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Astrologer Deep Ramgarhia

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जन्म कुंडली के अलग अलग नक्षत्र में राहू फल ++++++++++++++++++++++ राहु के अपने नक्षत्र आर्द्रा स्वाति एवं शतभिषा इन नक्षत्रों में राहु रहने पर शुभ परिणाम देता है। विभिन्न नक्षत्रों के फल अलग-अलग है। राहु एक रहस्यमयी ग्रह है जो पृथ्वी के नजदीक है. अतः जल्दी फल देता है। इसका वर्णन जितना करें कम है। 1. राहु यदि अश्विनी नक्षत्र में हो तो व्यक्ति शक्ति व सम्मान प्राप्त करता है राहु जिस भाव में होता है उस भाव से संबंधित यश प्राप्त होगा। 2. राहु यदि भरणी नक्षत्र में हो तो व्यक्ति साहसी, लालची, बहुत मजबूत इरादों वाला होता है। 3. कृतिका नक्षत्र में राहू स्थित हो तो व्यक्ति बहुत होशियार तथा ज्ञानवान होता है वह विपरीत लिंग की ओर आकर्षित होता है। 4. रोहिणी चन्द्रमा का इसमें यदि राहू स्थित हो तो व्यक्ति मितभाषी और मधुर स्वभाव का प्यारा सा होता है। 5 मृगशिरा नक्षत्र में राहु व्यक्ति को हिम्मतवाला तथा होशियार बनाता है किंतु अपनी बात को कहने में असुविधा महसूस करता है। 6. आर्द्रा नक्षत्र में राहु हो तो व्यक्ति चतुर बुद्धिमान ज्ञानवान होता है और सामने वाले को अंधेरे में रखने की योग्यता रखता है। 7. पुनर्वसु बृहस्पति का नक्षत्र है इसमें राहु दो प्रकार से फल देता है अच्छा व बुरा कुछ भी अचानक संभव होता है। 8 शनि के पुष्य नक्षत्र में राहु हो तो व्यक्ति को शौर्य, साहस सम्मान की प्राप्ति होती है। लेकिन दो विवाह होते हैं। ७. आश्लेषा नक्षत्र बुध का नक्षत्र है। इसमें राहु हो तो व्यक्ति विचलित रहता है उसके कर्म विचार आय तीनों में स्थिरता नहीं रहती। 10 केतु के मघा नक्षत्र में राहु राजसी जीवन आनंद भोग-विलास राज सम्मान प्राप्त कराता है। 11. शुक्र के पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र मे राहू यात्रा करने वाला व अस्थिर भ्रमित होता है। 12. सूर्य के उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र में राहु व्यक्ति को एक बहुत सम्मानित, समाज में नाम कमाने वाला बनाता है। 13. चंद्रमा के हस्त नक्षत्र में राहु अति चंचल, कर्मशील, अस्थिर मन् बुद्धि वाला हो जाता है। इसमें राहु टिककर नही बैठने देता। 14. मंगल के चित्रा नक्षत्र में राहु हो तो व्यक्ति सत्ता प्राप्त करता है पद का हमेशा इच्छुक बना रहता है शासन करता है। 15 स्वाति नक्षत्र में जिनका राहु स्थित होता है ये भ्रमित रहते हैं। समझ नहीं पाते उन्हें हमेशा प्रोत्साहन की आवश्यकता होती है। 16. विशाखा नक्षत्र में राहु बेहद प्रसिद्ध हो जाता है लेकिन घम व ईर्ष्यावश गले में फंसा रहता है। 17. अनुराधा नक्षत्र में राडु व्यक्ति मिलनसार बहुत से मित्रों से युक्त होता है। 18. ज्येष्ठा नक्षत्र में राहु रहने पर व्यक्ति को कर्तव्यनिष्ट बुद्धिमान व चतुर बनाता है। 19. मूल नक्षत्र केतु का नक्षत्र है। राहू मूल नक्षत्र में रहने पर व्यक्ति विवाद में फसा रहता है दूसरों की सपत्ति व अन्य चीजों को प्राप्त करना चाहता है। 20. शुक्र के पूर्वाषाढा नक्षत्र में राहु बहुत अच्छा व्यापारी बनाता है और व्यक्ति खूब धन कमाता है। 21. उत्तराषाढा नक्षत्र में स्थित राहु बहुत मिलनसार सुखी धनी व विदेशों में यात्रा करवाता है। 22. श्रवण नक्षत्र में राहु का फल उत्तम नहीं होता। जीवन साथी से कलह करवाता है। 23 धनिष्ठा नक्षत्र में राहु बहुत कीर्तिवान, यश प्राप्त करने वाला व सम्मानित बनाता है। 24 शतभिषा नक्षत्र में राहु परम साहसी बनाता है व्यक्ति खतरों से खेल जाता है किंतु स्वास्थ्य कमजोर रहता है। 25 पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में राहु बीमार अहंकारी क्रोधी परेशान बनाता है। 26 उत्तराभाद्रपद में राहु रहने पर व्यक्ति को जल से भय होता है। नदी समुद्र से दूर रहना चाहिए। 27. रेवती नक्षत्र में राहु अति उत्तम भाग्यवान् भाग्योदय विदेश में होता है। इस प्रकार राहु के विभिन्न फल है। यहां तक कि इस महादशा में छ छ वर्ष के तीन प्रकार के फल प्राप्त होते है। प्रथम भाग संघर्ष में द्वि तीय भाग उत्थान, प्रगति पर एवं अंतिम सीढियां उतरने जैसा फल देता है।

