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Current Affairs Quiz 20 May 2020 दैनिक सामान्य ज्ञान क्विज
https://www.simplifiedshiksha.com/current-affairs-quiz-20-may/
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दक्षिणी अंडमान द्वीप के दुर्लभ ताड़/पाम को ‘जवाहरलाल नेहरू ट्रॉपिकल बोटैनिकल गार्डन एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट’ (Jawaharlal Nehru Tropical Botanic Garden and Research Institute- JNTBGRI) की मदद से पलोदे (Palode) (केरल) में उगाया जाएगा।
प्रमुख बिंदु:
पिनंगा अंडमानेंसिस (Pinanga andamanensis) जिसे एक समय विलुप्त प्रजाति के रूप में दर्ज किया गया था। यह एरेका ताड़ (Areca Palm) से संबंधित है। दक्षिण अंडमान के 'माउंट हैरियट नेशनल पार्क' के एक छोटे क्षेत्र में 600 पौधे पाए जाते है।
भारतीय मुख्य भूमि पर ‘अंडमान द्वीप के दुर्लभ ताड़’ के जर्मप्लाज़्म का संरक्षण किया जाएगा ताकि प्राकृतिक आपदा के समय यदि अंडमान द्वीप से यह नष्ट भी हो जाए तो इसका निरंतर अस्तित्त्व सुनिश्चित हो सके।
पिनंगा अंडमानेंसिस (Pinanga andamanensis):
‘पिनंगा अंडमानेंसिस’ ‘चरम लुप्तप्राय प्रजाति’ (Critically Endangered Species) है, जो अंडमान द्वीप समूह के स्थानिक लुप्तप्राय प्रजातियों में से एक है।
सर्वप्रथम वर्ष 1934 में ‘इतालवी वनस्पतिशास्त्री’ ओडोराडो बेस्करी द्वारा इसे वर्णित किया गया था।
वर्ष 1992 में इसे विलुप्त मान लिया गया था।
ताड़ के पेड़ का नाम पिनंगा क्यों?
यह नाम 'पेनांग ’से लिया गया है, जो मलेशिया का एक राज्य है। पिनांग का मूल 'पुलाऊ पिनांग' (Pulau Pinang) में है, जिसका अर्थ है 'अरेका नट पाम का द्वीप' (Island of the Areca Nut Palm)।
जैव विविधता संरक्षण की विधियाँ:
स्व-स्थानिक संरक्षण (In Situ Conservation):
इस प्रकार के संरक्षण के अंतर्गत पौधों एवं प्राणियों को उनके प्राकृतिक वास स्थान अथवा सुरक्षित क्षेत्रों में संरक्षित किया जाता है। संरक्षित क्षेत्र भूमि या समुद्र के वे क्षेत्र होते हैं जो संरक्षण के लिये समर्पित हैं तथा जैव विविधता को बनाए रखते हैं।
गैर-स्थानिक संरक्षण (Ex Situ Conservation):
गैर-स्थानिक संरक्षण विधि में वनस्पति या जीन को मूल वातावरण से अलग स्थान पर संरक्षित किया जाता है।
इसमें चिड़ियाघर, उद्यान, नर्सरी, जीन पूल आदि में पूर्ण नियंत्रित स्थितियों में प्रजातियों का संरक्षण किया जाता है।
गैर-स्थानिक संरक्षण की विधियाँ:
गैर-स्थानिक संरक्षण रणनीतियों में निम्नलिखित विधियाँ शामिल हैं
वनस्पति उद्यान (Botanical Garden)
प्राणी उद्यान (Zoological Garden)
जीन, पराग, बीज आदि का संरक्षण (Conservation of Gene, Pollen, Seed etc.)
टिशू कल्चर (Tissue Culture)
डीएनए बैंक (DNA bank)
जीन बैंकः
आनुवांशिक संसाधनों का गैर-स्थानिक संरक्षण जीन बैंकों एवं बीज बैंकों द्वारा किया जाता है। ‘राष्ट्रीय पादप आनुवांशिक संसाधन ब्यूरो’ (The National Bureau of Plant Genetic Resources, NBPGR), नई दिल्ली फसल के पौधों के जीन पूल तथा उगाई जाने वाली किस्मों के बीजों को संरक्षित रखता है।
‘राष्ट्रीय पशु आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो’ (The National Bureau of Animal Genetic Resources) करनाल (हरियाणा), पालतू पशुओं के आनुवांशिक पदार्थ का रखरखाव करता है।
राष्ट्रीय मत्स्य आनुवांशिक संसाधन ब्यूरो (The National Bureau of Fish Genetic Resources), लखनऊ मत्स्यन के संरक्षण के लिये समर्पित है।
गैर-स्थानिक संरक्षण का महत्त्व:
यह प्रजातियों को लंबा जीवनकाल तथा प्रजनन गतिविधि के लिये स्थान प्रदान करता है।
संरक्षण प्रणालियों में आनुवंशिक तकनीकों का उपयोग किया जा सकता है।
जीवों की प्रजातियों को फिर से वन में स्थानापन्न किया जा सकता है।
जलवायु परिवर्तन और गैर-स्थानिक संरक्षण:
वर्तमान में सभी पारिस्थितिक तंत्र, जलवायु परिवर्तन के प्रति सुभेद्य हैं, और विशेष रूप से समुद्र तटीय वनों में गिरावट आ सकती है। जलवायु परिवर्तन मॉडलों के अनुसार, वैश्विक प्रजातियों तथा उनके आवासों के वितरण में तीव्र तथा व्यापक बदलाव हो सकता है।
हालांकि जलवायु परिवर्तन में वृद्धि, निवास स्थान का विखंडन कारण प्रजातियों की अनुकूलन क्षमता कम हो जाती है। अत: प्रजातियों के संरक्षण में मानव की भूमिका लगातार बढ़ रही है।
गैर-स्थानिक प्रजातीय संरक्षण की सीमाएँ:
चिड़ियाघर में जानवरों का व्यवहार बड़ी संख्या में लोगों के लगातार भ्रमण पर आने से प्रभावित हो सकता है।
यद्यपि गैर-स्थानिक संरक्षण विधियाँ यद्यपि कुछ प्रजातियों के दीर्घकालिक अस्तित्त्व के लिये लाभदायक हो सकती हैं, लेकिन जलवायु परिवर्तन के दौरान जीवों को प्रजनन तथा पुनर्स्थापन के दौरान ठीक से प्रबंधित नहीं होने पर चुनौती का सामना करना पड़ सकता है।
निष्कर्ष:
जैव विविधता मानव अस्तित्त्व तथा प्राकृतिक प्रणालियों के अस्तित्त्व के लिये बेहद आवश्यक है, हालाँकि जैव-विविधता को सर्वाधिक नुकसान मानवजनित गतिविधियों के कारण हुआ है है। अत: जैव-विविधता संरक्षण की दिशा में स्व-स्थानिक और गैर-स्थानिक दोनों तरीकों से संरक्षण की आवश्यकता होती है।
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Indian Institutes Of Technology- Delhi) और ‘नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड इंडस्ट्रियल साइंस एंड टेक्नोलॉजी’ [National Institute of Advanced Industrial Science and Technology (AIST)- Japan] द्वारा किये गए एक संयुक्त अध्ययन के अनुसार, अश्वगंधा (Ashwagandha) और ‘प्रोपोलिस’ (Propolis) COVID-19 हेतु दवा में मददगार साबित हो सकते हैं।
