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नीली क्रांति के माध्यम से मत्स्य पालन क्षेत्र के सतत और जवाबदेह विकास के लिए प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना को कैबिनेट की मंजूरी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के क्रियान्वयन को मंजूरी दे दी है। योजना का उद्देश्य नीली क्रांति के माध्यम से देश में मत्स्य पालन क्षेत्र के सतत और जवाबदेह विकास को सुनिश्चित करना है। कुल 20050 करोड रुपए की अनुमानित लागत वाली यहयोजना, केन्द्रीय येाजना और केन्द्र प्रायोजित योजना के रूप में लागू की जाएगी। इसमें केन्द्र की हिस्सेदारी 9407 करोड रूपए, राज्यों की हिस्सेदारी 4880 करोड रुपए तथा लाभार्थियों की हिस्सेदारी 5763 करोड रुपए होगी। इस योजना को वित्त वर्ष 2020 21 से 2024 25 तक पांच वर्षों की अवधि में लागू किया जाएगा। योजना के दो घटक होंगे। पहला केन्द्रीय योजना और दूसरा केन्द्र प्रायोजित योजना। केन्द्रीय योजना के दो वर्ग होंगे एक लाभार्थी वर्ग और दूसरा गैर लाभार्थी वर्ग। केन्द्र प्रायोजित योजना को तीन प्रमुख श्रेणियों में विभाजित किया गया है उत्पादन और उत्पादकता को प्रोत्साहन अवसंरचना और उत्पादन बाद प्रंबधन मत्स्य पालन प्रबंधन और नियामक फ्रेमवर्क योजना का वित्त पोषण केन्द्रीय परियोजना के लिए 100 प्रतिशत वित्तीय जरुरतों की पूर्ति केन्द्र की ओर की जाएगी। इसमें लाभार्थी वर्ग से जुडी गतिविधियों को चलाने का काम पूरी तरह से राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड सहित केन्द्र सरकार का होगा। इसमें सामान्य लाभार्थियों वाली परियोजना का 40 प्रतिशत जबकि अनुसूचित जाति और जनजाति तथा महिलाओं से जुडी परियोजना का 60 प्रतिषण वित्त पोषण केन्द्र सरकार करेगी। केन्द्र प्रायोजित योजना का वित्त पोषण इस योजना के तहत गैर लाभार्थियों से जुडी गतिविधियों का पूरा खर्च राज्य और केन्द्र शासित प्रदेश की सरकारें मिलकर उठाएंगी। इसके तहत पूर्वोत्तर तथा हिमालयी क्षेत्र वाले राज्यों में लागू की जाने वाली ऐसी परियेाजना का 90 फीसदी खर्च केन्द्र और 10 फीसदी खर्च राज्य सरकारें वहन करेंगी। अन्य राज्यों के मामले में केन्द्र और संबधित राज्यों की हिस्सेदारी क्रमश 60 और 40 प्रतिशत होगी। केन्द्र शासित प्रदेशों में लागू की जाने वाली ऐसी योजनाओं का सौ फीसदी वित्त पोषण केन्द्र की ओर से किया जाएगा गैर लाभार्थी वर्ग की योजना का वित्त पोषण इस वर्ग की योजना का वित्त पोषण पूरी तरह से सं​बधित राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों की ओर से किया जाएगा। इसमें सामान्य श्रेणी वाली परियोजना में सरकार, राज्य और केन्द्रशासित प्रदेशों की कुल हिस्सेदारी 40 प्रतिशत से अधिक नहीं होगी जबकि महिलाओं,अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग से जुडी परियोजना के लिए सरकार की ओर से 60 फीसदी की आर्थिक मदद दी जाएगी। पूर्वोत्तर तथा हिमालयी क्षेत्र के राज्यों में ऐसी परियोजनाओं के लिए सरकार की ओर से90 प्रतिशत वित्त पोषण किया जाएगा जबकि राज्यों की हिस्सेदारी 10 प्रतिशत होगी। अन्य राज्यों के लिए यह क्रमश 60 और 40 प्रतिशत होगी केन्द्र शासित प्रदेशों के लिए केन्द्र की ओर से 100 फीसदी मदद दी जाएगी लाभ मत्स्य पालन क्षेत्र की गंभीर कमियो को दूर करते हुए उसकी क्षमताओं का भरपूर इस्तेमाल होगा मत्स्य पालन क्षेत्र में 9 प्रतिशत की सालाना दर से वृद्धि के साथ 2024 25 तक 22 मिलियन मेट्रिक टन उत्पादन का लक्ष्य हासिल किया जा सकेगा। मत्स्य पालन के लिए गुणवत्ता युक्त बीज हासिल करने तथा मछली पालन के लिए बेहतर जलीय प्रबंधन को बढावा मिलेगा। मछली पालन के लिए आवश्यक अवसंरचना और मजबूत मूल्य श्रृंखला विकसित की जा सकेगी। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में मछली पालन से सीधे या परोक्ष रूप से जुडे हुए सभी लोगों के लिए रोजगार और आय के बेहतर अवसर बनेंगे। मछली पालन क्षेत्र में निवेश आकर्शित करने में मदद मिलेगी जिससे मछली उत्पाद बाजार में और अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकेंगे। वर्ष 2024 तक मछली पालन से जुडे किसानों की आय दोगुनी करने में मदद मिलेगी मछली पालन क्षेत्र तथा इससे जुडे किसानों और श्रमिकों को सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा मिलेगी

