en
Feedback

Don't get caught by a cheater! Telemetrio finds and tags such channels 👉 If you want to see the tag, subscribe 👈

I.A.S.(हिंदी माध्यम)

I.A.S.(हिंदी माध्यम)

Open in Telegram

🚩 Channel was restricted by Telegram

Show more
India187 457The category is not specified
2 554
Subscribers
No data24 hours
No data7 days
No data30 days
Posts Archive
ट्यूलिप – सभी यूएलबीऔर स्मार्ट शहरों में नए स्नातकों को अवसर प्रदान करने के लिए शहरी अध्‍ययन प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरूआत कार्यान्वयन के लिए एमओएचयूएऔर एआईसीटीईके बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर मानव संसाधन विकासमंत्रीश्री रमेश पोखरियाल`निशंक’, आवास और शहरी कार्य राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) श्री हरदीप एस. पुरीऔर अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) ने द अर्बन लर्निंग इंटर्नशिप प्रोग्राम (ट्यूलिप) या शहरी अध्‍ययन प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए संयुक्त रूप से एक ऑनलाइन पोर्टल की शुरूआत की है– एक ऐसा कार्यक्रम जो देश भर के सभी शहरी स्थानीय निकायों (यूएलबी) और स्मार्ट शहरों में नए स्नातकों को प्रशिक्षण के अवसर प्रदान करेगा। ट्यूलिप के पोर्टल की शुरूआत मानव संसाधन विकास मंत्रालय में सचिव श्री अमित खरे, आवास और शहरी कार्य मंत्रालय में सचिवश्री दुर्गा शंकर मिश्रा, एआईसीटीई के अध्‍यक्ष और दोनों मंत्रालयों तथा एआईसीटीई के अधिकारियों ने की। ट्यूलिपशहरी क्षेत्र में नए स्नातकों को अनुभव के साथ अध्‍ययन के अवसर प्रदान करने का एक कार्यक्रम है। यह हमारे प्रधानमंत्री के दूरदर्शी नेतृत्व का परिणाम है जिनका दृढ़ विश्‍वास है कि युवाओं की शक्ति और उनकी क्षमता न केवल हमारे देश में बल्कि दुनिया में सकारात्मक बदलाव ला सकती है। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा है कि भारत के युवाओं को हमारे देश के भविष्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभानी है। स्‍मार्ट शहर मिशन- प्रगति की तस्‍वीर स्मार्ट शहर मिशन ने शहरी भारत के भविष्य की नींव रखने में पिछले तीन वर्षों में महत्वपूर्ण प्रगति की है। अब तक1,65,000 करोड़ रुपये की परियोजनाओं की निविदा की गई, जिसमें से लगभग 1,24,000 करोड़ रुपये की परियोजनाएं कार्यान्वयन के चरण में हैं। 26,700 करोड़ रुपये की परियोजनाएं पहले ही पूरी हो चुकी हैं और नागरिकों को इनका लाभ मिल रहा है। हमारे स्मार्ट शहर कोविडसंकट का प्रबंधन करने के लिए प्रौद्योगिकी का लाभ उठाने में सबसे आगे रहे हैं, इनमें से 47 अपने स्मार्ट कमांड और नियंत्रण केन्‍द्रों का संकट प्रबंधन युद्ध कक्ष के रूप में उपयोग कर रहे हैं और 34 शहर उन्हें जल्द से जल्द पूरा करने के लिए काम कर रहे हैं। पैदल चलने के अनुकूल बनाने, गैर-मोटर चालित परिवहन और सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने के लिए, हमारे शहरों ने 2300 करोड़ रुपये मूल्‍य की 151 स्मार्ट सड़क परियोजनाओं को पूरा किया है और 18,300 करोड़ रुपये की लागत वाली 373 परियोजनाएं पूरी होने के करीब हैं। 3,700 करोड़रुपए के 91 पीपीपी परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं और 21,400 करोड़ रुपये की लागत वाली 203 परियोजनाएं जल्द पूरी हो जाएंगी। 800 करोड़ रूपए की 51 परियोजनाएं जीवंत शहरी स्थानों के क्षेत्र में पूरी हो चुकी हैं। 2,300 करोड रुपये की 67 परियोजनाएं जो स्मार्ट पानी से संबंधित हैं और 200 करोड़ रुपये की 41 परियोजनाएँ जो स्मार्ट सोलर के तहत हैं, पूरी हो चुकी हैं। वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने ‘आकांक्षापूर्ण भारत’ के अंतर्गत वर्ष 2020-21 के बजट के अनुरूप ट्यूलिप की कल्पना की गई। घोषणा इस प्रकार थी: "सरकार ने एक कार्यक्रम शुरू करने का प्रस्ताव किया है जिसके तहत देश भर के शहरी स्थानीय निकाय एक वर्ष तक की अवधि के लिए नए इंजीनियरों को इंटर्नशिप के अवसर प्रदान करेंगे।" इस तरह के कार्यक्रम से भारत के जनसांख्यिकीय लाभांश का फायदा लेने में मदद मिलेगी, क्योंकि आने वाले वर्षों में यह दुनिया की काम करने वाली उम्र की सबसे बड़ी आबादी होगी। भारत में तकनीकी स्नातकों का पर्याप्त पूल है, जिनकोउनके पेशेवर विकास के लिए वास्तविक दुनिया की परियोजना कार्यान्वयन और नियोजन तक पहुंचाना आवश्यक है। सामान्य शिक्षा समाज में मौजूद उपयोगी ज्ञान की गहराई को नहीं दर्शा सकती है। शिक्षा को, अध्‍ययन से कार्य के बजाय, 'हमारे समाजके लिएआवश्‍यक है कि वह ‘कार्य से अध्‍ययन’ के रूप में शिक्षा की नये सिरे से कल्‍पना करे।