प्रमुख बिंदु:
इस शोधकार्य को ‘बायोमॉलिक्यूलर स्ट्रक्चर एंड डायनेमिक्स’ (Biomolecular Structure and Dynamics) पत्रिका में प्रकाशित किया जाएगा।
IIT दिल्ली और AIST के शोधकर्त्ताओं ने अश्वगंधा और प्रोपोलिस आधारित यौगिकों का उपयोग COVID-19 के एंजाइम को लक्षित करने के लिये किया है, जिसे ‘मेन प्रोटीज़’ (Main Protease) या ‘एम्प्रो’ (Mpro) के रूप में जाना जाता है।
वायरस के प्रतिलिपि निर्माण में ‘मेन प्रोटीज़’ (Main Protease) या ‘एम्प्रो’ (Mpro) एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
शोधकर्त्ताओं के अनुसार, ‘विथानोन’ [Withanone (Wi-N)] और ‘कैफ्फेसिक एसिड फेनेथाइल एस्टर’ (Caffeic Acid Phenethyl Ester-CAPE) एम्प्रो की पुनरावृत्ति को रोकने में सक्षम है।
‘विथानोन’ [Withanone (Wi-N)] अश्वगंधा से प्राप्त एक प्राकृतिक यौगिक है।
‘कैफ्फेसिक एसिड फेनेथाइल एस्टर’ (Caffeic Acid Phenethyl Ester-CAPE) न्यूज़ीलैंड प्रोपोलिस का एक सक्रिय संघटक है।
अश्वगंधा (Ashwagandha):
अश्वगंधा (वैज्ञानिक नाम- विथानिया सोमनीफेरा) एक औषधीय जड़ी बूटी है, जिसे प्रतिरक्षा बढ़ाने हेतु उपयोग में लाया जाता है।
अश्वगंधा आम तौर पर एक चूर्ण के रूप में भी उपलब्ध होता है जिसे जल, घी या शहद के साथ मिश्रित किया जाता है।
यह मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र के कार्य में बढ़ोतरी करने के साथ ही याददाश्त में भी सुधार करता है।
यह स्वस्थ यौन और प्रजनन संतुलन को बढ़ावा देने हेतु प्रजनन प्रणाली में भी सुधार करता है।
अश्वगंधा तनाव को भी दूर करने में मदद करता है।
प्रोपोलिस (Propolis):
प्रोपोलिस एक प्राकृतिक राल का मिश्रण है जो मधुमक्खियों द्वारा पौधों या कलियों से एकत्रित किये गए पदार्थों से उत्पादित होता है।
मधुमक्खियाँ मुख्य रूप से चिनार से प्रोपोलिस एकत्रित करती हैं।
मधुमक्खियाँ अपने छत्ते के निर्माण और मरम्मत में भी प्रोपोलिस का उपयोग करती हैं।
भारत सरकार की कुछ अन्य पहलें:
ध्यातव्य है कि भारत सरकार ने COVID-19 के मद्देनज़र कुछ आयुर्वेदिक दवाओं पर नैदानिक शोध अध्ययनों को शुरू करने हेतु एक टास्क फोर्स का गठन किया है।
आयुष संजीवनी एप (AYUSH Sanjivani App):
‘आयुष संजीवनी एप’ को आयुष मंत्रालय (Ministry of AYUSH) और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (Ministry of Electronics and Information Technology- MEITY) द्वारा विकसित किया गया है।
इस एप से लोगों के बीच आयुष से संबंधित सिफारिशों एवं विभिन्न कदमों की स्वीकार्यता तथा उपयोग के साथ COVID-19 के उन्मूलन में इनके प्रभाव से जुड़ी जानकारियाँ जुटाने में मदद मिलेगी।
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भारत में स्थित अमेरिकी दूतावास के अधिकारियों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, भारत और अमेरिका द्वारा COVID-19 के परीक्षण और इस बीमारी की वैक्सीन के विकास पर शोध के लिये मिलकर कार्य करने की योजना पर विचार किया जा रहा है।
प्रमुख बिंदु:
अमेरिकी दूतावास के अनुसार, भारत और अमेरिका के वैज्ञानिक अनेक संक्रामक बीमारियों पर शोध, वैक्सीन के निर्माण और कम लागत में वैक्सीन की उपलब्धता को सुनिश्चित करने के लिये मिलकर कार्य करते रहे हैं।
COVID-19 की महामारी को देखते हुए ‘वैक्सीन एक्शन प्रोग्राम’ (Vaccine Action Programme) के तहत भारत और अमेरिका COVID-19 संक्रमण की पहचान करने और इसकी वैक्सीन के निर्माण हेतु मिलकर कार्य करने पर विचार कर रहे हैं।
इंडो-यूएस वैक्सीन एक्शन प्लान
(Indo-US Vaccine Action Programme-VAP):
VAP एक द्विपक्षीय स्वास्थ्य कार्यक्रम है, इसके तहत नई और उन्नत वैक्सीन के विकास से जुड़ी अनेक गतिविधियों को सहयोग प्रदान किया जाता है।
इस कार्यक्रम की शुरुआत वर्ष 1987 में की गई थी।
VAP में यू.एस. नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (U.S. National Institutes of Health), भारतीय जैव प्रौद्योगिकी विभाग (Indian Department of Biotechnology-DBT) और भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (Indian Council of Medical Research-ICMR) आदि के अधिकारी शामिल होते हैं।
इस कार्यक्रम के तहत अमेरिका और भारत के वैज्ञानिकों द्वारा वैक्सीन, प्रतिरक्षाविज्ञानी अभिकर्मकों (Immunodiagnostic Reagents) आदि के विकास की दिशा में सहयोगात्मक अनुसंधान परियोजनाओं का संचालन किया जाता है।
VAP के कार्यक्रमों और योजनाओं के कार्यान्वयन के लिये एक ‘संयुक्त कार्य समूह’ (Joint Working Group- JWG) की स्थापना की गई है। JWG में दोनों देशों के वैज्ञानिक और अन्य अधिकारी शामिल होते हैं।
JWG के भारतीय सदस्य भारतीय प्रधान मंत्री द्वारा नियुक्त एक 'सर्वोच्च समिति' (Apex Committee) के सदस्य होते हैं, यह समिति VAP के तहत प्रस्तावित भारतीय कार्यक्रमों की समीक्षा और उन्हें अनुमति प्रदान करने का कार्य करती है।
अन्य सहयोग:
200 वेंटिलेटर का सहयोग:
अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा पिछले सप्ताह भारत को 200 वेंटिलेटर (Ventilator) दान किये जाने की घोषणा की गई थी, इसके तहत पहले चरण में 50 वेंटिलेटर शीघ्र ही भारत पहुँचने की उम्मीद है।
इन वेंटिलेटरों का खर्च वर्तमान में भारत के लिये घोषित 5.9 मिलियन अमेरिकी डॉलर की सहायता के तहत यूएस एजेंसी फॉर इंटरनेशनल डेवलपमेंट (United States Agency for International Development-USAID) द्वारा वहन किया जाएगा।