कैबिनेट ने प्रवासियों/फँसे हुए प्रवासियों के लिए खाद्यान्नों के आवंटन हेतु ‘आत्म निर्भर भारत’ पैकेज को स्वीकृति दी प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल ने करीब 8 करोड़ प्रवासियों/फँसे हुए प्रवासियों के लिए केन्द्रीय भंडार से दो माह (मई और जून, 2020) तक प्रति व्यक्ति 5 किलोग्राम निःशुल्क खाद्यान के आवंटन को पूर्वव्यापी स्वीकृति दे दी है। इससे करीब 2,982.27 करोड़ रूपए की खाद्य सब्सिडी प्रदान की जाएगी। इसके अलावा अंतराराज्य परिवहन और लदाई-उतराई प्रभार और डीलरों की अतिरिक्त राशि/अतिरिक्त डीलर लाभ के लिए दिए जाने वाले करीब 127.25 करोड़ रूपए का वहन पूरी तरह से केन्द्र सरकार के द्वारा किया जाएगा। इसके फलस्वरूप, भारत सरकार से मिलने वाली कुल अनुमान खाद्य सब्सिडी करीब 3,109.52 करोड़ होगी। यह आवंटन से कोविड-19 के कारण हुए आर्थिक व्यवधान से प्रवासियों/फँसे हुए प्रवासियों के द्वारा सामना की जा रही कठिनाईयों को कम किया जा सकेगा।

कैबिनेट ने ‘प्रधानमंत्री वय वंदना योजना’ के विस्तार को स्वीकृति दी प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल ने वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण और वृद्धावस्था आय सुरक्षा को समर्थ बनाने के लिए निम्नलिखित को अपनी स्वीकृति दे दी है: (ए) 31 मार्च 2020 से अगले तीन वर्षों अर्थात 31 मार्च 2023 तक प्रधानमंत्री वय वंदना योजना (पीएमवीवीवाई) का विस्तार। (बी) प्रारंभ में 2020-21 के लिए प्रतिवर्ष 7.40 प्रतिशत की सुनिश्चित प्रतिफल दर और इसके पश्चात प्रत्येक वर्ष पुन: समायोजित की जाएगी। (सी) वरिष्ठ नागरिक बचत योजना (एससीएसएस) की संशोधित प्रतिफल दर के अनुरूप वित्तीय वर्ष में 1 अप्रैल से प्रभावी वार्षिक समायोजित सुनिश्चित ब्याज की दर किसी भी बिंदु पर योजना के नवीन मूल्यांकन के साथ 7.75 प्रतिशत तक होगी। (डी) योजना के अंतर्गत प्रतिफल की गारंटीकृत दर और एलआईसी द्वारा प्रतिफल की बाजार दर के बीच अंतर के कारण होने वाले व्यय के लिए अनुमोदन। (ई) नई जारी पालिसियों के संबंध में योजना के प्रथम वर्ष के कोषों के वित्तीय प्रबंधन व्ययों को प्रतिवर्ष 0.5 प्रतिशत और इसके बाद दूसरे वर्ष से अगले 9 वर्षों के लिए प्रतिवर्ष 0.3 प्रतिशत तक सीमित करना। (एफ) प्रत्येक वित्तीय वर्ष क पर प्रतिफल की वार्षिक समायोजित दर की स्वीकृति के लिए वित्त मंत्री को अधिकार दिए गए हैं। (जी) इस योजना की अन्य नियम एवं शर्ते समान रहेंगी। इस योजना के अंतर्गत, प्रति वर्ष 12,000 रूपए की पेंशन के लिए 1,56,658 रूपए और प्रति माह 1000 रूपए की न्यूनतम पेंशन धनराशि प्राप्त करने के लिए 1,62,162 रूपए तक के न्यूनतम निवेश तक संशोधित किया गया है। वित्तीय निहितार्थ: सरकार का वित्तीय दायित्व वर्ष 2020-21 के लिए प्रारंभिक तौर पर प्रतिवर्ष 7.40 प्रतिशत की सुनिश्चित वापसी और एलआईसी द्वारा तय बाजार प्रतिफल के बीच अंतर के विस्तार तक सीमित है और इसके बाद एससीएसएस के अनुरूप प्रतिवर्ष निर्धारित किया जाएगा। इस योजना के वित्तीय प्रबंधन व्ययों प्रथम वर्ष के लिए प्रबंधन के अंतर्तग परिसम्पत्तियों के 0.5 प्रतिशत प्रतिवर्ष और इसके बाद दूसरे वर्ष से अगले 9 वर्षों के लिए प्रतिवर्ष 0.3 प्रतिशत तक सीमित किया गया है। इसके अनुसार वित्तीय वर्ष 2023-24 में 829 करोड़ रूपए और अंतिम वित्तीय वर्ष 2032-33 में 264 करोड़ रूपए का अनुमानित व्यय होगा। वास्तविक आधार पर वार्षिक भुगतान के लिए सब्सिडी प्रतिपूर्ति के 614 करोड़ रूपए होने का उम्मीद है। हालांकि वास्तविक ब्याज अंतर (सब्सिडी) नई जारी पालिसियों की संख्या में शर्तों के वास्तविक अनुभव पर निर्भर होगी। पीएमवीवीवाई वरिष्ठ नागरिकों के लिए एक समाजिक सुरक्षा योजना है जो क्रय मूल्य/वार्षिक अंशदान पर सुनिश्चित रिटर्न के आधार पर उनको न्यूनतम पेंशन सुनिश्चित कराने की मंशा रखती है।

करीब आठ लाख सूक्ष्म-उद्यम सूचना, बेहतर विवरण और औपचारिक पहुँच के माध्यम से लाभान्वित होंगे। विस्तार और उन्नयन के लिए 2,00,000 सूक्ष्म उद्यमों तक ऋण से जुड़ी सब्सिडी और हैंडहोल्डिंग सहायता को बढ़ाया जाएगा। यह उन्हें गठित, विकसित और प्रतिस्पर्धी बनने में समर्थ बनाएगा। इस परियोजना से नौ लाख कुशल और अल्प-कुशल रोजगारों के सृजन की संभावना है। इस योजना में आकांक्षापूर्ण जिलों में मौजूदा सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमियों, महिला उद्यमियों और उद्यमियों को ऋण तक पहुँच बढ़ाया जाना शामिल है। संगठित बाजार के साथ बेहतर समेकन। सोर्टिग, ग्रेडिंग, प्रसंस्करण, पैकेजिंग, भंडारण आदि जैसी समान सेवाओं को पहुँच में वृद्धि। पृष्ठभूमि: करीब 25 लाख अपंजीकृत खाद्य प्रसंस्करण उद्यम है जो इस क्षेत्र का 98 प्रतिशत है और ये असंगठित और अनियमित हैं। इन इकाईयों का करीब 68 प्रतिशत ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित है और इनमें से 80 प्रतिशत परिवार आधारित उद्यम हैं। यह क्षेत्र बहुत सी चुनौतियों जैसे ऋण तक पहुँच न होना, संस्थागत ऋणों की ऊँची लागत, अत्याधुनिक तकनीक की कमी, खाद्य आपूर्ति श्रृंखला के साथ जुड़ने की असक्षमता और स्वास्थ्य और सुरक्षा मानकों के साथ अनुपालन का सामना करता है। इस क्षेत्र को मजबूत करने से व्यर्थ नुकसान में कमी, खेती से इतर रोजगार सृजन अवसर और किसानों की आय को दुगना करने के सरकार के लक्ष्य तक पहुँचने में महत्वपूर्ण रूप से मदद मिलेगी।

