YES OSHO YES☘️
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Contents Index 🎉
#001 All OSHO Guided Meditations
#002 Filmy Tunes With OSHO Talks
#003 Other Meditations
#004 OSHO Documentaries
#005 Jokes Gibberish & Evng Satsang
#006 Sannayas Audio Clips
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महान डॉक्टर मुल्ला नसरूद्दीन
एक दिन सुबह से बैठा अपनी क्लीनिक में,
दोपहर होने के क़रीब आयी,
लेकिन कोई मरीज़ न आया।
कोई मिलने वाला भी न आया।
एक-दो बार उसने अपने
नौकर महमूद से कहा कि आज क्या बात है,
क्या गाँव में कोई मरीज़ नहीं बचा?
ऐसा कभी हुआ नहीं....!
आज किसी मुलाकाती का भी पता नहीं।
कोई सत्संग करने वाला
बकवासी दोस्त भी नहीं आया।
कहां मर गए सब?
साँझ होने लगी, फिर भी कोई नहीं आया।
रात भी हो गयी, मगर कोई नहीं आया।
रात के बारह बजे नसरुद्दीन ने कहा
कि जा, बाहर का दरवाज़ा बंद कर आ।
अब प्रतीक्षा करनी व्यर्थ है, अब सोने जाएंगे।
महमूद गया बाहर और
क्षणभर में वापस लौट आया।
नसरूद्दीन ने पूछाः
इतनी जल्दी तू दरवाज़ा बंद कर आया?
नौकर ने कहाः
साहब, दरवाज़ा पहले से ही बंद था!
मालूम होता है कि आज सुबह हम
दरवाज़ा खोलना ही भूल गए थे।
लेकिन दिन भर ये ख़याल ही नहीं आया
कि दरवाज़ा बंद भी हो सक़ता है।
बेकार ही चिंता करते रहे कि
लोग नहीं आए तो क्यूँ नहीं आए?
हम जिस मन में बैठे हुए हैं,
उसका दरवाज़ा भी सदियों से बंद है।
परमात्मा चाहे भी तो कैसे प्रवेश करे?
उस बंद दरवाज़े को
खोलने का नाम ही ध्यान है।
शांति को,आनंद को मत खोजो।
अपने हृदय का बंद द्वार खोलो!
ओशो
