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क्लिटोरिस में लिंगमुण्ड की तुलना में दोगुनी संवेदनशीलता होती है। भगशेफ पर लगभग
8000 तंत्रिका अंत होते हैं, इस तथ्य के
बावजूद कि पुरुष लिंग के सिर पर उनमें से
केवल चार हजार होते हैं....
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जीवन में ऐसी स्त्री का होना आवश्यक है जिसे देखते, छूते ही l तन बदन में उत्तेजना भर जाए। 🔥🫦 चित्र में दिखाइ युवती का हाथ लगते ही यह युवा निराशा से ऊपर जाकर मस्तराम बन जाता है💞 आप भी निराश हो गए हो तो ऐसी उत्तेजित युवती के स्पर्श संसर्ग से जीवन में नई ऊर्जा का संचार कीजिए
ऊर्जा वृद्धि के लिए उत्तेजना उत्पन्न होना आवशयक है। दैहिक रूप से स्पर्श, चुंबन, सम्भोग से उत्तेजन पाया जा सकता है किन्तु उसकी एक सीमा है। इसके अतरिक्त उत्तेजक लेखन पढ़ के या फिर उत्तेजक चित्र/चलचित्र भी विकल्प है। यह भी उत्तेजना को एक सीमा तक हे बढ़ा सकते हैं। मानव मस्तिष्क, जिसकी कप्लना शक्ति की कोई निर्धारित सीमा नहीं है, उत्तेजना बढ़ने के लिए सबसे अच्छा विकल्प है। कल्पना के द्वारा कोई भी व्यक्ति अपनी उत्तेजना को जितना चाहे उतने ऊँचे स्तर तक ले जा सकता है। यदि दो व्यक्ति आपस में अपनी उत्तेजक कल्पनाओं को साझा करे तो और भी अधिक उत्तेजना उत्पन्न की जा सकती है। अपनी कल्पना में व्यक्ति बिना किसी सीमा के, बंधन के या अवरोध के कुछ भी उत्तेजक सोच सकता है, जो की वास्तविक जीवन में विभिन्न बंधनों के कारण संभव ना हो। ❤️🔥👄
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स्त्री विस्तारित हो जाती है बिस्तर पर
अपने प्रेमी की ज़िद के आगे,,
इसलिए नहीं,,
कि उसे पसन्द है ज़िस्म की प्यास बुझाना
न ही उसे शौक़ है
हर किसी के सामने ख़ुद को सौंप देने की...
सिर्फ़ इसलिए,,
क्योंकि वो अपने प्रेमी को नाराज़ नहीं देखना चाहती,
वो सब करती है जो तुम्हें सुखद होता है..
उसने उन कृत्यों को कहीँ सीखा नहीं होता है..
परन्तु सब इतने ढंँग से करती है सिर्फ़ तुम्हारे लिए..
फ़िर तुम्हें उसके चरित्र पर हमला करते देर नहीं लगती
कहने में ज़रा संँकोच नहीं होता
ये सब कैसे सीखा, कहाँ देखा
इनसे प्रेमिकाओं के चरित्र की पुष्टि नहीं होती,,
उसको ये करने में ज़रा भी सन्तुष्टि नहीं होती,,
सब आता है उसको क्यों कि वो तुम्हें खोना नहीं चाहती,,,,
जागना चाहती है तुम्हारे साथ परन्तु सोना नहीं चाहती.🌹🔥
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*यौन शिक्षा और यौन स्वास्थ्य का मतलब*