कैबिनेट ने “सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों को औपचारिक रूप देने की योजना” को स्वीकृति दी प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल ने 10,000 हजार करोड़ रूपए के परिव्यय के साथ अखिल भारतीय स्तर पर असंगठित क्षेत्र के लिए एक नई केन्द्र प्रायोजित “सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों को औपचारिक रूप देने की योजना (एफएमई)” को स्वीकृति दे दी है। इस व्यय को 60:40 के अनुपात में भारत सरकार और राज्यों के द्वारा साझा किया जाएगा। योजना का विवरण: उद्देश्य: सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाईयों के द्वारा वित्त अधिगम्यता में वृद्धि लक्ष्य उद्यमों के राजस्व में वृद्धि खाद्य गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों का अनुपालन समर्थन प्रणालियों की क्षमता को सुदृढ़ बनाना असंगठित क्षेत्र से औपचारिक क्षेत्र में पारगमन महिला उद्यमियों और आकांक्षापूर्ण जिलों पर विशेष ध्यान अपशिष्ट से धन अर्जन गतिविधियों को प्रोत्साहन जनजातीय जिलों लघु वन उत्पाद पर ध्यान मुख्य विशेषताऐं: केन्द्र प्रायोजित योजना। व्यय को 60:40 के अनुपात में भारत सरकार और राज्यों के द्वारा साझा किया जाएगा। 2,00,000 सूक्ष्म-उद्यमों को ऋण से जुड़ी सब्सिडी के माध्यम से सहायता प्रदान की जाएगी। योजना को 2020-21 से 2024-25 तक के लिए 5 वर्ष की अवधि हेतु कार्यान्वित किया जाएगा। समूह दृष्टिकोण खराब होने वाली वस्तुओं पर विशेष ध्यान व्यक्तिगत सूक्ष्म इकाईयों को सहायता: 10 लाख तक के लागत वाली वैध परियोजना के सूक्ष्म उद्यमों को 35 प्रतिशत की दर से ऋण से जुड़ी सब्सिडी मिलेगी। लाभार्थी का योगदान न्यनतम 10 प्रतिशत और ऋण का शेष होगा। एफपीओ/एसएचजी/क़ोओपरेटिव को सहायता: कार्यशील पूँजी और छोटे उपकरणों के लिए सदस्यों हेतु ऋण के लिए एसएचजी को प्रारंभिक पूँजी अगले/पिछले लिकेंज, सामान्य बुनियादी ढ़ाचे, पैकेजिंग, विपणन और ब्रांडिंग के लिए अनुदान कौशल प्रशिक्षण एवं हैंडहोल्डिंग समर्थन ऋण से जुड़ी पूँजी सब्सिडी कार्यान्वयन कार्यक्रम: योजना को अखिल भारतीय स्तर पर प्रारंभ किया जाएगा। ऋण से जुड़ी सहायता सब्सिडी 2,00,000 इकाईयों को प्रदान की जाएगी। कार्यशील पूँजी और छोटे उपकरणों के लिए सदस्यों हेतु ऋण के लिए एसएचजी को (4 लाख रूपए प्रति एसएचजी) की प्रारंभिक पूँजी दी जाएगी। अगले/पिछले लिकेंज, सामान्य बुनियादी ढ़ाचे, पैकेजिंग, विपणन और ब्रांडिंग के लिए एफपीओ को अनुदान प्रदान किया जाएगा। प्रशासनिक और कार्यान्वयन तंत्र इस योजना की निगरानी खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री की अध्यक्षता में एक अंतर-मंत्रिस्तरीय अधिकार प्राप्त समिति (आईएमईसी) के द्वारा केन्द के स्तर पर की जाएगी। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य/संघ शासित प्रदेशों की एक समिति एसएचजी/ एफपीओ/क़ोओपरेटिव के द्वारा नई इकाईयों की स्थापना और सूक्ष्म इकाईयों के विस्तार के लिए प्रस्तावों की निगरानी और अनुमति/अनुमोदन करेगी। राज्य/संघ शासित प्रदेश इस योजना के कार्यान्वयन के लिए विभिन्न गतिविधियों को शामिल करते हुए वार्षिक कार्ययोजना तैयार करेंगे। इस कार्यक्रम में तीसरे पक्ष का एक मूल्याँकन और मध्यावधि समीक्षा तंत्र भी बनाया जाएगा। राज्य/संघ शासित प्रदेश नोडल विभाग और एजेन्सी राज्य/संघ शासित प्रदेश इस योजना के कार्यान्वयन के लिए एक नोडल विभाग और एजेन्सी को अधिसूचित करेगें। राज्य/संघ शासित प्रदेश नोडल एजेंसी (एसएनए) राज्य/संघ शासित प्रदेशों में इस योजना को कार्यान्वित करने के लिए उत्तरदायी होने के साथ-साथ राज्य/संघ शासित प्रदेश स्तर उन्नयन योजना की तैयारी और प्रमाणीकरण, समूह विकास योजना, इकाईयों और समूहों आदि को सहायता प्रदान करते हुए जिला, क्षेत्रीय स्तर पर स्रोत समूह के कार्य की निगरानी करेगी। राष्ट्रीय पोर्टल और एमआईएस एक राष्ट्रीय पोर्टल की स्थापना की जाएगी जहाँ आवेदक/ व्यक्तिगत उद्यमी इस योजना में शामिल होने के लिए आवेदन कर सकते हैं। योजना की सभी गतिविधियों को राष्ट्रीय पोर्टल पर संचालित किया जाएगा। समाभिरूपता प्रारूप भारत सरकार और राज्य सरकारों के द्वारा कार्यान्वयन के अंतर्गत मौजूदा योजनाओं से सहायता भी इस योजना के अंतर्गत ली जा सकेगी। यह योजना उन अंतरालों को भरने का कार्य करेगी जहाँ अन्य स्रोतों खासकर पूँजी निवेश, हैंडहोल्डिंग सहायता, प्रशिक्षण और सामान्य बुनियादी ढ़ांचे के लिए सहायता उपलब्ध नहीं है। प्रभाव और रोजगार सृजन:

20 May World metrology day Theme - Measurement for global trade
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Current Affairs Quiz 20 May 2020 दैनिक सामान्य ज्ञान क्विज https://www.simplifiedshiksha.com/current-affairs-quiz-20-may/
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Photo from Anand Pratap Singh
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KSG IAS CURRENT CONNECT APRIL 2020

पिछले कुछ वर्षों में वैश्वीकरण और देश में विदेशी कंपनियों के आने से औद्योगिक क्षेत्र की स्थानीय इकाइयों पर प्रतिस्पर्द्धा का दबाव बढ़ा है, ऐसे में क्रॉस सब्सिडी को कम करने से औद्योगिक क्षेत्र पर पड़ने वाले वाले अतिरिक्त दबाव को कम किया जा सकेगा। देश के कई क्षेत्रों में वर्तमान ज़रूरतों के अनुसार विद्युत विभाग में नवीनीकरण न होने या अन्य कारणों से से एक बड़े क्षेत्र को सेवाएँ उपलब्ध कराना एक चुनौती है। ऐसे में फ्रेंचाइजी और ‘उप- वितरक लाइसेंस’ देने के माध्यम से निजी क्षेत्र को जोड़कर इस समस्या का समाधान किया जा सकता है। ऐसे में ‘केंद्रीय प्रवर्तन प्राधिकरण’ की स्थापना के माध्यम से विद्युत क्षेत्र में योजनाओं के क्रियान्वयन और उनकी बेहतर निगरानी में सहायता प्राप्त होगी। आगे की राह वर्तमान समय में कृषि और औद्योगिक क्षेत्र के विकास को सुनिश्चित करने के लिये आसान दरों पर बिजली की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना बहुत ही आवश्यक है। वितरक कंपनियों के लिये कृषि क्षेत्र में विद्युत वितरण को किफायती बनाने और कंपनियों के घाटे को कम करने हेतु किसानों को मीटर और ‘प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण’ के बारे में जागरूक किया जाना चाहिये। विद्युत वितरण के दौरान होने वाली विद्युत हानि ‘ट्रांसमिशन लॉस’ (Transmission Loss) को कम करने के लिये आवश्यक तकनीकी बदलाव किये जाने चाहिये। विद्युत क्षेत्र की समस्याओं के समाधान के लिये केंद्र व राज्य सरकारों तथा सभी राजनीतिक दलों एवं अन्य हितधारकों के बीच एक सकारात्मक राजनीतिक संवाद का होना बहुत ही आवश्यक है।

जलवायु परिवर्तन पर पेरिस समझौते के अनुसार, राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित हमारे योगदानों और एक स्वच्छ ग्रह के प्रति हमारी ज़िम्मेदारी को ध्यान में रखते हुए भारत ने संकल्प लिया है कि 2030 तक विद्युत उत्पादन की हमारी 40 प्रतिशत स्थापित क्षमता ऊर्जा के स्वच्छ स्रोतों पर आधारित होगी। साथ ही यह भी निर्धारित किया गया है कि वर्ष 2022 तक 175 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता स्थापित की जाएगी। इसमें सौर ऊर्जा से 100 गीगावाट, पवन ऊर्जा से 60 गीगावाट, बायोमॉस से 10 गीगावाट और छोटी पनबिजली परियोजनाओं से 5 गीगावाट क्षमता शामिल है। इस महत्त्वाकांक्षी लक्ष्य को हासिल करने के साथ ही भारत विश्व के सबसे बड़े स्वच्छ ऊर्जा उत्पादकों की जमात में शामिल हो जाएगा। यहाँ तक कि वह कई विकसित देशों से भी आगे निकल जाएगा। फिलहाल वर्ष 2018 तक में देश की कुल स्थापित क्षमता में तापीय ऊर्जा की 63.84 फीसदी, नाभिकीय ऊर्जा की 1.95 फीसदी, पनबिजली की 13.09 फीसदी और नवीकरणीय ऊर्जा की हिस्सेदारी 21.12 फीसदी है। मसौदे में प्रस्तावित सुधार लागत आधारित दर और प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण सरकार द्वारा प्रस्तावित संशोधन के अनुसार, नियामक विद्युत उत्पादन और उसके वितरण की लागत के आधार पर विद्युत दरों का निर्धारण करेंगे, नियामकों द्वारा निर्धारित दरों में सब्सिडी को शामिल नहीं किया जाएगा। किसानों को प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) के माध्यम से सीधे उनके खाते में सब्सिडी प्रदान की जाएगी। नियामकीय व्यवस्था को मजबूत बनाना इस मसौदे में अध्यक्ष के अतिरिक्त अपीलीय न्यायाधिकरण की क्षमता को 7 सदस्यों तक बढ़ाने का सुझाव दिया गया है। जिससे मामलों के त्वरित निस्तारण हेतु कई पीठों की स्थापना की जा सके, साथ ही न्यायाधिकरण के निर्णयों के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिये इसे और अधिक सशक्त बनाने का प्रस्ताव भी किया गया है। वर्तमान विद्युत अधिनियम के तहत केंद्रीय और राज्य आयोग के अध्यक्ष तथा अन्य सदस्यों की नियुक्ति के लिये कई चयन समितियों का गठन करना पड़ता है। जिन्हें अब समाप्त कर क चयन समिति की व्यवस्था का प्रस्ताव किया गया