आर्थिक सहायता:
अमेरिका के रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र (Centers for Disease Control and Prevention-CDC) द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, भारत सरकार की सहमति और सहयोग से COVID-19 की रोकथाम, तैयारी और प्रतिक्रिया गतिविधियों के लिये 3.6 मिलियन अमेरिकी डॉलर की अतिरिक्त सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
इसके तहत भारत सरकार की अनुमति के आधार पर प्रयोगशालाओं और शोध संस्थानों को सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
चुनौतियाँ:
CDC द्वारा भारतीय प्रयोगशालाओं और शोध संस्थानों को सहायता उपलब्ध कराने की योजना विलंबित हो सकती है क्योंकि दिसंबर 2019 में केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा CDC को एक ‘वाॅच लिस्ट’ (Watch List) में रखा गया है।
ध्यातव्य है कि CDC द्वारा ‘मणिपाल इंस्टिट्यूट ऑफ वायरस रिसर्च’ (Manipal Centre for Virus Research-MCVR) के साथ Nipah Virus पर एक शोध शुरू करने से पहले भारत सरकार की अनुमति न लेने के कारण यह कार्रवाई की गई थी।
भारत में स्थित कोई भी गैर सरकारी संगठन (Non Governmental Organization-NGO) Foreign Contribution Regulation Act (FCRA), 2010} के तहत पंजीकरण करा कर विदेशी अनुदान प्राप्त कर सकता है।
परंतु यदि किसी विदेशी दाता (Foreign Donor) को ‘वाॅच लिस्ट’ या ‘पूर्व अनुमति’ की सूची में रखा गया हो तो ऐसी स्थिति में केंद्रीय गृह मंत्रालय की अनुमति के बगैर विदेशी दाता द्वारा सीधे धनराशि नहीं भेजी जा सकती है।
हालाँकि CDC ने स्पष्ट किया है कि वह इस योजना के लिये भारत सरकार द्वारा अनुमति प्राप्त संस्थानों के साथ ही कार्य करेगी।
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फिलिस्तीन शरणार्थियों के कल्याण हेतु कार्य करने वाली United Nations Relief and Works Agency-(UNRWA) ने COVID-19 संकट से उत्पन्न परिस्थितियों में अपनी बुनियादी सेवाओं को संचालित करने के लिये भारत द्वारा दी जा रही वित्तीय सहायता की सराहना की है।
प्रमुख बिंदु
ध्यातव्य है कि हाल ही में भारत सरकार ने संयुक्त राष्ट्र राहत एवं कार्य एजेंसी (UNRWA) को शिक्षा एवं स्वास्थ्य समेत उसके विभिन्न कार्यक्रमों और सेवाओं में समर्थन देने हेतु 2 मिलियन डॉलर प्रदान किये थे।
भारत के इस योगदान से UNRWA को अपनी नकदी प्रवाह संबंधी चुनौतियों का समाधान करने में मदद मिलेगी।
उल्लेखनीय है कि भारत ने UNRWA को दिये जाने वाले अपने वार्षिक योगदान को वर्ष 2016 में 1.25 मिलियन डॉलर से बढ़ाकर वर्ष 2019 में 5 मिलियन डॉलर तक कर दिया है।
इसके अतिरिक्त भारत ने UNRWA को वर्ष 2020 के दौरान 5 मिलियन डॉलर देने का वचन दिया है, इस पूरे योगदान से भारत का UNRWA के सलाहकार आयोग का सदस्य बनने का मार्ग काफी आसान हो गया है।
भारत का यह योगदान संयुक्त राष्ट्र राहत एवं कार्य एजेंसी (UNRWA) को फंडिंग की कमी के कारण उत्पन्न हुए वित्तीय संकट से निपटने में मदद करेगा, जिसके कारण एजेंसी फिलिस्तीनी शरणार्थियों को स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाएँ प्रदान करने में भी असमर्थ है।
इस अवसर पर भारतीय प्रतिनिधि ने UNRWA द्वारा किये गए सराहनीय कार्य और प्रयासों के प्रति प्रशंसा व्यक्त की।
ध्यातव्य है कि विश्व में लगभग 5 मिलियन फिलिस्तीनी शरणार्थी UNRWA द्वारा प्रदान की जाने वाली स्वास्थ्य सेवाओं पर निर्भर हैं।
वहीं, एजेंसी द्वारा चलाए जा रहे स्कूलों में प्रत्येक वर्ष 526,000 छात्रों को शिक्षित किया जाता हैं, जिनमें से आधी महिलाएँ होती हैं।
इसी बीच, भारत फिलिस्तीनियों के लिये मेडिकल आपूर्ति की भी तैयारी कर रहा है ताकि उन्हें कोरोनोवायरस से लड़ने में मदद प्रदान की जा सके।
कौन हैं फिलिस्तीनी शरणार्थी?
संयुक्त राष्ट्र राहत एवं कार्य एजेंसी (UNRWA) द्वारा फिलिस्तीनी शरणार्थियों को ‘उन व्यक्तियों के रूप में परिभाषित किया जाता है, जिनका निवास स्थान 1 जून, 1946 से 15 मई, 1948 की अवधि के दौरान फिलिस्तीन था और जिन्होंने वर्ष 1948 के संघर्ष के परिणामस्वरूप घर और आजीविका दोनों को खो दिया था।’
UNRWA अपनी सेवाएँ मुख्यतः उन्ही लोगों को प्रदान करता है, जो फिलिस्तीनी शरणार्थी की इस परिभाषा के अंतर्गत आते हैं और जो संस्था के साथ पंजीकृत हैं तथा जिन्हें सहायता की आवश्यकता है।
इस परिभाषा के तहत पंजीकरण के लिये फिलिस्तीन शरणार्थियों के वंशज भी पात्र हैं, जिसमें गोद लिये बच्चे भी शामिल हैं।
UNRWA के आधिकारिक आँकड़े के अनुसार, पंजीकृत फिलिस्तीनी शरणार्थियों में से लगभग एक-तिहाई से अधिक लोग पूर्वी येरुशलम सहित जॉर्डन, लेबनान, सीरिया, गाजा पट्टी और वेस्ट बैंक में लगभग 58 मान्यता प्राप्त फिलिस्तीन शरणार्थी शिविरों में रहते हैं।
फिलिस्तीनी शरणार्थी संकट
उल्लेखनीय है कि फिलिस्तीनी शरणार्थी संकट को समझने के लिये हमें सर्वप्रथम इज़राइल-फिलिस्तीन संघर्ष को समझना होगा।
अरब और यहूदियों के बीच संघर्ष को समाप्त करने में असफल रहे ब्रिटेन ने वर्ष 1948 में फिलिस्तीन से अपने सुरक्षा बलों को हटा लिया और अरब तथा यहूदियों के दावों का समाधान करने के लिये इस मुद्दे को नवनिर्मित संगठन संयुक्त राष्ट्र (UN) के विचारार्थ प्रस्तुत किया।
संयुक्त राष्ट्र ने फिलिस्तीन में स्वतंत्र यहूदी और अरब राज्यों की स्थापना करने के लिये एक विभाजन योजना (Partition Plan) प्रस्तुत की जिसे फिलिस्तीन में रह रहे अधिकांश यहूदियों ने स्वीकार कर लिया किंतु अरबों ने इस पर अपनी सहमति प्रकट नहीं की।
