en
Feedback

Don't get caught by a cheater! Telemetrio finds and tags such channels 👉 If you want to see the tag, subscribe 👈

I.A.S.(हिंदी माध्यम)

I.A.S.(हिंदी माध्यम)

Open in Telegram

🚩 Channel was restricted by Telegram

Show more
India187 457The category is not specified
2 554
Subscribers
No data24 hours
No data7 days
No data30 days
Posts Archive
आईएएसएसटी ने मुंह के कैंसरों के तेज़ और सटीक इलाज के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित कंप्यूटर निदान ढांचा विकसित किया है पुरुषों में सभी कैंसर का लगभग 16.1 फीसदी और महिलाओं में 10.4 फीसदी मौखिक कैंसर होता है भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के स्वायत्त संस्थान, गुवाहाटी के इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडी इन साइंस एंड टेक्नोलॉजी (आईएएसएसटी) के वैज्ञानिकों ने मुंह के स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा के पूर्वानुमान और तेज़ निदान में सहायता करने के लिए एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित एल्गोरिदम विकसित किया है। आईएएसएसटी के केंद्रीय कम्प्यूटेशनल और न्यूमेरिकल विज्ञान विभाग में डॉ. लिपी बी महंता के नेतृत्व वाले अनुसंधान समूह द्वारा विकसित यह ढांचा मौखिक स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा की ग्रेडिंग में मदद करेगा। इस अध्ययन के लिए किसी भी मानक मौखिक कैंसर डाटासेट की अनुपलब्धता की भरपाई करने के लिए कई सहयोगों के माध्यम से वैज्ञानिकों द्वारा एक स्वदेशी डेटासेट विकसित किया गया था। विभिन्न अत्याधुनिक एआई तकनीकों को टटोलते हुए और उनकी प्रस्तावित पद्धति को इस्तेमाल करके देखते हुए, वैज्ञानिकों ने मौखिक कैंसर की ग्रेडिंग में अभूतपूर्व सटीकता हासिल की है। पहले से प्रशिक्षित गहरे कॉन्वोन्यूशनल न्यूरल नेटवर्क (सीएनएन) का उपयोग करके ट्रांसफर के जरिए दो पद्धतियों को लागू करके ये अध्ययन किया गया था। इस वर्गीकरण की समस्या के लिए सबसे उपयुक्त मॉडल ढूंढ़ने के लिए एलेक्सनेट, वीजीजी-16, वीजीजी-19 और रेसनेट-50 इन चार आवेदक पूर्व-प्रशिक्षित मॉडलों को चुना गया और इस समस्या पर खरा उतरने के लिए एक प्रस्तावित सीएनएन मॉडल को विकसित किया गया था। हालांकि, रेजनेट-50 मॉडल द्वारा 92.15 फीसदी की उच्चतम वर्गीकरण सटीकता प्राप्त की गई थी, लेकिन