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Computer Courses | Computer Tutorial | Computer Classes | Computer Institute | Computer Tricks

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History of BIOS in Hindi – BIOS का इतिहास 1. BIOS का आविष्कार वर्ष 1975 में गैरी किल्डल (Gary Kildall) के द्वारा किया गया था। इस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल पहली बार CP/M ऑपरेटिंग सिस्टम में किया गया था। 2. पुराने समय में बायोस का इस्तेमाल बूटिंग के दौरान लोड किए गए CP/M मशीन के विशेष भाग के वर्णन करने के लिए किया जाता था। 1990 के दशक में पर्सनल कंप्यूटर में बायोस का उपयोग किया जाने लगा। 3. शुरुआती दौर में इस सॉफ्टवेयर को ROM चिप्स पर स्थित किया गया था। हालांकि कुछ समय के बाद बायोस को ROM से हटाकर EEPROM या फ़्लैश ड्राइव में स्थित किया जाने लगा।

BIOS setting को open कैसे करें? BIOS setting ओपन करने के लिए आपको सबसे पहले अपना कंप्यूटर restart करना होगा, Restart करने के बाद कंप्यूटर चालु होते ही आपको की-बोर्ड शार्टकट keys F2, F12, Delete या Esc में से कोई भी एक key को बिना समय लगाये दबाना है ऐसा करते ही आपके कंप्यूटर की BIOS setting ओपन हो जाएगी।

BIOS के प्रकार – Types of BIOS in Hindi इसके दो प्रकार होते है जिनके बारे में नीचे बताया गया है :- 1- UEFI UEFI का पूरा नाम (यूनिफाइड एक्सटेंसिबल फर्मवेयर इंटरफेस) होता है। इसका इस्तेमाल 2.2 TB जैसी बड़ी हार्ड-ड्राइव के लिए किया जाता है। यह GUID table के बजाय master boot record का उपयोग करके हार्ड-ड्राइव को संभालता है। 2- Legacy BIOS Legacy BIOS का इस्तेमाल छोटी हार्ड-ड्राइव के लिए किया जाता है। यह बड़ी हार्डड्राइव को नहीं संभाल सकता। UEFI की तुलना में इसकी क्षमता कम होती है।

• BIOS का मुख्य कार्य हार्डवेयर को सेट करना और ऑपरेटिंग सिस्टम को शुरू करना होता है। यह इनपुट और आउटपुट डिवाइसों को नियंत्रित (control) भी करता है। • BIOS कंप्यूटर की ROM मेमोरी में मौजूद होता है, यह कंप्यूटर के चालू होने पर हार्डवेयर की पहचान कर उन्हें configure (कॉन्फ़िगर) करता है. • CPU ऑपरेटिंग सिस्टम लोड होने से पहले ही BIOS को एक्सेस कर लेता है जिसकी वजह से BIOS कंप्यूटर के शुरू होने पर ही स्टार्ट हो जाता है। • BIOS सॉफ्टवेयर का प्रयोग पहली बार आईबीएम (IBM) के द्वारा वर्ष 1981 में किया गया था। वर्ष 1981 में IBM ने इस सॉफ्टवेयर का प्रयोग पर्सनल कंप्यूटर में किया था। कुछ ही समय में यह काफी लोकप्रिय हो गया जिसके बाद इस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल सभी प्रकार के कम्प्यूटरो में किया जाने लगा। • यह सॉफ्टवेयर कंप्यूटर सिस्टम में Data Flow (डेटा प्रवाह) को नियंत्रित भी करता है। BIOS को “BYE-oss” के नाम से भी जाना जाता है। इस सॉफ्टवेयर को अनेक नामो से जाना जाता है जैसे :- ROM BIOS, PC BIOS और सिस्टम BIOS आदि।

BIOS in Hindi – BIOS क्या है? • BIOS का पूरा नाम Basic Input/Output System (बेसिक इनपुट/आउटपुट सिस्टम) होता है. • कंप्यूटर को start (स्टार्ट) करने पर सबसे पहले हमें जो स्क्रीन दिखायी देती है उसे ही हम BIOS कहते हैं. • BIOS एक सॉफ्टवेयर है जो कंप्यूटर के चालू होने पर अपने आप ही run करने लगता है। दुसरे शब्दो में कहे तो “यह एक प्रोग्राम है जिसका इस्तेमाल हार्डवेयर को मैनेज करने के लिए किया जाता है”। • BIOS मदरबोर्ड के साथ जुड़ा हुआ एक सॉफ्टवेयर होता है और जब भी कंप्यूटर चालू होता है तो यह अपने आप ही run होने लगता है. • BIOS एक ऐसा प्रोग्राम है जो कंप्यूटर को बूट (boot) करने के लिए ज़िम्मेदार होता है। यह हार्डवेयर के सभी कनेक्शन का पता लगाता है और उनकी जांच करता है कि सभी कनेक्शन सही तरीके से काम कर रहे है या नहीं।

