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| 2 | जहाँ हिंदू आज़ादी से सड़कों, ट्रेनों और हर सार्वजनिक जगह पर अपने त्योहार मनाते हैं, “जय श्री राम” और तरह-तरह के भजन गाते हैं, वहीं कोई मुस्लिम सार्वजनिक जगह पर नमाज़ पढ़ ले तो उसका वीडियो बनाया जाता है और उसे परेशान किया जाता है।
*इसी का नाम आज़ादी है क्या?*
#IndependenceDay
https://x.com/i/status/2088394473374183585 | 180 |
| 3 | *Kya isi ka naam azaadi hai?*
Jahan Hindu public roads, trains aur doosri public places par azaadi se apne tyohar manate hain, “Jai Shri Ram” aur bhajan padhte hain, wahan agar koi Muslim public place par namaz padh le to uska video banaya jata hai, use pareshan kiya jata hai.
Agar azaadi sab ke liye hai, to phir ibadat ki azaadi bhi sab ke liye barabar honi chahiye.
*Kisi ek ke liye azaadi aur doosre ke liye pabandi kya isi ko azaadi kehte hain?* | 168 |
| 4 | محاضرات و پریزنٹیشن پروگرام بعنوان
*سیرت النبی صلی اللہ علیہ وسلم*
Seerah presentation contest
🎙️Sadarati khitab:
صدارتی خطاب
Hazrat Mufti Muhammed Sarodi
شیخ الجامعہ حضرت مفتی محمد سارودی صاحب مد ظلہ
🕌 Jamiah Haqqaniyah-Kathor
🗓️02-08-2026
https://youtu.be/0y7gIi1I-Tk | 167 |
| 5 | 📍 Holland Park Masjid, Brisbane (Australia)
The Holland Park Mosque is the oldest Masjid on the East Coast of Australia and has consistently been opened for over 100 years. Established in 1908 by Afghan cameleers, this 114 year old site is a pioneer for all Islamic societies, and a major spiritual hub of Brisbane and its surrounding cities. Boasting a rich history, the Holland Park Mosque is a proud testament to how Muslims have been a part of the Australian fabric for over a century. (Via the Holland Park Mosque website)
https://www.hollandparkmosque.org.au/ | 208 |
| 6 | 📍 Holland Park Masjid, Brisbane (Australia)
The Holland Park Mosque is the oldest Masjid on the East Coast of Australia and has consistently been opened for over 100 years. Established in 1908 by Afghan cameleers, this 114 year old site is a pioneer for all Islamic societies, and a major spiritual hub of Brisbane and its surrounding cities. Boasting a rich history, the Holland Park Mosque is a proud testament to how Muslims have been a part of the Australian fabric for over a century. (Via the Holland Park Mosque website)
https://www.hollandparkmosque.org.au/ | 1 |
| 7 | 没有文字... | 1 |
| 8 | 📖┃𝙁𝙄𝘼𝙉𝙕 𝙡𝙖𝙪𝙣𝙘𝙝𝙚𝙨 𝐒𝐢𝐥𝐞𝐧𝐭 𝐕𝐨𝐢𝐜𝐞𝐬 𝐨𝐟 𝐌𝐮𝐬𝐥𝐢𝐦𝐬 𝐢𝐧 𝐍𝐞𝐰 𝐙𝐞𝐚𝐥𝐚𝐧𝐝: 𝐀 𝐒𝐨𝐜𝐢𝐚𝐥 𝐇𝐢𝐬𝐭𝐨𝐫𝐲 𝟏𝟕𝟔𝟗–𝟏𝟗𝟓𝟗
For the first time, FIANZ is proud to share a publication tracing the largely untold history of Muslims in Aotearoa New Zealand from 1769 to 1959.
This history did not begin with the mosques and Islamic centres familiar to us today. It is found in colonial records and in the lives of Muslims who traded, farmed, raised families, served New Zealand during two World Wars, and were laid to rest here - generations before “diversity” became part of our national vocabulary.
For a community too often regarded as recent arrivals, 𝐒𝐢𝐥𝐞𝐧𝐭 𝐕𝐨𝐢𝐜𝐞𝐬 is a powerful testament to our longstanding place in the story of New Zealand. These lives are not merely footnotes; they form part of our country’s shared history.