है। मसौदे में विद्युत अधिनियम के प्रावधानों और आयोग के आदेशों का अनुपालन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से दंडात्मक कार्रवाई के रूप में अधिक जुर्माना लगाए जाने हेतु विद्युत अधिनियम की धारा 142 और 146 में संशोधन का प्रस्ताव किया गया है। विद्युत अनुबंध प्रवर्तन प्राधिकरण की स्थापना मसौदे में उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक ‘केंद्रीय प्रवर्तन प्राधिकरण’ की स्थापना का प्रस्ताव किया गया है। इस प्राधिकरण के पास विद्युत उत्पादन और वितरण से जुड़ी हुई कंपनियों के बीच बिजली की खरीद, बिक्री या हस्तांतरण से संबंधित अनुबंधों की लागू करने के लिये दीवानी अदालत (Civil Court) के बराबर अधिकार होंगे। नवीकरणीय ऊर्जा और पनबिजली केंद्र सरकार ने देश में ऊर्जा के नवीकरणीय स्रोतों से बिजली के उत्पादन के आवश्यक क्षमता विकास और प्रोत्साहन के लिये एक ‘राष्ट्रीय नवीकरणीय ऊर्जा नीति’ (National Renewable Energy Policy) के निर्माण का प्रस्ताव किया है। मसौदे में आयोग को विद्युत वितरकों द्वारा अनिवार्य रूप से नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से बिजली की खरीद की एक न्यूनतम मात्रा निर्धारित करने का प्रस्ताव किया गया है। साथ ही नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से न्यूनतम बिजली खरीदने की बाध्यता न पूरी करने पर जुर्माना लगाने का प्रस्ताव भी किया गया है। सीमा पार विद्युत व्यापार इसके तहत मसौदे में भारत तथा अन्य देशों के बीच बिजली व्यापार को बढ़ावा देने तथा इसे और अधिक आसान बनाने के लिये आवश्यक प्रावधानों को प्रस्तावित किया गया है। फ्रेंचाइजी और उप- वितरण लाइसेंस केंद्र सरकार ने इस मसौदे में राज्यों में विद्युत वितरण कंपनियों को किसी क्षेत्र विशेष में विद्युत् वितरण के लिये फ्रेंचाइजी और उप- वितरण कंपनियों को जोड़ने का अधिकार देने का प्रस्ताव किया है। प्रस्तावित संशोधनों से लाभ ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि और सामान्य उपभोक्ताओं के लिये बिजली उपलब्ध कराने के लिये अलग-अलग सप्लाई लाइनों के न होने से राज्य सरकारों को वितरण कंपनियों को अधिक सब्सिडी देने पर विवश होना पड़ा है। विद्युत सब्सिडी के भुगतान हेतु ‘प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण’ की प्रक्रिया अपनाने से किसान या अन्य पात्र लोगों को सहायता सुनिश्चित करने के साथ ही सरकार के आर्थिक बोझ को कम करने में मदद मिलेगी। कृषि क्षेत्र में उपभोगताओं के लिये मीटर अनिवार्य करने से किसानों को बिजली और जल के अनियंत्रित दोहन के संदर्भ में जागरूक किया जा सकेगा साथ ही बिजली चोरी की घटनाओं को नियंत्रित कर बिजली खपत की बेहतर निगरानी की जा सकेगी।

भारत सरकार की नीति ‘सभी के लिये विद्युत’ (Power For All ) का उद्देश्य वर्ष 2022 तक देश के प्रत्येक व्यक्ति तक सस्ती, विश्वसनीय, टिकाऊ और नवीकरणीय ऊर्जा तक पहुँच प्रदान करना है। इस उद्देश्य को प्राप्त करने के लिये सरकार ने हाल ही में विद्युत अधिनियम (Electricity Act ),2003 में कुछ संशोधन करने की घोषणा की है। केंद्र सरकार ने देश के विद्युत क्षेत्र में बड़े सुधार करने के उद्देश्य से ‘विद्युत अधिनियम (संशोधन) विधेयक, 2020’ के मसौदे को मंजूरी दी है। इस मसौदे में शामिल सुधारों में सब्सिडी वितरण हेतु ‘प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण’ (Direct Benefit Transfer- DBT) की प्रणाली का प्रयोग, विद्युत वितरण कंपनियों (डिस्कॉम्स) की वैधता, लागत आधारित दर, विद्युत अनुबंध प्रवर्तन प्राधिकरण की स्थापना और नियामकीय व्यवस्था को मज़बूत बनाना आदि प्रमुख हैं। इसके साथ ही एक समावेशी राष्ट्रीय नवीकरणीय ऊर्जा नीति (National Renewable Energy Policy) का विकास और शुल्कों का युक्तिकरण शामिल है। बिजली क्षेत्र की अधिकांश समस्याएँ डिस्कॉम (वितरण कंपनियाँ) क्षेत्र के खराब निष्पादन से जुड़ी हुई हैं। इन्हीं समस्यायों को ध्यान में रखते हुए वर्ष 2015 में ‘उदय’ (उज्ज्वल डिस्‍कॉम एश्‍योरेंस योजना) योजना को लॉन्च किया गया था जो कि विचार की दृष्टि से एक अच्छी पहल थी। कुछ राज्यों में यह पहल सकारात्मक परिवर्तन वाली साबित हुई और कुछ राज्यों में इसे इच्छित लाभकारी परिवर्तन नहीं प्राप्त हो सके। इस आलेख में विद्युत वितरण में आने वाली चुनौतियाँ, विद्युत अधिनियम में संशोधन के प्रभाव, नवीकरणीय ऊर्जा नीति की आवश्यकता के साथ विद्युत क्षेत्र की समस्याओं का समाधान करने का प्रयास किया जाएगा। उदय योजना क्या है? नवंबर, 2015 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा उज्ज्वल डिस्कॉम एश्योरेंस योजना या ‘उदय