मदरबोर्ड की विशेषताएं – Features of Motherboard in Hindi इसकी विशेषताएं नीचे दी गयी हैं:- 1- मदरबोर्ड सीपीयू और मेमोरी को सपोर्ट करता है। 2- ठीक से काम करने के लिए वीडियो कार्ड, हार्ड ड्राइव, साउंड कार्ड को मदरबोर्ड के साथ अनुकूल (compatible) होना चाहिए। 3- यह कंप्यूटर के डिवाइसों को आपस में जोड़ने में मदद करता है। 4- इसका आकार एक जैसा नहीं होता है। यह अलग अलग साइज़ में आता है.

5– microATX यह एक छोटा मदरबोर्ड है जिसे ATX के आधार पर बनाया गया है। हालांकि ATX की तुलना में microATX का आकार काफी छोटा होता है। इसका आविष्कार 1997 में Intel के द्वारा किया गया था. इसमें ATX की सभी विशेषताएं शामिल होती है। 6– NLX मदरबोर्ड NLX का पूरा नाम न्यू लो प्रोफाइल एक्सटेंडेड है जिसे 1990 के दशक के अंत में बनाया गया था। इस motherboard को सीपीयू से अलग किया जा सकता है।

3- BTX मदरबोर्ड इसका पूरा नाम Balanced Technology Extended है. इसे 17 सितंबर 2003 को विकसित किया गया था। इसका इस्तेमाल मेमोरी स्लॉट और एक्सपेंशन स्लॉट के स्थानों को स्विच करने के लिए किया जाता है। 4– LPX मदरबोर्ड इसका पूरा नाम Low-Profile EXtended motherboard है. इसे 1987 में वेस्टर्न डिजिटल के द्वारा विकसित किया गया था। LPX मदरबोर्ड का उपयोग 1990 के दशक में किया जाता था। इसमें एक बड़ा स्लॉट होता है जो एक्सपेंशन कार्ड को स्थापित (establish) करने में मदद करता है। इसका इस्तेमाल ज्यादातर पतले कम्प्यूटरो में किया जाता है।

मदरबोर्ड फॉर्म फैक्टर के प्रकार – Types of Motherboard Form Factor in Hindi आकार के आधार पर Motherboard के निम्नलिखित प्रकार होते है:- 1- AT मदरबोर्ड AT मदरबोर्ड का पूरा नाम एडवांस्ड टेक्नोलॉजी मदरबोर्ड है इसे अगस्त 1984 में, IBM के द्वारा विकसित किया गया था। इस मदरबोर्ड का आकार काफी बड़ा होता है। इसलिए आजकल इनका इस्तेमाल नहीं किया जाता। 2- ATX मदरबोर्ड ATX मदरबोर्ड का पूरा नाम एडवांस टेक्नोलॉजी एक्सटेंडेड मदरबोर्ड है इसे जुलाई 1995 में Intel के द्वारा विकसित किया गया था। इस मदरबोर्ड के विभिन्न वर्जन हैं जैसे:- 2.01 , 2.02 और 2.03. ATX का आकार AT की तुलना में छोटा होता है.