📘 Read or download 𝐒𝐢𝐥𝐞𝐧𝐭 𝐕𝐨𝐢𝐜𝐞𝐬 𝐨𝐟 𝐌𝐮𝐬𝐥𝐢𝐦𝐬 𝐢𝐧 𝐍𝐞𝐰 𝐙𝐞𝐚𝐥𝐚𝐧𝐝 here: https://heyzine.com/flip-book/3f0ed9cf4a.html
We invite you to read and share this important chapter of our collective history. | 243 |
| 9 | #FreedomFeels #JailDiary
https://www.facebook.com/share/1JJqR78PSy/ | 1 |
| 10 | #जेल_की_कहानी #Day1
फ़ज़र की नमाज़ पढ़ कर बैठा तो बैरक के काफ़ी सारे बंदे मेरे पास आ कर बैठ गए पूछने लगे मेरे बारे में के किस केस में आया हूँ चोट कैसे लगी कहाँ का रहने वाला हूँ वगैरह वगेरह मैं एक एक कर के जवाब दे रहा था, इतने में किसी ने आवाज़ दी चाय आ गई सभी उठ कर भागे चाय लेने के लिए। कुछ मिनट बाद मास्टर जी एक ग्लास में चाय लाए और उसमें से आधी मुझे दी, हालांकि मैं चाय का कुछ खास शौक़ीन नहीं हूँ फिर भी मैंने चाय ले ली जब चाय की शक्ल देखी तो पीने का दिल ही नहीं किया फिर भी एक घूँट टेस्ट करी तो ऐसा लगा के जैसे गर्म पानी में चीनी घोल रखी है। भूक भी लग रही थी ज़ोर की तो मैं वो चाय पी गया या यूँह कहिये के गटक गया। चंद मिनट के बाद नाश्ता आया जिसमे हर किसीको आधा ग्लास खिचड़ी मिली। वह इतनी कम थी के छोटे बच्चे का भी पेट ना भरे। बाहरहाल वह खिचड़ी पी के बैठा गया और कुछ लोगो से बात करने लगा। दूसरे बैरक से भी लोग मुझे देखने आने लगे और यह बात हो रही थी की खुरेजी से कोई मुल्लाजी आए हैं और दोनों टांगे टूटी हुई हैं। उन्ही लोगो में एक लड़का आया जिसने अपना नाम ज़ियाउद्दीन बताया और बोला वो मेरे घर के पास रहता है और मुझे जानता है, उसने मेरी टीशर्ट की तरफ़ ध्यान दिलाया जिस पर बहुत सारे ख़ून के धब्बे लगे हुए थे और पूरी तरह गर्द आलूद थी, वो वापिस गया और एक टीशर्ट के कर आया बोला भाई आप टीशर्ट चेंज करलो। मैंने जब टीशर्ट उतारी तो उसका हाल देखा तो पता चला कल क्या कुछ हुआ मेरे साथ (यह टीशर्ट मेरे पास अभी तक है)। थोड़ी देर बाद दो लड़के आए बैरक में दोनों ने बहुत फैंसी कपड़े और जूते पहन रखे थे। आते ही उन्होंने पूछा खालिद भाई कौन है? किसी ने मेरी तरफ़ इशारा किया वो मेरे पास आए आकर सलाम किया और अपना नाम सलीम न आशु बताया, बोले भाई हम नासिर गैंग से हैं और आप हमारे बड़े भाई हो, अभी तो हम तारीख़ पर जा रहे हैं शाम को मिलेंगे इतना कह कर हाथ मिलाया और जाने लगे जाते जाते एक लड़के को थप्पड़ मारा और पूरे बैरक को गाली दे कर कहा यह अपने बड़े भाई हैं कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए इन्हें। मैं ना इन्हें जानता था ना इनके बॉस को बैरक के लोगो ने बताया के नासिर गैंग जमना पार का सबसे बड़ा गैंग है और यह दोनों उसी गैंग के गुर्गे हैं और जेल में इनका बहुत दबदबा है। थोड़ी देर बाद ही वार्ड का मुंशी गौतम आया व्हील चेयर के साथ और बोला जो बंदी भाई कल आए हैं वो लाइन लगा के चक्कर (जेल का ऑफिस) पहुँचें सुपरिंटेंडेंट साहब के सामने पेशी के लिए।