प्रायोगिक निष्कर्ष बताते हैं कि इस प्रस्तावित सीएनएन मॉडल ने 97.5 फीसदी की सटीकता प्रदर्शित करते हुए इस स्थानांतरण सीखने की पद्धति को पीछे छोड़ दिया। ये अध्ययन न्यूरल नेटवर्क जर्नल में प्रकाशित किया गया है। अब तकये समूह इस एल्गोरिदम को उचित सॉफ्टवेयर में परिवर्तित करने के लिए तैयार है ताकि फील्ड ट्रायल शुरू किए जा सकें। स्वास्थ्य और आईटी क्षेत्रों के बीच की वर्तमान खाई को देखते हुए यह वो अगली चुनौती है जिसका सामना करने को ये समूह तैयार है। डॉ. महंत की आकांक्षा है कि इन चुनौतियों को पूरा करने के लिए तमाम उन्नत बुनियादी ढांचा मदद मिल जाए और वे महसूस करते हैं कि इस सॉफ्टवेयर का अस्पतालों में सक्रिय रूप से परीक्षण करने की आवश्यकता है, ताकि यह वास्तव में मजबूत, ज्यादा सटीक और वास्तविक समय में काम के योग्य बन सके। पुरुषों में सभी कैंसर का लगभग 16.1 फीसदी और महिलाओं में 10.4 फीसदी मौखिक कैंसर है, और पूर्वोत्तर भारत में यह तस्वीर और भी ज्यादा खतरनाक है। सुपारी और तम्बाकू के अधिक सेवन के कारण अन्य कैंसर की तुलना में ओरल कैविटी कैंसर की पुनरावृत्ति दर भी ऊंची होती है। यह कैंसर समूह जिन चरित्रों से पहचाना जाता है वो है एपीथीलियल स्क्वैमस ऊतक विभेदन और आक्रामक ट्यूमर विकास, ये गाल के आंतरिक क्षेत्र के नीचे की झिल्ली को बाधित करता है और इस तरह ब्रोडर के हिस्टोपैथोलॉजिकल सिस्टम द्वारा इसे अच्छे से विभेदित एससीसी (डब्ल्यूडीएससीसी), मध्यम रूप से विभेदित एससीसी (एमडीएससीसी) और खराब तरीके से विभेदित एससीसी (पीडीएससीसी) के तौर पर वर्गीकृत किया जा सकता है। ट्यूमर के विकास को उजागर करने वाली सेलुलर मोर्फोमेट्री इन तीन वर्गों को अलग करने वाले एक बहुत बारीक ऊतकीय अंतर को प्रदर्शित करती है, जिसे इंसानी आंख से देख पाना बहुत कठिन है। अपनी काफी समान ऊतकीय विशेषताओं के कारण ये ढूंढने में काफी मुश्किल बना हुआ है, जिसे वर्गीकृत करने में रोग विज्ञानियों को भी मुश्किल होती है। एआई में गहन अध्ययन के आने के बाद डिजिटल इमेज विश्लेषण में एक असाधारण संभावना दिखती है ताकि वो कैंसर के निदान में एक कम्प्यूटेशनल सहायता के रूप में काम कर सके, जिससे कैंसर रोगियों के लिए समय पर और प्रभावी रोगनिरोधी और बहु-मोडल उपचार प्रोटोकॉल में मदद मिलेगीऔर इस रोग के प्रबंधन में बढ़ोतरी करते हुए ये रोग विज्ञानियों के परिचालन कार्यभार को कम करेगा।

