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अगर 2 -4 शॉर्ट में वीर्यपात हो जाता है तो निम्न बातों का ध्यान रखे :-
1. फॉरप्ले देर तक करिये, जब तक योनि पूर्ण गीली न हो जाय, स्त्री की आंखें बंद, होठ फड़कने लगे, तेज गहरी सांस लेने लगे, शरीर बिल्कुल ढीली कर दे ,कमरे में सिर्फ स्त्री के सिसकिया सुनाई दे, तब अपने शेर को गुफा में प्रवेश करिये।
2. फॉरप्ले करते समय योनि के भग को जीभ से चाटिए। खुरदरा गर्म जीभ जब योनि को टच करता है तो योनि जल्दी गीली और स्त्री सन्तुष्ट होती हैं।
3. जब आपका शेर गुफा में बाहर भीतर हो रहा हो तो उस समय ध्यान सम्भोग से हटाएं और धीरे धीरे बाहर भीतर करें तेजी से नही।
4. जब लगे कि आपका वीर्यपात होने वाला है तो रूक जाएं और सांस गहरी लें मुहँ के द्वारा।
5. उपरोक्त क्रियाएं कीजिए, हो सकता है प्रियतमा सन्तुष्ट हो जाएं।
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अगर 2 -4 शॉर्ट में वीर्यपात हो जाता है तो निम्न बातों का ध्यान रखे :-
1. फॉरप्ले देर तक करिये, जब तक योनि पूर्ण गीली न हो जाय, स्त्री की आंखें बंद, होठ फड़कने लगे, तेज गहरी सांस लेने लगे, शरीर बिल्कुल ढीली कर दे ,कमरे में सिर्फ स्त्री के सिसकिया सुनाई दे, तब अपने शेर को गुफा में प्रवेश करिये।
2. फॉरप्ले करते समय योनि के भग को जीभ से चाटिए। खुरदरा गर्म जीभ जब योनि को टच करता है तो योनि जल्दी गीली और स्त्री सन्तुष्ट होती हैं।
3. जब आपका शेर गुफा में बाहर भीतर हो रहा हो तो उस समय ध्यान सम्भोग से हटाएं और धीरे धीरे बाहर भीतर करें तेजी से नही।
4. जब लगे कि आपका वीर्यपात होने वाला है तो रूक जाएं और सांस गहरी लें मुहँ के द्वारा।
5. उपरोक्त क्रियाएं कीजिए, हो सकता है प्रियतमा सन्तुष्ट हो जाएं।
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*जिंदगी*
स्त्री की अगर शादी के बाद पति से ना बने तो उसका ज़िंदगी में एक ऐसा दोस्त ज़रुर होना चाहिए, जिससे वह जब चाहें मैसेज कर सकें, सलाह-मशवरा ले सकें, सुख-दुःख बाँट सकें, डांट सकें, लड़ सकें, कंधे पर सिर रख कर रो सकें, खुलकर हँस सकें, घूम सकें, जब चाहें मन चाही खुल कर सैक्स चैट सकें, बेझिझक होकर निःसंकोच सब कुछ उसे बता सकें बिना इस बात की परवाह किये कि सामने वाला व्यक्ति क्या सोचेगा...?
अगर ऐसा दोस्त उस के पास है तो वह खुश हैं वरना शादी शुदा स्त्रियां इसी कारण डिप्रेशन में रहती है, घुट घुट कर जीती है, जीते जी मर जाती है, क्योंकि इनके पास सुनाने वाले तो बहुत हैं पर सुनने वाला कोई नहीं ।
इसी कारण शादी शुदा स्त्रियों का प्यार लाजवाब होता है जिसमे जिस्म के साथ साथ खुबसुरत साथ की चाहत होती है अगर मन की भावनाओं को समझने बाला मिल जाए तो नग्न हो कर जिस्म भी वह सौंप देती है। पर मैं समझता हूं कि ये वासना नहीं बलकि आत्म की तृप्ति के लिए होता है!❤️🔥🫦
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*जिंदगी*
स्त्री की अगर शादी के बाद पति से ना बने तो उसका ज़िंदगी में एक ऐसा दोस्त ज़रुर होना चाहिए, जिससे वह जब चाहें मैसेज कर सकें, सलाह-मशवरा ले सकें, सुख-दुःख बाँट सकें, डांट सकें, लड़ सकें, कंधे पर सिर रख कर रो सकें, खुलकर हँस सकें, घूम सकें, जब चाहें मन चाही खुल कर सैक्स चैट सकें, बेझिझक होकर निःसंकोच सब कुछ उसे बता सकें बिना इस बात की परवाह किये कि सामने वाला व्यक्ति क्या सोचेगा...?