वर्ष 1948 में यहूदियों ने स्वतंत्र इज़राइल की घोषणा कर दी और इज़राइल एक देश बन गया, इसके परिणामस्वरूप आस-पास के अरब राज्यों (इजिप्ट, जॉर्डन, इराक और सीरिया) ने इज़राइल पर आक्रमण कर दिया। युद्ध के अंत में इज़राइल ने संयुक्त राष्ट्र की विभाजन योजना के आदेशानुसार प्राप्त भूमि से भी अधिक भूमि पर अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया।
युद्ध के परिणामस्वरूप, फिलिस्तीनियों की एक बड़ी संख्या या तो पलायन कर गई या उन्हें इज़राइल से बाहर जाने और इज़राइल की सीमा के पास शरणार्थी शिविरों में बसने के लिये विवश किया गया और अंततः फिलिस्तीनी शरणार्थी संकट का उदय हुआ।
इज़राइल-फिलिस्तीन विवाद के वर्तमान कारण:
येरूशलम पर अधिकार को लेकर दोनों देशों में संघर्ष होता रहा है। इज़राइल के द्वारा वर्तमान में तेल अवीब से अपनी राजधानी येरुशलम स्थानांतरित करने का भी फिलिस्तीन द्वारा विरोध किया गया।
शरणार्थियों के पुनर्वास को लेकर भी दोनों देशों में मतभिन्नता की स्थिति है। इज़राइल इन्हें फिलिस्तीन में पुनर्स्थापित करना चाहता है और फिलिस्तीन इन्हें वास्तविक स्थानों पर पुनर्स्थापित करने की बात कहता है।
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आत्मनिर्भर गुजरात सहाय योजना
Aatmanirbhar Gujarat Sahay Yojana
हाल ही में गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने एक ‘आत्मनिर्भर गुजरात सहाय योजना’ (Aatmanirbhar Gujarat Sahay Yojana) की घोषणा की है जो छोटे उद्यमियों और स्वरोज़गारों जैसे इलेक्ट्रीशियन, प्लंबर एवं बढ़ई को तीन वर्ष की अवधि के लिये 1 लाख रुपए तक का ऋण प्रदान करती है।
प्रमुख बिंदु:
इस योजना का लक्ष्य COVID-19 के कारण राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन में दैनिक/मासिक आमदनी से प्रभावित सब्जी विक्रेता, निर्माण श्रमिक आदि को भी शामिल करना है।
इस योजना के आवेदकों को क्रेडिट सोसाइटियों और शहरी एवं ज़िला सहकारी बैंकों जो 5,000 करोड़ रुपए के संपार्श्विक-मुक्त ऋण सौंपेंगे, के साथ अपने मामले को आगे बढ़ाने में मदद करने के लिये गारंटरों की आवश्यकता होगी।
गुजरात सहकारी समिति अधिनियम,1961 के तहत पंजीकृत कुल 260 शहरी सहकारी बैंक, 18 ज़िला सहकारी बैंक और 6,500 क्रेडिट सहकारी समितियाँ सफल आवेदकों को 2% की ब्याज दर पर संपार्श्विक-मुक्त ऋण प्रदान करेंगी।
यह योजना 21 मई से शुरू होगी और ऋण देने वाली एजेंसियाँ 31 अगस्त तक आवेदन स्वीकार करेंगी।
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माइक्रो आरएनए
MicroRNA
हाल ही में संयुक्त राज्य अमेरिका की ‘ऑगस्टा यूनिवर्सिटी’ (Augusta University) के अंतर्गत आने वाले ‘ऑगस्टा मेडिकल कॉलेज’ के शोधकर्त्ताओं के अनुसार, माइक्रो आरएनए (MicroRNA) ‘जीन एक्सप्रेशन’ को नियंत्रित करने में मानव शरीर में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और वायरस के आक्रमण के समय फ्रंटलाइन का कार्य करते हैं।
प्रमुख बिंदु:
एक माइक्रो आरएनए पौधों, जानवरों एवं कुछ विषाणुओं में पाया जाने वाला एक छोटा नॉन-कोडिंग आरएनए अणु (लंबाई लगभग 22 न्यूक्लियोटाइड) है, जो ‘आरएनए साइलेंसिंग’ (RNA Silencing) और ‘जीन एक्सप्रेशन’ के बाद के ट्रांसक्रिप्शनल विनियमन में कार्य करता है।
ये वायरस के आक्रमण के समय फ्रंटलाइन का कार्य करते हैं और वायरस के आनुवंशिक पदार्थ (RNA) को काटकर वायरस से लड़ते हैं।
गौरतलब है कि आयु एवं अंतर्निहित स्वास्थ्य की स्थिति, लोगों को COVID-19 के मद्देनज़र अधिक संवेदनशील बनाती है। ऐसा इसलिये है क्योंकि उनमें प्रतिक्रिया करने वाले माइक्रोआरएनए नंबर कम होते हैं।
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प्रतिवर्ष 20 मई को संयुक्त राष्ट्र द्वारा विश्व मधुमक्खी दिवस के रूप में मनाया जाता है। 2018 में इसकी शुरुआत हुई थी।
मुख्य बिंदु
विश्व मधुमक्खी दिवस को स्लोवेनियाई एपिकल्चर के क्षेत्र में बेहतरीन काम करने वाले एंटोन जानसा के जन्मदिन के उपलक्ष्य में मनाया जाता है।
थीम : मधुमक्खियों को बचाओ
परागणकों, चिड़िय, तितलियों, चमगादड़ों के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए यह दिवस मनाया जा रहा है। 2000 में, सीओपी (कांफ्रेंस ऑफ़ पार्टीज) में इंटरनेशनल पोलिनेटर पहल शुरू की गई थी। यह पहल कृषि में परागणकर्ताओं की स्थिरता पर केंद्रित है।
महत्व
मधुमक्खियाँ सबसे बड़ी परागणक होती हैं। वे वर्तमान में निवास के नुकसान, परजीवी, बीमारियों और कृषि कीटनाशकों के कारण खतरे में हैं। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, लगभग 35% विश्व कृषि अभी भी परागणकों पर निर्भर है।
इंटरनेशनल पोलिनेटर इनिशिएटिव
इंटरनेशनल पोलिनेटर इनिशिएटिव का मुख्य उद्देश्य समन्वित विश्व व्यापी कार्रवाई को बढ़ावा देना है। इसे कन्वेंशन ऑन बायोलॉजिकल डायवर्सिटी (CBD) के तहत लॉन्च किया गया था। यह पहल 2030 तक चलने वाली है। भारत भी इस पहल का एक हिस्सा है।
जैविक विविधता पर कन्वेंशन एक बहुपक्षीय संधि है। यह 1992 में रियो डी जेनेरियो में आयोजित पृथ्वी शिखर सम्मेलन में शुरू हुई थी।
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अमेरिका स्थित फर्म मॉडर्ना के COVID-19 वैक्सीन ने सकारात्मक परिणाम दिखाने शुरू कर दिए हैं। इसे एक बहुत बड़ी सफलता माना जा रहा है क्योंकि यह पहला वैक्सीन है जिसने वायरस के खिलाफ एंटीबॉडी तैयार की है।
मुख्य बिंदु