यौन शिक्षा के बारे में बात करना आज भी वर्जित माना जाता है। हालांकि, यौन स्वास्थ्य के बारे में सभी को पता होना जरूरी है। यौन शिक्षा एक व्यक्ति को जिम्मेदारियों, यौन गतिविधि, सही उम्र, प्रजनन क्षमता, जन्म नियंत्रण, सेक्स परहेज आदि के बारे में सिखाती है। आजकल, लोग स्कूलों और सार्वजनिक कार्यक्रमों के माध्यम से यौन स्वास्थ्य के बारे में जागरूकता प्राप्त कर रहे हैं। अगर पुराने जमाने की बात करें तो उस समय इन बातों पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया जाता था। साथ ही शादी से पहले इस बारे में बात करना भी किसी को पसंद नहीं था। अगर कोई इस बारे में बात करना चाहता था, तो उसे समाज द्वारा गलत माना जाता था। यौन शिक्षा को लेकर काफी विवाद हुआ था। लेकिन आज हर कोई अपनी सेहत के लिए जिम्मेदार हो गया है, इसलिए खुद को जागरूक रखते हैं। गांवों और शहरों की महिलाओं और पुरुषों को यौन स्वास्थ्य के बारे में शिक्षित किया जा रहा है ताकि एचआईवी-एड्स जैसे यौन रोगों और संक्रमणों को रोका जा सके। यौन संचारित रोगों और किसी भी अवांछित गर्भावस्था के जोखिम को रोकने के लिए बच्चों और किशोरों को यौन शिक्षा प्राप्त करनी चाहिए।
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कामसूत्र के अनुसार, स्त्रियों के लिए सबसे अच्छे सेक्स आसन वे होते हैं, जो उसे पूरी तरह संतुष्टि महसूस करा सकते हैं। स्त्री अपने पुरुष साथी की गोद में बैठे, दोनों का चेहरा आमने-सामने हो, जिससे संभोग का आसन बने। इस स्थिति में सेक्स के दौरान पुरुष अपनी महिला साथी के स्तनों, गर्दन, गले, कान के पीछे, होठों पर किस कर सकता है, उसकी पीठ का हल्के हाथों से मसाज कर सकता है, इससे स्त्री को ऑर्गेज्म पाने में आसानी रहती है और वह संतुष्ट भी होती है।
दूसरे सेक्स आसन में, अगर पुरुष अपनी महिला साथी के स्तनों पर अपने शरीर का भार न डालने की सावधानी बरतें, तो पुरुष ऊपर और स्त्री नीचेवाला सेक्स आसन भी सही है। इसके अलावा पुरुष नीचे और स्त्री के ऊपर होने का सेक्स आसन भी स्त्री को संतुष्ट करने के लिए परफेक्ट होता है।
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एक औसत महिला बेड पर कितनी देर टिक सकती है?
वैसे तो ये किसी को पता नहीं होता कि कोई महिला कब तक संतुष्ट हो पाती है। लेकिन अगर एक औसत समय की बात की जाए तो ये बताया जा सकता है।
ज्यादातर पुरुष इस बात से परेशान रहते हैं कि कहीं सेक्स के दौरान वह जल्दी ही ठंडे न पड़ जाएं। इसी के साथ ही पुरुष इस बात को लेकर भी सोचते हैं कि महिलाएं आखिर कितनी देर में संतुष्ट हो जाती हैं? आखिर कितनी देर में महिलाओं के ऑर्गेज्म प्राप्त होता है। लेकिन क्या आप भी यही सोचते हैं ?