एआरसीआई ने कैंसर के इलाज के लिए दुर्लभ धातु आधारित मैग्नेटोकैलोरिक सामग्री का निर्माण किया मैग्नेटोकैलोरिक वस्तु ट्यूमर कोशिकाओं को मारने के लिए जरूरी नियंत्रित ऊष्मा उपलब्ध करा सकता है विकिरण चिकित्सा (रेडिएशन थेरेपी) के साथ इसके इस्तेमाल की विधि से इसका दुष्प्रभाव तो कम होगा ही है, इलाज में समय भी कम लगेगा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के स्वायत्त अनुसंधान एवं विकास केंद्र पाउडर धातु शोधन एवं नई सामग्री के लिए अंतरराष्ट्रीय उन्नत अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिकों ने एक दुर्लभ धातु आधारित मैग्नेटोकैलोरिक सामग्री का निर्माण किया है जिसका कैंसर के इलाज में प्रभावी तरीके से इस्तेमाल किया जा सकता है। एआरसीआई द्वारा विकसित इस मैग्नेटोकैलोरिक वस्तु (ऐसी वस्तु जिसमें एक चुंबकीय क्षेत्र लगाने या हटाने से वस्तु गर्म या ठंडा हो सकती है) का श्री चित्रा तिरुनल इंस्टीट्यूट फॉर मेडिकल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी में परीक्षण चल रहा है। इस शोध कार्य पर एक शोध पत्र एलायड एंड कंपाउंड पत्रिका में प्रकाशित हो चुका है। चिकित्सा सामग्री के क्षेत्र में तरक्की से चुंबकीय हाइपरथर्मिया (असाधारण रूप से उच्चतर तापमान) का विकास होगा जिससे कैंसर के इलाज में कीमोथेरपी जैसी प्रक्रिया के दुष्प्रभावों के मुद्दों का समाधान निकालने की कोशिश की जा सकती है। चुंबकीय हाइपरथर्मिया में सूक्ष्म चुंबकीय पदार्थों को कुछ गौस के बदलते चुंबकीय क्षेत्रों में रखा जाता है जो चुंबकीय रिलैक्सेशन के नुकसान होने की वजह से ऊष्मा पैदा करता है। आमतौर पर ट्यूमर कोशिकाओं को मारने के लिए 40 से 45 डिग्री सेंटीग्रेड तापमान की जरूरत पड़ती है। हालांकि, चुंबकीय हाइपरथर्मिया (असामान्य तौर पर उच्चतर तापमान) में तापमान पर नियंत्रण रखने की कमी एक प्रमुख खामी है जिससे शरीर में स्वस्थ कोशिकाओं को क्षति पहुंच सकती है और इससे बड़े हुए रक्त दबाव इत्यादि जैसे दुष्प्रभाव भी होता है। इन समस्याओं को मैग्नेटोकैलोरिक सामग्रियों का इस्तेमाल कर दूर किया जा सकता है क्योंकि यह नियंत्रित ऊष्मा उपलब्ध कराता है। मैग्नेटोकैलोरिक सामग्री चुंबकीय क्षेत्र लागू करने या हटाने पर क्रमश: गर्म होता है या ठंडा होता है। इसके इस्तेमाल का फायदा यह है कि चुंबकीय क्षेत्र हटाते ही इसमें शीतलन का प्रभाव दिखने लगता है जबकि चुंबकीय सूक्ष्म कणों के मामले में चुंबकीय क्षेत्र हटाने पर भी जरूरत से ज्यादा तापमान बना रहता है। मैग्नेटोकैलोरिक प्रभाव: अध्ययन के दौरान प्रणाली में चुंबकीय क्षेत्र लागू करने पर ऊष्मा बढ़ता है और चुंबकीय क्षेत्र हटाने पर शीतलन होती है। एआरसीआई में वैज्ञानिकों के दल ने अध्ययन के लिए दुर्लभ धातु आधारित मिश्र धातु का चुनाव किया क्योंकि कुछ दुर्लभ धातुएं मानव शरीर के अनुकूल होती हैं। उन्होंने मिश्र धातु की संरचना को इस तरह उपयुक्त बनाया ताकि कैंसर कोशिकाओं को मारने के लिए क्यूरी तापमान को आवश्यक चिकित्सा संबंधी तापमान सीमा (42-46 डिग्री सेंटीग्रेड) के नजदीक लाया जा सके। प्रारंभिक हाइपरथर्मिया का मापन 15 मिनट तक अंब्रेल इजी हीट लैबोरेट्री इंडक्शन हीटिंग सिस्टम के इस्तेमाल से किया जाता था जिसमें एससीटीआईएमएसटी में हर 1 मिनट पर तापमान मापा जाता था। सूखे पाउडर पर चुंबकीय क्षेत्र लागू करने से दुर्लभ धातु के सूक्ष्म कणों का तापमान 59 डिग्री तक बढ़ गया। ट्यूमर में इंजेक्शन की अनुरूपता के लिए सूक्ष्म कणों को आसुत जल (डिस्टिल्ड वॉटर) में बिखेरा गया और तब तापमान 38 डिग्री तक पाया गया। यह अपेक्षित है कि चुंबकीय क्षेत्र में बढ़ोतरी के साथ ही ऊष्मीय क्षमता भी बढ़ेगी। एआरसीआई और एससीटीआईएमएसटी ज्यादा आंकड़े जुटाने के लिए एमआरआई के साथ 0.5 टेस्ला के चुंबकीय क्षेत्र में परीक्षण के लिए तरल पदार्थ में दुर्लभ सूक्ष्म कणों को बिखेर कर ट्यूमर कोशिकाओं पर विट्रो मापन का काम कर रहे हैं। हाइपरथर्मिया मापन सूखे दुर्लभ धातु के सूक्ष्म कणों में तापमान में वृद्धि और आसुत जल (डिस्टिल्ड वॉटर) में इन्हें बिखेरने की स्थिति में तापमान में गिरावट दिखाता है।

