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𝑴𝒊𝒅𝒏𝒊𝒈𝒉𝒕 𝑫𝒊𝒂𝒓𝒚 ✍️

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𝑨 𝑫𝒊𝒂𝒓𝒚 𝒐𝒇 𝑼𝒏𝒔𝒂𝒊𝒅 𝑾𝒐𝒓𝒅𝒔. 𝑺𝒐𝒎𝒆 𝑺𝒕𝒐𝒓𝒊𝒆𝒔 𝑵𝒆𝒗𝒆𝒓 𝑬𝒏𝒅. 🌙✍️

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0 Rᴇᴘᴏʀᴛs ᴀʀᴇ Bʟᴏᴄᴋᴇᴅ ʙʏ @teleprotectorbot 174 Cʜᴀɴɴᴇʟs ᴀʀᴇ Sᴀᴠᴇᴅ Fʀᴏᴍ Rᴇᴘᴏʀᴛs ɪɴ Lᴀsᴛ 24 Hᴏᴜʀs

इन्कार की दीवारें उसने बुलंद कर रखी हैं, और हमने भी हार मानने की ज़िद छोड़ रखी है। उसकी आँखों की झील में डूब जाने का ख़्वाब,🌊 ज़िंदगी की सबसे हसीन खता लगती है।✨ ᴡʀɪᴛᴇʀ×ʀᴇᴋʜᴀ🫀

इन्कार की दीवारें उसने बुलंद कर रखी हैं, और हमने भी हार मानने की ज़िद छोड़ रखी है। उसकी आँखों की झील में डूब जाने का ख़्वाब,🌊 ज़िंदगी की सबसे हसीन खता लगती है।✨ ᴡʀɪᴛᴇʀ×ʀᴇᴋʜᴀ🫀

❖ बारिश के बाद ❖ बारिश रुकी तो सड़क कुछ कहने लगी, भीगी हुई मिट्टी कोई बात सहने लगी। गड्ढों में आसमान का चेहरा उतर आया, शहर ने ख़ुद को आज ख़ुद से मिला पाया। कुछ लोग भीगे हुए घर को चले गए, कुछ रास्तों में अपने ही ख़यालों में खो गए। चाय की भाप में शाम घुलती रही, दो अजनबियों की ख़ामोशी मिलती रही। मैं भी उसी सड़क पर कुछ देर ठहर गया, बारिश तो रुक गई, पर मन फिर भी भीग गया। तब जाना—कुछ बारिशें गुज़रती नहीं, भीतर उतरकर कभी ठहरती नहीं। और ये सड़क भी अजीब आईना है जनाब, हर कोई इसमें अपना चेहरा देखता है, मगर अपना रास्ता नहीं। — 𝐈𝐧𝐝𝐫𝐚 🖋️🌸

दर्द को मेरे रवानी चाहिए, आंखों में रोने को पानी चाहिए... कर तो ले फिर से मुहब्बत इक दफा, *पर मीरा जैसी मुझे एक दीवानी चाहिए...!!* 🥰 शौक है जिन्हें उठाने का ये जोखिम, *उनको मेरी बात मान लेनी चाहिए...!!*💘

0 Rᴇᴘᴏʀᴛs ᴀʀᴇ Bʟᴏᴄᴋᴇᴅ ʙʏ @teleprotectorbot 269 Cʜᴀɴɴᴇʟs ᴀʀᴇ Sᴀᴠᴇᴅ Fʀᴏᴍ Rᴇᴘᴏʀᴛs ɪɴ Lᴀsᴛ 24 Hᴏᴜʀs

एक ऐसा कंधा, एक ऐसा साथ, जहाँ न छुपाना पड़े कोई भी राज़। उलझे केश हों या बे-फ़िल्टर रूप, जो हर रंग में दे सप्रेम छांव, न दे धूप। बिन कहे सुन ले जो मन की हर पुकार, सिखा दे तुम्हें तुमसे ही प्यार। जहाँ स्त्रीत्व का भार कुछ पल को ठहर जाए, काश! हर स्त्री को ऐसा एक पुरुष मिल जाए।