अगर ऐसा दोस्त उस के पास है तो वह खुश हैं वरना शादी शुदा स्त्रियां इसी कारण डिप्रेशन में रहती है, घुट घुट कर जीती है, जीते जी मर जाती है, क्योंकि इनके पास सुनाने वाले तो बहुत हैं पर सुनने वाला कोई नहीं ।
इसी कारण शादी शुदा स्त्रियों का प्यार लाजवाब होता है जिसमे जिस्म के साथ साथ खुबसुरत साथ की चाहत होती है अगर मन की भावनाओं को समझने बाला मिल जाए तो नग्न हो कर जिस्म भी वह सौंप देती है। पर मैं समझता हूं कि ये वासना नहीं बलकि आत्म की तृप्ति के लिए होता है!❤️🔥🫦
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*जिंदगी*
औरत की अगर शादी के बाद पति से ना बने तो उसका ज़िंदगी में एक ऐसा दोस्त ज़रुर होना चाहिए, जिससे वह जब चाहें मैसेज कर सकें, सलाह-मशवरा ले सकें, सुख-दुःख बाँट सकें, डांट सकें, लड़ सकें, कंधे पर सिर रख कर रो सकें, खुलकर हँस सकें, घूम सकें, जब चाहें मन चाही खुल कर सैक्स चैट सकें, बेझिझक होकर निःसंकोच सब कुछ उसे बता सकें बिना इस बात की परवाह किये कि सामने वाला व्यक्ति क्या सोचेगा...?
अगर ऐसा दोस्त उस के पास है तो वह खुश हैं वरना शादी शुदा औरतें इसी कारण डिप्रेशन में रहती है, घुट घुट कर जीती है, जीते जी मर जाती है, क्योंकि इनके पास सुनाने वाले तो बहुत हैं पर सुनने वाला कोई नहीं ।
इसी कारण शादी शुदा औरत का प्यार लाजवाब होता है जिसमे जिस्म के साथ साथ खुबसुरत साथ की चाहत होती है अगर मन की भावनाओं को समझने बाला मिल जाए तो नग्न हो कर जिस्म भी वह सौंप देती है। पर मैं समझता हूं कि ये वासना नहीं बलकि आत्म की तृप्ति के लिए होता है!❤️🔥🫦
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*थोड़ा रुककर एक बार अवश्य पढ़िए..*
क्या आप भी स्त्री के लिए
औरत शब्द का प्रयोग करते हैं ?
क्या आप भी घर की महिलाओं को
औरत कहकर बुलाते हैं ?
तो ये लेख आपके लिए ही है.
★
भाषा का ज्ञान नहीं होने के कारण
हम आमतौर पर स्त्री के लिए ,
घर की महिलाओं के लिए
औरत शब्द का प्रयोग करते हैं ,
किन्तु
हमें ज्ञात ही नहीं कि ऐसा करके
हम कितना बड़ा पाप कर रहे हैं.
औरत शब्द एक
अरेबिक (अरबी भाषा) शब्द
'awrat or awrah' से बना है,
जिसका अर्थ होता है जननांग.
अंग्रेजी में इसे genitalia कहा जाता है
जिसका अर्थ प्राइवेट पार्ट, योनि होता है.
क्यों ! चौंक गए ना ?
यकीन नहीं हो रहा ?
किन्तु दुःखद ....