संयुक्त राज्य में वैक्सीन प्राप्त करने वाले लगभग 8 लोगों ने सकारात्मक परिणाम दिखाए हैं। LNP- एनकैप्सुलेटेड mRNA-1273 वैक्सीन mRNA (मैसेंजर RNA) की अवधारणा पर कार्य करता है। यह वैक्सीन वायरस के खिलाफ प्रतिरक्षा उत्पन्न करने के लिए मैसेंजर आरएनए को इंजेक्ट करता है।
प्रमुख सफलता
जिन लोगों को एमआरएनए -1273 की खुराक दी गई, उन्होंने एंटीबॉडी का उत्पादन किया और वायरस के प्रजनन को भी रोक दिया। विकसित एंटीबॉडीज का स्तर उन रोगियों के समान था जो वायरस से रिकवर हुए थे।
दुष्प्रभाव
वैक्सीन की कम और मध्यम खुराक ने उस स्थान पर लालिमा पैदा की जहां इसे इंजेक्ट किया गया था। उच्च खुराक के मामले में, रोगियों में बुखार और सिरदर्द के लक्षण देखे गये। हालांकि, यह दुष्प्रभाव एक दिन बाद दूर हो गए। यह वैक्सीन दिसंबर, 2020 तक बाजार में पहुंच सकती है।
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19 मई, 2020 को भारत ने फिलिस्तीनी शरणार्थियों के कल्याण में मदद करने के लिए UNRWA (संयुक्त राष्ट्र राहत और निर्माण एजेंसी) को 2 मिलियन डालर की राहत सहायता प्रदान की। इस सहायता राशि का उपयोग शरणार्थियों के लिए शिक्षा और स्वास्थ्य सहित मुख्य कार्यक्रमों में किया जायेगा।
मुख्य बिंदु
2019 में भारत ने UNRWA में अपना वार्षिक योगदान 2016 में 1.25 मिलियन डालर से बढ़ाकर 2019 में 5 मिलियन अमरीकी डालर कर दिया था। 2020 में भारत ने 5 मिलियन अमरीकी डालर का अतिरिक्त योगदान दिया। इसने भारतीय को UNRWA के सलाहकार आयोग में सदस्य बना दिया।
महत्व
3.1 मिलियन से अधिक फिलिस्तीनी शरणार्थी हैं। वे पूरी तरह से UNRWA द्वारा प्रदान की जाने वाली स्वास्थ्य सेवाओं में निर्भर हैं। UNRWA हर साल 526,000 छात्रों को शिक्षित करने का कार्य करता है।
भारत-फिलिस्तीन
भारत COVID-19 से लड़ने में मदद करने के लिए फिलिस्तीनियों के लिए चिकित्सा आपूर्ति भी तैयार कर रहा है। भारत ने फिलिस्तीन के साथ अलग से 17 समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। इन समझौतों के तहत, भारत स्वास्थ्य, कृषि, युवा मामलों, सूचना प्रौद्योगिकी, कांसुलर मामलों, मीडिया और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में फिलिस्तीन की मदद करता है।
भारत इन परियोजनाओं के माध्यम से 72 मिलियन अमरीकी डालर प्रदान करेगा। इससे गाजा में सूचना और संचार प्रौद्योगिकी के लिए स्कूलों और उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने के प्रयासों में मदद मिलेगी।
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भारतीय रेलवे ने पहले 12,000 एचपी इलेक्ट्रिक इंजन का परिचालन किया। इस लोकोमोटिव का निर्माण मेक इन इंडिया पहल के तहत फ्रांसीसी कंपनी एल्स्टॉम द्वारा किया गया था।
मुख्य बिंदु
इस लोकोमोटिव का निर्माण बिहार के मधेपुरा में इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव में किया गया है। यह 120 किमी/घंटा की अधिकतम गति पर 6,000 टन का भार उठाने में सक्षम है।
इस लोकोमोटिव का निर्माण 74% और 26% की भारतीय और फ्रांसीसी हिस्सेदारी के बीच एक संयुक्त उद्यम के रूप में किया गया है।
इसके साथ, भारत उच्च हॉर्स पॉवर लोकोमोटिव का उत्पादन करने वाला दुनिया का छठा देश बन गया है।
परियोजना
भारत-फ्रांसीसी परियोजना के तहत 2018-20 में लगभग 4 लोकोमोटिव वितरित किए जाने थे, 2019-20 में 35, 2020-21 में 60 और 11 साल की लंबी डिलीवरी के अंत तक हर साल 100 लोकोमोटिव डिलीवर किये जायेंगे। इस परियोजना को रेलवे क्षेत्र में सबसे बड़ा एफडीआई (प्रत्यक्ष विदेशी निवेश) माना जाता है।
यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि भारतीय रेलवे ने भी 11 साल की अवधि के लिए 1000 डीजल लोकोमोटिव की आपूर्ति करने के लिए अमेरिकी कंपनी जनरल इलेक्ट्रिक के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए।भारतीय रेलवे ने पहले 12,000 एचपी इलेक्ट्रिक इंजन का परिचालन किया। इस लोकोमोटिव का निर्माण मेक इन इंडिया पहल के तहत फ्रांसीसी कंपनी एल्स्टॉम द्वारा किया गया था।
मुख्य बिंदु
इस लोकोमोटिव का निर्माण बिहार के मधेपुरा में इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव में किया गया है। यह 120 किमी/घंटा की अधिकतम गति पर 6,000 टन का भार उठाने में सक्षम है।
इस लोकोमोटिव का निर्माण 74% और 26% की भारतीय और फ्रांसीसी हिस्सेदारी के बीच एक संयुक्त उद्यम के रूप में किया गया है।
इसके साथ, भारत उच्च हॉर्स पॉवर लोकोमोटिव का उत्पादन करने वाला दुनिया का छठा देश बन गया है।
परियोजना
भारत-फ्रांसीसी परियोजना के तहत 2018-20 में लगभग 4 लोकोमोटिव वितरित किए जाने थे, 2019-20 में 35, 2020-21 में 60 और 11 साल की लंबी डिलीवरी के अंत तक हर साल 100 लोकोमोटिव डिलीवर किये जायेंगे। इस परियोजना को रेलवे क्षेत्र में सबसे बड़ा एफडीआई (प्रत्यक्ष विदेशी निवेश) माना जाता है।
यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि भारतीय रेलवे ने भी 11 साल की अवधि के लिए 1000 डीजल लोकोमोटिव की आपूर्ति करने के लिए अमेरिकी कंपनी जनरल इलेक्ट्रिक के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए।
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19 मई, 2020 को विश्व स्वास्थ्य संगठन ने घोषणा की कि वह COVID-19 महामारी से निपटने में स्वतंत्र समीक्षा शुरू करेगा। इसके लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन “Resolution on COVID-19 response” लॉन्च करेगा।
मुख्य बिंदु
