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DR NARAYAN DUTT SHRIMALI

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राम ! राम !! राम !!! राम !!!! जैसे प्यास और जल, भूख और अन्न एक चीज है, ऐसे ही परमात्मा की भूख और परमात्मा एक चीज है । अन्न, जल सब जगह नहीं मिलते, पर परमात्मा सब जगह हैं । *परम श्रद्धेय स्वामी जी श्री रामसुखदास जी महाराज जी द्वारा विरचित ग्रंथ गीता प्रकाशन गोरखपुर से प्रकाशित स्वाति की बूंदें पृष्ठ संख्या २७* *राम ! राम !! राम !!! राम !!!!* 👏👏

राम ! राम !! राम !!! राम !!!! परमात्मा मैं - पन से भी नजदीक हैं । मैं - पन आपसे दूर है । मैं - पन के साथ आप निरंतर नहीं रह सकते । सुषुप्ति में मैं- पन नहीं रहता । परंतु परमात्मा के साथ आप निरंतर रहते हैं । *परम श्रद्धेय स्वामी जी श्री रामसुखदास जी महाराज जी द्वारा विरचित ग्रंथ गीता प्रकाशन गोरखपुर से प्रकाशित स्वाति की बूंदें पृष्ठ संख्या २८* *राम ! राम !! राम !!! राम !!!!* 👏👏

राम ! राम !! राम !!! राम !!!! सांसारिक सुख क्यों नहीं टिकता ? क्योंकि वह आपका है ही नहीं । *परम श्रद्धेय स्वामी जी श्री रामसुखदास जी महाराज जी द्वारा विरचित ग्रंथ गीता प्रकाशन गोरखपुर से प्रकाशित स्वाति की बूंदें पृष्ठ संख्या २६* *राम ! राम !! राम !!! राम !!!!* 👏👏

राम ! राम !! राम !!! राम !!!! संसार की प्राप्ति में तो भाई-भाई में लड़ाई हो जाती है, पर परमात्मा की प्राप्ति में दुनिया मात्र सहायक हो जाती है । *परम श्रद्धेय स्वामी जी श्री रामसुखदास जी महाराज जी द्वारा विरचित ग्रंथ गीता प्रकाशन गोरखपुर से प्रकाशित स्वाति की बूंदें पृष्ठ संख्या २६* *राम ! राम !! राम !!! राम !!!!* 👏👏

राम ! राम !! राम !!! राम !!!! *मुक्ति स्वर्ग आदि लोकों की तरह एक स्थान विशेष में नहीं है । मुक्त आप हैं ही । मिटने वाले से अलग हो जाओ तो मुक्ति स्वत: सिद्ध है ।* *परम श्रद्धेय स्वामी जी श्री रामसुखदास जी महाराज जी द्वारा विरचित ग्रंथ गीता प्रकाशन गोरखपुर से प्रकाशित स्वाति की बूंदें पृष्ठ संख्या २६* *राम ! राम !! राम !!! राम !!!!* 👏👏

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राम ! राम !! राम !!! राम !!!! असत् को सत्ता देना, महत्ता देना और अपना मानना - ये तीन बाधाएं हैं । इन तीन बाधाओं के रहते कितना ही साधन करो, वहीं - के - वहीं रहोगे, जैसे - रस्सी नौका से बंधी रहे तो रात भर नौका चलाते रहो, वहीं - के - वहीं रहोगे । *परम श्रद्धेय स्वामी जी श्री रामसुखदास जी महाराज जी द्वारा विरचित ग्रंथ गीता प्रकाशन गोरखपुर से प्रकाशित स्वाति की बूंदें पृष्ठ संख्या २५* *राम ! राम !! राम !!! राम !!!!* 👏👏

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NMSV SEPT 2024.pdf11.23 MB

*।। श्रीहरि: हर शरणम् ।।* 🌷 ★ सब लौकिक विद्याओंसे *अनजान* होते हुए भी *जिसने परमात्माको जान लिया है, वही वास्तवमें ज्ञानवान् है।* (१५। २०) 🌷 *संजीवनी-सुधा* पृष्ठ संख्या ९८ स्वामीजी श्री रामसुखदासजी महाराज *।। श्री कृष्णार्पणमस्तु ।।* 🌹🙏

राम ! राम !! राम !!! राम !!!! *संसार की सेवा करने से भी भगवान् में प्रेम होगा और भगवान् को (अपना मानकर) याद करने से भी भगवान् में प्रेम होगा ।* *परम श्रद्धेय स्वामी जी श्री रामसुखदास जी महाराज जी द्वारा विरचित ग्रंथ गीता प्रकाशन गोरखपुर से प्रकाशित स्वाति की बूंदें पृष्ठ संख्या २3* *राम ! राम !! राम !!! राम !!!!* 👏👏

राम ! राम !! राम !!! राम !!!! थोड़ा धन होने से आप विशेष पुण्य कर सकते हैं, ज्यादा धन होने से नहीं । *परम श्रद्धेय स्वामी जी श्री रामसुखदास जी महाराज जी द्वारा विरचित ग्रंथ गीता प्रकाशन गोरखपुर से प्रकाशित स्वाति की बूंदें पृष्ठ संख्या २3* *राम ! राम !! राम !!! राम !!!!* 👏👏

राम ! राम !! राम !!! राम !!!! शरीर प्रतिक्षण बदलता है, एक क्षण भी आपके साथ नहीं रहता । शरीर को अपना मानना बेइमानी है । बेईमानी को छोड़ दो तो मुक्ति है । बेईमानी से बंधन है, ईमानदारी से मुक्ति है। *परम श्रद्धेय स्वामी जी श्री रामसुखदास जी महाराज जी द्वारा विरचित ग्रंथ गीता प्रकाशन गोरखपुर से प्रकाशित स्वाति की बूंदें पृष्ठ संख्या २२* *राम ! राम !! राम !!! राम !!!!* 👏👏

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राम ! राम !! राम !!! राम !!!! भगवान् सर्वज्ञ हैं, सर्वसमर्थ हैं और दयालु भी हैं, ऐसे भगवान् के रहते हम अपने को अनाथ क्यों मानें ? *परम श्रद्धेय स्वामी जी श्री रामसुखदास जी महाराज जी द्वारा विरचित ग्रंथ गीता प्रकाशन गोरखपुर से प्रकाशित स्वाति की बूंदें पृष्ठ संख्या २२* *राम ! राम !! राम !!! राम !!!!* 👏👏

राम ! राम !! राम !!! राम !!!! आप "साधक संजीवनी" आदरपूर्वक समझ -समझकर पढ़ो तो अंतः करण में फर्क जरूर पड़ेगा । *परम श्रद्धेय स्वामी जी श्री रामसुखदास जी महाराज जी द्वारा विरचित ग्रंथ गीता प्रकाशन गोरखपुर से प्रकाशित स्वाति की बूंदें पृष्ठ संख्या २१* *राम ! राम !! राम !!! राम !!!!* 👏👏

राम ! राम !! राम !!! राम !!!! *भगवान् के सिवाय कुछ नहीं है - यह ऊंची से ऊंची दार्शनिक दृष्टि है ।* *परम श्रद्धेय स्वामी जी श्री रामसुखदास जी महाराज जी द्वारा विरचित ग्रंथ गीता प्रकाशन गोरखपुर से प्रकाशित  स्वाति की बूंदें पृष्ठ संख्या २०* *राम ! राम !! राम !!! राम !!!!* 👏👏