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*💫🌹 सुविचार 🌹* *🌹जीवन की किताबों पर बेशक नया कवर चढ़ाइये पर बिखरे पन्नोंको पहले प्यार से चिपकाइये तो सही उम्मीद कभी हमें छोड़कर नहीं जाती जल्दबाजी में हम ही उसे छोड़ देते हैं ज़िन्दगी की सारी शिकायत ऐसे ही ठीक हो जाएँ अगर लोग एक दूसरे के बारे में बोलने की जगह एक दूसरे से बोलना सीख लें जिन्दगी पल पल ढलती है जैसे रेत मुट्ठी से फिसलती हैं शिकवे कितने भी हो हर पल फिर भी हंसते रहना क्योंकि ये ज़िन्दगी जैसी भी हो बस एक बार ही मिलती है*
*🌹जब भी अपने आप पर घमंड आने लगे तो दीवार पर लगी अपने बुजुर्गो की फोटो जरूर देख लें कि वो क्या कुछ साथ ले गए हैं और उनके जाने के बाद लोग उनके बारे में किस तरीके की बातें करते हैं नजर और नसीब का भी कुछ ऐसा इत्तेफाक है कि नजर को अक्सर वही चीज पसन्द आती है जो नसीब में नहीं होती है और नसीब में लिखी चीज अक्सर नजर नहीं आती*। *💫🌹 जय श्री कृष्णा 🌹💫*
*साधना विधान*
यह प्रयोग किसी भी महीने में शुक्ल पक्ष की पंचमी से प्रारम्भ करना चाहिए।
साधक पीले रंग का वस्त्र धारण करें तथा पीले आसन पर पश्चिम दिशा की ओर मुंह करके बैठें।
सबसे पहले सामने किसी बाजोट पर पीला वस्त्र बिछाकर उस = पर दुर्गा यंत्र स्थापित कर लेना चाहिए और उसके पास ही सिंहवाहिनी देवी का चित्र रख देना चाहिए, सामने अगरबत्ती व दीपक भी लगा दें।
इसके बाद विद्युत माला से उपरोक्त मंत्र का जप प्रारम्भ करें, ग्यारह दिन में इक्यावन हजार मंत्र जप सम्पन्न करने पर यह प्रयोग पूर्ण होता है।
इस प्रयोग में रात्रि को कई प्रकार के दृश्य दिखाई पड़ेंगें, कई प्रकार की आवाजें भी सुनाई पड़ेंगीं, परन्तु साधक को विचलित नहीं होना चाहिए और बराबर मंत्र जप करते रहना चाहिए।
जब मंत्र जप पूरा हो जाय, तो बारहवें दिन किसी कुंवारी कन्या को भोजन कराकर पीले वस्त्र दान में देने चाहिए तथा उस रात्रि को पुनः साधना में बैठ कर अनिश्चित मंत्र जप करते रहना चाहिए।
आधी रात के लगभग मां जगदम्बा के साक्षात् दर्शन सम्भव हैं और इससे मनोवांछित वरदान प्राप्त होता है।
अगले दिन यंत्र तथा माला किसी नदी में उपरोक्त मंत्र बोलते हुए प्रवाहित कर दें।
*मंत्र*
।। *ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे* ।।
राम मन्त्र
यह मंत्र राम इष्ट रखने वाले साधकों के लिए तथा गृहस्थ व्यक्तियों के लिए उपयोगी माना गया है ।
विनियोग
अस्य राम मंत्रस्य, ब्रह्मा ऋषिः, गायत्री छन्दः, श्री रामो देवता, रां बीजम्, नमः शक्तिः, चतुर्वावध पुरुषार्थ सिद्धये जपे विनियोगः ।
ध्यान
नीलांभोधरकांतिकांतमनिशं वीरासनाध्यासिनम् । मुद्रां ज्ञानमयों दधानमपरं हस्तांबुजं जानुनि । सीतां पार्श्वगतां सरोरुहकरां विद्युन्निभां राघवम् । पश्यंतों मुकुटां गदा दिवि विधा कल्पोज्ज्वलांगं भजे ।।
