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खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग (Khadi and Village Industries Commission- KVIC) ने पोखरण की एक समय सबसे प्रसिद्ध रही बर्तनों की कला की पुनःप्राप्ति तथा कुम्हारों को मुख्य धारा से जोड़ने के लिये प्रयास प्रारंभ किये हैं।
प्रमुख बिंदु:
पोखरण में कुम्हारों के परिवारों को इलेक्ट्रिक पॉटर चाकों (Electric Potter Wheels) का वितरण किया गया है।
इलेक्ट्रिक चाकों के अलावा, KVIC ने 10 कुम्हारों के समूह में 8 अनुमिश्रक मशीनों (Blunger Machines) का भी वितरण किया है।
अनुमिश्रक मशीनों का इस्तेमाल मिट्टी को मिलाने के लिये किया जाता है।
यह मशीन केवल 8 घंटे में 800 किलो मिट्टी को कीचड़ में बदल सकती है जबकि व्यक्तिगत रूप से मिट्टी के बर्तन बनाने के लिये 800 किलो मिट्टी तैयार करने में लगभग 5 दिन का समय लगता है।
KVIC ने गाँव में 350 प्रत्यक्ष रोज़गार का भी सृजन किया है।
KVIC द्वारा किये जा रहे प्रयासों का उद्देश्य कुम्हारों को सशक्त बनाना, स्व-रोज़गार का सृजन करना और मृतप्राय हो रही मिट्टी के बर्तनों की कला को पुनर्जीवित करना है।
इसके अलावा इस गाँव के कुम्हारों को कुम्हार सशक्तीकरण योजना से भी जोड़ा गया है।
उल्लेखनीय है कि इस कार्यक्रम से राजस्थान के कई ज़िलों जैसे जयपुर, कोटा, झालावाड़ और श्री गंगानगर सहित एक दर्जन से अधिक ज़िलों को लाभ प्राप्त हुआ है।
KVIC अध्यक्ष द्वारा राजस्थान में KVIC के राज्य निदेशक को बाड़मेर और जैसलमेर रेलवे स्टेशनों पर मिट्टी के बर्तनों के उत्पादों का विपणन करने और उसकी बिक्री के लिये सुविधा प्रदान करने का निर्देश भी जारी किया गया है, जिससे कुम्हारों को विपणन में सहायता प्रदान की जा सके।
400 रेलवे स्टेशनों पर केवल मिट्टी/टेराकोटा के बर्तनों में खाद्य पदार्थों की बिक्री होती है जिनमें से राजस्थान के दो जैसलमेर और बाड़मेर शामिल हैं, दोनों प्रमुख रेलमार्ग पोखरण के सबसे नज़दीक हैं।
KVIC की राज्य इकाई इन शहरों में पर्यटकों के उच्च स्तर को देखते हुए इन रेलवे स्टेशनों पर अपने मिट्टी के बर्तनों की बिक्री में सुविधा प्रदान करेगी।
कुम्हार सशक्तीकरण योजना
(Kumhar Sashaktikaran Yojana)
KVIC द्वारा राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र, जम्मू और कश्मीर, हरियाणा, पश्चिम बंगाल, असम, गुजरात, तमिलनाडु, ओडिशा, तेलंगाना और बिहार जैसे राज्यों के कई दूरदराज़ इलाकों में कुम्हार सशक्तीकरण योजना की शुरुआत की गई है।
कुम्हार सशक्तीकरण योजना का मुख्य उद्देश्य कुम्हार समुदाय को मुख्यधारा में वापस लेकर आना है।
इस योजना के अंतर्गत, KVIC द्वारा बर्तनों के उत्पाद का निर्माण करने के लिये उपयुक्त मिट्टी को मिलाने के लिये अनुमिश्रक मशीनों और पग मिल्स जैसे उपकरण उपलब्ध कराए जाते हैं।
इन मशीनों ने मिट्टी के बर्तनों के निर्माण की प्रक्रिया में लगने वाले कठिन परिश्रम को भी समाप्त कर दिया है और इसके कारण कुम्हारों की आय 7 से 8 गुना ज्यादा बढ़ गई है।
कुम्हारों के सशक्तीकरण की आवश्यकता:
पोखरण में 300 से अधिक कुम्हार परिवार रहते हैं जो कई दशकों से मिट्टी के बर्तनों के निर्माण के कार्य से जुड़े हुए हैं, लेकिन काम में कठिन परिश्रम और बाज़ार का समर्थन नहीं मिलने के कारण कुम्हारों ने अन्य रास्तों को तलाश करना शुरू कर दिया था।
आगे की राह:
पोखरण (जहाँ पर भारत ने अपना पहला परमाणु परीक्षण किया था) को अब तक केवल परमाणु परीक्षणों के स्थल के रूप में जाना जाता था, लेकिन बहुत जल्द ही उत्कृष्ट मिट्टी के बर्तनों का निर्माण भी इसकी पहचान बनेगा।
कुम्हारों को आधुनिक उपकरण और प्रशिक्षण प्रदान करना उन्हें समाज के साथ जोड़ने और उनकी कला को पुनर्जीवित करने का प्रयास है।
खादी और ग्रामोद्योग आयोग
(Khadi and Village Industries Commission):
यह 'खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग अधिनियम (Khadi and Village Industries Commission Act) 1956' के तहत एक सांविधिक निकाय (Statutory Body) है।
यह भारत सरकार के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय (Ministry of MSME) के अंतर्गत एक मुख्य संस्था है।
उद्देश्य:
सामाजिक उद्देश्य: रोज़गार देना।
आर्थिक उद्देश्य: बिक्री योग्य वस्तुओं का उत्पादन करना।
व्यापक उद्देश्य: गरीबों को आत्मनिर्भर बनाना एवं एक मज़बूत ग्रामीण सामुदायिक भावना का निर्माण करना
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सर्वोच्च न्यायालय ने अपने एक निर्णय में स्पष्ट किया है कि गुप्त मतदान का सिद्धांत (Principle of Secret Ballot) स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की आधारशिला है।
प्रमुख बिंदु
सर्वोच्च न्यायालय के अनुसार, किसी भी लोकतंत्र में गुप्त मतदान प्रणाली यह सुनिश्चित करने में मदद करती है कि मतदाता का चुनाव पूर्ण रूप से स्वतंत्र हो।
पृष्ठभूमि
सर्वोच्च न्यायालय का यह निर्णय इलाहाबाद उच्च न्यायालय के एक निर्णय के बाद आया है, जिसमें 25 अक्तूबर, 2018 को प्रयागराज ज़िला पंचायत की बैठक के निर्णय को रद्द कर दिया था, जिसमें पंचायत अध्यक्ष के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव पारित किया गया था।
इलाहाबाद उच्च न्यायालय के अनुसार, अविश्वास प्रस्ताव के विरुद्ध हुए मतदान के दौरान निर्धारित नियमों का पालन नहीं किया गया जिससे मतदान की गोपनीयता भंग हुई थी।
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अपनी जाँच में पाया था कि पंचायत के कुछ सदस्यों ने मतदान की गोपनीयता के नियम का उल्लंघन किया था।
उच्च न्यायालय के विरुद्ध याचिकाकर्त्ताओं का तर्क
सर्वोच्च न्यायालय में अपीलकर्त्ताओं ने तर्क दिया था कि मतपत्रों की गोपनीयता का सिद्धांत एक पूर्ण सिद्धांत नहीं है और इस विशेषाधिकार की स्वैच्छिक छूट अनुज्ञेय है।
याचिकाकर्त्ताओं ने जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 94 का उल्लेख करते हुए कहा कि मतदाता स्वैच्छिक रूप से मतपत्र की गोपनीयता के विशेषाधिकार को छोड़ सकता है, इस प्रकार मतदाता को इस सिद्धांत का पालन करने के लिये बाध्य नहीं किया जा सकता है।
सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय
मतपत्रों की गोपनीयता का सिद्धांत संवैधानिक लोकतंत्र की एक महत्त्वपूर्ण शर्त है, जो कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के उद्देश्यों की प्राप्ति में काफी लाभदायक है।
