं दिया। भगवान बोले, "देवी, आज तुम्हें स्वयं इसका उत्तर मिलेगा।" इतना कहते ही दोनों ने साधारण वृद्ध दंपति का रूप धारण किया और पृथ्वी लोक की ओर चल पड़े। उस दिन घनघोर वर्षा हो रही थी। आकाश में बिजली चमक रही थी और तेज हवाएं चल रही थीं। गांव के लोग अपने-अपने घरों में छिप गए थे। ऐसे समय में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी एक छोटे से गांव पहुंचे। गांव के बाहर एक टूटी-फूटी झोपड़ी थी। उसमें एक गरीब किसान, उसकी पत्नी और उनके दो छोटे बच्चे रहते थे। पूरे दिन मेहनत करने के बाद भी उनके घर में केवल थोड़ी-सी खिचड़ी बनी थी। तभी दरवाजे पर दस्तक हुई। किसान ने दरवाजा खोला तो सामने दो भीगे हुए वृद्ध खड़े थे। वृद्ध बोले, "बेटा, कई दिनों से भूखे हैं। क्या थोड़ा भोजन मिल सकता है?" किसान ने बिना एक पल सोचे दोनों को अंदर बुला लिया। उसकी पत्नी ने धीमे से कहा, "घर में तो बच्चों के लिए भी मुश्किल से भोजन है।" किसान मुस्कुराकर बोला, "अगर भगवान हमारे घर मेहमान बनकर आए हों तो क्या उन्हें भूखा लौटा देंगे?" यह सुनकर पत्नी भी मुस्कुरा दी। उसने पूरे घर का भोजन उन दोनों वृद्धों के सामने परोस दिया और स्वयं अपने बच्चों के साथ पानी पीकर सोने का निश्चय कर लिया। माता लक्ष्मी यह सब देखकर भावुक हो उठीं। उन्होंने भगवान विष्णु की ओर देखा और बोलीं, "प्रभु, इनके पास कुछ भी नहीं है, फिर भी इन्होंने अपना सब कुछ दे दिया।" भगवान विष्णु बोले, "देवी, यही सच्चा धन है। जिसके हृदय में दया, सेवा और प्रेम है, वही वास्तव में सबसे बड़ा धनी है।" रात गहराने लगी। पूरा परिवार भूखा ही सो गया, लेकिन उनके चेहरे पर संतोष था। उसी समय भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी अपने वास्तविक दिव्य स्वरूप में प्रकट हुए। पूरी झोपड़ी दिव्य प्रकाश से भर गई। शंख, चक्र, गदा और पद्म की आभा चारों ओर फैल गई। किसान और उसकी पत्नी की आंखें खुलीं तो सामने स्वयं भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को देखकर वे विस्मित रह गए। दोनों तुरंत उनके चरणों में गिर पड़े। भगवान विष्णु ने किसान को उठाया और कहा, "वत्स, तुमने हमें भोजन नहीं कराया, बल्कि अपनी श्रद्धा अर्पित की है। जिसने अतिथि में भगवान का दर्शन किया, उसके जीवन में कभी अभाव नहीं रहता।" माता लक्ष्मी ने मुस्कुराकर अपने करकमलों से किसान की झोपड़ी को स्पर्श किया। देखते ही देखते टूटी हुई झोपड़ी सुंदर घर में बदल गई। खाली अन्न के पात्र अनाज से भर गए। गाय, बैल, खेत और धन-धान्य से पूरा आंगन समृद्ध हो गया। लेकिन भगवान विष्णु ने कहा, "याद रखना, यह वैभव केवल तुम्हारे लिए नहीं है। जो भूखा आए उसे भोजन देना, जो दुखी आए उसे सहारा देना और जो असहाय हो उसकी सेवा करना। जिस घर में सेवा और करुणा रहती है, वहां माता लक्ष्मी कभी घर छोड़कर नहीं जातीं।" किसान और उसकी पत्नी ने हाथ जोड़कर कहा, "प्रभु, हमें धन नहीं, बस आपके चरणों की भक्ति चाहिए।" भगवान विष्णु प्रसन्न होकर बोले, "जहां निस्वार्थ प्रेम, सच्ची भक्ति और सेवा होती है, वहां मैं स्वयं निवास करता हूं और जहां मैं रहता हूं, वहां लक्ष्मी कभी दूर नहीं जातीं।" इतना कहकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी अंतर्ध्यान हो गए। उस दिन के बाद वह परिवार केवल धनवान ही नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र में दया, सेवा और भक्ति का प्रतीक बन गया। दूर-दूर से लोग उनके घर आते और सीखते कि सच्ची समृद्धि सोने-चांदी में नहीं, बल्कि प्रेम, करुणा, अतिथि-सत्कार और भगवान पर अटूट विश्वास में छिपी होती है। तभी से कहा जाता है कि जिस घर में भगवान विष्णु की भक्ति और माता लक्ष्मी का सम्मान होता है, वहां सुख, शांति और समृद्धि स्वयं चलकर आती है।