इस समीक्षा का मुख्य उद्देश्य COVID -19 की उत्पति से सम्बंधित अंतर्राष्ट्रीय दोषारोपण को समाप्त करना है। वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से आयोजित 73 वें विश्व स्वास्थ्य सभा इस प्रस्ताव पर चर्चा की गयी। इसमें भारत का प्रतिनिधित्व केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने किया।
प्रस्ताव
लगभग 116 देशों ने स्वतंत्र समीक्षा के प्रस्ताव का समर्थन किया। भारत ने भी इस संकल्प का समर्थन किया। इस संकल्प का विचार ऑस्ट्रेलिया द्वारा शुरू किया गया था। हालाँकि, प्रस्ताव को यूरोपीय संघ द्वारा ड्राफ्ट किया गया था। चीन ने इस प्रस्ताव का विरोध किया था।
अब तक उपलब्ध जानकारी के अनुसार, COVID-19 एक जूनोटिक बीमारी है जो जानवरों से मनुष्यों में फैलती है। इसका प्रकोप चीन के वुहान से शुरू हुआ और तेजी से पूरी दुनिया में फैल गया है। विभिन्न देशों ने संकट से निपटने के लिए अलग-अलग तरीके अपनाए हैं। यह भी जांच का एक हिस्सा होना है19 मई, 2020 को विश्व स्वास्थ्य संगठन ने घोषणा की कि वह COVID-19 महामारी से निपटने में स्वतंत्र समीक्षा शुरू करेगा। इसके लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन “Resolution on COVID-19 response” लॉन्च करेगा।
मुख्य बिंदु
इस समीक्षा का मुख्य उद्देश्य COVID -19 की उत्पति से सम्बंधित अंतर्राष्ट्रीय दोषारोपण को समाप्त करना है। वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से आयोजित 73 वें विश्व स्वास्थ्य सभा इस प्रस्ताव पर चर्चा की गयी। इसमें भारत का प्रतिनिधित्व केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने किया।
प्रस्ताव
लगभग 116 देशों ने स्वतंत्र समीक्षा के प्रस्ताव का समर्थन किया। भारत ने भी इस संकल्प का समर्थन किया। इस संकल्प का विचार ऑस्ट्रेलिया द्वारा शुरू किया गया था। हालाँकि, प्रस्ताव को यूरोपीय संघ द्वारा ड्राफ्ट किया गया था। चीन ने इस प्रस्ताव का विरोध किया था।
अब तक उपलब्ध जानकारी के अनुसार, COVID-19 एक जूनोटिक बीमारी है जो जानवरों से मनुष्यों में फैलती है। इसका प्रकोप चीन के वुहान से शुरू हुआ और तेजी से पूरी दुनिया में फैल गया है। विभिन्न देशों ने संकट से निपटने के लिए अलग-अलग तरीके अपनाए हैं। यह भी जांच का एक हिस्सा होना है
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मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने हाल ही में एक नया मोबाइल एप्लिकेशन लॉन्च की है जिसका नाम “नेशनल टेस्ट अभ्यास” है।
मुख्य बिंदु
इस मोबाइल एप्लीकेशन को राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी द्वारा विकसित किया गया है। यह एप्लीकेशन उम्मीदवारों को जेईई मेन्स, NEET आदि जैसे परीक्षाओं के लिए मॉक टेस्ट लेने में मदद करेगा। यह एप्लीकेशन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा संचालित है और इसलिए छात्रों को टेस्ट लेने के बाद तुरंत परिणाम मिलेगा। इस एप्लीकेशन का उद्देश्य उम्मीदवारों को अपने घरों से उच्च गुणवत्ता वाले मॉक टेस्ट लेने में मदद करना है। यह वर्तमान में एंड्राइड और iOS संस्करणों में उपलब्ध है।
महत्व
जेईई मेन्स परीक्षा 18 जुलाई से 23 जुलाई के बीच आयोजित की जाएगी और NEET परीक्षा 26 जुलाई को आयोजित की जाएगी। इस प्रकार, यह एप्लीकेशन छात्रों को बड़े स्तर पर मदद करेगा।
राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी देश में प्रतियोगी परीक्षाओं को आयोजित करती है। इसमें JEE, GATE, NEET, GPAT, UGC, CAT, NET आदि शामिल हैं। इसे भारतीय समाज पंजीकरण अधिनियम, 1860 के तहत स्थापित किया गया था। NTA एक स्वायत्त संगठन है।मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने हाल ही में एक नया मोबाइल एप्लिकेशन लॉन्च की है जिसका नाम “नेशनल टेस्ट अभ्यास” है।
मुख्य बिंदु
इस मोबाइल एप्लीकेशन को राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी द्वारा विकसित किया गया है। यह एप्लीकेशन उम्मीदवारों को जेईई मेन्स, NEET आदि जैसे परीक्षाओं के लिए मॉक टेस्ट लेने में मदद करेगा। यह एप्लीकेशन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा संचालित है और इसलिए छात्रों को टेस्ट लेने के बाद तुरंत परिणाम मिलेगा। इस एप्लीकेशन का उद्देश्य उम्मीदवारों को अपने घरों से उच्च गुणवत्ता वाले मॉक टेस्ट लेने में मदद करना है। यह वर्तमान में एंड्राइड और iOS संस्करणों में उपलब्ध है।
महत्व
जेईई मेन्स परीक्षा 18 जुलाई से 23 जुलाई के बीच आयोजित की जाएगी और NEET परीक्षा 26 जुलाई को आयोजित की जाएगी। इस प्रकार, यह एप्लीकेशन छात्रों को बड़े स्तर पर मदद करेगा।
राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी देश में प्रतियोगी परीक्षाओं को आयोजित करती है। इसमें JEE, GATE, NEET, GPAT, UGC, CAT, NET आदि शामिल हैं। इसे भारतीय समाज पंजीकरण अधिनियम, 1860 के तहत स्थापित किया गया था। NTA एक स्वायत्त संगठन है।
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योजना को कोविड-19 और इसके बाद लॉकडाउन की वजह से बनी अप्रत्याशित स्थिति से निपटने के एक निर्दिष्ट उपाय के रुप में बनाया गया है। इससे एमएसएमई सेक्टर में विनिर्माण और अन्य गतिविधियां बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। अर्थव्यवस्था और रोजगार सृजन में एमएसएमई की अहम भूमिका को देखते हुए, प्रस्तावित योजना से एमएसएमई सेक्टर को सदस्य ऋणदाता संस्थानों के जरिए कम ब्याज दर पर 3 लाख करोड़ रुपये तक के अतिरिक्त ऋण मुहैया कराने से काफी राहत मिलेगी और इस तरह एमएसएमई को अपनी संचालन उत्तरदायित्वों को पूरा करने और व्यापार को फिर से शुरू करने में मदद मिलेगी। मौजूदा अप्रत्याशित माहौल में अपना कामकाज जारी रखने में योजना के तहत एमएसएमई को मदद देने से अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक असर पड़ेगा और इसे पुनर्जीवित करने में मदद मिलेगी।
