1 123
订阅者
无数据24 小时
+17 天
+130 天
帖子存档
1 123
किसी को जानना हो कहां रहता हूं मैं,
उसे देखे उसकी आंखों में दिखता हूं मैं,
माना के वक़्त का पाबंद नहीं हूं
पर जब भी तुमसे मिलने आऊं
वक़्त से पहले पहुंचता हूं मैं,
मैं तुझ से रूठ भी जाऊं तो रूठ कर कहां जाऊंगा,
एक तू ही तो वो शख्स है जिसे घर समझता हूं मैं,
बात अगर तुम्हारी हो तो ज़मीं पे तिनके सा हूं,
अपनी अनां में वैसे तो पर्वत से ऊंचा दिखता हूं मैं,
सोचता हूं अब उसे भुला दूंगा
यह सोच सोच कर हमेशा उसे याद करता रहता हूं मैं,
ज़िक्र जब उसका होता है तो मेरी आंखों में चमक आ जाती है,
सब मेरे चेहरे से जान जाते हैं उसका क्या लगता हूं मैं।
~⭐🌼🩷
1 123
धन्य: अस्मि भारतत्वेन
अर्थात्
भाग्य है मेरा कि मैं एक भारतीय हूं ।। 🇮🇳
Choose your country , kindness and freedom daily and not for some special days. ❤️
79 वें स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं 💐
1 123
Repost from 💓सुकूँन 🍁
🇮🇳 79वें स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं!🇮🇳
🇮🇳जान से प्यारा हिंदुस्तान 🇮🇳
1 123
मैंने पढ़ी है तुम्हारी वो खामोशी जो किसी और के हक़ से आयी है!
मैंने समझा है उस दर्द को जो मेरे हिस्से में न जाने कैसे आ गया!
वक़्त के सहारे, नदियों के किनारे, कभी किसी शाम,
तुम्हें रूबरू कराऊंगा उस सुकूँन से,
जो आज तक तुमने सिर्फ किताबों के पन्नों पर पाया है!
विरासत में मिले इस प्रेम के बारीक भावों से परिचित रहकर भी तुम्हारा यूं अंजान बनना भी कभी कभी मुझे तुमसे कोसों दूर ले जाता है!
अभिराइट्स⭐️
1 123
बांध लिया खुद को शर्तों के धागों में मैंने
फिर मैं चाहतों भरी नींद कभी सोया ही नहीं
इस कदर पाया है मैंने उसे
कि पाया ही नहीं और कभी खोया ही नहीं 🍂
1 123
थक जाना दुनियां की महफ़िलों से तो!
आवाज देना मैं अकसर अकेला ही रहता हूँ!
~अभिराइट्स
1 123
बेनाम से मोहब्बत भरे खत पड़े हैं संदूक में ,
जो तू हां करदे , तो
नाम लिख दूं ।। 🪄
1 123
वो इतना मिला ही नहीं कि मुझे ग़ुरूर हो जाये ,
उसने मुझे छुआ ही नहीं कि कोई सुरूर हो जाये ,
आरज़ू मेरी भी थी उसे सीने से लगाने की ,
मगर किस्मत चाहती थी कि वो बस दिखे और दूर हो जाये ... 🌸🎀🩷
1 123
अभी जो हम जुदा हुए तो बस ख्वाबों में मिलेंगे
रह जायेंगे सारे सवाल ठहरे हुए, हम रूठे रूठे जवाबों में मिलेंगे
पहना मैंने रंग तुम्हारी पसंद का और ले आई कुछ फूल
गुस्सा कम नहीं होता तुम्हारा
कि जान ! तुम जैसे लड़के तो नवाबों में मिलेंगे
भूलो ये नाराज़गी और हमे गले लगाओ
इसके बाद हम तुम्हें ना मयखाने की शराबों में मिलेंगे
मोहब्बत निभाना तुम आसमान की जैसे चांद से हो ,
इस ज़िंदगी के बाद हम तुम किताबों में मिलेंगे
ये रात बरसात और महक गुलमोहर सी
लौट जाओ घर जल्दी
हम सुबह सुबह ख्वाबों में मिलेंगे
~🦋
现已上线!2025 年 Telegram 研究 — 年度关键洞察 