व्हील चेयर देख कर मैं खुश हो गया सोचा एक प्रॉब्लम को ख़त्म हुई। गौतम ने पुष्पक जो मेरे पास बैठा था उससे कहा के तू ख़ान साहब के साथ रहना। मैं वहाँ से उठा और सहारा ले कर व्हील चेयर तक पहुँचा उस पर बैठते ही पुष्पक ने कहा भाई यह आपकी नई ऑडी है। जब उसने पुश किया तो वो आगे चल ही नहीं रही थी फिर गौतम ने बताया अरे यह थोड़ी ख़राब है सिर्फ़ रिवर्स गियर में चलती है। मैंने कहा वाह इसकी हालत तो मुझसे भी ज़्यादा ख़राब है। बहरहाल पुष्पक मुझे जैसे तैसे चक्कर तक ले गया वहाँ सुपरिंटेंडेंट का दरबार लगा हुआ था। सामने बड़ी सी कुर्सी पर एक बुजुर्ग आदमी बैठा था जो था तो जेल का सुपरिंटेंडेंट लेकिन सब उसे ताऊ कहते थे, अगल बगल DS AS बैठे थे। पास में कुछ खास बंदी (गैंगस्टर) और सेवादार खड़े थे सामने जमीन पर नए आए हुए बंदी मैं अपनी ऑडी में सबसे पीछे बैठा था, मुझे देख कर एक पतला दुबला सा लड़का जो ताऊ के पीछे खड़ा था उनके कान में कुछ कहने लगा (उसका नाम नोनी था और जेल उसे डॉन साब कहती थी) ताऊ ने इशारा कर के मेरी ऑडी अपने पास बुलाली। इस पेशी में नए बंदी अपना परिचय देते हैं। नाम क्राइम और एंट्री के हिसाब से ऑफिसर सबको गाली बकते हैं और वार्निंग देते हैं। मुझे लगा अब मुझे भी यह ज़िल्लत झेलनी पड़ेगी लेकिन जब मेरा नंबर आया तो ताऊ ने पूछा आपका नाम खालिद है मैंने कहा जी सर। वो बोले १-२ दिन में आपको दूसरे बैरक में शिफ्ट कर देंगे, मैं बोला सर में आज शाम को चला जाऊँगा। वो बोले अच्छी बात है अगर नहीं गए तो बता देना किसी चीज़ की ज़रूरत हो तो। में थोड़ा हैरान हुआ जो अब तक बाक़ी सबको माँ बहन की गालियाँ बक रहा था वो मुझसे आप जनाब क्यों कर रहा है। फिर नोनी मेरे पास आया और मेरे कान में बोला भाई मेरा नाम नोनी है आपको जानता हूँ आप मुझे नहीं जानते आप टेंशन मत लेना मैं सब संभाल लूंगा। मैंने उसे शुक्रिया कहा तो वो बोला अरे आप बड़े भाई हो, शाम को बुलाऊँगा आपको अपने पास। इतने में एक सेवादार आया और मेरा नाम पुकारा मैंने देखा उसकी तरफ़ तो बोला आपकी मुलाक़ात है। मैं ख़ुश हो गया क्यूँकि मुझे पता था मेरी वाइफ और भाई ज़रूर आए होंगे। पुष्पक ने ऑडी का रिवर्स गियर मुलाक़ात जंगले की तरफ़ लगा दिया और मैं अपनी पहली मुलाक़ात का इंतज़ार करने लगा।
To be continue….