यदि घर का ईशान कोण कटा हो तो शुभ कार्य, तरक्की और संतान सुख में बाधा आती है। यहां शीशा लगा देने से प्रतीकात्मक रूप से ईशान कोण बढ़ जाने से दोष की अशुभता में कमी आती है।

यदि परिवार में तरक्की में बाधा हो, शुभ कार्य रुके हो, विवाह हेतु रिश्ते ना आते हों तो ईशान कोण को सही करें। यहां साफ जल रखें, तुलसी, आँवले या शमी का पौधा लगाएं। गुरु यंत्र लगाने से भी फायदा होगा।

घर परिवार की तरक्की और शुभता के लिए ईशान कोण में शहद, चांदी के नाग नागिन जोड़ा और कुछ चांदी के सिक्के दबाने चाहिए।

ईशान कोण ज्ञान और विवेक की दिशा है। यदि यहां टॉयलेट या कचरा होगा फिर सदस्यों का ज्ञान और विवेक भी उसी स्तर के होंगे। फिर प्रतिष्ठा और तरक्की का अभाव होगा।

यदि ईशान कोण में सीढ़ी होगी और ऊपर ममटी भी बनी होगी जिस से ईशान कोण ऊंचा होने से दोष बनेगा ऐसे घर की आर्थिक स्थिति खराब होती है।

यदि घर परिवार में शुभ कार्य नहीं हो रहे, संतान की शिक्षा सही से नहीं हो रही, शादी के लिए रिश्ते नहीं आ रहे तो ईशान कोण पर ध्यान दें, यहां के वास्तु दोष को दूर करें।

यदि घर का मुखिया ईशान कोण में शयन करे तो उसको पेट गैस, जलन, खराब पाचन तंत्र और कार्यक्षेत्र में शत्रु परेशान करते हैं।

द्वादश भाव में राहु का फल : द्वादश भावस्थ राहु के विषय में ज्योतिष ग्रंथों में उक्ति है कि ऐसा जातक प्रबलरूपेण शत्रुसंहारक तथा मित्रवर्धक होता है जीवन में जो कुछ भी उन्नति करता है. वह स्वयं की प्रतिमा एवं हिम्मत के बल पर होती है। बाल्यावस्था सधारण रूप से व्यतीत होती है तथा पिता का सुख नहीं के बराबर मिलता है। जीवन की प्रौढ़ावस्था में इन्हें पत्नी के सुख में न्यूनता प्राप्त होती है। यद्यपि आय के कई स्रोत होते हैं. परंतु फिर भी इनका व्यय विशेष बढा-चढा रहता है। ऐसा जातक ईश्वर पर श्रद्धा रखने वाला होता है।