योजना’ (UDAY) को स्वीकृति प्रदान की गई। उदय को विद्युत वितरण कंपनियों (डिस्कॉम्स) की वित्‍तीय तथा परिचालन क्षमता में सुधार लाने के लिये शुरू किया गया था। इस योजना में ब्‍याजभार, विद्युत की लागत और कुल तकनीकी तथा वाणिज्यिक नुकसान की हानि को कम करने का प्रावधान है। इसके परिणामस्‍वरूप डिस्कॉम्स लगातार 24 घंटे पर्याप्‍त और विश्‍वसनीय विद्युत की आपूर्ति करने में समर्थ हो जाएंगी। इस योजना में राज्‍य सरकार को अपने ऋणों का स्‍वैच्छिक रूप से पुनर्गठन करने के लिये प्रोत्‍साहित करने हेतु प्रावधान है। उदय योजना के तहत बिजली वितरण कंपनियों को आगामी दो-तीन वर्षों में उबारने हेतु निम्नलिखित चार पहले अपनाए जाने की बात शामिल है जो निम्नलिखित हैं – बिजली वितरण कंपनियों की परिचालन क्षमता में सुधार। बिजली की लागत में कमी। वितरण कंपनियों की ब्याज लागत में कमी। राज्य वित्त आयोग के साथ समन्वय के माध्यम से बिजली वितरण कंपनियों पर वित्तीय अनुशासन लागू करना। विद्युत क्षेत्र की समस्याएँ विद्युत क्षेत्र ने पिछले कुछ वर्षों के दौरान क्षमता विकास के मामले में भारी वृद्धि देखी है, लेकिन मांग और पूर्ति में असंतुलन के कारण यह क्षेत्र सदैव ही तनाव में रहा है। ऊर्जा पर 37वीं स्थायी पैनल की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत के 34 बिजली संयंत्रों में लगभग 1.40 लाख करोड़ रुपए की गैर-निष्पादित परिसंपत्तियाँ (Non-Performing Assets-NPA) हैं। बिजली की कीमत के निर्धारण की दुविधा के कारण डिस्कॉम्स जितना अधिक बिजली वितरण उपलब्ध कराते हैं, उतना ही उनका घाटा बढ़ता जाता है। परिणामस्वरूप, यह मांग की कमी बदले में बिजली डिस्कॉम्स को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर रहा है। अधिकांश ग्रामीण क्षेत्रों और कृषि कार्य में विद्युत आपूर्ति के लिये मीटर (Electricity Meter) न होने के कारण ऐसे क्षेत्रों में विद्युत खपत के संदर्भ में विस्तृत आँकड़ों की अनुपलब्धता एक बड़ी समस्या है। कृषि में विद्युत सब्सिडी के कारण राज्य सरकारों पर आर्थिक दबाव बढ़ा है और यह आर्थिक दबाव विद्युत क्षेत्र के विकास की सबसे बड़ी बाधा रही है, साथ ही वितरक कंपनियों को समय पर भुगतान न मिलने के कारण कंपनियों की स्थिति खराब हुई है। बेहतर तकनीक एवं उपकरणों के नवीनीकरण के न होने के कारण उत्पादन केंद्रों से उपभोक्ताओं तक विद्युत् वितरण के दौरान भारी मात्रा में ऊर्जा की हानि एक बड़ी समस्या है। सरकार पर सब्सिडी के दबाव को कम करने के लिये क्रॉस-सब्सिडी (किसी एक वर्ग या समूह को कम दरों पर सेवाएँ या उत्पाद उपलब्ध करने के लिये किसी दूसरे समूह से अधिक/अतिरिक्त शुल्क वसूल करने की प्रक्रिया) जैसी नीतियों को अपनाने से औद्योगिक क्षेत्र पर नकारात्मक परिणाम देखने को मिले हैं। विद्युत उत्पादन में नवीकरणीय ऊर्जा की भूमिका

अरुणाचल प्रदेश की दिबांग घाटी में प्रस्तावित 3097 मेगावाट की एटालिन जलविद्युत परियोजना की वजह से जैव विविधता पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर पर्यावरण कार्यकर्त्ता इस परियोजना को रद्द करने की मांग कर रहे हैं। प्रमुख बिंदु: उल्लेखनीय है कि पर्यावरण कार्यकर्त्ताओं ने वन सलाहकार समिति (Forest Advisory Committee-FAC) के अध्यक्ष और सदस्यों को एक पत्र के माध्यम से अवगत किया कि क्यों एटालिन जलविद्युत परियोजना को रद्द किया जाना चाहिये। पर्यावरण कार्यकर्त्ताओं का पत्र के माध्यम से तर्क: एटालिन जलविद्युत परियोजना को मंज़ूरी देते वक्त वन संरक्षण और संबंधित कानूनी सिद्धांतों की अनदेखी की गई है। इस तरह किसी भी परियोजना को मंज़ूरी देने से पर्यावरण/वन/वन्यजीवों/मनुष्यों पर अत्यधिक प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा साथ ही इस प्रभाव की क्षतिपूर्ति को कभी कम नहीं किया जा सकता है। इस पत्र में पर्यावरण की रक्षा और सुधार करने तथा वन और वन्यजीवों की सुरक्षा हेतु पूर्व में उच्चतम न्यायालय की टिप्पणियों का भी उल्लेख किया है। FAC निरंतर वन, वन्यजीवों और जैव विविधता हॉटस्पॉट में दुर्लभ पुष्प और जीव-जंतु प्रजातियों की अनदेखी कर रहा है। इस पत्र में एटालिन जलविद्युत परियोजना पर पर्यावरण प्रभाव आकलन रिपोर्ट में भी खामियों का उल्लेख किया है 23 अप्रैल को वन सलाहकार समिति (Forest Advisory Committee- FAC) ने इन क्षेत्रों में लगभग 270,000 पेड़ों की कटाई की अनुमति दी है। FAC उप समिति का तर्क है कि भारतीय वन्यजीव संस्थान (Wildlife Institute of India) द्वारा किये गए अध्ययन के आधार पर उपयोगकर्त्ता एजेंसी (निजी फर्म) को वन्यजीव संरक्षण योजना का वित्तीय परिव्यय को वन विभाग में जमा करने पर ही