भारत-ऑस्ट्रेलिया के राजनेताओं की वर्जुअल माध्यम से शिखर बैठक भारत-ऑस्ट्रेलिया वर्चुअल शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री का उद्घाटन भाषण Excellency, नमस्कार! सबसे पहले मैं अपनी ओर से और पूरे भारत की ओर से ऑस्ट्रेलिया में COVID-19 से प्रभावित सभी लोगों और परिवारों के प्रति हार्दिक संवेदना प्रकट करना चाहूँगा। इस वैश्विक महामारी ने विश्व में हर प्रकार की व्यवस्था को प्रभावित किया है। और हमारे summit का यह डिजिटल स्वरूप इसी प्रकार के प्रभावों का एक उदाहरण है। Excellency, आपसे इस डिजिटल माध्यम से मिलकर मुझे ख़ुशी तो है ही, लेकिन थोड़ी निराशा भी है, क्योंकि हमें भारत में आपका गर्मजोशी से स्वागत करने का अवसर नहीं मिल पाया। पहले जनवरी में और फिर पिछले महीने हम आपकी भारत यात्रा का की प्रतीक्षा कर रहे थे, लेकिन दुर्भाग्यवश दोनों ही बार यात्रा स्थगित करनी पड़ी। हमारी आज की मुलाक़ात आपकी भारत यात्रा का स्थान नहीं ले सकती। एक मित्र के नाते, मेरा आपसे आग्रह है कि स्थिति सुधरने के बाद आप शीघ्र सपरिवार भारत यात्रा प्लान करें और हमारा आतिथ्य स्वीकार करें। Excellency, भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंध विस्तृत होने के साथ-साथ गहरे भी हैं। और यह गहराई आती है हमारे shared values, shared interests, shared geography और shared objectives से। पिछले कुछ वर्षों में हमारे सहयोग और तालमेल में अच्छी गति आई हैं। यह सौभाग्य की बात है कि हमारे संबंधों की बागडोर का एक छोर आप जैसे सशक्त और visionary लीडर के हाथ में हैं। मेरा मानना है कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के संबंधों को और सशक्त करने के लिए यह perfect समय है, perfect मौक़ा है। अपनी दोस्ती को और मज़बूत बनाने के लिए हमारे पास असीम संभावनाएँ हैं। ये संभावनाएँ अपने साथ challenges भी लाती हैं। Challenges कि किस तरह इस potential को वास्तविकता में translate किया जाए, ताकि दोनों देशों के नागरिकों, businesses, academics, researchers, इत्यादि के बीच links और मज़बूत बने। कैसे हमारे संबंध अपने क्षेत्र के लिए और विश्व के लिए एक factor of stability बनें, कैसे हम मिल कर global good के लिए कार्य करें, इन सभी पहलुओं पर विचार की आवश्यकता है। Excellency, समकालीन विश्व में देशों की एक दूसरे से अपेक्षाएँ, और हमारे नागरिकों की हमसे अपेक्षाएँ बढ़ गई हैं। Democratic values को share करने के नाते, हम दोनों देशों का कर्तव्य है कि इन अपेक्षाओं पर खरे उतरें।इसलिए, वैश्विक कल्याण के मूल्य, जैसे लोकतंत्र, Rule of Law, Freedom, Mutual Respect, International Institutions का सम्मान, और पारदर्शिता आदि को uphold करना, और protect करना हमारी sacred responsibility है। यह एक प्रकार से भविष्य के लिए हमारी धरोहर है।आज जब अलग-अलग प्रकार से इन values को challenge किया जा रहा है, तो हम आपसी सम्बन्धों को मजबूत कर के इन्हें सशक्त कर सकते हैं। Excellency, भारत ऑस्ट्रेलिया के साथ अपने सम्बन्धों को व्यापक तौर पर और तेज़ गति से बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। यह न सिर्फ़ हमारे दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि Indo-Pacific क्षेत्र और विश्व के लिए भी आवश्यक है। मुझे प्रसन्नता है कि हमारे विभिन्न institutional dialogues हमारे संबंधों को और substance प्रदान कर रहें हैं। दोनों देशों के बीच निरंतर उच्च-स्तरीय exchanges भी हो रहें हैं। व्यापार और निवेश भी बढ़ रहा है। लेकिन मैं यह नहीं कहूँगा कि मैं इस गति से, इस विस्तार से संतुष्ट हूँ। जब आप जैसा लीडर हमारे मित्र देश का नेतृत्व कर रहा हो, तो हमारे संबंधों में विकास की गति का मापदंड भी ambitious होना चाहिए। मुझे बहुत प्रसन्नता है कि आज हम अपने द्विपक्षीय संबंधों को Comprehensive Strategic Partnership के रूप में upgrade कर रहे हैं। वैश्विक महामारी के इस काल में हमारी Comprehensive Strategic Partnership की भूमिका और महत्वपूर्ण रहेगी। विश्व को इस महामारी के आर्थिक और सामाजिक दुष्प्रभावों से जल्दी निकलने के लिए एक coordinated और collaborative approach की आवश्यकता है। हमारी सरकार ने इस Crisis को एक Opportunity की तरह देखने का निर्णय लिया है। भारत में लगभग सभी क्षेत्रों में व्यापक reforms की प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है। बहुत जल्द ही ग्राउंड लेवल पर इसके परिणाम देखने को मिलेंगे। इस कठिन समय में आपने ऑस्ट्रेलिया में भारतीय समुदाय का, और ख़ास तौर पर भारतीय छात्रों का, जिस तरह ध्यान रखा है, उसके लिए मैं विशेष रूप से आभारी हूँ।