चिंता नहीं, जागरूकता है कोविड-19 से लड़ने की कुंजी : डॉ. जितेन्‍द्र सिंह कोविड-19 के रोगियों के लिए भारत की प्रथम स्‍वदेशी, किफायती, वायरलेस शारीरिक मानक निगरानी प्रणाली कोविड बीईईपी लॉन्‍च कोविड बीईईपी मौलिक कोविड के लिए एंटिडोट के रूप में उभरेगा केन्द्रीय पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह ने आज यहां कहा कि चिंता नहीं, बल्कि जागरूकता कोविड-19 महामारी से लड़ने की कुंजी है। कोविड-19 के रोगियों के लिए भारत की प्रथम स्‍वदेशी, किफायती, वायरलेस शारीरिक मानक निगरानी प्रणाली कोविड बीईईपी (कन्टिन्यूअस ऑक्‍सीजनेशन एंड वाइटल इंफॉर्मेशन डिटेक्‍शन बायोमेड ईसीआईएल ईएसआईसी पीओडी) को लॉन्‍च करते हुए उन्‍होंने इस महामारी से कारगर ढंग से निपटने के लिए रोकथाम और जागरूकता के महत्‍व पर जोर दिया, ऐसे समय में जबकि लगभग दो महीने के प्रभावी और समयबद्ध लॉकडाउन के बाद अनलॉक की प्रक्रिया अब चरणबद्ध रूप से शुरू की जा चुकी है। इसे ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज, हैदराबाद ने आईआईटी हैदराबाद तथा परमाणु ऊर्जा विभाग के सहयोग से विकसित किया गया है। आईआईटी हैदराबाद, ईसीआईएल, हैदराबाद और टीआईएफआर हैदराबाद जैसे विख्‍यात संस्‍थानों के सहयोग से मौजूदाकोविड-19 संकट के दौरान बीमित व्‍यक्तियों के कल्‍याण के लिए एक अन्‍य नवाचार के प्रस्‍तुत करने वाले और अपने उपकरणों की लम्‍बी सूची में एक नाम और जोड़ने वाले ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज, हैदराबाद के प्रयासों की सराहना करते हुए डॉ. सिंह ने कहा कि कोविड बीईईपी इस बात का उत्‍कृष्‍ट उदाहरण है कि भारत के प्रतिष्ठित संस्‍थानों के बीच तालमेल देश के समक्ष आ रही अधिकतर चुनौतियों का समाधान न्‍यूनतम लागत के साथ प्रस्‍तुत कर सकता है और इस प्रकार भारत को सही मायनों में आत्‍मनिर्भरबना सकता है। डॉ. सिंह ने यह भी कहा कि कोविड बीईईपी मौलिक कोविड,जिस महामारी से इस समय समूचा विश्‍व जूझ रहा है; के लिए प्रभावी एंटिडोट के रूप में उभरेगा। कोविड बीईईपी के नवीनतम संस्‍करण में निम्‍नलि‍खित को शामिल किया गया है : क. एनआईबीपी निगरानी : कोविड-19 से प्रभावित बुजुर्गों की मृत्‍यु दर सबसे ज्‍यादा है। इसलिए इस संदर्भ में, एनआईबीपी निगरानी आवश्‍यक हो जाती है। ख. ईसीजी निगरानी : प्रोफिलैक्सिस जैसी दवाओं और/या हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीनऔर एज़िथ्रोमाइसिन आदि जैसे उपचारों का उपयोग हृदय पर प्रभाव डालता है और इसलिए ईसीजी निगरानी का महत्व है। ग. श्वसन दर : इसकी गणना बायो इम्पीडन्स मैथॅड से की जाती है। कोविड बीईईपीइसके फैलने के जोखिम को काफी हद तक कम करने के साथ-साथ पीपीईजैसे संसाधनों की बचत करने में भी मदद करेगा। डॉ. सिंह ने स्वास्थ्य संबंधी अनेकसमस्याओं के समाधान विकसित करने के लिए परमाणु ऊर्जा विभाग के कार्यों की सराहना की। ईसीआईएल परमाणु ऊर्जा विभाग के अंतर्गत हीआता है। लोकप्रिय धारणा के विपरीत, परमाणु ऊर्जा विभाग मानव जाति केव्‍यापक कल्याण के लिए परमाणु ऊर्जा के परोपकारी उपयोग को बढ़ावा देने के लिए सक्रिय रूप से प्रयासरत है। चाहे बिजली उत्‍पादन करने का क्षेत्र हो, कृषि उपज बढ़ाने, खाद्य संरक्षण का क्षेत्र होया मुंबई में टीएमसी केनाम से प्रसिद्ध ऑन्कोलॉजी केंद्र का संचालन करने का क्षेत्र हो, परमाणु ऊर्जा विभाग ने हमेशा जरूरत की घड़ी में देश का साथ निभाया है । कोविड बीईईपी का विकास उसी दिशा में उठाया गया एक अन्‍य कदम है। डॉ. सिंह से पहले, गृह राज्य मंत्री, श्री जी. किशन रेड्डी, परमाणु ऊर्जा विभाग के सचिव, श्री केएन व्यास, ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज, हैदराबाद के डीन प्रो. श्रीनिवास, ईसीआईएल के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशकरियर एडमिरल (सेवानिवृत्त) संजय चौबे ने भी इस अवसर पर वर्तमान संदर्भ में ऐसे आविष्कारों के महत्व को रेखांकित किया।