अगर हां, तो आज हम आपको बताएंगे कि आखिर महिलाएं कितनी देर में संतुष्ट हो सकती हैं या ऑर्गेज्म प्राप्त कर सकती हैं।
वैसे तो ये किसी को पता नहीं होता कि कोई महिला कब तक संतुष्ट हो पाती है। लेकिन अगर एक औसत समय की बात की जाए तो ये बताया जा सकता है। बहुत सी महिलाएं इस बात से बहुत ज्यादा परेशान रहती हैं कि उनका पार्टनर उन्हें संतुष्ट क्यों नहीं कर पाता। एक महिला हमेशा चाहती है कि उसे सेक्स के दौरान पूरी संतुष्टि प्राप्त हो। अगर ऐसा नहीं होता है तो महिलाएं दूसरे रास्ते भी ढूंढने लग जाती हैं क्योंकि हर कोई यौन संतुष्टि प्राप्त करना चाहता ही है। महिलाओं के लिए भी ये बहुत जरूरी होता है।
क्या कहती है स्टडी
एक स्टडी के अनुसार, ये बात सामने आई है कि एक औसत महिला लगभग 25 मिनट तक संतुष्टि प्राप्त कर सकती है। उन्हें पुरुषों के मुकाबले संतुष्ट होने में ज्यादा समय लगता है। महिलाएं 25 मिनट तक सेक्स कर सकती हैं। हालांकि, इस पूरे 25 मिनट में वह सिर्फ इंटरकोर्स ही नहीं चाहती, बल्कि वह फोरप्ले भी चाहती हैं। महिलाओं को संतुष्टि दिलाने के लिए पुरुषों को फोरप्ले जरूर करना चाहिए। जिससे वह जल्दी संतुष्ट हो जाएंगी। अगर सेक्स के दौरान सिर्फ एक ही पार्टनर संतुष्टि प्राप्त करता है तो वह पूर्ण सेक्स नहीं कहलाया जाता। बल्कि उसे अधूरा सेक्स कहा जाता है।
एक औसत महिला 25 मिनट में संतुष्टि प्राप्त कर पाती है। इसका एक सर्वे अमेरिका और यूके में हुआ था। जहां 18 से 35 साल तक की महिलाओं को चुना गया था। उन महिलाओं का कहना था कि वह लगभग 25 मिनट तक सेक्स चाहती हैं, क्योंकि वह लगभग 25 मिनट में संतुष्ट हो पाती हैं। उन महिलाओं का यह भी कहना था कि सेक्स के दौरान में वो अच्छे से फोरप्ले भी चाहती हैं
पुरुष कितनी देर टिक पाते हैं
अमेरिका में हुए सर्वे के मुताबिक, ज्यादातर पुरुष बेड पर सिर्फ 11 से 14 मिनट तक ही टिक पाते हैं। जिसकी वजह से महिलाओं को पूरी तरह से संतुष्टि नहीं मिल पाती है। हालांकि, इस स्टडी में पुरुषों का कहना था कि समय के साथ-साथ उनकी सेक्स टाइमिंग भी बढ़ रही है। यानी जो लोग शुरुआत में बेड पर कम टिक पाते हैं वह समय के साथ-साथ देर तक सेक्स करने के योग्य हो जाते हैं।
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कैट पोजीशन मिशनरी पोजीशन से मिलती-जुलती है। इस पोजीशन में मेल पार्टनर फीमेल पार्टनर के शरीर पर पूरी तरह लीन होने के बजाय अपने पैर और हाथ के सहारे कैट जैसी पोजीशन में होते हैं। वहीं फीमेल पार्टनर का हिप सरफेस से ऊपर की ओर उठा हुआ होता है।
2. स्पून पोजिशन
स्पून पोजिशन में मेल पार्टनर फीमेल पार्टनर के पीछे कर्ल अप होकर लेटे होते हैं और इसी पोजिशन में पेनिट्रेशन होती है। वहीं बहुत सी महिलाएं इस पोजिशन को पसंद करती हैं, परंतु उनमें से कई महिलाएं हैं, जिन्हें इस पोजिशन में ऑर्गेज़्म प्राप्त करने में परेशानी आती है।