ख़ालिद सैफ़ी की 🔏 से | 217 |
| 11 | 没有文字... | 157 |
| 12 | ICOM, its a private islamic top school. They are looking for a imam for school
The school is opposite to Melbourne Grand Mosque
Pls send to someone eligible to work in Australia and interested to move
https://nz.seek.com/job/93283163?tracking=SHR-IOS-SharedJob-anz-2 | 171 |
| 13 | 没有文字... | 181 |
| 14 | #जेल_की_कहानी
मैं जैसे ही जेल अंदर दाखिल हुआ मुझे मुलाइजह वार्ड का मुंशी खड़ा मिला उसने मेरी हालत देख के मुझे सहारा दिया। मैंने उससे पूछा क्या व्हील चेयर मिल सकती है क्यूँकि मुझसे अब बिल्कुल चला नहीं जा रहा था। उसने कहा भाई अभी तो नहीं मिल सकती लेकिन सुबह दिलवा दूँगा। मैंने कहा भाई मुझे चला नहीं जा रहा क्या करूँ। उसने मुझे साइड में बिठाया और किसी को लेने चला गया फिर वह एक और क़ैदी के साथ आया और उन दोनों ने मुझे सहारा दिया चलने के लिए। जैसे तैसे वह मुझे मुलाइजह वार्ड के बैरक में ले गए उस वक़्त क़रीब १२ बाज चुके थे। बैरक में सन्नाटा था बस कुछ लोगों के खाराटे सुनाई दे रहे थे। क़ैदी मुंशी जिसका नाम गौतम था उसने ताला खोला और मुझे अंदर कर दिया और यह कह कर के कल सुबह मिलता हूँ व्हील चेयर के साथ वह ताला लगा कर चला गया। मैं वहाँ खड़ा आस पास देखता रहा के सीन क्या है बैरक का। चारों तरफ़ लोग सोए हुए थे या सोने की कोशिश कर रहे थे। एक बड़ा सा हाल जिसमे 70-80 लोग सो रहे थे आठ पंखे लगे थे चार ट्यूब लाइट जल रही थी (जेल में रात को लाइट बंद करना अलाउड नहीं होता, पुराने लोग नहीं मानते लेकिन नए लोग रोशनी में ही सोते हैं) मैं खड़ा सोच ही रहा था के क्या करूँ कहाँ बैठूँ, इतने में एक लड़का (जिसका नाम कमरुद्दीन था) उठ कर मेरे पास आया और सलाम किया मेरा हाथ पकड़ कर आगे ले गया गेट के सामने ही दो लोग लेटे हुए थे उन्होंने मेरे लिए जगह दी और मैं बैठ गया। जिन्होंने जगह दी उन्हें सब मास्टर जी कहते थे (टेलर) मास्टर जी ने पूछा खाना खाओगे क्या? मैंने कहा जी, उनके पास कुछ बचा हुआ खाना था जो बहुत थोड़ा सा था और मैं सुबह से भूका था। क़मरूद्दीन ने बैरक से कुछ कुछ करके खाना जमा किया और मुझे लाकर दिया। मुझे याद नहीं क्या था कैसा था बस इतना याद है मैंने जल्दी जल्दी वह खा लिया। फिर मैंने कमरुद्दीन से पूछा भाई यहाँ स्तंजा और वुज़ू करने का क्या इंतज़ाम है। वो मुझे सहारा दे कर बाथरूम में ले गया, पैरों में फ्रैक्चर की वजह से टॉयलेट में बैठा नहीं जा सका और इंग्लिश सीट वहाँ थी नहीं बहरहाल किसी तरह स्टैंजा किया फिर उस भाई ने वुज़ू कराया जैसे ही नाक साफ़ करी नाक से ख़ून निकलने लगा कुल्ली की तो मुँह से भी ख़ून आया चेहरा धोया तो दाढ़ी के बालों का गुच्छा हाथ में आ गया। यह सब देख कर कमरू भी डर गया पूछा भाई यह सब कैसे हुआ मैंने बताया भाई पुलिस ने मारा है, मगर क्यों उसने पूछा मैंने उसे थोड़ा बहुत बता दिया वो बोला मुझे लगा लूट करते हुए आप पकड़े गए हैं इसलिए इतनी चोट आई हैं। मैंने पूछा क्या