दक्षिण पश्चिम मानसून कर्नाटक के दक्षिणी हिस्‍से के कुछ और हिस्‍सों, रायलसीमा के कुछ भागों, तमिलनाडु के अधिकांश हिस्‍सों, समूची दक्षिण पश्चिम बंगाल की खाड़ी तरफ बढ़ा दक्षिण पश्चिम मानसून के और आगे बढ़ने के लिए स्थितियां अनुकूल भारतीय मौसम विभाग के नई दिल्‍ली स्थित राष्‍ट्रीय मौसम भविष्‍यवाणी केन्‍द्र/ क्षेत्रीय मौसम केन्‍द्र के अनुसार: दक्षिण पश्चिम मानसून कर्नाटक के दक्षिणी हिस्‍से के कुछ और हिस्‍सों, रायलसीमा के कुछ भागों, तमिलनाडु के अधिकांश हिस्‍सों, समूची दक्षिण पश्चिम बंगाल की खाड़ी, पश्चिमी मध्‍य बंगाल की खाड़ी के कुछ और भागों, समूची पूर्वी मध्‍य बंगाल की खाड़ी और बंगाल की खाड़ी के उत्‍तर पश्चिम के कुछ भागों और उत्‍तर पूर्वी बंगाल की खाड़ी के कुछ और हिस्‍सों की तरफ बढ़ गया है। मानसून का उत्‍तरी दायरा (एनएलएम) अब कारवाड़, शिमोगा, तुमकुरू, चित्‍तूर और चेन्‍नई के रास्‍ते गुजर रहा है। दक्षिण पश्चिम मानसून के लिए ऐसी अनुकूल स्थितियां बन रही हैं जिससे वह अगले 23 दिन के दौरान मध्‍य अरब सागर, गोवा, कोंकण के कुछ भागों, कर्नाटक के कुछ और हिस्‍सों, रायलसीमा, तमिलनाडु के शेष हिस्‍सों, तटीय आन्‍ध्र प्रदेश के कुछ हिस्‍सों, मध्‍य और उत्‍तरी बंगाल की खाड़ी के कुछ और भागों और उत्‍तर पूर्व के कुछ हिस्‍सों की तरफ बढ़ जाएगा। इसके बाद ऐसी अनुकूल स्थितियां बन सकती हैं जब दक्षिण पश्चिम मानसून अगले 2 दिन के दौरान महाराष्‍ट्र के कुछ और भागों, कर्नाटक के कुछ और भागों, तेलंगाना के कुछ भागों, तटीय आन्‍ध्र प्रदेश के कुछ और भागों, बंगाल की खाड़ी शेष हिस्‍सोंऔर उत्‍तर पूर्वी राज्‍यों, सिक्किम, ओडिशा के कुछ भागों और गंगा के तटीय पश्चित बंगाल की तरफ बढ़ जाए। पश्चिमी विक्षोभ कम दबाव वाले क्षेत्र में कायम रहेगा। साथ ही उत्तर-पश्चिमी राजस्थान और उसके पड़ोस, उत्तर पंजाब, बिहार और इससे सटे पूर्वी उत्तर प्रदेश, उत्‍तर पूर्वी उत्तर प्रदेश और पड़ोस तथा मध्य गुजरात में चक्रवाती चक्‍कर के रूप में बना हुआ है। चक्रवाती तूफान जो पूर्वी मध्‍य बंगाल की खाड़ी और आसपास उत्तरी अंडमान सागर से सटे क्षेत्र पर स्थित था अब पूर्वी मध्य बंगाल की खाड़ी में टिका हुआ है। इसके प्रभाव से, अगले 48 घंटों के दौरान बंगाल की खाड़ी के पूर्वी मध्‍य हिस्‍से में कम दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना है। इसके पश्चिम उत्‍तर पश्चिम दिशा की ओर बढ़ने और अगले 24 घंटे के दौरान अधिक सुस्‍पष्‍ट होने की संभावना है। समुद्र तल के स्‍तर से 5.8 किलोमीटर ऊपर केरल तट से दूर दक्षिण पूर्वी अरब सागर पर चक्रवाती तूफान बना हुआ है। पूर्वी विदर्भ और उसके पड़ोस में चक्रवाती तूफान समुद्र तल के स्‍तर से 0.9 किलोमीटर तक ऊपर है और कम स्‍पष्‍ट है। इस बीच, अगले पांच दिन के लिए सामान्‍य मौसम की भविष्‍यवाणी (12 जून 2020 को सुबह 08:30 बजे तक): अगले 24 घंटे के दौरान अधिकतम तापमान में कोई महत्‍वपूर्ण बदलाव नहीं और उत्‍तर पश्चिम भारत के मैदानी इलाकों में अगले तीन दिन के दौरान तापमान में 2-4°से. के बढ़ोतरी होगा। उत्‍तर पश्चिमी भारत में छिटपुट वर्षा होने की संभावना है।