हालांकि, आपको बता दें कि यह पोजिशन ऑर्गेज्म प्राप्त करने के लिए इसलिए बेहतर है क्योंकि इस पोजीशन में सेक्स के दौरान पार्टनर आपकी क्लिटोरिस को आसानी से रब कर पाते हैं और यह ऑर्गेज्म तक पहोचने में आपकी मदद करता है। इसके साथ ही इसमें आप दोनों बिल्कुल रिलैक्स होते हैं, इस पोजीशन में किसी का भार किसी के ऊपर नही होता।
3. पीनर पोजीशन
पीनर पोजीशन के लिए फीमेल पार्टनर को बेड पर उल्टा लेटना है, और मेल पार्टनर उनके ऊपर होंगे। इस पोजीशन में पीछे से इंटरकोर्स होता है। इसमें महिलाएं अपनी क्लिटोरिस को खुद से रब कर सकती हैं। इसके साथ ही मेल पार्टनर के लिए भी क्लिटोरिस रब करना आसान हो जाता है। इतना ही नहीं इस पोजिशन में सेक्स के दौरान क्लिटोरिस खुद ब खुद बेड से रब होती रहती है, तो ऑर्गेज्म तक पहुंचने में आसानी होती है।
4. मिशनरी विद ट्विस्ट पोजिशन
इसमें आपको मिशनरी पोजिशन में ही रहना है, परंतु फीमेल पार्टनर के कमर के नीचे तकिया या फिर किसी भी प्रकार के गद्दे का इस्तेमाल करते हुए कमर को अपलिफ्ट करें। यह आपके पेल्विस को ऊपर उठाने में मदद करेगा और पेनिट्रेशन की स्थिति को भी बेहतर बनाएगा।
इस पोजीशन में पेनिस वेजाइना के हर एरिया तक सही से पहुंच पाता है, और आपको यह समझने में आसानी होगी कि आपका सेंसेटिव हिस्सा कौन सा है।
इसके साथ ही मेल पार्टनर घुटनों के बल या महिला के पैरों को फैलाकर इस पोजीशन को एंजॉय करें, यह काफी बेहतर प्लेजर प्रदान करता है। आप मिशनरी को भी एक और ट्विस्ट दे सकती हैं। इसमें महिलाएं अपने दोनों पैरों को पूरी तरह कॉम्पैक्ट कर लें, यह वेजाइना को टाइट कर देगा और सेक्स के दौरान ऑर्गेज्म प्राप्त करने में भी मदद करेगा।
इस पोजीशन में सेक्स के दौरान पेनिस वजाइना में पूरी तरह इंसर्ट नहीं होता और पेनिट्रेशन के दौरान पेनिस का निचला हिस्सा और आसपास की स्किन क्लिटोरिस को रब करते हुए एक सेंसेशन पैदा करती हैं। ऐसे में सेक्स के दौरान महिलाओं को काफी ज्यादा प्लेजर मिलता है और वह आसानी से ऑर्गेज्म प्राप्त कर सकती हैं।
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क्लिटोरिस को शामिल करने वाली ये 4 सेक्स पोजीशन हो सकती हैं आपके लिए बेस्ट, ऑर्गेज्म तक पहुंचना होगा आसान
कई शोध यह साबित कर चुके हैं कि महिलाओं को ऑर्गेज़्म तक पहुंचने में पेनिट्रेशन से ज्यादा क्लिटोरिस की भूमिका होती है। इसलिए आप ये पोजिशन ट्राई कर सकती हैं।
सेक्स और प्लेजरेबल सेक्स (Pleasurable sex) में बहुत फर्क है। आंकड़े बताते हैं कि बहुत सारी महिलाएं सेक्स के दौरा ऑर्गेज़्म (Orgasm) तक नहीं पहुंच पाती। तो बहुत सी महिलाएं अपने पार्टनर की खुशी के लिए इसे फेक (Fake orgasm) करती हैं। ये दोनों ही चीजें आपकी मेंटल हेल्थ और बॉन्डिंग को कमजोर कर सकती हैं। इसलिए हेल्दी सेक्स सेशन (Healthy sex session) के लिए जरूरी है उन सभी बातों के बारे में जानना जो इसे सपोर्ट कर सकती हैं। इनमें सेक्स पोजीशन भी एक जरूरी भूमिका अदा करती हैं। आइए जानते हैं उन सेक्स पोजीशन (Sex position to reach orgasm) के बारे में जो आपको बेहतर ऑर्गेज़्म तक पहुंचने में मदद कर सकती हैं।
