ᴇʟɪxɪʀ ᴡʀɪᴛᴇꜱ 💜
الذهاب إلى القناة على Telegram
1 132
المشتركون
لا توجد بيانات24 ساعات
-27 أيام
+630 أيام
أرشيف المشاركات
1 132
ख्वाइश-ए-वफ़ा शहर से निकली तो गांव गांव चली
कुछ यादें संग मेरे हर ओर पांव पांव चली
धूप में बिताए जो कुछ पल तो समझ आया
वो ज़िन्दगी ही क्या , जो छांव छांव चली ❤️✨
1 132
ना कर इश्क़ की उम्मीद भी, उम्र गुज़ार दी खोते हुए वो बेबस सी थकान हूं मैं ,
कहां आसरा ढूंढ रही हो तुम मेरी जान !
मरम्मत भी जिसकी मुमकिन नहीं, वो जर्जर मकान हूं मैं ... 🥂
1 132
ज़िद करते हो तुम बस हर बार अपनी ,
झुमके भी नहीं लाये....
जाओ मैं नहीं मानती ..
क्या ... तुम्हारे सिवा भी दुनिया है ?
कौन .. कहां ...
जाओ मैं नहीं जानती...
तारीख आज घर आयी है उसकी ज़िंदगी किसी और के साथ जुड़ने की ,
उसका नाम किसी अनजान के नाम के साथ...
जाओ मैं नहीं मानती...
जाओ मैं नहीं मानती... ❤️🩹
1 132
Repost from 💓सुकूँन 🍁
Let us celebrate Unity in diversity and the ideals that shape our nation.
Happy Republic Day 🇮🇳
260126
1 132
अपनी खुशहाली पर बेफ़िज़ूल गुरूर करोगे
मेरी दुआएँ रखेंगी खयाल तुम्हारा , ग़र तुम मुझे दूर करोगे ... 🌷
1 132
एक दफ़ा जिसे छूने के लिए मैंने घण्टों समय बिताया था!
उसकी चाहत की कसक सिर्फ़ वही समझ पाया था!
मैंने तो बस एक दफ़ा पलटकर मुस्कुराया था!
मोह्हबत का हर फ़र्ज़ उसने निभाया था!
मैं समझी मैं एक अंजान हूँ उसके लिए,
मग़र वो तो मुझे छोड़ने मेरे शहर तलक आया था!
खुदगर्ज़ मैं न जाने किस ज़माने से डरती रही,
मरकर एक रोज,वो तिरंगे में लिपट कर आया था!
आज फ़िर उस इंतज़ार में बैठी हूँ,
शायद आ जाए वो भीगता हुआ,जैसे एक रोज़ आया था!
~ अभिमंद 🩵
1 132
ग़ैर चांद की भी नज़रें नहीं पड़ने देती ,
तू ज़रा भी मिलता तो बहोत सम्भाल के रखती मैं ... ❤️
1 132
किस्मत का लिखा उतरता है ज़मीं पर , खयालों का आसमां कहां जीतता है ,
बीत जाती हैं ज़िंदगियां वक्त के साथ , वही यादें लिये शहर कहां बीतता है ... 🌻🍂
1 132
जिन्हें प्रेम मिला उन्होंने प्रेम में कविताऐं लिखी ,
जिन्हें नहीं मिला , उन्होंने कविताओं में प्रेम लिखा ... ❤️
1 132
तिल के लड्डू , सर्द अहसास और पतंग का प्यार ,
मुबारक हो आपको उत्तरायण का त्यौंहार🪁🪁 🌞💐💐❤️
साल के पहले त्यौंहार की हार्दिक शुभकामनाएं 🙏
1 132
तुम एक चिराग़ की खैरात दे रहे हो मुझे ,
मैं आफ़ताब से दामन छुड़ा के आयी हूं ... 😌
1 132
मैं हर्फ़ हूँ पन्नो का और तू दास्ताँ किताबों की,
मैं क़ैदी तेरे ख्यालों का,तू हकीकत मेरे ख्वाबों की!
~✍