न्यायालय के अनुसार, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 94 मतदाता के पक्ष में एक विशेषाधिकार का प्रावधान करती है, जिसके तहत कोई भी उसे यह खुलासा करने के लिये मज़बूर नहीं कर सकता है कि उसने किसके पक्ष में मतदान किया था, किंतु तब यह विशेषाधिकार समाप्त हो जाता है जब मतदाता विशेषाधिकार का प्रयोग न करने का फैसला करता है और स्वयं ही इस बात का खुलासा करता है कि उसने किसके पक्ष में मतदान किया है।
गुप्त मतदान प्रणाली
गुप्त मतदान प्रणाली का अभिप्राय मतदान की उस विधि से होता है जो यह सुनिश्चित करती है कि सभी मत गुप्त रूप से डाले जाएँ, ताकि मतदाता किसी अन्य व्यक्ति से प्रभावित न हो और मतदान के समय किसी को भी यह ज्ञात न हो कि विशिष्ट मतदाता ने किसे वोट दिया है।
सरल शब्दों में कहा जा सकता है कि गुप्त मतदान वह मतदान पद्धति है जिसमें मतदाता की पसंद गोपनीय होती है।
भारत में गुप्त मतदान की शुरुआत वर्ष 1951 में पेपर बैलेट के साथ हुई थी।
गुप्त मतदान प्रणाली का महत्त्व
भारतीय राजनीतिक प्रणाली, जिसमें चुनाव अभियानों के दौरान धन और ‘बाहुबल’ का प्रयोग एक आम बात हो गई है, में गुप्त मतदान प्रणाली उन लोगों के लिये एक मात्र रास्ता होता है, जो स्वतंत्र रूप से बिना किसी हस्तक्षेप के अपने मताधिकार का प्रयोग करने के इच्छुक हैं।
गुप्त मतदान धन और बल की शक्तियों के दुरुपयोग को रोकने में मदद करता है, ध्यातव्य है कि कई बार राजनेताओं द्वारा एक विशिष्ट व्यक्ति के पक्ष में मतदान करने के लिये मतदाताओं को मज़बूर किया जाता है और उन्हें धमकी दी जाती है कि यदि ऐसा नहीं होता है तो उन्हें भविष्य में किसी भी प्रकार का लाभ प्राप्त नहीं होगा।
इस प्रकार मतपत्र की गोपनीयता सुनिश्चित करके हम यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि प्रत्येक मतदाता किसी अन्य व्यक्ति से प्रभावित होकर अपने मताधिकार का प्रयोग न करे।
भारत में गुप्त मतदान प्रणाली से संबंधित समस्याएँ
चुनाव संचालन नियम-1961 के नियम 59A में यह निर्धारित किया गया था मतगणना शुरू होने से पूर्व विभिन्न बूथों से आए पेपर मतपत्र मतगणना केंद्रों पर बड़े पैमाने पर एक साथ मिला दिये जाएंगे, जिससे किसी एक विशिष्ट बूथ से संबंधी सूचना प्राप्त करना संभव नहीं था।
किंतु वर्ष 2008 से EVM की शुरुआत के साथ ही इस तरह का भौतिक मिश्रण संभव नहीं था अतः बूथ-स्तरीय डेटा प्राप्त करना अपेक्षाकृत काफी आसान हो गया।
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2018 में सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष एक याचिका दायर कर चुनाव में ‘टोटलाइज़र’ (Totaliser) मशीन के उपयोग का निर्देश देने का अनुरोध किया गया था जिससे मतपत्र की गोपनीयता बनी रहती, लेकिन सर्वोच्च न्यायालय ने बिना सुनवाई किये ही इस याचिका को खारिज कर दिया।
ध्यातव्य है कि ‘टोटलाइज़र’ (Totaliser) मशीन मतगणना के समय एक निर्वाचन क्षेत्र के सभी EVMs से प्राप्त मतों को एक साथ मिला देती है।
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‘नेशनल टेस्ट अभ्यास’ मोबाइल एप