बॉन्डिंग बढ़ाता है ऑर्गेज़्म
बात यदि सेक्स के दौरान ऑर्गेज्म प्राप्त करने की की जाए तो, मेल और फीमेल के बीच जो ऑर्गेज्म गैप है उसे पूरा कर पाना पुरुषों के लिए थोड़ा मुश्किल हो जाता है। परंतु यदि आप अपनी सेक्स लाइफ को बेहतर रखना चाहती है, तो अपने पार्टनर के साथ आपका भी ऑर्गेज्म तक पहुंचना बहुत जरूरी है। अक्सर महिलाएं अपने पार्टनर को अच्छा फील कराने के लिए फेक ऑर्गेज्म का ढोंग करती हैं, परंतु अपने शरीर की जरूरतों को भी समझना आपके लिए महत्वपूर्ण है।
कई स्टडी का मानना है, कि ज्यादातर महिलाएं पेनिट्रेशन से नहीं, बल्कि क्लिटोरिस सेंसेशनसे ऑर्गेज्म प्राप्त करती हैं। ऐसे में मेल पार्टनर को सेक्स के दौरान पेनिट्रेशन के साथ-साथ क्लिटोरिस पर भी ध्यान देने की आवश्यकता होती है। महिलाओं का ऑर्गेज्म तक पहुंचना प्लेजर के साथ-साथ उनकी सेहत के लिए भी बहुत जरूरी होता है।
कई स्टडी का मानना है, कि ज्यादातर महिलाएं पेनिट्रेशन से नहीं, बल्कि क्लिटोरिस सेंसेशनसे ऑर्गेज्म प्राप्त करती हैं। ऐसे में मेल पार्टनर को सेक्स के दौरान पेनिट्रेशन के साथ-साथ क्लिटोरिस पर भी ध्यान देने की आवश्यकता होती है। महिलाओं का ऑर्गेज्म तक पहुंचना प्लेजर के साथ-साथ उनकी सेहत के लिए भी बहुत जरूरी होता है।
होम इंटीमेट हेल्थ क्लिटोरिस को शामिल करने वाली ये 4 सेक्स पोजीशन हो सकती हैं आपके लिए बेस्ट, ऑर्गेज्म तक पहुंचना होगा आसान
क्लिटोरिस को शामिल करने वाली ये 4 सेक्स पोजीशन हो सकती हैं आपके लिए बेस्ट, ऑर्गेज्म तक पहुंचना होगा आसान
कई शोध यह साबित कर चुके हैं कि महिलाओं को ऑर्गेज़्म तक पहुंचने में पेनिट्रेशन से ज्यादा क्लिटोरिस की भूमिका होती है। इसलिए आप ये पोजिशन ट्राई कर सकती हैं।
सेक्स और प्लेजरेबल सेक्स (Pleasurable sex) में बहुत फर्क है। आंकड़े बताते हैं कि बहुत सारी महिलाएं सेक्स के दौरा ऑर्गेज़्म (Orgasm) तक नहीं पहुंच पाती। तो बहुत सी महिलाएं अपने पार्टनर की खुशी के लिए इसे फेक (Fake orgasm) करती हैं। ये दोनों ही चीजें आपकी मेंटल हेल्थ और बॉन्डिंग को कमजोर कर सकती हैं। इसलिए हेल्दी सेक्स सेशन (Healthy sex session) के लिए जरूरी है उन सभी बातों के बारे में जानना जो इसे सपोर्ट कर सकती हैं। इनमें सेक्स पोजीशन भी एक जरूरी भूमिका अदा करती हैं। आइए जानते हैं उन सेक्स पोजीशन (Sex position to reach orgasm) के बारे में जो आपको बेहतर ऑर्गेज़्म तक पहुंचने में मदद कर सकती हैं।
बॉन्डिंग बढ़ाता है ऑर्गेज़्म
बात यदि सेक्स के दौरान ऑर्गेज्म प्राप्त करने की की जाए तो, मेल और फीमेल के बीच जो ऑर्गेज्म गैप है उसे पूरा कर पाना पुरुषों के लिए थोड़ा मुश्किल हो जाता है। परंतु यदि आप अपनी सेक्स लाइफ को बेहतर रखना चाहती है, तो अपने पार्टनर के साथ आपका भी ऑर्गेज्म तक पहुंचना बहुत जरूरी है। अक्सर महिलाएं अपने पार्टनर को अच्छा फील कराने के लिए फेक ऑर्गेज्म का ढोंग करती हैं, परंतु अपने शरीर की जरूरतों को भी समझना आपके लिए महत्वपूर्ण है।
