सुविचारों का दरिया😇
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☀️दरिया बनकर किसीको 🌤डुबाने से बेहतर है, की जरिया बनकर किसीको🌤 बचाया जाए !☀️ ⛈⛈⛈⛈⛈⛈⛈⛈⛈⛈⛈ बेस्ट सुविचार 💫💫🪐😊😊😊😜😊😍😍🤔🤗💪💪🤘 Contact -. 1- @Vaibhav100 2- @anshuman5555
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सोच रहा आज कुछ खास लिखू,
अपने मन के सारे एहसास लिखूं,
दिल के सागर में उमड़ते जज्बात लिखूं,
या तेरे बिन कैसे हैं मेरे हालत लिखूं,
सम्मोहित करने वाले आवाज की मिठास लिखूं,
या तुम्हारे संग जिन्दगी बिताने की आस लिखूं,
मिले तेरे गोद में मेरे सर को आधार लिखूं
या तेरी बाहों को अपने गले का हार लिखूं,
तुमको अपनी सर्वश्रेष्ठ अभिलाषा जैसे लिखूं,
अब तुम ही बताओ ,तुमको मैं कैसे लिखूं...♥️
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अगर लड़ाई झगड़े के बाद भी
आपको वहीं इंसान चाहिए तो,
समझ लेना तुम दोनों ने अपने आप को नहीं
बल्कि... परमात्मा ने तुम दोनों को चुना हैं.!!
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सुबह दरीचे पर,
देख ख्वाबों की
फेहरिस्त,
ज़िम्मेदारियाँ
मासूमियत पर
मुस्कुरा जाती हैं...
जिम्मेदारियां
ख्वाबों को
खा जाती हैं...🖤
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उसकी आँखों में मोहब्बत की चमक आज भी है
हालांकि उसे मेरी मोहब्बत पर शक आज भी है
नाव में बैठ कर धोये थे,हाथ उसने कभी
पूरे तालाब में मेहंदी की महक आज भी है
छू तो नहीं पाया उसे प्यार से कभी
पर मेरे होठों पर उसके होठों की झलक आज भी है
हर बार पूछते हैं,हमारी चाहत का सबब
वैसी ही इश्क की ये परख आज भी है
नहीं रह पते वो भी हमारे बिना
दोनों तरफ इश्क की दहक आज भी है
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तुम्हारी तस्वीर को हर हाल चूमूँगा,
तुम्हारी बाते तुम्हारे ख़्याल चूमूँगा,
मैं तुम्हारी आँखों को चूमने के बाद,
होंठ की बजाय तुम्हारे गाल चूमूँगा,
यक़ीनन वो साल अच्छा ही गुज़रेगा,
पहले दिन मैं तुम्हे जिस साल चूमूँगा,
तुम मिरे चूमने का इंतिज़ार किया करोगी,
ऐ जाँ मैं तुम्हे इतना कमाल चुमूँगा।
🥀
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ये जो तुम्हारा शरमाना है
और कुछ नहीं मुझे बहकाना है
गले लगने का तो बहाना है
मुझे इश्क़ का मरीज़ जो बनाना है
तेरी हर अदा मुझे घायल करती है
तेरी मासूम मुस्कान मुझे पागल करती है....
हम तुम पर मरते मरते मर न जाएं किसी दिन
क्या तू इस बात का ख्याल भी न करती है...!!
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अक्षरों से आरंभ होकर
जीवन की समझ तक पहुँचाती है गुरु की सीख।
गुरु-ऋण शब्दों से नहीं,
आचरण से चुकाया जाता है।
सभी गुरुजनों को शत-शत नमन, जोहार एवं वंदन। 🙏🌸
आपका आशीष यूँ ही बना रहे।
शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ।....