मैं लुटेरा दिखता हूँ वो बोला दिखता तो मैं भी नहीं हूँ और क्राइम तो करता हूँ। उसने पूछा कब तक छुट जाओगे आप? मैंने बड़े कॉन्फिडेंस से कहा कल शाम तक चला जाऊँगा (जब तक कमरू उस जेल में रहा इस बात पर मुझे छेड़ता रहा) वुज़ू करके वापिस अपनी जगह पर बैठ गया मास्टर जी ने क़िबला बताया और मैंने बैठे हुए उस दिन की नमाज़ असर मग़रिब और ईशा पढ़ी और फिर लेट गया जब लेटा तो पता चला जिस्म में कहाँ कहाँ दर्द हो रहा है। सब से ज़्यादा टांगे और पीठ दुख रहे थे और ऐसे में ज़मीन पर सोना पड़ रहा था वह भी ठंडी। ना चादर ना तकिया। मैं सोचने लगा यह अचानक लाइफ में क्या हो गया? चंद मिनटों में ही मुझे नींद आ गई और मैं सीधा उठा जब वार्डन सुबह गिनती करने आया। छह बजे के आस पास का वक़्त होगा, कमरू भी उठ के मेरे पास आया और पूछने लगा अगर मुझे कुछ चाहिए, मैंने कहा भाई बाथरूम ले चलो वुज़ू करके नमाज़ पढ़नी है। जैसे ही उठने की कोशिश की तो मुझसे उठा ही नहीं जा रहा था। शायद ठंडे फर्श पर सोने की वजह से जिस्म अकड़ गया था और चोटों का असल पता भी अगले दिन ही चलता है। कमरू ने एक और लड़के को बुलाया जिसका नाम पुष्पक था दोनों ने मिल कर मुझे संभाला और बाथरूम ले गए। वुज़ू करते हुए फिर नाक से खून निकला और रात से ज़्यादा निकला नाक में शदीद दर्द हो रहा था थोड़ा सा ज़ोर डाला तो याद आया एक पुलिस वाले ने मेरे मुँह पर तीन चार लात मारी थीं और एक मेरी नाक पर लगी थी, इसी वजह से नाक की हड्डी थोड़ी सी खिसक गई थी और उसे ठीक होने में करीब २ महीने लगे। बहरहाल वुज़ू किया नमाज़ पढ़ी और फिर कुछ लोग मेरे पास आ कर बैठ गए। कुछ इस तरह गुजरी जेल में मेरी पहली रात।
कहानी भी जारी है,,,,,,,,
ख़ालिद सैफ़ी की 🔏 से
#JailDiary #FreedomFeels
https://www.facebook.com/share/p/1EUSkQqTKx/ | 156 |
| 15 | https://x.com/i/status/2079554578782302522 | 91 |
| 16 | #जेल_की_कहानी #जेल_प्रवेश
26-02-2020 वो दिन जब मुझे जेल भेजा गया। थाने से हॉस्पिटल फिर कोर्ट और वहाँ से जेल पहुँचा। मुझे उस दिन पता चला के मंडोली में भी कोई जेल है। पुलिस वाले मुझे जेल नंबर १२ में ले के पहुंचे और कुछ कागजी कार्यवाही करने के बाद मुझे वहाँ छोड़ कर चले गए। मेरी दोनों टांगो पर पलस्तर था एक उंगली टूटी हुई थी और ज़िस्म का कोई हिस्सा नहीं था जिस पर चोट ना हो। मैं एक तरफ़ दीवार का सहारा ले के ज़मीन पर बैठ गया और चारों तरफ़ देखने लगा, मैं पहली बार जेल गया था कभी किसी की मुलाक़ात के लिए भी जेल जाना नहीं हुआ। जिस जगह पर था उसे डिओढ़ी कहते हैं जो उर्दू का शब्द है जिसका मतलब स्वागत कक्ष होता है। एक बड़ा सा हाल जिसकी दीवारों पर गांधी जी की बड़ी बड़ी तस्वीरें पेंट हुई थी। एक बहुत बड़ा ब्राउन कलर का गेट जो जेल में अंदर की तरफ़ जाने के लिए था। उस गेट पर एक बहुत खूबसूरत पंख फैलाए पंछी की पेंटिंग बनी हुई थी (वो मेरी जेल की फ़ेवरेट पेंटिंग थी क्यूँकि वह आज़ादी का एहसास दिलाती थी) मैं उस पेंटिंग को बड़े ध्यान से देख रहा था और