5- Northbridge (नार्थब्रिज) Northbridge एक प्रकार का सर्किट है जो chipset के अंदर मौजूद होता है। इसका इस्तेमाल सीपीयू और मेमोरी के बीच कनेक्शन प्रदान करने के लिए किया जाता है। 6- Southbridge (साउथब्रिज) Southbridge एक इंटीग्रेटेड सर्किट है इसे सिंगल यूनिट के नाम से भी जाना जाता है। यह सर्किट I/O कंट्रोलर, हार्ड ड्राइव कंट्रोलर और इंटीग्रेटेड हार्डवेयर के लिए महत्वपूर्ण है। 7- Jumper (जम्पर) जम्पर मदरबोर्ड का एक महत्वपूर्ण भाग है जिसका इस्तेमाल विद्युत सर्किट को चालू और बंद करने के लिए किया जाता है। एक जम्पर धातु से बना होता है जो काफी छोटा होता है। 8- Integrated Circuit (इंटीग्रेटेड सर्किट) यह मदरबोर्ड की एक छोटी चिप है जिसे माइक्रोचिप और बेयर चिप के नाम से भी जाना जाता है। यह चिप मदरबोर्ड में एम्पलीफायर या मेमोरी की तरह कार्य करती है। 9- PCI slot (पीसीआई स्लॉट) इसका इस्तेमाल मॉडेम, साउंड कार्ड, वीडियो कार्ड और नेटवर्क हार्डवेयर कार्ड को कंप्यूटर से जोड़ने के लिए किया जाता है। 10- Memory Slot (मेमोरी स्लॉट) मेमोरी स्लॉट का इस्तेमाल कंप्यूटर में RAM को डालने के लिए किया जाता है। ज्यादतर कंप्यूटर में दो से चार मेमोरी स्लॉट मौजूद होते है। 11- USB Header (यूएसबी हैडर) इसका इस्तेमाल USB को कनेक्ट करने के लिए किया जाता है। 12– Power Connector (पॉवर कनेक्टर) इस कनेक्टर का काम मदरबोर्ड को बिजली पहुँचाना होता है. इसमें 20 से 24 पिन होती है. 13:- CPU Socket (सीपीयू सॉकेट) सीपीयू को मदरबोर्ड से जोड़ने के लिए CPU सॉकेट का इस्तेमाल किया जाता है. 14:- VGA Port (वीजीए पोर्ट) VGA पोर्ट की मदद से मॉनिटर को कंप्यूटर से जोड़ा जाता है.

मदरबोर्ड के भाग – Parts of Motherboard in Hindi एक मदरबोर्ड निम्नलिखित भागों से मिलकर बना होता है:- 1- Heat Sink (हीट सिंक) Heat sink एक कूलिंग डिवाइस है जिसका काम सीपीयू के गर्म होने पर उसे ठंडा रखना है। यह तांबे या एलुमिनियम जैसे पदार्थ से बना होता है। 2- Parallel Port (पैरेलल पोर्ट) पैरेलल पोर्ट एक ऐसा पोर्ट है जिसका इस्तेमाल प्रिंटर को कंप्यूटर के साथ जोड़ने के लिए किया जाता है। इसलिए इसे प्रिंटर पोर्ट भी कहते हैं. इस पोर्ट में 25 पिन होती हैं. 3:- Serial Port (सीरियल पोर्ट) सीरियल पोर्ट का इस्तेमाल कीबोर्ड और माउस को कंप्यूटर के साथ कनेक्ट करने के लिए किया जाता है. 4– Back pane connector (बेक पेन कनेक्टर) यह एक प्रकार का कनेक्टर है जो सीपीयू के पिछे लगा होता है। माउस, कीबोर्ड, मॉनिटर, तभी काम करेंगे जब ये डिवाइस बैक पेन कनेक्टर से जुड़े होंगे।

3:- Desktop Motherboard (डेस्कटॉप मदरबोर्ड) वह motherbaord जिसका इस्तेमाल मुख्य रूप से डेस्कटॉप कंप्यूटर में किया जाता है उसे डेस्कटॉप मदरबोर्ड कहते हैं. 4:- Laptop Motherboard (लैपटॉप मदरबोर्ड) वह motherbaord जिसका इस्तेमाल लैपटॉप में किया जाता है उसे लैपटॉप मदरबोर्ड कहते हैं. 5:- Server Motherbaord (सर्वर मदरबोर्ड) वह motherbaord जिसका इस्तेमाल वेब सर्वर में किया जाता है उसे सर्वर मदरबोर्ड कहते हैं.

Types of Motherboard in Hindi – मदरबोर्ड के प्रकार मदरबोर्ड के निम्नलिखित 5 प्रकार होते हैं:- 1:- Integrated Motherboard (इंटीग्रेटेड मदरबोर्ड) वह मदरबोर्ड जिसमें डिवाइसों को जोड़ने की सुविधा पहले से मौजूद होती है उसे इंटीग्रेटेड मदरबोर्ड कहते हैं. इस मदरबोर्ड में हम किसी भी प्रकार का बदलाव नहीं कर सकते और इसे हम कंप्यूटर से बाहर नहीं निकाल सकते. इस motherboard का इस्तेमाल डेस्कटॉप और लैपटॉप में किया जाता है. 2:- Non Integrated Motherboard (नॉन इंटीग्रेटेड मदरबोर्ड) वह मदरबोर्ड जिसमें डिवाइसों को जोड़ने की सुविधा पहले से मौजूद नहीं होती है उसे नॉन इंटीग्रेटेड मदरबोर्ड कहते हैं. इस मदरबोर्ड में हम अपनी इच्छा के अनुसार बदलाव कर सकते हैं. इसे हम कंप्यूटर से बाहर आसानी से निकाल सकते है. इस motherboard का इस्तेमाल पुराने डेस्कटॉप और सर्वर में किया जाता है.