National Test Abhyas Mobile App
केंद्रीय मानव संसाधन एवं विकास मंत्री ने घोषणा की है कि National Testing Agency- (NTA) ने नेशनल टेस्ट अभ्यास मोबाइल एप (National Test Abhyas Mobile App) पर हिंदी भाषा में भी मॉक टेस्ट देने की सुविधा शुरू की।
प्रमुख बिंदु:
इस एप को राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी द्वारा विकसित किया गया है जो उम्मीदवारों को NTA के दायरे में JEE main और NEET जैसी आगामी परीक्षाओं के लिये मॉक टेस्ट देने में सक्षम बनाता है।
इस एप को उच्च गुणवत्ता वाले मॉक टेस्ट हेतु उम्मीदवारों की पहुँच की सुविधा के लिये लॉन्च किया गया है क्योंकि COVID-19 के मद्देनज़र राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन के कारण शैक्षणिक संस्थानों को बंद कर दिए जाने से प्रतियोगी छात्रों को आगामी परीक्षाओं के लिये मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
हिंदी माध्यम वाले प्रतियोगी परीक्षा के छात्र अब NTA द्वारा नेशनल टेस्ट अभ्यास मोबाइल एप पर जारी हिंदी भाषा में मॉक टेस्ट का अभ्यास कर सकते हैं।
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छोलुंग सुकफा
Chaolung Sukapha
19 जून, 2020 को असम के मुख्यमंत्री ने कोलकाता के एक राजनीतिक टिप्पणीकार गरगा चटर्जी (Garga Chatterjee) को गिरफ्तार करने का आदेश दिया जिन्होंने छोलुंग सुकफा (Chaolung Sukapha) को ‘चीनी आक्रमणकारी’ बताया था।
प्रमुख बिंदु:
छोलुंग सुकफा 13वीं शताब्दी के(Ahom kingdom) के संस्थापक थे जिसने छह शताब्दियों तक असम पर शासन किया था।
समकालीन विद्वान छोलुंग सुकफा को बर्मा मूल का बताते हैं जो अहोमों का नेता था और लगभग 9,000 अनुयायियों के साथ 13वीं शताब्दी में ऊपरी बर्मा से असम की ब्रह्मपुत्र घाटी में पहुँचा था।
‘ए हिस्ट्री ऑफ असम’ नामक अपनी किताब में सर एडवर्ड गैट (Sir Edward Gait) ने लिखा है कि वर्ष 1235 में सुकफा एवं उनके लोग वर्षों तक भटकने के बाद ऊपरी असम के चाराइदेव (Charaideo) में आकर बस गए।चाराइदेव ही वह स्थान था जहाँ सुकफा ने अपनी पहली छोटी रियासत की स्थापना की। यहीं से अहोम साम्राज्य के विस्तार का बीज बोया गया।
अहोम साम्राज्य के संस्थापकों की अपनी भाषा एवं धर्म था। धीरे-धीरे अहोमों ने हिंदू धर्म एवं असमिया भाषा को स्वीकार कर लिया।
विद्वानों का मानना है कि अहोमों ने यहाँ रहने वालों पर अपना प्रभाव डालने के बजाय यहाँ रहने वाले समुदायों की भाषा, धर्म एवं संस्कारों को अपनाया।
सुकफा का महत्त्व विशेषकर आज के असम में विभिन्न समुदायों एवं जनजातियों को आत्मसात करने के उसके सफल प्रयासों में निहित है।उन्हें व्यापक रूप से ‘बोर असोम’ (Bor Asom) या ‘ग्रेटर असम’ (Greater Assam) के वास्तुकार के रूप में जाना जाता है।
सुकफा एवं उसके शासन की याद में असम में प्रत्येक वर्ष 2 दिसंबर को ‘असोम दिवस’ (Asom Divas) मनाया जाता है।
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गुवाहाटी में सदियों पुराने ऐतिहासिक कामाख्या मंदिर में 1565 से उपलब्ध रिकॉर्ड में पहली बार COVID-19 वायरस के फैलने की संभावना को ध्यान में रखते हुए 5 दिनों के अंबुबाची मेले का आयोजन नहीं किया जाएगा।