विद्युत मंत्रालय (Ministry of Power) ने 3 जून, 2020 को वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से देशभर में वास्तविक समय (Real Time) में विद्युत की खरीद-बिक्री हेतु बाज़ार की शुरुआत की है। प्रमुख बिंदु: उल्लेखनीय है कि विद्युत् मंत्रालय द्वारा उठाए गए इस कदम से भारतीय विद्युत बाज़ार भी विश्व में संचालित ‘रियल टाइम इलेक्ट्रिसिटी मार्केट’ की श्रेणी में शामिल हो गया है। रियल टाइम इलेक्ट्रिसिटी मार्केट (Real Time Electricity Market-RTEM) एक संगठित बाज़ार है जहाँ भारत के क्रेताओं एवं विक्रेताओं द्वारा वास्तविक समय में आवश्यकताओं के अनुसार विद्युत की खरीद-बिक्री की जाएगी। रियल टाइम मार्केट लागू किये जाने से वास्तविक समय में विद्युत बाज़ार में अपेक्षित लचीलापन आएगा साथ ही बाज़ार में उपलब्ध अधिशेष विद्युत का ईष्टतम उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा। रियल टाइम मार्केट में एक दिन में कुल 48 नीलामी सत्र (Auction Sessions) आयोजित किये जाएंगे अर्थात् प्रत्येक 30 मिनट पर विद्युत की नीलामी की जाएगी और सत्र बंद होने के एक घंटे के भीतर विद्युत का वितरण किया जाएगा। रियल टाइम मार्केट के माध्यम से विद्युत वितरण कंपनियों (डिस्काम) को प्रतिस्पर्द्धा मूल्य पर बाज़ार में पहुँचने के लिये एक वैकल्पिक तंत्र उपलब्ध कराया जाएगा। लंबी अवधि के अनुबंध एवं रियल टाइम मार्केट में सहभागिता करने के लिये विद्युत उत्पादक कंपनियों के लिये विद्युत वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) के साथ लाभ साझा करने हेतु एक तंत्र उपलब्ध कराया गया है। गौरतलब है कि रियल टाइम मार्केट से वर्ष 2022 तक भारत सरकार के 175 गीगावाट (Gigawatt- GW) नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy-RE) के लक्ष्य को प्राप्त करने में मज़बूती मिलेगी। राष्ट्रीय भार प्रेषण केंद्र (National Load Despatch Centre)-पोसोको (POSOCO) बिजली एक्सचेंज के बीच समन्वय में स्वचालन को लेकर ज़रूरी सुविधा उपलब्ध करा रहा है ताकि रियल टाइम मार्केट के तहत तेज़ी से व्यापार किया जा सके। पॉवर सिस्टम ऑपरेशन कार्पोरेशन लिमिटेड (Power System Operation Corporation Limited-POSOCO): ‘पॉवर सिस्टम ऑपरेशन कार्पोरेशन लिमिटेड’ भारत सरकार का उपक्रम है जो क्षेत्रीय भार प्रेषण केंद्रों (Regional Load Despatch Centres-RLDCs) और राष्ट्रीय भार प्रेषण केंद्र (National Load Despatch Centre-NLDC) के संचालन और जनशक्ति की आवश्यकता से संबंधित सभी पहलुओं का पर्यवेक्षण तथा नियंत्रण करता है। इसमें 5 क्षेत्रीय भार प्रेषण केंद्र और एक राष्ट्रीय भार प्रेषण केंद्र शामिल है। ‘राष्ट्रीय भार प्रेषण केंद्र और क्षेत्रीय भार प्रेषण केंद्र’ विद्युत अधिनियम, 2003 के तहत कार्य करते हैं। राष्ट्रीय भार प्रेषण केंद्र के कार्य: केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग एवं केंद्र सरकार द्वारा समय-समय पर जारी किये गए दिशा-निर्देशों या नियमों के अनुसार प्रेषण प्रणाली के संचालन से संबंधित जानकारी का प्रसार करना। राष्ट्रीय ग्रिड का संचालन एवं उनकी सुरक्षा करना। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ऊर्जा के विनिमय हेतु समन्वय करना उद्देश्य: विद्युत वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) को अपनी विद्युत आवश्यकताओं की योजना बनाने में मदद करना। डिस्कॉम को अपनी विद्युत संबंधी आवश्यकताओं को बेहतर ढंग से पूरा करने में मदद करना। नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन की निरंतर या परिवर्तनशील प्रकृति के कारण ग्रिड प्रबंधन की चुनौतियों को रियल टाइम मार्केट की साहयता से कम करना। बोली लगाने के अल्प समय और परिभाषित प्रक्रियाओं के कारण क्रेता अपनी ज़रूरत के हिसाब से विद्युत की खरीद कर सकेंगे। विद्युत उत्पादक कंपनियों को भी अपनी गैर-आवश्यक क्षमता को बेचने का अवसर प्राप्त होगा जिससे उनकी उत्पादन क्षमता में वृद्धि होगी। विद्युत खरीद की लागत को कम किया जा सकेगा साथ ही विद्युत की ज़रूरत पड़ने पर रियल टाइम इलेक्ट्रिसिटी मार्केट से खरीदा भी जा सकता है।