क्लिटोरिस को शामिल करने वाली ये 4 सेक्स पोजीशन हो सकती हैं आपके लिए बेस्ट
कई स्टडी का मानना है, कि ज्यादातर महिलाएं पेनिट्रेशन से नहीं, बल्कि क्लिटोरिस सेंसेशनसे ऑर्गेज्म प्राप्त करती हैं। ऐसे में मेल पार्टनर को सेक्स के दौरान पेनिट्रेशन के साथ-साथ क्लिटोरिस पर भी ध्यान देने की आवश्यकता होती है। महिलाओं का ऑर्गेज्म तक पहुंचना प्लेजर के साथ-साथ उनकी सेहत के लिए भी बहुत जरूरी होता है।
इसलिए हम कुछ ऐसे सेक्स पोजिशन्स के बारे में बता रहे हैं जो सेक्स के दौरान क्लिटोरिस को इंवॉल्व करते हैं। ताकि महिलाओं को ऑर्गेज्म तक पहुंचने में मदद मिल सके। तो चलिए जानते हैं ऐसे ही 4 पोजिशन के बारे में।
यहां जाने ऑर्गेज्म तक पहुंचने के 4 बेस्ट सेक्स पोजिशन
1. कैट पोजिशन
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ब्रह्मचारी होने के बाद भी वात्स्यायन ने कैसे लिखा था कामसूत्र---
महर्षि वात्स्यायन के जीवन का बड़ा हिस्सा वाराणसी में गुजरा. बताते हैं कि उन्होंने यहीं कामसूत्र जैसी कालजयी रचना की
पांचवीं सदी के आसपास भारत में ऐसी किताब लिखी गई, जिसने दुनियाभर में तहलका मचा दिया. यह किताब थी कामसूत्र. दो हजार साल बाद आज भीह किताब सेक्स की जानकारी देने वाली सबसे प्रमाणिक किताब मानी जाती है. इसे महर्षि वात्स्यायन ने लिखा था. वात्स्यायन के बारे में कहा जाता है कि उन्होंने यह किताब वेश्यालयों में जाकर देखी गई मुद्राओं और वेश्याओं से बात करके लिखी. उन्होंने तो कभी इस तरह की गतिविधियों में ना तो हिस्सा लिया और ना ही इसका आनंद लिया. वो आजीवन ब्रह्मचारी रहे. मशहूर लेखिका वेंडी डोनिगर ने अपनी किताब रिडिमिंग द कामसूत्रा में विस्तार से महर्षि वात्सयायन के बारे में भी बताया है
कौन थे वात्स्यायन----
वात्स्यायन एक ऋषि थे. जिन्हें बहुत ज्ञानवान माना जाता रहा है. उन्हें खासकर वेदों का जबरदस्त ज्ञान था. उनका काफी समय बनारस में गुजरा. उन्होंने पहली बार वैज्ञानिक तौर पर बताया कि अाकर्षण का विज्ञान आखिर क्या है. उनका मानना था कि जिस तरह हम जीवन से जुड़े तमाम पहलुओं की बात करते हैं, उसी तरह हमें सेक्स की भी उपेक्षा नहीं करनी चाहिए. वात्स्यायन धार्मिक शिक्षाओं से जुड़े हुए थे. बेशक उन्होंने कामसूत्र लिखा लेकिन उनके बारे में कहा जाता है कि वो कभी सेक्स गतिविधियों में संलग्न नहीं रहे.
वात्स्यायन ने ये किताब क्यों लिखी---
इतिहासकारों का मानना है कि वात्स्यायन ने सोचा कि सेक्स पर चर्चा होनी चाहिए और इसे अनदेखा नहीं किया जा सकता. उनकी किताब ने सुनिश्चित किया कि लोग इस संबध में बेहतर जानकारी हासिल कर सकें. यह किताब लोगों के लिए काफी जानकारीपरक भी है. उन दिनों सेक्स को लेकर न कोई किताब थी और न ही इस पर जानकारी देने की कोई व्यवस्था थी. इस किताब को पढ़ने के लिए लोगों का सेक्स ज्ञान निःसंदेह बढ़ता है. दुनियाभर में अब इस किताब को रेफर किया जाता है. इस किताब में क्या करें और क्या नहीं करें की काफी चर्चा है. हजारों साल बाद भी यह उपयोगी बनी हुई है.