राष्ट्रीय आधुनिक कला संग्रहालय 8 जून से 3 जुलाई 2020 तक ग्रीष्मकालीन कला कार्यक्रम “ऑनलाइन नैमिषा 2020” का आयोजन करेगा “ऑनलाइन नैमिषा 2020” कार्यक्रम के तहत चार कार्यशालाओं का आयोजन किया जाएगा राष्ट्रीय आधुनिक कला संग्रहालय ने 8 जून से 3 जुलाई 2020 तक ग्रीष्मकालीन कला कार्यक्रम “ऑनलाइन नैमिषा 2020” का आयोजन करने की घोषणा की है। इस महामारी की स्थिति में और लॉकडाउन के दौरान, संग्रहालय और सांस्कृतिक संस्थान हमेशा की तरह आगंतुकों और दर्शकों को सेवा प्रदान नहीं कर सकते हैं। इस स्थिति ने एनजीएमए को अपने दर्शकों तक पहुंचने के लिए नए क्षेत्रों और प्लेटफार्मों का पता लगाने के लिए प्रेरित किया। पिछले दो महीनों में एनजीएमए ने कई कार्यक्रमों और प्रदर्शनियों का वर्चुअल रूप में आयोजन किया है। तकनीकी विकास, ऐसे कार्यक्रमों को डिजिटल रूप से आयोजित करने का अवसर प्रदान करता है। इसलिए एनजीएमए अपने सबसे लोकप्रिय ग्रीष्मकालीन कला कार्यक्रम नैमिषा को डिजिटल रूप से आयोजित करने का प्रयास कर रहा है। महीने भर चलने वाला यह ऑनलाइन कार्यक्रम एनजीएमए, नई दिल्ली की एक पहल है जिसके अंतर्गत प्रतिभागियों को कलाकारों के साथ अभ्यास करने और उनसे सीखने का अवसर प्राप्त होता है। अपने दर्शकों से वर्चुअल रूप में संपर्क बढाने के लिए एनजीएमए द्वारा चार समावेशी कार्यशालाओं की योजना बनाई गई है। 1 जून को इन कार्यशालाओं की घोषणा का गर्मजोशी से स्वागत किया गया है और अब तक 600 से अधिक प्रतिभागियों के पंजीकरण प्राप्त हुए हैं। “ऑनलाइन नैमिषा 2020” कार्यक्रम में, 8 जून 2020 से 3 जुलाई 2020 तक चार कार्यशालाओं का आयोजन किया जाएगा। कार्यशालाओं के शीर्षक हैं - चित्रकला कार्यशाला, मूर्तिकला कार्यशाला, प्रिंटमेकिंग और इन्द्रजाल - द मैजिक ऑफ आर्ट (स्वतंत्रता को समझने के लिए अंतःविषय रचनात्मक कार्यशाला) । ऑनलाइन कार्यशाला सत्र दो समूहों में आयोजित किए जाएंगे।: समूह 1: 6 वर्ष से 15 वर्ष तक, समय : सुबह 11 बजे से 11.35 बजे तक और समूह 2: 16 वर्ष एवं इससे अधिक, उम्र की कोई उपरी सीमा नहीं, समय : 4.00 बजे शाम से 4.35 बजे तक। राष्ट्रीय आधुनिक कला संग्रहालय के महानिदेशक श्री अद्वैत चरण गरनायक ने कहा, " राष्ट्रीय आधुनिक कला संग्रहालय (एनजीएमए) के पहले महानिदेशक के रूप में, मैं इस बात में दृढ़ता से विश्वास करता हूं कि संग्रहालयों को वर्चुअल रूप में आम लोगों के लिए सुलभ बनाया जाना चाहिए। समर आर्ट 2020, संग्रहालय और इसकी गतिविधियों के साथ समाज के सभी वर्गों को जोड़ने की दिशा में उठाया गया एक कदम है। सोमवार से, मैं वरिष्ठ-कनिष्ठ कलाकारों के साथ आपकी स्क्रीन पर आपके पास पहुंचूंगा और हम सभी एक साथ कला रचना के लिए सीखने का प्रयास करेंगे। कार्यक्रम का शीर्षक नैमिषा एक पवित्र स्थान का प्रतिनिधित्व करता है जहां लोग अपनी श्रद्धा या भक्ति की पेशकश करते हैं। मेरा मानना ​​है कि एनजीएमए की गतिविधियों का दायरा, एक संस्था के रूप में विशेष रूप से शिक्षा के क्षेत्र में बढ़ाया जाना चाहिए और समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचने का प्रयास किया जाना चाहिए। " नैमिषा 2020 समर आर्ट प्रोग्राम से चयनित कलाकृतियों की प्रदर्शनी को जल्द ही सार्वजनिक रूप से देखने के लिए एनजीएमए के सांस्कृतिक मीडिया मंच एसओ –एचएएम पर वर्चुअल रूप में प्रदर्शित किया जाएगा