केंद्र सरकार द्वारा 'COVID-19 प्रबंधन सूचकांक' (COVID-19 Management Index) के तहत 10 राज्यों के लिये किये गए विश्लेषण में राजस्थान प्रथम स्थान पर रहा है। प्रमुख बिंदु: COVID-19 महामारी का ‘डबलिंग टाइम’ (पॉज़िटिव रोगियों की संख्या के दोगुने होने का समय) जहाँ देश में 12 दिन है, वहीं राजस्थान में यह 18 दिन का है। 'COVID-19 प्रबंधन सूचकांक' में COVID-19 के पॉज़िटिव मामले, सही हो चुके मरीज़, मृत्यु-दर जैसे पैरामीटरों के आधार पर राज्यों का विश्लेषण किया गया है। राजस्थान की COVID-19 के संदर्भ में वर्तमान स्थिति: हालाँकि राजस्थान में COVID-19 पॉज़िटिव मामलों की संख्या 10,000 होने वाली है लेकिन सक्रिय मामलों (Active Cases) का ग्राफ लगातार घट रहा है। अब राज्य में केवल 2,699 सक्रिय मामले हैं। राजस्थान में COVID-19 महामारी के कारण होने वाली मृत्यु-दर 2.16% रही जो राष्ट्रीय औसत से काफी कम थी। वही मरीज़ों का 'रिकवरी रेट' 67.59% है। राजस्थान सरकार द्वारा किये गए प्रयास: राज्य में वर्तमान में प्रतिदिन 18,250 परीक्षण किये जा रहे हैं तथा शीघ्र ही 25,000 परीक्षण प्रतिदिन का लक्ष्य प्राप्त कर लिया जाएगा। राज्य में विभिन्न शहरों से 11 लाख प्रवासियों की वापसी के बावजूद, ग्रामीण क्षेत्रों में महामारी का व्यापक प्रसार नहीं हुआ क्योंकि महामारी के प्रसार को रोकने के लिये ग्रामों तथा उपखंड स्तर पर 'सूक्ष्म नियोजन' प्रणाली को अपनाया गया था। राजस्थान सरकार की आगे की रणनीति: राज्य का 'चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग' वर्तमान में अन्य स्वास्थ्य सेवाओं, जैसे कि टीकाकरण, परिवार कल्याण, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रम आदि पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, ताकि राज्य का बुनियादी स्वास्थ्य ढाँचा तथा 'स्वास्थ्य सूचकांक' COVID-19 महामारी के कारण प्रतिकूल रूप से प्रभावित न हो। राज्य सरकार 15 ज़िलों के 21 केंद्रों पर शीघ्र ही नैदानिक परीक्षण भी शुरू करेगी। इनमें वे ज़िले भी शामिल हैं, जहाँ अन्य राज्यों से सबसे ज्यादा प्रवासी वापस आए हैं। प्रत्येक ग्राम में 'स्वास्थ्य जागरूकता' बढ़ाने के लिये दो स्वास्थ्य मित्र प्रशिक्षित तथा नियुक्त किये जाएंगे। निष्कर्ष: COVID-19 महामारी का बेहतर प्रबंधन ही इस महामारी से बचाव का एकमात्र तरीका है। अत: सभी राज्य सरकारों को संस्थानों, संगठनों, निजी एवं सार्वजनिक क्षेत्रों के साथ मिलकर महामारी प्रबंधन की योजनाओं को वास्तविक धरातल पर लागू करना चाहिये।