औरत शब्द हमारी शब्दावली में
इस तरह घुलमिल गया कि
फीमेल के लिए महिला, स्त्री, नारी जैसे
शब्दों की जगह औरत शब्द ने ले ली,
जिसका एक बड़ा कारण
हमारी शिक्षा प्रणाली और
बॉलीवुड भी रहा है. जिन्होंने फिल्में ही
औरत , जख्मी औरत जैसे नामों से बनाई.
सलीम जावेद की राइटर जोड़ी रही हो या
नामचीन लेखक कादर खान साहब,
इन्होंने फिल्मों की डॉयलॉग डिलीवरी में
जमकर औरत शब्द का इस्तेमाल किया.
स्कूलों में भी औ से औरत
पढ़ाया जाने लगा.
महिला, स्त्री जैसे शब्द मानो
गायब ही हो गए.
सोचिए जब आप दूसरों से
अपनी पत्नी के लिए ये कहते है कि
ये मेरी औरत है तो उसका मतलब
क्या होता है.
जब आप अपनी घर की
महिलाओं के लिए औरत शब्द का
प्रयोग करते है तो उसका मतलब
क्या निकलता है.
★
आशा है अब आप कोई भी फीमेल या
घर की फीमेल के लिए कभी भी
औरत शब्द का प्रयोग कर
अपमानित नही करेंगे , अपितु उन्हें
स्त्री, महिला या नारी जैसे शब्दों का
प्रयोग कर सम्मानित करेंगे.
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परमसुख की दहलीज तक पहुंच पाना 😘,उतना आसान नही होता,❤️जितना आप सब सोचते हो🙈।कुछ मर्दों को लगता है की,😛जहा एक औरत की योनि से रसीली झील की बांध टूटी,❤️तो वो संतुष्ट हो गई,लेकिन ये बिलकुल गलत है🙈
परमसुख की दहलीज हमें तब मिलती है,😘जब दोनों जिस्म एक दूसरे की पसीने से लथपथ बदन से लिपट ❤️संभोग का मजा लेते है🙈
Haaye, वो हसिन पल का मजा ही अलग होता है😘
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प्रेम.... महज़ इत्तेफ़ाक़...
प्रेम कभी उन लोगों को क्यों नहीं मिलता जो भरे हैं प्रेम से
प्रेम सदैव एक रिक्तितता बनकर रह जाता है प्रेम के भूखे लोगो के लिए..
वो ही लोग उपेक्षित हैं जो सबसे ज्यादा हक़दार हैं प्रेम के
वो ..जिन्होंने प्रेम को ईश्वर माना वो सबसे ज्यादा छले गए अपने ईश्वर के हाथों
प्रेम ने ना सिर्फ श्रद्धा का नाश किया बल्कि विरक्ति के भाव संग भर दी प्रेम के प्रति घृणा भी.... पीड़ा भी...
प्रेम पाने के सतत प्रयास भी विफल हुए सदैव
आखिर क्यों सबसे निश्छल पात्रों के हिस्से ही आया छल
प्रेम अक्सर आवरण में घृणित कर्म लगता है क्रुद्ध प्रेमियों को
पर फिर भी प्रेम अभाव कभी खत्म नहीं कर पाया मनुष्य में से मनुष्यत्व
वे सबसे ज्यादा समर्पित रहे प्रेम के प्रति
यानी घृणा, छल, व उपेक्षा मिलकर भी समाप्त नहीं कर सकते प्रेम की बूंद मात्र को भी...
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एक जोड़े में संभोग सुख के बारे में....
😘कई लोगों का मानना है कि लगातार लंबे समय तक संबंध बनाने से महिला के ऑर्गेज्म खत्म हो जाते हैं। वास्तव में, यह बिल्कुल विपरीत है।
इसलिए, जितना अधिक एक महिला को अपने साथी की आदत हो जाती है, उतनी अधिक संभावना होती है कि उसे तीव्र चरमसुख का अनुभव होगा।
उतना ही अधिक आपका साथी आपके आनंद के सभी पहलुओं को जान पाएगा....