*क्या आपको पता है, कि केला और नारियल हमारे पूजा पाठ में खास स्थान क्यूं रखता है??* नारियल और केला ये दो ही ऐसे फल है जो किसी के जूठे बीज से उत्पन्न नही होते, मतलब अगर हमे आम का पेड़ लगाना है तो हम आम को खाते है और उसके बीज या गुठली को जमीन में गाड़ते है तो वह पौधे के रूप में उगता है, या फिर ऐसे ही गुठली निकाल के लगा दे तो भी वह उस पेड़ का बीज (जूठा या अंग) ही हुआ, लेकिन केले का या नारियल का पेड़ लगाने को केवल जमीन से निकला हुआ पौधा (ओधी) ही लगाते है, जो की खुद में ही पूर्ण है, न किसी का बीज न हिस्सा, न जूठा। इसलिए भगवान को सम्पूर्ण फल अर्पित किया जाता है। हमारे पूर्वज कितने ज्ञाता थे, जो चीजे हमे आज तक पता नहीं वो पहले से जानते थे और उसका जीवन में इस्तेमाल कर जीवन पदत्ती में ढाल लिए थे, जो हमे परंपरा से प्राप्त हुआ है, केवल हम उन्हे इस्तेमाल करते गए पर उनकी क्यों और क्या महत्ता है ये जान नही सके।

प.पु.बाबाजींची अमृतवाणी 1616
प.पु.बाबाजींची अमृतवाणी 1616

एकनाथी भागवत ( मराठी भाषांतर) पान नं.2
एकनाथी भागवत ( मराठी भाषांतर) पान नं.2

एकनाथी भागवत पान नं.2 (अध्याय 1) ओवी 5-16
एकनाथी भागवत पान नं.2 (अध्याय 1) ओवी 5-16

प.पु.बाबाजींची अमृतवाणी 1616
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एकनाथी भागवत ( मराठी भाषांतर) पान नं.2
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एकनाथी भागवत पान नं.2 (अध्याय 1) ओवी 5-16
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एकनाथी_भागवत_अ_1_ओवी_1_ते_4.m4a2.15 MB

प.पु.बाबाजींची अमृतवाणी 1615
प.पु.बाबाजींची अमृतवाणी 1615

एकनाथी भागवत पान नं. 1 (अध्याय 1)
एकनाथी भागवत पान नं. 1 (अध्याय 1)

NathBhagawat-by-Bapat-23(1).pdf145.26 MB

*अमृत कलश* *"स्वभाव को मधुर बनायें"* 〰️〰️〰️❗❗〰️〰️〰️ *🌞जिसका स्वभाव मधुर है, उसका जीवन भी मधुर बन जाता है। स्वभाव की मधुरता ही जीवन को सुखमय बनाती है। अच्छा स्वभाव व्यक्ति को किसी के दिल में उतार देता है तो बुरा स्वभाव व्यक्ति को किसी के दिल से भी उतार देता है। इसलिए अपने स्वभाव को मृदु बनाओ ताकि आपका पूरा जीवन मधुरता से भर सके। आज मनुष्य दु:खी रहता है क्योंकि वो मकान, शहर, देश, मित्र, संबंध सब कुछ बदलता है, लेकिन अपना स्वभाव नहीं बदल पाता।* *🌞जीवन की सत्यता तो ये है, कि अपने स्वभाव से ही आदमी सुखी और दुःखी बनता है। अच्छा स्वभाव सुंदरता की कमी को भी पूरा कर देता है पर अच्छे स्वभाव की कमी हो तो सुंदरता से उसकी पूर्ति कभी नहीं की जा सकती है। चेहरे की सुंदरता तो प्रकृति पर निर्भर होती है और स्वभाव की सुंदरता आपकी प्रवृत्ति पर निर्भर करती है। चेहरे की सुंदरता जहाँ केवल आँखों में उतर पाती है, वहीं स्वभाव की सुंदरता दूसरों के दिल तक उतर जाती है-..!!!* *🌺 जय माता दी 🌺🙏*

.           *!! "प्रभु-कृपा क्या है" ? !!* पैसा आलीशान घर महंगी गाड़ियां और धन-दौलत प्रभु-कृपा नही है इस जीवन में अनेक संकट और विपदाएं जो हमारी जानकारी के बिना ही गायब हो जाती है *वह प्रभु-कृपा है !* कभी-कभी सफ़र के दौरान भीड़ वाली जगह में धक्का-मुक्की के बावजूद हम किसी तरह से गिरते- गिरते बच जाते हैं और संतुलन बना लेते है वह संतुलन जिसने हमें गिरने से बचाया *वह प्रभु-कृपा है !* जब कभी एक समय का भोजन भी मिलना मुश्किल हो फिर भी हमें पेट भर खाने को मिले *वह प्रभु-कृपा है !* जब आप अनेक मुश्किलो के बोझ तले दबे हो फिर भी आप इनका सामना करने का सामर्थ्य महसूस करे *वह सामर्थ्य प्रभु-कृपा है !* जब आप बिल्कुल हार मानने ही वाले हो और ये सोच ले कि अब सब कुछ ख़त्म हो चुका है तभी उसी क्षण, आपको आशा की एक किरण दिखाई देने लगे और आप फिर से संघर्ष के लिए तैयार हो जाएं, *वह आशा प्रभु-कृपा है !* जब विपत्ति के समय आपके सभी सगे-संबंधी आपको अकेला छोड़ दे एक गुरु आए और आपसे कहे - “तुम आगे बढ़ो हम तुम्हारे साथ है !”, *उस गुरु के हिम्मत देने वाले शब्द प्रभु-कृपा है ...!!* *जब आप कामयाबी के शिखर पर हो पैसा और ख़ुशियां भरपूर हो उस वक़्त भी आप स्वयं को ज़मीन से जुड़ा और विनम्र महसूस करे वह प्रभु-कृपा है ...!!* *केवल धन ऐश्वर्य और सफलता का होना ही प्रभु-कृपा नही है, लेकिन जब आपके पास ये चीज़ें न हो फिर भी आप ख़ुशी संतुष्टि और स्वयं को धन्य महसूस करे, वह प्रभु-कृपा है ...!!*