एफएएसटी FAST चीन का ‘पाँच सौ मीटर एपर्चर वाला गोलाकार टेलीस्कोप’ (Five-hundred-meter Aperture Spherical Telescope- FAST) सितंबर, 2020 में एलियन के संकेतों की खोज शुरू करेगा। प्रमुख बिंदु: जनवरी, 2020 में चीन द्वारा इस टेलीस्कोप की पहली तस्वीर विश्व के लिये सार्वजनिक की गई थी। ब्रह्माण्ड में पारलौकिक जीवन खोजने में मदद करने के अलावा यह टेलीस्कोप ब्रह्मांड संबंधी घटनाओं की एक विस्तृत श्रृंखला का अध्ययन करने के लिये डेटा एकत्र करेगा जिसमें ब्लैक होल, गैस क्लाउड, पल्सर एवं अधिकतम दूरी की आकाशगंगाएँ शामिल हैं। इस टेलीस्कोप का व्यास लगभग 500 मीटर का है किंतु यह ध्यान रखना महत्त्वपूर्ण है कि यह केवल एक निश्चित समय में रिसीवर पर 300 मीटर व्यास वाले क्षेत्र को ही केंद्रित करता है। पूर्ण रूप से तैयार होने के बाद यह प्यूर्टो रिको (Puerto Rico) में ‘अरेसिबो वेधशाला’ (Arecibo Observatory) द्वारा कवर किये गए आकाशीय क्षेत्र को दो बार स्कैन करने में सक्षम होगा जो अब तक दुनिया में सबसे बड़े ‘सिंगल-एपर्चर रेडियो टेलीस्कोप’ के लिये एक रिकॉर्ड है। इस टेलीस्कोप का उल्लेख पहली बार वर्ष 1994 में किया गया था किंतु वास्तविक मंज़ूरी वर्ष 2007 में दी गई थी। इस टेलीस्कोप को 36-फुट लंबाई के त्रिकोणीय आकार के 4,500 पैनलों का उपयोग करके बनाया गया है जो एक डिश पैनल जैसी संरचना बनाते हैं। यह एक 33-टन का ’रेटिना’ (Retina) उपकरण है जिसे 460-525 फीट की ऊँचाई पर लगाया गया है। इस टेलीस्कोप को चीन के दक्षिण-पश्चिमी प्रांत गुइझोउ (Guizhou) के पिंगटांग काउंटी (Pingtang County) में स्थापित किया गया है। यह दुनिया का सबसे बड़ा एवं सबसे संवेदनशील रेडियो टेलीस्कोप है। इसे ‘आई ऑफ हेवन’ (Eye of Heaven) के रूप में भी जाना जाता है।