क्या वात्स्यायन ने और भी किताबें लिखीं---
वात्स्यायन महान दार्शनिक भी थे. उन्होंने न्याय सूत्र नाम भी किताब भी लिखी. ये किताब आमतौर पर आध्यात्मिक उदारवाद पर थी-जो जन्म और जीवन पर आधारित थी. ये मोक्ष की भी बात करती है. ये शानदार किताब है, जो ये बताती है कि वात्स्यायन कितनी विलक्षण बुद्धि के थे. हालांकि इस किताब पर ज्यादा चर्चा नहीं हुई.
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🤤पहले गुदा मैथुन के लिए सबसे अच्छा आसन "बेली" आसन है, क्योंकि इस आसन में लड़की के कूल्हों को आराम मिलता है और साथी के लिए उन्हें उत्तेजित करना और सहलाना आसान होता है....
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घर्षण के बिना संभोग सुख
क्या हम कोशिश करेंगे))
कैसे करेंः आदमी अपने लिंग को योनि के खिलाफ दबाता है और अपने कूल्हों को एक तरफ से दूसरी तरफ ले जाता है। योनि और लिंग दोनों को एक ही समय में उत्तेजित किया जाना चाहिए। इस तरह, आप एक साथ एक उत्तेजक अवस्था में आ सकते हे
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लगभग 90 सेकंड तक चलने वाला एक भावुक चुंबन आपका रक्तचाप बढ़ाता है और आपके हृदय गति को बढ़ाता है। यह रक्त में हार्मोन के स्तर को भी बढ़ाता है, जिससे जीवन प्रत्याशा एक मिनट कम हो जाती है.....
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बड़ी उम्र की ये स्त्रियां वास्तव में शरीर से नही मन से प्यासी होती है कारण इनके साथी उन्हें वो सब कुछ नही दे पाते
जिसकी ये अपेक्षा करती है,चाहे वो उनकी व्यस्तता वजह हो ,चाहे ढलती उम्र के कारण सेक्स के प्रति रुझान कम होना इन प्यासी नारियो को जब कोई पर पुरुष प्रेम देता है तो ये तन मन से उस से लता की तरह चिपक जाती है और अपना सर्वस्व निछावर कर देती है।अब दूसरा पहलू देखे
पुरुष को इनके गदराए बदन से खेलने में आनंद आता है ये अपनी स्वभाविक कामुक अदाओ और सिसकियों से ज्यादा उत्तेजित कर देती है।बच्चे पैदा होने के कारण इनके आंतरिक शारीरिक अंगों में ऐसे बदलाव आ जाते है जो घर्षण में ज्यादा आनंद देते है पुरुष को ऐसा चरमसुख देते है कि उसे मोक्ष जैसा लगता है
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स्त्री संभोग के लिए तैयार,,,
,,जब वह अपने हाथ, पैर, गर्दन
आदि अंगों को ढ़ीला छोड़ दे।
,,,आंख मींच ले।
,,शर्म खत्म हो जाए।
,, पुरुष से बार बार लिपटे।
,, अपनी योनि के दाने,, लिंग,, जो
सबसे सेंसिटिव होता है के आस-पास
के स्थान के साथ रगड़ने की
कोशिश करे।
,, स्त्री में कामेच्छा दोगुना होती है
और सेक्स दिमाग का गेम है जो
प्राइवेट पार्ट खेलते हैं मगर दिमाग
के कंट्रोल मे होते हैं और अगर दिमाग
पर कंट्रोल हो तो अच्छा नतीजा आता है।
स्त्री कंट्रोल करने में माहिर होती है, जबकि
उसे जबरदस्त सेक्स एक्शन की इच्छा है।
इसे पुरुष पार्टनर को महसूस करना चाहिए।
,,काम संहिता,,
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संभोग में फोरप्ले
जानवर से भी सीखो हम इंसान पेंटी खोले डाले वीर्य गिरा और शांत हो गए चाहे स्त्री छटपटाती रहे काम वासना में जलती रहे हमे क्या फर्क परता है अपना पानी गिरा काम खत्म ।
गाय भैंस या कोई जानवर भी पहले योनि को सहलाता है,जीभ से चाटता है योनि से स्राव होता है कई बार देखते होंगे मादा जानवर पेशाब कर देती है तो नर जानवर उसे चाट कर मुंह ऊपर कर लेता है।
यानी ये जानवर प्राकृतिक हैं प्रकृति की नियम का पालन करते हैं फोरप्ले करते हैं और जब पूर्ण रूप से मादा जानवर तैयार हो जाती है फिर लिंग को योनि में डालकर वीर्यपात करते हैं ।
परंतु ध्यान रखो ये जानवर संतति के लिए संभोग करते हैं हस्तमैथुन नही, गुदा मैथुन नही,मुंह में नही,या बिना कामुक हुए मादा को ये संभोग नही करते ।
प्राकृतिक बनाए हम इंसान भी ।
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🙏 🙏 🙏 मनुष्य की सोच🙏 🙏 🙏
🙏 एक #स्त्री और #पुरुष की सच्ची #मित्रता
किसी #शक की #मोहताज नही होती...