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कैबिनेट ने आपातकालीन क्रेडिट लाइन गारंटी योजना (ईसीएलजीएस) की शुरुआत कर तीन लाख करोड़ रुपये तक की अतिरिक्त फंडिंग को मंज़ूरी दी
राष्ट्रीय क्रेडिट गारंटी ट्रस्टी कंपनी लिमिटेड (एनसीजीटीसी) द्वारा सदस्य ऋणदात्री संस्थाओं को 100 फीसदी क्रेडिट गारंटी कवरेज
इच्छुक मुद्रा कर्जदारों सहित योग्य सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) कर्जदारों को गारंटी युक्त आपातकालीन क्रेडिट लाइन (जीईसीएल) सुविधा
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट ने निम्नलिखित मंज़ूरी दी है।
कैबिनेट ने आज योग्य एमएसएमई और इच्छुक मुद्रा कर्जदारों को तीन लाख करोड़ रुपये तक की अतिरिक्त फंडिंग के लिए ‘आपातकालीन क्रेडिट लाइन गारंटी योजना’ को मंजूरी दी।
योजना के तहत, राष्ट्रीय क्रेडिट गारंटी ट्रस्टी कंपनी लिमिटेड (एनसीजीटीसी) द्वारा योग्य एमएसएमई और इच्छुक कर्जदारों को गारंटी युक्त आपातकालीन क्रेडिट लाइन (जीईसीएल) सुविधा के रुप में तीन लाख रुपये तक की अतिरिक्त फंडिंग के लिए 100 फीसदी गारंटी कवरेज उपलब्ध कराई जाएगी।
इस उद्देश्य के लिए भारत सरकार द्वारा मौजूदा और अगले तीन वित्तीय वर्षों के लिए 41,600 करोड़ रुपय की राशि उपलब्ध कराई जाएगी।
कैबिनेट ने यह भी मंज़ूरी दी कि यह योजना जीईसीएल सुविधा के तहत इस योजना की घोषणा की तारीख से लेकर 31.10.2020 की अवधि में स्वीकृत सभी कर्जों या जीईसीएल के तहत 3,00,000 करोड़ रुपये तक की कर्ज राशि की स्वीकृति, इनमें से जो पहले हो, पर लागू होगी।
विवरण:
आपातकालीन क्रेडिट लाइन गारंटी योजना (ईसीएलजीएस) को कोविड-19 और इसके बाद लॉकडाउन की वजह से बनी अप्रत्याशित स्थिति से निपटने के एक निर्दिष्ट उपाय के रुप में बनाया गया है। इससे एमएसएमई सेक्टर में विनिर्माण और अन्य गतिविधियां बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। इस योजना का उद्देश्य आर्थिक परेशानी झेल रही एमएसएमई को पूरी गारंटी युक्त आपातकालीन क्रेडिट लाइन के रुप में तीन लाख करोड़ रुपये तक की अतिरिक्त फंडिंग उपलब्ध कराते हुए उन्हें राहत दिलाना है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य सदस्य ऋणदात्री संस्थाओं यानी बैंकों, वित्तीय संस्थानों (एफआई), और गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थानों (एनबीएफसी) को कोविड-19 संकट की वजह से आर्थिक तंगी झेल रहे एमएसएमई कर्जदारों को देने के लिए उनके पास अतिरिक्त फंडिंग सुविधा की उपलब्धता बढ़ाना है। उन्हें कर्जदारों द्वारा जीईसीएल फंडिंग का पुनर्भुगतान नहीं किए जाने की वजह से होने वाले किसी नुकसान के लिए 100 फीसदी गारंटी उपलब्ध कराई जाएगी।
इस योजना में शामिल प्रमुख विशेषताएं-
योजना के तहत जीईसीएल फंडिंग के लिए वे सभी एमएसएमई योग्य होंगे जिनका बकाया ऋण 29.02.2020 को 25 करोड़ रुपये तक जो इस तारीख तक पिछले 60 दिनों तक या उससे कम दिनों तक बकाया यानी नियमित एसएमए 0 और एसएमए 1 खातों या जिनका एक करोड़ रुपये का वार्षिक कारोबार हो।
योग्य एमएसएमई कर्जदारों को जीईसीएल फंडिंग की राशि या तो अतिरिक्त सक्रिय पूंजी मियादी ऋण (बैंकों और वित्तीय संस्थानों के मामले में) या मियादी ऋण (एनबीएफसी के मामले में) के रुप में उनके 29 फरवरी, 2020 को 25 करोड़ रुपये तक की कुल बकाया राशि का 20 फीसदी ही होगी।
ईसीएलजीएस के तहत जीईसीएल के जरिए की जाने वाली पूरी फंडिंग एनसीजीटीसी द्वारा सदस्य ऋणदात्री संस्थाओं को 100 फीसदी क्रेडिट गारंटी के साथ होगी।
योजना के तहत ऋण की अवधि 4 साल होगी और इसकी अधिस्थगन अवधि मूलधन पर एक साल होगी।
योजना के तहत एनसीजीटीसी द्वारा सदस्य ऋणदाता संस्थानों से कोई भी गारंटी राशि नहीं ली जाएगी।
योजना के तहत ब्याज दर बैंकों एवं वित्तीय संस्थानों के लिए अधिकतम 9.25 फीसदी और गैर- वित्तीय संस्थाओं के लिए अधिकतम 14 फीसदी होगी।
क्रियान्वयन कार्यक्रम:
यह योजना जीईसीएल सुविधा के तहत इस योजना की घोषणा की तारीख से लेकर 31.10.2020 की अवधि में स्वीकृत सभी कर्जों या जीईसीएल के तहत 3,00,000 करोड़ रुपये तक की कर्ज राशि की स्वीकृति, इनमें से जो पहले हो, पर लागू होगी।
प्रभाव:
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कॉयर जियो टेक्सटाइल्स को ग्रामीण सड़क निर्माण के लिए मंजूरी दी गयी
निर्णय से कॉयर उद्योग को विशेषकर कोविड महामारी के दौरान बढ़ावा मिलेगा : श्री गडकरी
कॉयर जियो टेक्सटाइल्स, जो एक पारगम्य फैब्रिक है तथाप्राकृतिक, मजबूत, अत्यधिक टिकाऊ, टूट-फूट, मोड़ एवं नमी प्रतिरोधी है व किसी भी सूक्ष्मजीव (माइक्रोबियल) के हमले से मुक्त है, को अंततः ग्रामीण सड़क निर्माण के लिए एक अच्छी सामग्री के रूप में स्वीकार किया गया है।
केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय ग्रामीण आधारभूत संरचना विकास एजेंसी ने कहा है कि पीएमजीएसवाई-III के तहत ग्रामीण सड़कों के निर्माण के लिए कॉयर जियो टेक्सटाइल्स का उपयोग किया जाएगा।
केन्द्रीयएमएसएमई और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रीश्री नितिन गडकरी कॉयर फाइबर के वैकल्पिक उपयोग का पता लगाने के लिए प्रयासरत थे।इस सम्बन्ध में उन्होंने कहा, "यह बहुत ही महत्वपूर्ण बात है क्योंकि हम अबकॉयर जियो टेक्सटाइलकासड़क निर्माण में उपयोग कर सकते हैं। इस निर्णय से कॉयर उद्योग को विशेष रूप से कोविड-19 महामारी के इस कठिन समय में बढ़ावा मिलेगा।"