पूरा दिन जो कुछ हुआ उसके बारे में सोच रहा था। तभी एक कड़क आवाज़ ने मेरा ध्यान भटकाया मैंने देखा एक भयानक सी शक्ल वाला आदमी जो वर्दी में था और हाव भाव से नशे में मालूम हो रहा था। किस केस में आया है, उसने बड़े गुस्से भरे लहज़े में पूछा मैंने कहा प्रोटेस्ट के केस में। वो बोला यह प्रोटेस्ट क्या होता है? मैंने कहा धरना प्रदर्शन वो चिल्ला के बोला तो दंगा बोल ना। मैं चुप रहा वो मेरे पास आ कर खड़ा हो गया और चिल्ला कर बोला बता क्या कर के आया है? मेरी चुप्पी देख कर गाली दे कर उल्टा सीधा बोलने लगा फिर मेरे और पास आया मुझे लगा अब यह मुझे पीटेगा मैं पहले ही इतना पिट चुका था के उसके पास आने भर से सहम गया। उसने मेरे बाल पकड़े और बोला कितने लोगो को मारा है। मैंने कहा किसी को नहीं फिर बोला यह हालत किसने की तेरी मैंने कहा पुलिस ने बोला तुझे तो गोली मार देनी चाहिए थी बिना मतलब जेल का खर्चा बढ़ाने के लिए भेज दिया। मुझे पक्का हो गया अब फिर पिटना पड़ेगा मैं आंख बंद करे अगले लात या घूंसे का इंतेज़ार कर रहा था तभी किसी ने मेरा नाम पुकारा मैंने ऊपर देखा तो थोड़ी दूर एक लड़का खड़ा था उसने कहा मेडिकल मुलाईजह के लिए अंदर आओ। वो मुझे ऐसा लगा जैसे किसी फरिश्ते ने आ कर मुझे बचा लिया हो। मेडिकल रूम में दाखिल होते ही में उस लड़के को शुक्रिया बोला उसने हैरानी से देखा कहा कुछ नहीं। वह भी एक बंदी था जिसका नाम हरिओम था जो जेल की OPD में सेवादार था। फिर उसने मुझसे मेडिकल जानकारी ली जैसे मुझे कौनसी बीमारी हैं कौन सी दवा लेता हूँ क्या नशा करता हूँ वगैरह वगैरह सबसे फनी सवाल उसने पूछा क्या मेरी २ गोली (Testicles) हैं या एक? मैं सुन कर हंस पड़ा और बोला यह कैसा सवाल है भाई। कहा जरूरी है रिकॉर्ड में लिखना, बाद कोई यह ना कह दे की मेरी गोली जेल में चोरी हो गई है। मैं हंस पड़ा और कहा ऐसी कौन शिकायत करेगा। उसका व्यवहार मुझे अच्छा लगा और हम उसी दिन से दोस्त बन गए और जब तक में उस जेल में रहा तब तक हरिओम मेरा दोस्त रहा। मेडिकल चेक अप के बाद तलाशी हुई जिस में आम तौर पर नीचे के सारे कपड़े उतरवाए जाते हैं और उठक बैठक लगवाई जाती है। यह अपने आप में बड़ा भद्दा और शर्मनाक सा काम है। क्यूंकि मेरे दोनों पैरों में प्लास्टर था इसलिए मुझे इस प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ा। फिर वह जल्लाद दुबारा मेरे पास आया और बोला अब तो अंदर चला जा तुझे बाद में देखता हूँ। फिर जेल के अंदर जाने वाले गेट से में अंदर गया वहाँ एक सेवादार पहले से खड़ा था जिसकी ड्यूटी मुलाइजह (New Comers) वार्ड में थी।
खालिद सैफ़ी की कलम 🔏 से
https://www.facebook.com/share/p/1Xs3sQrS4K/ | 229 |
| 17 | 没有文字... | 285 |
| 18 | *Auckland Against Modi* | 273 |
| 19 | Every child deserves a place to learn the Qur’an. Every community deserves a place to gather in worship.
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🕌UK برطانیہ
https://youtu.be/l3548SFudcg | 290 |