परियोजना को अनुमति दी जा सकती है। एटालिन जलविद्युत परियोजना के विरोध के कारण: इस परियोजना से कुल 18 गाँवों के निवासी प्रभावित होंगे। इसके तहत लगभग 2,70,000 पेड़ों की कटाई होगी और विश्व स्तर पर लुप्तप्राय 6 स्तनधारी प्रजातियों के अस्तित्त्व के लिये खतरा उत्पन्न हो सकता है। इस क्षेत्र में पक्षियों की 680 प्रजातियाँ पाई जाती हैं, जो भारत में पाई जाने वाली कुल पक्षियों की प्रजातियों (Avian Species) का लगभग 56% हैं। यह परियोजना हिमालय के सबसे समृद्ध जैव-भौगोलिक क्षेत्र के अंतर्गत आती है तथा यह पुरापाषाणकालीन, इंडो-चाइनीज़ और इंडो-मलयन जैव-भौगोलिक क्षेत्रों के संधि-स्थल पर स्थित होगी। स्थानीय निवासियों के अनुसार, दिबांग क्षेत्र में प्रस्तावित ‘दिबांग बहुउद्देशीय परियोजना’ और ‘एटलिन जल विद्युत परियोजना’ दोनों एक साथ एक बहुत बड़े क्षेत्र को जलमग्न कर देगीं। पर्यावरणविदों एवं स्थानीय निवासियों का मत है कि परियोजना की वज़ह से विकृत पारिस्थितिकी को कृत्रिम वृक्षारोपण की सहायता से यथास्थिति में नहीं लाया जा सकता है। इडू मिश्मी समुदाय (Idu Mishmi Community) के लोग चारागाह भूमि, वनों और वन्यजीवों को होने वाले नुकसान को लेकर चिंतित हैं। वन सलाहकार समिति (Forest Advisory Committee-FAC): वन सलाहकार समिति औद्योगिक गतिविधियों के लिये वनों में पेड़ों की कटाई की अनुमति पर निर्णय लेती है। FAC केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (Ministry of Environment, Forest and Climate Change-MOEF&CC) के अंतर्गत कार्यरत है, जिसमें केंद्र के वानिकी विभाग के स्वतंत्र विशेषज्ञ और अधिकारी शामिल होते हैं। प्रतिपूरक वनीकरण (Compensatory Afforestation): प्रतिपूरक वनीकरण का आशय आधुनिकीकरण तथा विकास के लिये काटे गए वनों के स्थान पर नए वनों को लगाने से है। अर्थात् उद्योगों द्वारा वनों के नुकसान की प्रति पूर्ति हेतु वैकल्पिक भूमि का अधिग्रहण किया जाता है।

16 अप्रैल, 2020 को ‘वेबिनार’ (Webinar) श्रृंखला 'देखो अपना देश' (Dekho Apna Desh) के तहत 20वें वेबिनार 'उत्तराखंड एक स्वर्ग' (Uttarakhand Simply Heaven) का आयोजन किया गया। प्रमुख बिंदु: इस वेबिनार में ‘उत्तराखंड’ के 2 क्षेत्रों केदारखंड (गढ़वाल क्षेत्र) और मनु खंड (कुमाऊँ क्षेत्र) में पर्यटन की संभावनाओं को उजागर किया गया। इसके साथ ही वेबिनार में गंगोत्री, यमुनोत्री, बद्रीनाथ, केदारनाथ, हेमकुंड साहिब और फूलों की घाटी जैसे लोकप्रिय पर्यटक स्थलों को भी विशेष तौर पर दर्शाया गया। वेबिनार में देश के सबसे पुराने राष्ट्रीय पार्क जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क, राजाजी टाइगर रिज़र्व, नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क आदि के महत्त्व को भी उजागर किया गया। वेबिनार (WEBINAR): वेब कॉन्फ्रेंसिंग शब्द का उपयोग विभिन्न ऑनलाइन सेवाओं के लिये किया जाता है। इसमें वेब कास्ट, वेबिनार (वेब ​​सेमिनार) एवं पीयर-लेवल वेब मीटिंग शामिल हैं। इसे इंटरनेट प्रौद्योगिकियों द्वारा संभव बनाया गया है और इसमें एक प्रेषक से कई रिसीवरों तक संचार एवं बहु स्तरीय संचार के लिये वास्तविक समय बिंदु की अनुमति प्रदान की गई है। ‘देखो अपना देश’ वेबिनार श्रृंखला: भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय ने 14 अप्रैल, 2020 से ‘देखो अपना देश’ वेबिनार श्रृंखला (‘DEKHO APNA DESH’ WEBINAR SERIES) शुरू की है। वेबिनार का उद्देश्य भारत के गंतव्य स्थलों की जानकारी देना है। ‘देखो अपना देश’ श्रृंखला सत्रों का संचालन इलेक्ट्रॉनिक एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस विभाग की सक्रिय मदद से किया जाता है। इस वेबिनार श्रृंखला के अगले सत्र का शीर्षक ‘फोटोवाल्किंग भोपाल’ (Photowalking Bhopal) है। वेबिनार (WEBINAR) का आयोजन क्यों? COVID-19 महामारी के कारण पर्यटन क्षेत्र बहुत ज्यादा प्रभावित हुआ है क्योंकि घरेलू स्तर पर या सीमा पार से कोई आवागमन नहीं हो पा रहा है। वेबिनार (WEBINAR) का महत्त्व: प्रौद्योगिकी के कारण, स्थानों और गंतव्यों तक आभासी रूप से पहुँचना और बाद के दिनों के लिये अपनी यात्रा की योजना बनाना संभव है। वर्तमान COVID-19 महामारी के समय में मानव संपर्क को बनाए रखने में प्रौद्योगिकी काम आ रही है। नंदा देवी और फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यान: नंदा देवी और फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यान उच्च-तुगंता वाले पश्चिम हिमालयी क्षेत्र में अवस्थित है। नंदा देवी राष्ट्रीय उद्यान भारत के दूसरे सबसे ऊंचे पर्वत नंदा देवी के 7,817 मीटर शिखर क्षेत्र में विस्तृत है। फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र में अल्पाइन फूलों तथा सुंदर घास के मैदान पाए जाते हैं। दोनों पार्कों में वनस्पतियों एवं जीवों की उच्च विविधता और घनत्व पाया जाता है, जिनमें हिम तेंदुए, हिमालयी कस्तूरी मृग तथा पौधों की प्रजातियों सहित अनेक संकटापन्न प्रजातियाँ पाई जाती हैं। ऊपरी गंगा नदी तंत्र में संगम: अलकनंदा और भागीरथ: गंगा नदी उत्तराखंड राज्य के उत्तरकाशी ज़िले में गोमुख के निकट गंगोत्राी हिमनद से निकलती है। यहाँ यह भागीरथी के नाम से जानी जाती है। यह मध्य व लघु हिमालय श्रेणियों में महाखड्डों का निर्माण करते हुए गुजरती है। अलकनंदा नदी का स्रोत बद्रीनाथ के ऊपर सतोपथ हिमनद है। देवप्रयाग: देवप्रयाग में भागीरथी, अलकनंदा से मिलती है और इसके बाद गंगा कहलाती है। विष्णुप्रयाग: अलकनंदा नदी धौली और विष्णु गंगा धाराओं से मिलकर बनती है, जो जोशीमठ या विष्णुप्रयाग में मिलती है। कर्णप्रयाग: अलकनंदा की अन्य सहायक नदी पिंडार है, जो इससे कर्ण प्रयाग में मिलती है। रूद्रप्रयाग: जबकि मंदाकिनी या काली गंगा अलकनंदा से रूद्रप्रयाग में मिलती है। गंगा नदी हरिद्वार में मैदान में प्रवेश करती है।

राइट्स इश्यू Rights Issue रिलायंस इंडस्ट्रीज़ (Reliance Industries) राइट्स इश्यू (Rights Issue) की आय से 40,000 करोड़ रुपये का कर्ज चुकाने के लिये तीन दशकों में पहला शेयर राइट्स इश्यू 20 मई, 2020 को सार्वजनिक करेगी। प्रमुख बिंदु: ‘रिलायंस इंडस्ट्रीज़ लिमिटेड’ ने अपने प्रस्तावित राइट्स इश्यू के माध्यम से प्राप्त धन से लगभग 40,000 करोड़ रुपए का ऋण चुकाने का लक्ष्य निर्धारित किया है जिनकी कीमत 53,125 करोड़ रुपए है। यह भारत का अब तक का सबसे बड़ा इक्विटी फंड है। राइट्स इश्यू कंपनी की बैलेंस शीट को शून्य शुद्ध ऋण (Zero Net Debt) बनाने के लिये कंपनी की रणनीति का एक हिस्सा है। राइट्स इश्यू मौजूदा शेयरधारकों के लिये उनके मौजूदा शेयर होल्डिंग के अनुपात में किये गए शेयरों की पेशकश है। कंपनियाँ अक्सर बाज़ार मूल्य के छूट पर राइट्स इश्यू में शेयरों की पेशकश करती हैं। कर्ज में वृद्धि किये बिना पूंजी जुटाने की माँग करने वाली कंपनियों द्वारा राइट्स इश्यू का उपयोग किया जाता है। शेयरधारक राइट्स इश्यू में दिये गए शेयरों को खरीदने के लिये बाध्य नहीं हैं।

क्विनिन नोंगलादेव Quinine Nongladew हाल ही में पूर्वोत्तर भारत में मेघालय के एक गाँव ‘क्विनिन नोंगलादेव’ (Quinine Nongladew) के स्थानीय लोगों ने COVID-19 के संभावित इलाज के लिये क्विनिन (Quinine) का पता लगाया है। प्रमुख बिंदु: इसका (गाँव का नाम) नाम सिनकोना की छाल से निकाले गए ‘अल्कलॉइड क्विनिन’ (Alkaloid Quinine) के नाम पर रखा गया है। यह रूबिअसाए (Rubiaceae) परिवार से संबंधित एक पौधा है और इसे बड़े झाड़ी या छोटे पेड़ों के रूप में वर्गीकृत किया जाता है। जब शिलांग असम प्रांत के लिये ब्रिटिश प्रशासनिक मुख्यालय बना तब मलेरिया एवं मच्छरों से होने वाली अन्य बीमारियों से निपटने के लिये अंग्रेजों ने सिनकोना का वृक्षारोपण लगभग वर्ष 1874 के आसपास कराया था। मलेरिया के इलाज के लिये 'क्लोरोक्वीन' और 'कुनैन' के रूप में प्रसिद्ध 'क्विनिन सल्फेट' नामक दवा का उपयोग होता है।

गिलगित-बाल्टिस्तान में कार्यवाहक सरकार बनाने का आदेश पाकिस्तान के राष्ट्रपति आरिफ अल्वी ने गिलगित-बाल्टिस्तान प्रांत में कार्यवाहक सरकार के गठन और चुनाव कराने के लिए आदेश जारी किया है। इस कदम का भारत ने कड़ा विरोध किया है। राष्ट्रपति कार्यालय से यह आदेश तब जारी किया गया है जब पाकिस्तान के उच्चतम न्यायालय ने 30 अप्रैल को संघीय सरकार को क्षेत्र में आम चुनाव कराने के लिए 2018 के एक प्रशासनिक आदेश में संशोधन करने की मंजूरी दे दी थी। ‘गिलगित-बाल्टिस्तान ऑर्डर ऑफ 2018’ में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को कई विषयों पर कानून बनाने के साथ ही प्रशासनिक बदलाव करने का अधिकार दिया गया है। भारत का रुख उच्चतम न्यायालय द्वारा गिलगित-बाल्टिस्तान में चुनाव कराने की मंजूरी दिए जाने के बाद भारत ने इस्लामाबाद के समक्ष उसके ‘‘अवैध और जबरन’’ कब्जे वाले क्षेत्रों में ‘‘स्थिति में बदलाव’’ लाने के उसके प्रयासों के लिए कड़ा विरोध दर्ज कराया है। इस महीने की शुरुआत में दिल्ली में विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान के एक वरिष्ठ राजनयिक को डेमार्श (आपत्ति पत्र) जारी कर अदालत के आदेश पर कड़ा विरोध दर्ज कराया था और साफ तौर पर यह कहा था कि गिलगित-बाल्टिस्तान के इलाकों समेत जम्मू कश्मीर और लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश भारत का अभिन्न हिस्सा है।