भारतीय औषधि एवं होम्योपैथी के लिये औषधिकोश आयोग Pharmacopoeia Commission for Indian Medicine & Homoeopathy हाल ही में प्रधानमंत्री की अध्‍यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आयुष मंत्रालय के अंतर्गत अधीनस्‍थ कार्यालय के रूप में ‘भारतीय औषधि एवं होम्‍योपैथी के लिये औषधकोश आयोग’ (Pharmacopoeia Commission for Indian Medicine & Homoeopathy- PCIM&H) की पुनर्स्थापना को अपनी मंज़ूरी दे दी। प्रमुख बिंदु: इस आयोग में वर्ष 1975 में उत्तर प्रदेश के गाज़ियाबाद में स्थापित दो केंद्रीय प्रयोगशालाओं [भारतीय औषधि के लिये औषधिकोष प्रयोगशाला (Pharmacopoeia Laboratory for Indian Medicine- PLIM) और होम्योपैथिक औषधिकोष प्रयोगशाला (Homoeopathic Pharmacopoeia Laboratory- HPL)] का विलय किया गया है। आयुष मंत्रालय के अंतर्गत वर्ष 2010 में स्‍थापित ‘भारतीय औषधि एवं होम्‍योपैथी के लिये औषधकोश आयोग’ (PCIM&H) एक स्‍वयत्‍तशासी संगठन है। तीनों संस्थानों के विलय का उद्देश्य: इस विलय का उद्देश्‍य प्रभावी विनियमन एवं गुणवत्‍ता नियंत्रण की दिशा में आयुर्वेद, सिद्ध, यूनानी एवं होम्‍योपैथी दवाओं के नतीज़ों के मानकीकरण को बढ़ाने के लिये तीनों संस्थानों की बुनियादी ढाँचा सुविधाओं, तकनीकी जनशक्ति और वित्‍तीय संसाधनों का अधिकतम उपयोग करना है। इसका एक अन्य उद्देश्य ‘ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स रूल्स, 1945’ (Drugs and Cosmetics Rules, 1945) में आवश्यक संशोधन करके PCIM&H एवं इसकी प्रयोगशालाओं के विलय वाले ढाँचे को कानूनी दर्जा देना भी है। विलय का लाभ: यह विलय आयुष दवा मानकों के सामंजस्यपूर्ण विकास तथा औषधिकोष एवं सूत्रीकरण (पंजीकृत किये गए नुस्खे) के प्रकाशन की सुविधा प्रदान करेगा। विलय के बाद PCIM&H के पास आयुष मंत्रालय के अंतर्गत पर्याप्‍त प्रशासनिक ढाँचा होगा जिससे औषधकोष आधारित कार्य की क्षमता एवं परिणामों में वृद्धि तथा आयुर्वेद, सिद्ध, यूनानी और होम्‍योपैथी औषधियों के औषधकोश मानकों के परस्‍पर हितों को हासिल करने का प्रयास किया जाएगा इससे औषधियों के मानकीकरण आधारित कार्य के दुहराव एवं ओवरलेपिंग को रोका जा सकेगा जिससे संसाधनों का प्रभावी तरीके से अधिकतम इस्‍तेमाल हो सकेगा।

उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) ने हाल ही में मेक इन इंडिया पहल को प्राथमिकता प्रदान करने के लिए सार्वजनिक खरीद आदेश को संशोधित किया है। मुख्य बिंदु आदेश के अनुसार, DPIIT ने वर्ष 2020-21 के लिए स्थानीय सामग्री की न्यूनतम 60% खरीद, वर्ष 2021-23 के लिए 70% और वर्ष 2023-25 ​​के लिए 80% निर्धारित की है। यह रसायन और पेट्रोकेमिकल पर लागू होता है। DPIIT ने 55 रसायनों और पेट्रोकेमिकल्स की पहचान की है जो 5 लाख रुपये से अधिक की खरीद के लिए बोली लगाने के योग्य हैं। महत्व इस कदम से आत्म निर्भर भारत अभियान को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी। साथ ही, इससे घरेलू उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी। आत्म निर्भर भारत अभियान के तहत, भारत सरकार ने 20,000 लाख करोड़ रुपये का आवंटन किया। आवंटित किए गए फंड का उपयोग एमएसएमई, कृषि, मनरेगा, मत्स्य पालन, स्ट्रीट वेंडर, डेयरी क्षेत्र आदि में किया जा रहा है। यह फंड देश की जीडीपी का 10% है। 10% योगदान संयुक्त राष्ट्र में कई देशों और सदस्यों की बैठक द्वारा तय किया गया था।उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) ने हाल ही में मेक इन इंडिया पहल को प्राथमिकता प्रदान करने के लिए सार्वजनिक खरीद आदेश को संशोधित किया है। मुख्य बिंदु आदेश के अनुसार, DPIIT ने वर्ष 2020-21 के लिए स्थानीय सामग्री की न्यूनतम 60% खरीद, वर्ष 2021-23 के लिए 70% और वर्ष 2023-25 ​​के लिए 80% निर्धारित की है। यह रसायन और पेट्रोकेमिकल पर लागू होता है। DPIIT ने 55 रसायनों और पेट्रोकेमिकल्स की पहचान की है जो 5 लाख रुपये से अधिक की खरीद के लिए बोली लगाने के योग्य हैं। महत्व इस कदम से आत्म निर्भर भारत अभियान को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी। साथ ही, इससे घरेलू उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी। आत्म निर्भर भारत अभियान के तहत, भारत सरकार ने 20,000 लाख करोड़ रुपये का आवंटन किया। आवंटित किए गए फंड का उपयोग एमएसएमई, कृषि, मनरेगा, मत्स्य पालन, स्ट्रीट वेंडर, डेयरी क्षेत्र आदि में किया जा रहा है। यह फंड देश की जीडीपी का 10% है। 10% योगदान संयुक्त राष्ट्र में कई देशों और सदस्यों की बैठक द्वारा तय किया गया था।