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पेड़ पर क्षमता से ज्यादा
फल लग जाएं तो उसकी
डालियां टूटना शुरू हो जाती हैं।
और इंसान को
औकात से ज्यादा
मिल जाएं तो वह रिश्तों
को तोड़ना शुरू कर देता है।
नतीजा,
आहिस्ता आहिस्ता पेड़
अपने फल से वंचित हो जाता है,
और इंसान अपने रिश्तों से।
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जन्माष्टमी की आपको बहुत-बहुत बधाई शुभकामनाएँ। 🌹🙋♀️🙏🏻🙏🏻
🙋♀️दोहे🌹
जन्म अष्टमी आ गई, सभी बजाओ ढ़ोल।
जन्म दिया माँ देवकी, आओ हरि- हरि बोल।।
कारागृह में बंद थे, राजा -रानी साथ।
अत्याचार बहुत सहे, लिए हाथ में हाथ।।
कृष्ण पक्ष की अष्टमी, जन्मे आज किशोर।
पहरेदार सोय रहे, भई रात से भोर।।
धरे टोकरी शीश पे, चले नंद की ओर।
जमुना पड़ती बीच में, गर्जन करती जोर।।
यमुना की सुन गर्जना, डरते हैं वसुदेव।
पाँव बढाए कृष्ण जी, देखा यमुन स्वमेव।।
यशोमती की सुकन्या, भाग्य उठाए आज।
कष्ट हरण धरनी यहाँ, परहित साजे काज।।
कन्या जन्म की खबर से, बोखला गया कंस।
मुझे मारन जन्म ले, नारायण का अंश ।।
कंस पीटता शीश को, निकला बालक चोर।
गोकुल में हल्ला मचा, जन्में नंद किशोर।।
जन्म अष्टमी की खुशी, खूब मचाओ धूम ।
ध्यान लगा मनमोहना, संगे 'स्नेहा' झूम।।
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जन्माष्टमी की आपको बहुत-बहुत बधाई शुभकामनाएँ। 🌹🙋♀️🙏🏻🙏🏻
🙋♀️दोहे🌹
जन्म अष्टमी आ गई, सभी बजाओ ढ़ोल।
जन्म दिया माँ देवकी, आओ हरि- हरि बोल।।
कारागृह में बंद थे, राजा -रानी साथ।
अत्याचार बहुत सहे, लिए हाथ में हाथ।।
कृष्ण पक्ष की अष्टमी, जन्मे आज किशोर।
पहरेदार सोय रहे, भई रात से भोर।।
धरे टोकरी शीश पे, चले नंद की ओर।
जमुना पड़ती बीच में, गर्जन करती जोर।।
यमुना की सुन गर्जना, डरते हैं वसुदेव।
पाँव बढाए कृष्ण जी, देखा यमुन स्वमेव।।
यशोमती की सुकन्या, भाग्य उठाए आज।
कष्ट हरण धरनी यहाँ, परहित साजे काज।।
कन्या जन्म की खबर से, बोखला गया कंस।
मुझे मारन जन्म ले, नारायण का अंश ।।
कंस पीटता शीश को, निकला बालक चोर।
गोकुल में हल्ला मचा, जन्में नंद किशोर।।
जन्म अष्टमी की खुशी, खूब मचाओ धूम ।
ध्यान लगा मनमोहना, संगे 'स्नेहा' झूम।।
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हमेशा कठिन परिस्थितियों
में इंसान अकेला ही होता हैं।
रोगमुक्त होने के लिए
जिस प्रकार औषधि
स्वयं को ही लेनी पड़ती है,
उसी प्रकार जीवन के
कठिन प्रसंगों से बाहर
आने के लिए अपनी गलतियों
को भी स्वयं ही सुधारना होता है।
बाकी तो दुनिया
हमारी संपत्ति, स्टेटस
और पॉवर के कारण
हमारा साथ दे ही देती हैं।
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काश कि हम मिलते ही नहीं
दिल में इश्क़ के फूल खिलते ही नहीं ,
दर्द हमे मिलता ही नहीं काश कि तुझसे
ये नाजुक सा दिल लगता ही नहीं ,
आंखें सूख सी गई है तेरे इंतज़ार में
काश कि ये आंखें तुझसे लड़ती ही नहीं
बाते करने को बहुत से लोग थे
काश कि तुझसे बातें करते ही नहीं ,
तो घाव दिल पर इतने गहरे
लगते ही नहीं !!