❖ खिड़की के उस पार ❖ खिड़की के उस पार 🌤️ हर रोज़ एक नया सफ़र निकलता है, कोई जल्दी में घर से निकलता है, कोई लौटते हुए थकता है, कोई हँसता हुआ गुज़रता है, 🙂 और कोई चुपचाप अपने हिस्से का दिन ढोता है। मैं देर तक खिड़की पर बैठा रहता हूँ, 🪟 इन चेहरों में ख़ुद को तलाशता रहता हूँ, कभी लगता है—चल दूँ इनके साथ, कभी अपने ही कमरे में फिर लौट आता हूँ। सड़क पर बारिश बरसती है, 🌧️ लोग भीगकर भी चलते हैं, छोटी-सी छत के नीचे दो अजनबी साथ सिमटते हैं, और मैं सोचता हूँ—शायद बाहर की दुनिया इतनी भी कठिन नहीं, जितनी मैंने उसे अपने भीतर बना रखा है। 💭 शाम ढलती है, 🌆 खिड़की पर परछाईं ठहरती है, बाहर की भीड़ धीरे-धीरे अपने घरों को लौटती है, और मेरे कमरे में फिर वही ख़ामोशी उतरती है। 🌙 फिर शीशे में अपना चेहरा दिखता है, थका हुआ-सा, मगर जाने क्यों आज कुछ कहता है— “दुनिया तो अब भी वहीं है, रास्ते भी वहीं हैं, बस निकलना तुम्हें है… खिड़की से बाहर नहीं, अपने भय से बाहर निकलना है।” 🕊️ मैं देर तक मौन रहा, फिर खिड़की खोल दी— हवा भीतर आई, 🍃 और पहली बार लगा, शायद ज़िंदगी मुझसे दूर नहीं गई थी… मैं ही उससे थोड़ा दूर बैठा था। 🤍 — 𝐈𝐧𝐝𝐫𝐚 🖋️🌸

कहें तो* *मैं अपनी आंखे भी दे दूँ...!!* *मगर वो तो मेरी* *आँखों के ख्वाब मांग बैठे...!!!*

0 Rᴇᴘᴏʀᴛs ᴀʀᴇ Bʟᴏᴄᴋᴇᴅ ʙʏ @teleprotectorbot 382 Cʜᴀɴɴᴇʟs ᴀʀᴇ Sᴀᴠᴇᴅ Fʀᴏᴍ Rᴇᴘᴏʀᴛs ɪɴ Lᴀsᴛ 24 Hᴏᴜʀs

खुद में ही थोड़ी खुशी तलाश कर मुस्कुरा लिया करो, इस नादान दिल को ज़माने की नज़रों से बचा लिया करो। समझदारी तो वैसे भी थका देती है हर मोड़ पर, थोड़ा सा पागलपन भी सीने में ज़िंदा रखा करो। ᴡʀɪᴛᴇʀ×ʀᴇᴋʜᴀ

रिश्ता है सबसे प्यारा, भाई-बहन का ये बंधन खास है, 🥰❤️ राखी के इस धागे में छुपा, बचपन का हर एहसास है। 🧿✨ दूर रहें या पास रहें, खुशियाँ हमेशा साथ रहें, 🤗💫 हैप्पी रक्षाबंधन! 🎀🪢❤️

0 Rᴇᴘᴏʀᴛs ᴀʀᴇ Bʟᴏᴄᴋᴇᴅ ʙʏ @teleprotectorbot 623 Cʜᴀɴɴᴇʟs ᴀʀᴇ Sᴀᴠᴇᴅ Fʀᴏᴍ Rᴇᴘᴏʀᴛs ɪɴ Lᴀsᴛ 24 Hᴏᴜʀs

टीवी के रिमोट के लिए वो रोज़ की लड़ाई, एक-दूसरे के राज खोलकर माँ से मार खवाई। "अब कभी बात नहीं करूँगा" कहकर मुँह फुलाना, और फिर एक छोटी सी चॉकलेट देकर मनाना! ​बचपन की वो खट्टी-मीठी यादें पुरानी, जहाँ हर रोज़ लिखी जाती थी एक नई कहानी। कभी बहन का चिढ़ाना, कभी भाई का रूठ जाना, पर मुश्किल में हमेशा एक-दूसरे की ढाल बन जाना। Happy raksha bandhan 🥰