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یہاں روزانہ اسلامی تاریخ اور بزرگانِ دین و علمائے ربانیین کی تاریخ ولادت و تاریخ وفات اور دینی باتیں (فوٹو،پوسٹ) تاریخ اور مہینے کی مناسبت سے مع کتابوں کی لِنکس بھیجی جاتی ہیں طالب دعا 🤲 محمد جمال الدین خان قادری رضوی عفی عنہ 🆔 @Muhammad_Jamaluddin_Khan
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सरकारे ग़ौसुल अअ़्ज़म رضی الله عنہ के सिलसिले (यअ़्नी सिलसिलए आ़लियह क़ादिरिय्यह) के अ़लावह दूसरे सिलसिले में मुरीद हो सकते हैं या नहीं ?
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सुवाल:
क्या फ़रमाते हैं उ़ल्माए दीन व मुफ़्तियाने शरअ़ मतीन दरबारह (बारे में) ऐसे शख़्स़ के जो फ़तवा दे ऐसा कि जो कोई ख़ानदाने आ़लियह क़ादिरिय्यह को और ख़ानदानों से अफ़ज़ल व अअ़्ला न जाने और बावजूदे अफ़ज़लियत के फिर दूसरे ख़ानदानों में बैअ़त ह़ास़िल करे (मुरीद हो) वोह द़ाल (गुमराह) और मुद़िल्ल (गुमराह करने वाला) और ज़ुर्रिय्यते शैत़ाने लई़न (शैत़ाने लई़न की औलाद) में से है, ऐसा कहने वाला, येह फ़तवा देने वाला कैसा है? بینوا توجروا (बयान कीजिए और अज्र पाइए)।
अल-जवाब:
बिला शुब्हा ख़ानदाने अक़दस क़ादिरी (यअ़नी ग़ौसुल अअ़्ज़म رضی الله عنہ का ख़ानदान) तमाम ख़ानदानों से अफ़ज़ल है, कि ह़ुज़ूर पुरनूर सय्यिदुना ग़ौसुल अअ़्ज़म رضی الله تعالٰی عنہ अफ़ज़लुल औलिया (वलियों में सब से अफ़ज़ल) व इमामुम उ़रफ़ा (आ़रिफ़ों के इमाम) व सय्यिदुल अफ़राद व क़ुत़ुबे इरशाद हैं।
मगर حاشا لله (ऐसा हरगिज़ नहीं) कि दीगर सलासिले ह़क़्क़ह राशिदह बात़िल हों या उन में बैअ़त (मुरीद होना) नाजाइज़ व ह़राम हो,
इस की नज़ीर बि-ऐ़निही मज़ाहिबे अरबअ़ह अहले ह़क़ हैं। हमारे नज़दीक मज़हबे मुहज़्ज़ब ह़नफ़ी अफ़ज़लुल मज़ाहिब वाज़िह़ुल मज़ाहिब व अव्वलहा बिल्ह़क़्क़ है मगर ह़ाशा कि मुत्तबिआ़ने मज़हबे सलासह बाक़ियह عیاذا بالله (ख़ुदा की पनाह) द़ाल (गुमराह) व मुद़िल्ल (गुमराह करने वाले) हैं, ऐसा कहना ख़ुद स़रीह़ बात़िल व ग़ुलू है।
والعیاذ بالله تعالٰی، والله تعالٰی اعلم
(अल्लाह तआ़ला की पनाह, और अल्लाह तआ़ला ख़ूब जानता है)। [फ़तावा रज़विय्यह, जिल्द²⁶, पेज⁵⁶⁸]
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ـ[फ़तावा रज़विय्यह, जिल्द²⁶, पेज⁵⁶⁸]
शाने ग़ौसुल अअ़्ज़म رضی الله عنہ
شان غوث الاعظم رضی الله عنہ
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خدا کی قسم الله تعالٰی نے حضور غوث الاعظم رضی الله تعالٰی عنہ کے مانند (یعنی جیسا) نہ کوئی ولی عالَم (یعنی دنیا) مِیں ظاہر کیا نہ ظاہر کرے ـ
ख़ुदा की क़सम अल्लाह तआ़ला ने ह़ुज़ूर ग़ौसुल अअ़्ज़म رضی الله تعالٰی عنہ के मानिन्द (यअ़्नी जैसा) न कोई वली आ़लम (यअ़्नी दुनिया) में ज़ाहिर किया न ज़ाहिर करे।
الله تعالٰی نے جس ولی کو کسی مقام تک پہنچایا شیخ عبد القادر کا مقام اس سے اعلٰی ہے، اور جس پیارے کو اپنی محبت کا جام پلایا شیخ عبد القادر کے لئے اس سے بڑھ کر خوشگوار جام ہے اور جس مقرب کو کوئی حال عطا فرمایا شیخ عبد القادر کا حال اس سے اعظم ہے ـ الله تعالٰی نے اپنے اسرار سے وہ راز ان میں رکھا ہے جس کے سبب ان کو جمہور اولیاء پر سبقت ہے ـ اور الله تعالٰی کے جتنے ولی ہو گئے یا ہونگے قیامت تک سب شیخ عبد القادر کا ادب کریںگے ـ
अल्लाह तआ़ला ने जिस वली को किसी मक़ाम तक पहुँचाया शैख़ अ़ब्दुल क़ादिर का मक़ाम उस से अअ़्ला है, और जिस प्यारे को अपनी मुह़ब्बत का जाम पिलाया शैख़ अ़ब्दुल क़ादिर के लिए उससे बढ़कर खुशगवार जाम है, और जिस मुक़र्रब को कोई ह़ाल अ़त़ा फ़रमाया शैख़ अ़ब्दुल क़ादिर का ह़ाल उससे अअ़्ज़म है, अल्लाह तअ़ाला ने अपने असरार से वोह राज़ उन में रखा है जिसके सबब उनको जमहूर औलिया पर सबक़त है। और अल्लाह तआ़ला के जितने वली हो गए या होंगे क़यामत तक सब शैख़ अ़ब्दुल क़ादिर का अदब करेंगे।
یہ شہادتیں ہیں حضرت خضر علیہ الصلٰوۃ والسلام اور حضراتِ اولیائے کرام علیہم الرضوان کی ـ
येह शहादतें हैं ह़ज़रते ख़िज़्र علیہ الصلٰوۃ والسلام और ह़ज़राते औलिया ए किराम علیہم الرضوان की।
بقسم کہتے ہیں شاہانِ صریفین و حریم
کہ ہوا ہے نہ ولی ہو کوئی ہمتا تیرا
ब-क़सम कहते हैं शाहाने स़रीफ़ीनो ह़रीम
कि हुआ है न वली हो कोई हमता तेरा
جو ولی قبل تھے یا بعد ہوئے یا ہوں گے
سب ادب رکھتے ہیں دل میں مِرے آقا تیرا
जो वली क़ब्ल थे या बअ़्द हुए या होंगे
सब अदब रखते हैं दिल में मेरे आक़ा तेरा
[فتاوٰی رضویہ، جِلد²⁶، صفحہ⁵⁶⁰-⁵⁶¹]
[फ़तावा रज़विय्या, जिल्द²⁶, पेज⁵⁶⁰-⁵⁶¹]
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