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निम्फोमेनियाक होना बेन है या बून यानि वरदान है या अभिशाप? ऎसी लड़की को हर रात 3-4 बार चु@दाई की जरूरत होती है।
निम्फमेनियाक से ग्रसित स्त्री में एक विशेषता होती है की यह कितनी भी बार से#क्स कर ले इसकी योनि पुनः टाइट हो जाती है। ऐसी स्त्री को हर हाल में चाहिए ही चाहिए, आमतौर पर पति kuch महीनों बाद स्त्री को चार बार नहीं दे सकते इसलिए ऐसी स्त्री को। कैसे भी अपने बुर की आग बुझानी पडती है
बाबा कामपुरुष
निम्फोमेनियाक स्त्री के भगनासा में हमेशा आग🔥 लगी रहती है #भगनासा
-------
महिलाओं में भगनासा (Clitoris) सबसे अधिक कामोत्तेजक अंग होता है। भग (vulva) के अंदर मूत्र छिद्र से एक इंच ऊपर एक उभार सा होता है, जिसे भगनासा कहा जाता है। भगनासा, पुरुष लिंग यानी पेनिस का अविकसित रूप है। इसमें लिंग की तरह ही खोखले कोष होते हैं। क्लिटोरिस में करीब 8000 सेंसिटिव नर्व एंडिंग्स होते हैं, लगभग उतने ही जितने कि पुरुष के लिंग में होते हैं।
महिलाओं की योनि (vagina) में स्थित क्लिटोरिस पुरुष के शिश्नाग्र (penis) के जैसा ही होता है और यौन उत्तेजना प्राप्त करने में वह उतना ही संवेदनशील होता है। सेक्स के दौरान, संभोग से पहले भगनासा को छूने, सहलाने, दबाने या मलने से स्त्री कामातुर हो उठती है।
सेक्स विशेषज्ञ भी इस बात को स्वीकार करते हैं कि भगनासा का स्पर्श करने से स्त्री बहुत जल्दी ही सेक्स के लिए तैयार हो जाती है। क्योंकि सहलाने मात्र से ही क्लिटोरिस, पेनिस की तरह सख्त और उत्तेजित हो जाता है।
कामुक पुरुष के लिए ऐसी स्त्री वरदान है जबकि ढीला पुरुष ऐसी स्त्री के लिए अभिशाप है @बाबा कामपुरुष
वैसे तो पुरूषों के लिंग की लंबाई का ऑर्गेज्म से कोई संबंध नहीं है क्योंकि महिलाओं की योनि का केवल एक चौथाई भाग ही संवेदनशील होता है अगर संभोग क्रिया में पोज़ीशन और
टाइमिंग सही हो तो छोटे पेनिस वाला मर्द भी एक महिला
को ऑर्गेज्म तक पहुंचा सकता है॥ परन्तु निम्फोमेनियाक स्त्री को गहराई तक प्रवेश wala लिन चाहिए तभी उसकी कामोंत्तेजना शांत होती है 🔥
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Sex in front of a mirror: how to get more pleasure
For most people, all three parts of sex are important: tactile, auditory and visual. That is, when you fuck your girlfriend it is important for you to touch her, hear her moans and watch the process💦
A great way to reinforce the latter component is to have sex in front of a mirror.
🙃What makes it so good?
👉🏻First, the eye contact. A babe's face during sex can't help but be arousing. Now you can watch it in any position.
👉🏻Secondly, you have the opportunity to view your sex from all angles. It's like watching a homemade porno movie starring yourself.
👉🏻Third, sex in front of a mirror will give you the feeling of having sex in a public place. If you've always wanted your sex to have an audience, you don't have to shock the public at the nearest movie theater.