👸👉🤴🤝
#अपनी #सोच को #बदलिए,,,
🤔
#प्यार किया #पिता से तो
#अच्छी #बेटी कहलाई,
❤️👉👳
#प्यार किया #भाई से तो
अच्छी #बहना कहलाई,
❤️👉👦
किया #पति से #प्यार तो
#पतिव्रता कहलाई,
❤️👉🤴
#सेवा की जब #ससुर की तो
#संस्कारी_बहू कहलाई,
❤️👉🎅
#ममत्व जताया #बेटो पर तो
#ममता की #मूरत कहलाई,
❤️👉👩👦👦
एक #दोस्त बनाया दिल से
🌹
वो क्यों #चरित्रहीन कहलाई...?
🗣️🗣️🙏🥰🥰????????????????? 🥰🥰
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में प्रेम अगन झुलक रहा महुआ की बनी शराब हो तुम
में कुंज भूर्मरा सा मतवाला निष्गंध मधु पराग हों तुम🔥
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#अहोभाव
वासना के भिक्षा पात्र में कभी भी प्रेम नहीं समा सकता है। इसीलिए तो स्त्री उस पुरुष को खोजती है जो प्रेम के योग्य हो। उसे वासना नहीं चाहिए। उसे शुद्ध प्रेम, वह भी गहराई से करने वाला चाहिए।
वासना से भरा पुरुष हमेशा स्त्री को वासना का एक साधन ही समझता है।
वह उसे पुज्या नहीं भोग्या ही समझता है। वह हर पल वासना की दृष्टि से देखते रहता है। वह उसे प्रेम की नज़र से नहीं देखता है। जब कि स्त्री सदैव प्रेम से भरी रहती है। वह सदैव पूर्ण रहती है।
स्त्री की निरन्तर एक ही ख़ोज चलती रहती है। वह सुन्दर पुरुष को ख़ोज नहीं करती है। वह एक प्रेम करने वाला और उसे समझने वाला पुरूष की ख़ोज करती है। स्त्री की ख़ोज कभी भी नहीं रुकती है। वह सदैव उसे ही ख़ोजती है। जिस पर वह अपने प्रेम की वर्षा करे। स्त्री की इसी निरन्तर ख़ोज पर पुरुष उसके चरित्र पर प्रश्न चिन्ह लगा देता है। एक विफल पुरुष और कर भी क्या सकता है। केवल स्त्री पर प्रश्न चिन्ह लगाने के सिवाय।
स्त्री, पुरुष में वासना नहीं, वह सदैव प्रेम खोजती रहती है। वह प्रेम के गहनता तक उतरना चहाती है। वह रुह तक प्रेम का स्पर्श करना चहाती है।
वह अमर प्रेम खोजती है जो एकरुपता से उसे प्रेम करें। प्रेम की बरखा में रङ्ग जाना चहाती है। वह प्रेम से रङ्गने वाला रङ्गरेज़ खोजती है।और शायद इसीलिए स्त्री प्रेम की चाह में अपना देह सौपती है और पुरुष देह की लालसा में प्रेम करता है।
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