रां रामाय नमः ।
राम मन्त्र
फल-छः लाख मंत्र जप करने से यह मंत्र सिद्ध होता है और इससे साधक की राम में भक्ति दृढ़ होती है ।
त्वमेव माता च पिता त्वमेव त्वमेव बन्धुश्च सखा त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव सर्वं त्वमेव । त्वमेव मम देवदेव ॥
लक्ष्मी कमला मंत्र
यह मंत्र लक्ष्मी का प्रिय एवं श्रेष्ठ मंत्र कहा गया है तथा इस मंत्र के जप या प्रयोग से विशेष आर्थिक अनुकूलता, सम्पन्नता, ऐश्वर्य और व्यापारिक उन्नति सम्भव है।
इस मंत्र का जप सम्पन्न करने के लिए आयु, जाति या वर्ग का कोई बन्धन नहीं है, कोई भी पुरुष या स्त्री इस मंत्र का जप सकता है तथा इस साधना को पूर्ण कर सकता है।
इसके लिए यह आवश्यक है, कि पीले रंग का आसन बिछा कर पूर्व या उत्तर की तरफ मुंह करके साधक को स्वयं भी पीला वस्त्र धारण कर बैठना चाहिए और।
साधक को अपने सामने अगरबत्ती एवं घी का दीपक भी लगा लेना चाहिए।
सामने 'गज लक्ष्मी' का प्राण प्रतिष्ठितत चित्र स्थापित करें। इस चित्र में लक्ष्मी बैठी हुई होती हैं तथा उनके दोनों तरफ हाथी उन पर जल-वर्षा या घट-वर्षा करते हैं, इस चित्र को कांच के फ्रेम में मढ़वा कर सामने रख देना चाहिए।
इसके बाद नीचे लिखे मंत्र की 'कमलगट्टे की माला' से एक माला या ग्यारह मालाएं फेरनी चाहिए, कुल मिला कर इस अनुष्ठान में सवा लाख मंत्र जप होता है। इसलिए साधक को चाहिए, कि वह कुल मिला कर 1250 मालाएं फेरे, ऐसा करने पर सवा लाख मंत्र जप पूरा हो । जाता है।
इस मंत्र का जप या तो प्रातःकाल सूर्योदय से पहले करना चाहिए। अथवा रात्रि को किया जा सकता है, पर इस बात का ध्यान रखें, कि यह. सवा लाख मंत्र जप चालीस दिन में पूरा हो जाना चाहिए। इस प्रकार का चालीस दिन का अनुष्ठान करने के लिए नित्य जितनी भी सम्भव हो, मालाएं फेरी जा सकती हैं।
चालीस दिन बाद माला को नदी में प्रवाहित कर दे और चित्र को पूजा स्थान में स्थापित कर दे, परन्तु यदि अनुष्ठान के रूप में इस मंत्र को नहीं जपना है, तो साधक को नित्य अपनी पूजा में एक माला या ग्यारह मालाएं फेरनी चाहिए।
अनुष्ठान के रूप में इस प्रयोग को सम्पन्न कर जब साधक मंत्र जप सवा लाख पूरा कर ले, तब इसी मंत्र से दूध के बने पेड़ों की 108 आहुतियां देनी चाहिए और प्रत्येक आहुति देते समय इसी मंत्र का उच्चारण करना चाहिए।
मंत्र
।।ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः ।।
यह मंत्र अत्यन्त महत्वपूर्ण है, साधकों ने इससे विशेष लाभ उठाया है।
मंत्र जप में भूल कर भी रुद्राक्ष माला का प्रयोग नहीं करना चाहिए, लक्ष्मी से सम्बन्धित मंत्र जप में कमलगट्टे की माला सबसे अधिक उपयुक्त एवं लाभकारी मानी गई है, परन्तु यह माला भी मंत्रसिद्ध प्राणप्रतिष्ठा युक्त हो।
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