Arrange a night of crazy sex for your babe and witness all her emotions😉
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सेक्स के समय दुनिया की कोई शक्ति ऐसी नही है जो बिना प्रेम के लिंग में तनाव ला दे या स्त्री की योनि गीली कर दे ।।
जब तक प्रेम प्रसंग नही होता लिंग में तनाव नही आता ।
जबरदस्ती सम्भोग नही बलात्कार होता है ।।
जबरदस्ती लिंग को खड़ा करने के लिए हस्तमैथून करना पड़ता है या हिलाना पड़ता है ।
पर प्रेम में तो स्त्री को देख कर ही ये शिष्ट शेर खड़ा होकर दहाड़ते हुए स्वागत करता है गुफा में प्रवेश करने के लिए ।।
बाबा कामपुरुष
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एक संभोग सुख अद्भुत होता है, लेकिन यह हमेशा आसान या आवश्यक नहीं होता है, इसमें कई तत्व होते हैं और इसमें पहले खुद पर काम करना शामिल होता है।Â Â Â
फिर भी, संभोग के बिना सेक्स करना उतना ही दिलचस्प है। मिथकों का एक समूह है, इस तथ्य को शामिल करते हुए कि संभोग के बिना सेक्स अस्वास्थ्यकर है, लेकिन यह सब बकवास है
वास्तव में जो खतरनाक है वह है संभोग सुख प्राप्त करने के बारे में चिंतित होना। आम तौर पर, इस तरह का तंत्रिका संबंधी जुनून ही हमें चरम से दूर ले जाता है और वहां तक पहुंचना मुश्किल बना देता है।
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स्त्री पुरूष की सेक्स उत्तेजना
स्त्री छू लेने का आनंद लेती है सेक्स का क्षेत्र पूरा शरीर है उसका सेक्स परिधि पर है उसका यौवन परिधि पर छलकता है, जब पुरुष स्त्री को छूता है वह ऊर्जा उसके केंद्र या ह्रदय की ओर खिसकती है, यह पुरुष में नही होता हे, पुरुष का सेक्स केंद्र मन में बुद्धि में है, यानी स्त्री की सेक्स ऊर्जा परिधि बन कर खड़ी है पुरुष की उर्जा केंद्र में होता है, पुरुष स्त्री की कल्पना मात्र से उसके मस्तक में एक रसायन क्रिया होती है, और वह रसायन प्रक्रिया से पूरे शरीर मे एक नई तरंग और तरंग से प्रदार्थ रूपी या मानव बीज का अंदर फूल खिलता है एक अन्दर ही पराग क्रिया है फिर वह नीचे जा कर शक्राणु वीर्य का रूप बन जाता है, स्त्री की ऊर्जा परिधि से केंद्र में जाती है इसमें समय लगता है, पुरुष की उर्जा नीचे गिरती है, नीचे गिरने ने समय कम लगता है लेकिन पूरे शरीर की ऊर्जा केंद्र मे आने में समय लगता है,, जैसे पुरुष स्त्री दृश्य देखता है उसमे तत्काल रसायन प्रक्रिया शुरू हो जाती है फिर नीचेओर ऊर्जा बाहर निकलना चाहती है, स्त्री की ऊर्जा पहले केंद्र में इकट्ठा होगी, स्त्री की ऊर्जा जैसे ही केंद्र की आती है स्त्री अंदर की यात्रा में चली जाती है अपने केंद्र में हो जाती हे, जब केंद्र में पूरी ऊर्जा आ जाती है तब उसके बाहरी शरीर परिधि का मूल्य और वहा से ध्यान हट जाता है तब, वस्त्र हटाना आसान हो जाता है, जब पूरी ऊर्जा केंद्र में इकठ्ठी हो जाती है तब फिर नीचे बहती है तब योनि गर्भ हिस्सा सक्रिय होता है, स्त्री के पास सेक्स के तीन अनुभव है पुरुष के पास एक अनुभव है, जब स्त्री केंद्र में ऊर्जा इक्ट्ठा कर लेती है फिर नगन दृश्य देखना, मैथुन दृश्य देखने में उसे रस आएगा, प्रथम स्थिति ने स्त्री को नगनता उत्तेजित नही करती हे, पुरुष को प्रथम नगता भाती है क्योंकि उसे सिर्फ नीचे