सड़क निर्माण के लिए पीएमजीएसवाई की नई प्रौद्योगिकी दिशानिर्देशों के अनुसार, प्रस्तावों के प्रत्येक बैच के सडकों की कुल लम्बाई के 15 प्रतिशतमें नई प्रौद्योगिकियों का उपयोग करके निर्माण किया जाना है। इनमें से 5प्रतिशत सड़कों का निर्माण आईआरसी मान्यता प्राप्त प्रौद्योगिकी का उपयोग करके किया जाना है। आईआरसी ने अब ग्रामीण सड़क निर्माण के लिए कॉयर जियो टेक्सटाइल्स को मान्यता दी है।
इन निर्देशों के अनुसार, पीएमजीएसवाई -III के तहत 5 प्रतिशत ग्रामीण सड़कों का निर्माण कॉयर जियो टेक्सटाइल्स का उपयोग करके किया जाएगा। तदनुसार कॉयर जियो टेक्सटाइल्सका उपयोग करके आंध्र प्रदेश में 164 किलोमीटर, गुजरात में 151 किलोमीटर, केरल में 71 किलोमीटर, महाराष्ट्र में 328 किलोमीटर, ओडिशा में 470 किलोमीटर, तमिलनाडु में 369 किलोमीटर और तेलंगाना में 121 किलोमीटर सड़कों का निर्माण किया जाएगा। इस प्रकार 7 राज्यों में कॉयर जियो टेक्सटाइल्स का उपयोग करके 1674 किलोमीटर सड़क का निर्माण किया जाएगा, जिसके लिए एक करोड़ वर्ग मीटर कॉयर जियो-टेक्सटाइल्स की आवश्यकता होगी। इसकी अनुमानित लागत70 करोड़ रु है।
इस निर्णय देश में कॉयर जियो -टेक्सटाइल के लिए एक बड़ी बाजार संभावना बनेगी और कोविड-19 से प्रभावित कॉयर उद्योग के लिए यह एक वरदान सिद्ध होगा।
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कैबिनेट ने एनबीएफसी/एचएफसी की नकदी की समस्या के समाधान के लिए विशेष नकदी योजना को मंज़ूरी दी
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट ने गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों और आवास वित्त कंपनियों की नकदी की स्थिति में सुधार के लिए वित्त मंत्रालय द्वारा उनके वास्ते एक नई विशेष नकदी योजना शुरु करने के प्रस्ताव को अपनी मंज़ूरी दे दी है।
वित्तीय निहितार्थ:
सरकार के लिए इसका सीधा वित्तीय आशय 5 करोड़ रुपये है जो विशेष उद्देश्य संवाहक (एसपीडब्ल्यू) के लिए इक्विटी योगदान हो सकता है। इसके अलावा, सरकार के लिए इसमें शामिल गारंटी शुरु होने तक कोई वित्तीय निहितार्थ नहीं है। हालांकि, ऐसा होने पर सरकार के उत्तरदायित्व की सीमा डिफॉल्ट राशि के बराबर होती है जो कि गारंटी की उच्चतम सीमा पर निर्भर करता है। कुल गारंटी की उच्चतम सीमा 30,000 करोड़ रुपये तय की गई है जो जरूरत के अनुसार अभिष्ट राशि तक बढ़ाई जा सकती है।
योजना का विवरण:
सरकार ने गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) और आवास वित्त कंपनियों (एचएफसी) की नकदी की समस्या के समाधान के लिए एक विशेष नकदी योजना के जरिए एक कार्ययोजना का प्रस्ताव किया है। स्ट्रेस्ड संपत्ति फंड (एसएएफ) का प्रबंधन करने के लिए एक एसपीवी का गठन किया जाएगा जिसके विशेष प्रतिभूतियों की गारंटी भारत सरकार देगी और उसे सिर्फ भारतीय रिज़र्व बैंक ही खरीदेगा। ऐसी प्रतिभूतियों की खरीद प्रक्रिया का इस्तेमाल एनबीएफसी/एचएफसी के लघु अवधि के ऋणों को हासिल करने के लिए एसपीवी ही करेगा। इस योजना को वित्तीय सेवा विभाग प्रभाव में लाएगा जो विस्तृत दिशा-निर्देश जारी करेगा।
क्रियान्वयन कार्यक्रम:
सार्वजनिक क्षेत्र का एक बड़ा बैंक स्ट्रेस्ड संपत्ति फंड (एसएएफ) का प्रबंधन करने के लिए एक एसपीवी का गठन करेगा जो भारत सरकार की गारंटी के साथ ब्याज वाली विशेष प्रतिभूतियां जारी करेगी और उसे सिर्फ भारतीय रिज़र्व बैंक ही खरीदेगा। एसपीवी जरूरत के हिसाब से प्रतिभूतियां जारी करेगा जो प्रतिभूतियों की बकाया राशि पर निर्भर करेगा और यह राशि 30,000 करोड़ से अधिक नहीं होगी और जरूरत पड़ने पर इसे अभिष्ट राशि तक बढ़ाई जा सकती है। एसपीवी द्वारा जारी प्रतिभूतियों को भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा खरीदा जाएगा और इसरकी प्रक्रिया का इस्तेमाल योग्य एनबीएफसी/एचएफसी के कम से कम लघु अवधि के ऋणों को हासिल करने के लिए एसपीवी ही करेगा।
प्रभाव:
आंशिक क्रेडिट गारंटी योजना के विपरीत, जिसमें सार्वजनिक क्षेत्र के विभिन्न बैंकों और एनबीएफसी के बीच कई द्विपक्षीय सौदे शामिल हैं, एनबीएफसी को अपने मौजूदा परिसंपत्ति पोर्टफोलियो को अलग करने की जरूरत होती है और इसमें सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों से धन प्रवाह शामिल होता है। प्रस्तावित योजना एसपीवी और एनबीएफसी के बीच अपनी मौजूदा परिसंपत्ति को अलग किए बिना वन स्टेप व्यवस्था होगी। यह योजना एनबीएफसी को निवेश ग्रिड या जारी किए गए बॉन्ड के लिए बेहतर रेटिंग दिलाने का अधिकार भी देगा। इस योजना के संचालित होने और गैर-बैंकिंग क्षेत्र से धन प्रवाह को बढ़ाने में आसानी होने की संभावना है।
लाभ:
2020-21 के बजट भाषण में यह घोषणा की गई है कि एनबीएफसी/एचएफसी को अतिरिक्त नकदी की सुविधा प्रदान करने के लिए एक तंत्र तैयार किया जाएगा जो पीसीजीएस के माध्यम से उपलब्ध कराया जाएगा। यह सुविधा सरकार और आईबीआई द्वारा अब तक किए गए उपायों की पूरक होगी। इस योजना से एनबीएफसी/एचएफसी/एमएफआई के ऋण संसाधनों में बढ़ोतरी करके वास्तविक अर्थव्यवस्था को लाभ होगा।
पृष्ठभूमि:
2020-21 के बजट भाषण में यह घोषणा की गई है कि एनबीएफसी/एचएफसी को अतिरिक्त नकदी की सुविधा प्रदान करने के लिए एक तंत्र तैयार किया जाएगा जो आंशिक क्रेडिट गारंटी योजना (पीसीजीएस) के माध्यम से उपलब्ध कराया जाएगा। कोविद-19 की वजह से उभरती स्थिति के कारण वित्तीय स्थिरता को मजबूत करने के लिए उपरोक्त बजट घोषणा को लागू करने अति आवश्यक है।