मदरबोर्ड के कार्य – Functions of Motherboard in Hindi Motherboard के बहुत सारें कार्य होते हैं जिनके बारें में नीचे दिया गया है:- 1:– मदरबोर्ड का प्रमुख कार्य कंप्यूटर की दूसरी सभी डिवाइसों को आपस में जोड़ना होता है. 2:- मदरबोर्ड की मदद से कंप्यूटर के अन्य डिवाइस आपस में एक दुसरे के साथ कम्युनिकेशन कर सकते हैं. 3:- इसका काम डिवाइसों को बिजली सप्लाई करना होता है. 4:- कंप्यूटर का ज्यादा इस्तेमाल करने पर कंप्यूटर गर्म हो जाता है इसलिए कंप्यूटर को ठंडा करने का काम भी motherboard का होता है. 5:– कंप्यूटर को start और manage करने का काम भी यह करता है. 6:– इसका कार्य कंप्यूटर के सभी डिवाइसों में डेटा को send और receive करने का भी होता है.

• Motherboard अलग-अलग आकारों में आता है जिसके कारण यह आसानी से सीपीयू के अंदर सेट हो जाता है। • प्रत्येक मदरबोर्ड में एक चिपसेट (chipsets) होता है जो सभी डिवाइसों के कनेक्शन को मैनेज करके रखता है। • मार्किट में कई प्रकार के मदरबोर्ड उपलब्ध होते हैं जिन्हें अलग-अलग आकार के कंप्यूटर में फिट करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। प्रत्येक मदरबोर्ड सभी प्रकार की मेमोरी और सीपीयू के साथ काम करने में सक्षम नहीं होता। • मदरबोर्ड का अविष्कार 1981 में पहली बार IBM के द्वारा किया गया था। शुरुआती दिनों में मदरबोर्ड का नाम ‘Planar’ था। • मदरबोर्ड को Mainboard , Planner board, Logic board , System board, MOBO या MB के नाम से भी जाना जाता है।

Motherboard in Hindi – मदरबोर्ड क्या है? • मदरबोर्ड कंप्यूटर का सबसे महत्वपूर्ण भाग होता है जिसके द्वारा कंप्यूटर के सभी उपकरण आपस में एक दुसरे के साथ जुड़े रहते हैं. • दुसरे शब्दों में कहें तो, “मदरबोर्ड एक सर्किट बोर्ड होता है जिसकी मदद से कंप्यूटर के अन्य सभी डिवाइस आपस में एक दुसरे के साथ कम्युनिकेशन करते हैं.” • मदरबोर्ड का मुख्य काम कंप्यूटर के सभी हिस्सों को आपस में जोड़ना और इन हिस्सों को बिजली सप्लाई करना होता है. • मदरबोर्ड से सीपीयू, मेमोरी, हार्ड ड्राइव, वीडियो कार्ड, साउंड कार्ड, माउस, कीबोर्ड, मॉनिटर और अन्य डिवाइस केबल के माध्यम से जुड़े रहते हैं। • मदरबोर्ड को कंप्यूटर का हब (Hub) भी कहा जाता है क्योंकि इससे कंप्यूटर की सभी डिवाइस कनेक्ट होती हैं. मदरबोर्ड में सभी डिवाइसों को कनेक्ट करने के लिए पोर्ट मौजूद रहता है. • मदरबोर्ड CPU के अंदर स्थित होता है और यह फाइबर ग्लास और तांबे से बना होता है.

मदरबोर्ड क्या है? – What is Motherboard in Hindi? हेल्लो दोस्तों! आज हम इस पोस्ट में What is Motherboard in Hindi (मदरबोर्ड क्या है?) के बारें में पढेंगे. इसे बहुत ही आसान भाषा में लिखा गया है. इसे आप पूरा पढ़िए, यह आपको आसानी से समझ में आ जायेगा. तो चलिए शुरू करते हैं:-