▪️ #Edrishti Navatra ▪️ June 2020 ▪️ #Hindi Medium ▪️ #Current Affairs Magazine

Kurukshetra June 2020.pdf21.55 MB

सत्य के साथ मेरे प्रयोग - महात्मा गांधी

सही_हिन्दी_सुन्दर_हिन्दीडा_विजय.pdf13.48 MB

वस्तुनिष्ठ हिंदी :- ओंकार नाथ वर्मा | Free उपकार प्रकाशन | 30.1 MB | #Hindi

तार्किक योग्यता एवं गणितीय परीक्षण | पंकज कुमार | उपकार प्रकाशन | 58.1 MB #Hindi

तार्किक योग्यता एवं गणितीय परीक्षण | पंकज कुमार | उपकार प्रकाशन | 58 MB
तार्किक योग्यता एवं गणितीय परीक्षण | पंकज कुमार | उपकार प्रकाशन | 58 MB

वैदिक गणित सूत्र.Pdf11.92 MB

गणितीय सूत्रकोश हिंदी.Pdf36.21 MB

सामान्य_ज्ञान_अध्ययन_आधुनिक_भारत.pdf36.98 MB

मध्यकालीन_भारत_का_इतिहास_उपकार.Pdf21.59 MB

प्राचीन_भारत_का_इतिहास_उपकार.Pdf38.89 MB

Download_Dhyeya_IAS_Perfect_7_Weekly_Magazine_in_Hindi_June_2020.pdf2.90 MB