जन्म कुंडली के 12 भाव में राहू का शुभ अशुभ फल +++++++++++++++++++++++ राहु यदि लग्न में हो : जातक लापरवाह, पराक्रमी और अभिमानी होता है। उसे शीघ्र कीर्ति मिलती है। शक्तिवान होकर जातक लोगों की दृष्टि में श्रेष्ठ कहा जाता है। शिक्षा की ओर ऐसे जातकों का रूझान नहीं होता, इसलिये ये उच्च शिक्षा प्राप्त नहीं कर पाते। दूसरे भाव में राहु का फल : यदि किसी जातक की कुंडली में दूसरे भाव में राहु हो तो जातक रोगी और चिडविडे स्वभाव का होता है तथा पारिवारिक जीवन में उसे कई व्याघात सहन करने पड़ते हैं। यदि अन्य धन योग न हो तो आर्थिक दृष्टि से स्थिति डावांडोल ही रहती है फिर भी ऐसा जातक बाल्यावस्था में तो द्रव्याभाव से पीड़ित रहता है. परंतु ज्यों-ज्यों आयु बढ़ती है उसके पास अर्थ संचय होता रहता है। तृतीय भाव में राहू का फल : तीसरे भाव में राहु हो तो वह जातक अत्यंत प्रभावशाली व्यक्ति होता है। पराक्रम एवं बल में उसकी समानता कम ही लोग कर पाते हैं। जातरु की जान पहचान भी विस्तृत क्षेत्र में होती है एवं अपने प्रभाव से व्ह लोगों को अपने पक्ष में करने की युक्ति जागत है। सुंदर दृढ शरीर नासल भुजार, उन्न्त वक्ष स्थल एवं सामर्थ्ययुक्त व्यक्ति होता है। जातक प्रारंभ में सकट देखता है व शीघ्र ही उसे मन लायक पद प्राप्त हो जाता है एवं उत्तरोतर उन्नति करता है ऐसा जातक पुलिस या सेना में विशेष सफल होता है। इसके छोटे भाई नहीं होते, अगर होते भी है तो जातक को उनसे नहीं के बराबर लाभ प्राप्त होता है। आइजनहावर की जन्मकुंडली में राहू की यही चौथे भाव में राहु का फल यदि चौथे भाव में राहु हो तो जातक व्यवहारकुशल नहीं होता। बोलने में असभ्यता प्रकट करता है तथा कई बार वाणी के कारण अपना कार्य बिगड़ देता है धोखा देने में यह जातक कुशल होता है तथा समय पड़ने पर बड़े से बड़ा झूठ बोल लेता है। राजनीतिक क्षेत्र में यह पूर्ण सफलता प्राप्त करता है। पुत्रों की अपेक्षा कन्या संतान इसके ज्यादा होती है। पंचम भाव में राहु का फल : पंचम भाव में राहु की स्थिति नुकसानदायक ही होती है जीवन मे मित्रों का अभाव रहता है। लेकिन शत्रुओं से प्रताड़ित होने पर भी यह जीवट वाला व्यक्ति होता है। संतन-दुख इसे सहन करना पडल है तथा गृह कलह से भी यह चितित रहता है, ऐसा जातक क्रोधी एवं हृदय का रोगी होता है। छठे भाव में राहु का फल : राहु छठे भाव में बैठकर जातक की कठिनाइयों को सुगम कर देता है। शत्रुओं से वह सन्मान प्राप्त करता है। ऐसा व्यक्ति प्रबलरूपेण शत्रु संहारक तथा बलवान होता है। जातरु की बहुत आयु होती है तथा उसे लाभ भी श्रेष्ठ रहता है। पूर्ण सुख सुविधा इस जातक को प्राप्त होती रहती है। शत्रु निरंतर इसके विरूद्ध षड्यंत्र करते ही रहते हैं। सप्तम भाव में राहु का फल : यदि सप्तम भाव में राहु हो तो जातक की रोगिणी पत्नी / पति मिलती / मिलता है तथा धन हानि करता है। वह स्त्री दुर्बुद्धि एवं सकीर्ण मनोवृत्ति की भी हो सकती है। यदि कोई शुभ ग्रह उसको नही देख रहा हो तो यह स्त्री विलासी प्रकृति की होती है। ऐसा जातक कई मामलों में भाग्यहीन तनाव, तलाक जैसे कष्टों को भोगना पड़ा था। अष्टम भाव में राहु: का फल जिस व्यक्ति के अष्टम भाव में राहु होता है. वह दीर्घजीवी होता है। ऐसा व्यक्ति कवि लेखक किलोटर पत्रकार होता है। धर्म कर्म को समझते हुए भी यह उसमे आशिक अभिरुचि रखता हुआ विद्रोही स्वभाव का होता है। जातको का बचपन परेशानियों में बीतता है जलधात एवं वृक्षपात दोनों ही समय है। गृहस्थ जीवन सुखद कहा जा सकता है। नवम भाव में : राहु की स्थिति प्रायः भाग्यवर्धक ही मानी जाती है। अपने अधिकारों की प्राप्ति के लिए ऐसा जातक सचेष्ट रहता है तथा अधिकारियों से जो भी आदेश मिलता है उसका कठोरता से पालन करता है दशम भाव में राहू का फल : दशम भाव में राहु की स्थिति इस बात की सूचक है कि जातक देर सवेर निश्चय ही राजनीति के क्षेत्र में होता है। बाल्यावस्था में इसे कठोर श्रम करना पड़ता है। साथ ही यह सद्गुणों को लेकर चलने पर भी कदम-कदम पर बनाओं का सामना करता है। वैवाहिक सुख में बा उत्पन्न होती है एकादश भाव में राहु का फल : एकादश भाव में बैठा राहु इस बात का द्योतक है कि जातक प्रखर प्रतिभा संपन्न एवं राजनीति पटु है। वह जो भी कार्य करता है पूरी तरह से सोच-विचारकर करता है तथा एक बार जो ध्येय बना लेता है अथवा जो निश्चय कर लेता है, उसे पूरा करके ही छोड़ता है। जीवन में संपूर्ण आवश्यकताओं की पूर्ति हो जाती है। जाति वाले तथा परिवार वाले इसकी उन्नति में विशेष सहायक नहीं होते। शान-शौकत में जीवन बिताने का यह इच्छुक होता है। व्यय करने के मामले में यह पूरी सावधानी रखते है