जाना है, क्योंकि उर्जा केंद्र में ही है बस स्त्री दृश्य सिंगारी बन जाता है, इसलिए स्त्री का पूर्ण केंद्र तक यात्रा पुर्ण नही होती है उससे पहले पुरुष अपनी यात्रा समापत करना चाहता है, इसलिए स्त्री की सेक्स समता दुगनी होती है, यदि स्त्री को भी पुरुष की तरह देखने मात्र से सेक्स उत्पन होता तब तब यह स्त्री पुरुष का सेक्स एक समान हो जाता , दोनो एक दूसरे को देखे और सेक्स शुरू हो जाता है लेकिन दोनो की उत्तेजना भिन्न है, अलग है, स्त्री को तीन बार आनंद मिलता है स्पर्श, केंद्र, और योनि में, पुरुष में सब एक साथ होता है प्रथम शुरुआत और अंतिम में एक बड़ा विषफोष्ट्त, यह क्षण पुरुष को बार बार आकर्षित करता है, यह विषफोर्ट स्त्री के पास नही होता है, स्त्री को आनद लायब्द से लम्बा मिलता है, लेकिन वह अंतिम विषफोट्स नही मिलता है, स्त्री स्पर्श से उतेजना मिलती है यानी स्पर्श से केन्द्र में या प्रेम भाव में केन्द्र बनती है तब ऊर्जा परिधि से हृदय में आती है, पुरुष को दृश्य से उत्तेजना मिलती है जिससे बचना असंभव जैसा लगता है, स्त्री को ढक भी दी जाए तो भी दृश्य मिल जाते है , लेकिन स्त्री के लिए स्पर्श नही मिलता है, स्त्री के लिए सेक्स ऊर्जा उर्धगमन नही है लेकिन पुरुष के लिए उर्जा उर्धगमन होता है यह आगे जानकारी देंगे
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आज तक आपने किसी नपुंसक को ब्रम्हचर्य को उपलब्ध होते देखा है क्या ?
सौभाग्य है कि आपके पास वासना का इंधन है। ऊर्जा है। तो उसको अध्यात्म में भी प्रयोग किया जा सकता है और प्रेम में रूपांतरित किया जा सकता है । ऊर्जा तो एक ही है। आप के उपयोग पर निर्भर करता है। आग से घर भी जला सकते हैं और रोटी भी पका सकते हैं। ऊर्जा नष्ट नहीं होती उसका रूपांतरण होता है।🔥🔥🌹❤️
#everyone #followers #loveislove
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आज तक आपने किसी नपुंसक को ब्रम्हचर्य को उपलब्ध होते देखा है क्या ?
सौभाग्य है कि आपके पास वासना का इंधन है। ऊर्जा है। तो उसको अध्यात्म में भी प्रयोग किया जा सकता है और प्रेम में रूपांतरित किया जा सकता है । ऊर्जा तो एक ही है। आप के उपयोग पर निर्भर करता है। आग से घर भी जला सकते हैं और रोटी भी पका सकते हैं। ऊर्जा नष्ट नहीं होती उसका रूपांतरण होता है।🔥🔥🌹❤️
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सुहागरात की कल्पनाएं!
मानव समाज में सुहागरात को लेकर इतनी सारी कल्पनाएं बनी हुई हैं, जिनको गिन पाना असंभव है। फिर भी मैं कुछ कल्पनाओं पर बात करूंगा, जो हमारे समाज में अपने पैर जमा चुके हैं। सबसे पहले लड़कों की कल्पनाओं पर बात करते हैं। अक्सर लड़कों के दिमाग में यह बैठा रहता है कि वह सुहागरात के दिन क्या करेगा ? कैसे करेगा ? कही वह पहले ही नाइट फेल तो नहीं हो जाएगा ? क्या वह अपनी पत्नी को खुश कर पाएगा ? आदि कल्पनाएं लड़कों के दिमाग में बैठी रहती हैं। इसके अलावा लड़कों के दोस्त लड़के को सुहागरात के दिन एक योद्धा के रूप में देखते हैं। जैसे लड़के को किसी युद्ध में जाना हो और उसे युद्ध को जीत कर आना ही होगा आदि। मगर इन कल्पनाओं से अलग सत्य कुछ और ही है। उस सत्य के बारे में हम अंतिम में बात करेंगे। अब हम बात करते हैं लड़कियों के मन में सुहागरात को लेकर चलने वाली कल्पनाओं के बारे में। लड़कियां अक्सर सुहागरात को लेकर सोचती हैं कि अगर सुहागरात के दिन उनकी योनि से ब्लड नहीं आएगा तो क्या होगा ? कही उनका होने वाला पति उनके चरित्र पर सवाल तो नहीं उठाएगा ? पहली बार सेक्स करने पर कितना दर्द होगा ? क्या वह दर्द मेरे से सहा जाएगा ? कही लड़का हवसी तो नहीं होगा ? जैसे कई कल्पनाएं लड़कियों के मन में चलती हैं।