4 जून, 2020 को प्रधानमंत्री मोदी ऑस्ट्रेलियाई पीएम स्कॉट मॉरिसन के साथ एक आभासी द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। यह भारत द्वारा आयोजित होने वाला पहला वर्चुअल द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन है। मुख्य बिंदु दोनों नेता को भारत और ऑस्ट्रेलिया के संबंध पर एक व्यापक रूपरेखा पर चर्चा करेंगे। दोनों नेता कई समझौतों पर भी हस्ताक्षर करेंगे। प्रमुख समझौता सैन्य रसद सुविधाओं के आपसी बंटवारे से सम्बंधित है। यह समझौता हिन्द-प्रशांत क्षेत्र में ऑस्ट्रेलियाई और भारतीय सेनाओं के संचालन की बैंडविड्थ को बढ़ाने में मदद करेगा। दोनों नेता हिन्द-प्रशांत क्षेत्र में विज्ञान और प्रौद्योगिकी, COVID-19 संकट, साइबर सुरक्षा, समुद्री मुद्दों के बारे में भी चर्चा करेंगे। दोनों नेता यह भी साझा करेंगे कि उनके संबंधित देश COVID-19 महामारी से कैसे निपट रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया ने सिंगापुर के साथ पहले भी इसी तरह का शिखर सम्मेलन आयोजित किया है। भारत-ऑस्ट्रेलिया भारत और ऑस्ट्रेलिया ने 2015 में अपना पहला द्विपक्षीय नौसैनिक अभ्यास किया। इस अभ्यास को AUSINDEX कहा जाता है। इसके अलावा दोनों देश द्विपक्षीय सैन्य अभ्यास करते हैं जिसे AUSTRAHIND कहा जाता है। भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में एक गैर-स्थायी सदस्य बनने का प्रयास कर है। ऑस्ट्रेलिया ने भारत के UNSC में सदस्य बनने के लिए समर्थन किया है। ऑस्ट्रेलिया ने अजहर मसूद को वैश्विक आतंकवादी घोषित करने के संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव का भी समर्थन किया था।

3 जून, 2020 को प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारत और भूटान के बीच समझौता ज्ञापन को मंजूरी दी। पर्यावरण के क्षेत्र में सहयोग को बेहतर बनाने के लिए देशों के बीच समझौते पर हस्ताक्षर किए गए हैं। मुख्य बिंदु यह समझौता भारत और भूटान के बीच दीर्घकालिक सहयोग को बढ़ावा देने में मदद करेगा। साथ ही, यह पारस्परिकता और पारस्परिक लाभों के आधार पर प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा और प्रबंधन में मदद करेगा। इस समझौते के अनुसार दोनों देशों ने वायु अपशिष्ट, जलवायु परिवर्तन और रासायनिक प्रबंधन के क्षेत्र में अपने सहयोग का विस्तार करने पर भी सहमति व्यक्त की। समझौते के बारे में 2013 में पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के तहत संचालित केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और भूटान के राष्ट्रीय पर्यावरण आयोग के बीच समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे। दोनों देशों ने पर्यावरण के क्षेत्र में अपना सहयोग जारी रखने पर सहमति व्यक्त की है।

Current Affairs Quiz 4 Jun 2020 दैनिक सामान्य ज्ञान क्विज https://www.simplifiedshiksha.com/current-affairs-quiz-4-jun/
Current Affairs Quiz 4 Jun 2020 दैनिक सामान्य ज्ञान क्विज https://www.simplifiedshiksha.com/current-affairs-quiz-4-jun/

Mrida%20Sansadhan(By-Rahul%20Sharma).pdf6.04 KB