घर की तरक्की और शुभता के लिए मुख्य द्वार पर आम के पत्तों से बना तोरण लगाना चाहिए, शनिवार और अमावस्या के दिन मुख्य द्वार के पास घी या तिल के तेल का दीपक भी जलाना चाहिए।

शुभता के लिए घर का मुख्य द्वार हल्के रंग का होना चाहिए, मुख्य द्वार के आसपास किसी भी तरह का कबाड़ या कचरा ना रखें, बल्कि साफ जल और पर्याप्त रोशनी मुख्य द्वार के पास होने चाहिए।

बाहर से आने वाली नकारात्मक ऊर्जा से बचने के लिए घर के मुख्य द्वार के पास बांसुरी, विंड चाइम या पाकुआ दर्पण का इस्तेमाल करें।

यदि घर में झगड़े की स्थिति बनी रहती है, घर में अशांति का माहौल और मनमुटाव होते हैं तो शुभता के लिए हर शनिवार मुख्य द्वार के पास छोटी सी रंगोली बना कर उस पर घी या तिल के तेल का दीपक जलाएं।

घर की पूर्व दिशा के वास्तु का प्रभाव पिता पुत्र के आपसी रिश्ते पर पड़ता है। इस लिए यदि घर में पिता पुत्र में झगड़े होते हैं, पुत्र सुख का अभाव है तो घर की पूर्व दिशा को वास्तु अनुकूल करें।

यदि जन्म कुंडली के तीसरे भाव में शनि राहु या केतु हो या मंगल की युति इन ग्रहों से हो तो दक्षिण मुखी घर में रहना कष्टकारी होता है।

घर के मुख्य द्वार के बाद यदि तंग और अंधेरी जगह से होकर गुजरना पड़े मतलब आंगन में उजाला और खुला हुआ ना हो तो पितृ दोष का लक्षण होता है।

घर के मुख्य द्वार बाई तरफ खिड़की हो उसका प्रभाव मालकिन के भाग्य पर आता है। यदि खिड़की के नीचे नाली हो या खिड़की टूटी हो, आसपास गंदगी हो तो मालकिन के कामकाज में बाधा होगी

घर के मुख्य द्वार दाहिने तरफ खिड़की हो उसका प्रभाव बड़े बेटे के भाग्य पर आता है। यदि खिड़की के नीचे नाली हो या खिड़की टूटी हो, आसपास गंदगी हो तो बड़े बेटे के कामकाज में बाधा होगी

यदि घर के सामने कोई धर्मशाला, खाली प्लाट, बहुत ज़्यादा शोर करने वाली फैक्ट्री, बड़ा पेड़ या बिजली का खम्बा हो तो घर की तरक्की में बाधा आती है।