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गर वो मेरा होता तो पढ़ता मुझे
ये दुनियादारी न निभाता मुझसे,
ये लफ्जों के सहारे तो हजारों थे,
अपना था तो सीने से लगता मुझे,
क्यों कहूँ तुमसे तकलीफे अपनी,
तुमने कहाँ कहा कुछ बता मुझे,
क्या ही फर्क पड़ेगा मेरे जाने से,
खुदा न खास्ता कुछ हुआ तो मुझे,
मैं भी शामिल हूँ उन हज़ारों में,
मैं गया भी तो कोई ओर मिलेगा तुझे।
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वो खूबसूरत शाम
मुहब्बत के खत में, वो सलाम किस का था जब था नहीं मैं तो वो काम किस का था
बेवफ़ाई ऐसी भी होगी हमने सोचा न था खून से जो लिक्खा, वो कलाम किस का था
ढूँढ ही लाया वो आख़िर क़ातिल को मेरे कोई तो आए सामने, वो इनाम किस का था
नहीं भूलूँगा वो खूबसूरत शाम वस्ल की मैं लरज़ती जुबाँ पर, वो नाम किस का था
साक़ी ने मुझे पैमानें से जो पिलाया जाम सामने चेहरा वो सुब्ह-ओ-शाम किस का था
'सफ़र की बेरुखी से न इज्तिराब हुआ करो पढ़ कर देखो ग़ज़ल, वो पयाम किस का था
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जीवन-दर्शन
जीवन एक दर्पण है—आप उसमें जो भाव रखते हैं, वही आपको लौटकर मिलता है। इसलिए मन में सद्भाव, वाणी में मधुरता और कर्म में ईमानदारी बनाए रखें।
"बीता हुआ कल स्मृति है, आने वाला कल संभावना है, और आज ईश्वर का दिया हुआ सबसे अनमोल उपहार है। इसलिए वर्तमान को प्रेम, धैर्य और मुस्कान के साथ जीएँ।"
आपका आज का दिन सुख, शांति, स्वास्थ्य और सफलता से परिपूर्ण हो।
🙏 सुप्रभात! आपका दिन मंगलमय हो। 🌸
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बरखा थमने दो |
कहती थी, "क्या प्रेम करूँ मैं,
मिल जाए गर गैर कोई?"
दिल पर क्या गुज़री होगी,
पर छोड़ो, बात ख़ैर, कोई।
कहती थी, "मैं दूजा कर लूँ,
तुमको कोई आपत्ति है क्या?"
सोचो, हृदय का हाल क्या होगा,
एक पत्ता टूटे पेड़ से जैसा।
कहती थी, "मुझे कुछ नहीं आता,
तब भी प्यार करोगे क्या?"
प्यार किया था, क्या पूछा था?
यह बात नहीं सोचा था क्या?
कहती थी, "मुझको दुल्हन
कब बना कर ले जाओगे?"
कहता था, "बरखा थमने दो,
मौसम ज़रा बदलने दो।"
क्या मालूम था, मौसम अपना
वक्त से पहले ही बदलेगा।
दावा है मेरा, तुम लिख लो,
एक दिन मौसम पूछकर बदलेगा।
लेकिन तब तक यह मौसम
मौसम नहीं रहेगा, प्रिये।
दूर इतना जाना नहीं तुम,
आवाज़ लगे, तो लौटना, राधे।
मेरा गला यदि रूँधा हो,
तो आकर के गले लगाना।
इतने को गर काबिल न हो,
तो मुझ पर तुम फूल चढ़ाना।