हकीकत यह है कि सुहागरात के दिन बहुत ही काम लोग ठीक से शारीरिक संबंध बना पाते हैं। इसके पीछे विभिन्न कारण हैं। जैसे- सुहागरात के दिन घर में मेहमानों की भीड़, दुल्हन और दूल्हे का सही से परिचित नहीं होना, दुल्हन-दूल्हे का थक जाना और दोनों का मानसिक रूप से शारीरिक संबंध बनाने के लिए तैयार नहीं होना आदि। वर्तमान में प्रेम विवाह की संख्या लगातार पड़ रही है और ऐसे में अधिकतर लड़के-लड़कियां शादी से पहले ही शारीरिक संबंध बना चुकी होती हैं। इसके अलावा आज शादी से पहले लगभग हर लड़का-लड़की किसी ना किसी के प्रेम संबंध में रहे होते हैं या फिर सोशल मीडिया इत्यादि प्लेटफार्म के माध्यम से सेक्स इत्यादि के बारे में जानकारी प्राप्त कर चुके होते हैं। इसकी बावजूद भी सुहागरात को लेकर हमारे मानव समाज में कई तरह की कल्पनाएं होती हैं। खैर वक्त के साथ-साथ हमारी ये कल्पनाएं भी धीरे-धीरे मर जाएंगी।
🔥🔥🌹
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महिलायें भी यौन सुख पाने के लिए हस्तमैथुन का सहारा लेती हैं। हालांकि इससे वे आर्गेज्म तक नहीं पहुंच पाती हैं लेकिन उन्हें हस्तमैथुन से बहुत हद तक संतुष्टि भी मिल जाती है।
महिलाओं को हस्तमैथुन करते वक्त पूरा आनंद आता है, और उन्हें पुरुष की कमी बिलकुल भी महसूस नहीं होती है। क्योंकि वे इस दौरान केवल अपने आनंद के बारे में सोचती हैं और जब तक उन्हें आनंद नहीं मिलता तब तक वे करती रहती हैं। कुछ 2-3 मिनट में संतुष्ट हो जाती हैं और कुछ इसके लिए 15-20 मिनट का समय लेती हैं।
लगभग 10 प्रतिशत महिलायें सप्ताह में 3 बार हस्तमैथुन करती हैं, और 38 प्रतिशत महीने में एक बार करती हैं।
महिलायें हस्तमैथुन अकेले में ,रात में या पति प्रेमी की याद में करती हैं ,ज्यादातर महिलायें नहाते वक्त हस्तमैथुन करती हैं और इससे उन्हें आनंद मिलता है।
महिलायें आराम से और कोमलता से अपने आप को आनंद देती हैं। अगर उन्होंने अपनी उंगलियों के अलावा किसी अन्य वस्तु का प्रयोग इसके लिए किया तो कोशिश यही रहती है उसका स्पर्श आनंदित करने वाला हो।
महिला जब भी हस्तमैथुन करती है, इसमें वह अपने सारे अंगों को शामिल करती है। महिला इस दौरान अपने जांघों, अपने पेट के साथ-साथ स्तनों का मसाज भी करती है। इसलिए यह स्वास्थ्य के लिहाज से भी बहुत फायदेमंद होता है।
हस्तमैथुन के बाद महिलाओं को आराम मिलता है। क्योंकि इससे उनके पूरे शरीर का मसाज तो होता ही है, साथ ही यह यौन सुख भी प्रदान करता है। इसके लिए उन्हें पुरुष की जरूरत नहीं पड़ती और वे खुद से ही अपने आप को रोमांचित कर देती हैं।
नोट: आपके मन में भी सेक्स से सम्बन्धित समस्या व सवाल है तो हमें मैसेज कर के पूछ सकते है !❤️🔥
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