इस मेले में हर साल देश भर से लाखों श्रद्धालु, पर्यटक, साधु और अन्य लोग आते हैं। असम के राज्य पर्यटन के अनुसार, मेले में न्यूनतम 5 लाख श्रद्धालु शामिल होते हैं, जिसमें कई विदेशी भी शामिल होते हैं।
अंबुबाची महायोग का अनुष्ठान मंदिर के पुजारियों द्वारा सामाजिक दूरियों के मानदंडों को बनाए रखते हुए किया जाएगा। महायोग देवालय में 22 जून को सुबह 07:53:15 से 25 जून को 08:16:55 बजे तक किया जाएगा।
कामाख्या मंदिर 30 जून तक श्रद्धालुओं के लिए बंद रहेगा।
कामाख्या मंदिर
नीलाचल पहाड़ी पर स्थित यह हिंदू मंदिर कामाख्या देवी को समर्पित है। इतिहास के अनुसार यह मंदिर राजा नरकासुर द्वारा बनवाया गया था। 1565 से उपलब्ध आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, मंदिर का निर्माण कोच राजा नारायणन द्वारा किया गया था। कामाख्या 51 शक्ति पीठों में से एक है।
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झारखण्ड सरकार महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) की तर्ज पर नौकरी की गारंटी योजना शुरू करने जा रही है, झारखंड इस प्रकार की योजना शुरू करने वाला देश का दूसरा राज्य होगा, इससे पहले केरल ने मनरेगा की तर्ज पर जॉब गारंटी स्कीम शुरू की है।
मुख्य बिंदु
मनरेगा (जो ग्रामीण गरीबों के लिए 100 दिन की नौकरी देने पर केंद्रित है) के विपरीत यह योजना राज्य के शहरी क्षेत्रों में रहने वाले अकुशल श्रमिकों के लिए 100-दिवसीय कार्य प्रदान करने पर केंद्रित होगी। शहरी गरीबों के लिए आजीविका सुरक्षा बढ़ाने के उद्देश्य से बनाई गई इस योजना का नाम मुखयमंत्री SHRAMIK (Shahri Rozgar Manjuri For Kamgar) रखा जाएगा। इस योजना को राज्य मंत्रिमंडल की मंजूरी का इंतजार है।
अय्यनकली शहरी रोजगार गारंटी योजना (AUEGS) शहरी गरीबों के लिए केरल सरकार की 100-दिवसीय रोजगार गारंटी योजना है।
यह योजना मनरेगा से कैसे भिन्न होगी?
21 जून, 2020 को झारखंड के शहरी विकास सचिव ने मीडिया सूचित किया है कि योजना में बेरोजगारी भत्ते के लिए भी एक प्रावधान होगा। यह भत्ता तभी लागू होगा जब कोई स्थानीय निकाय अकुशल श्रमिक को 15 दिनों के भीतर नौकरी देने में विफल रहता है।
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कोल इंडिया लिमिटेड की आठ सहायक कंपनियों में से एक महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड (एमसीएल) ने सूचित किया है कि कंपनी ने ओडिशा के लिए 60,000 करोड़ रुपये की निवेश की योजना तैयार की है। वर्तमान में लगभग 30 कोयला खदानें ओडिशा में एमसीएल द्वारा संचालित हैं। अगले कुछ वर्षों में, कंपनी ने कोयला उत्पादन को प्रति वर्ष 300 मिलियन टन तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा था, जिसके लिए वह राज्य में तीन नए एमडीओ (खदान, विकास और संचालन) परियोजनाओं का विकास और संचालन करेगी।
नई निवेश योजनाओं के बारे में
राज्य में खदानों और सामाजिक अधोसंरचना (जैसे सड़क, फ्लाईओवर, स्कूल) के विकास के लिए MCL ने 2013-24 तक राज्य के 4 जिलों में अपने कमांड क्षेत्रों के तहत 31,000 करोड़ रुपये का निवेश करने की योजना बनाई है। 3 नए एमडीओ प्रोजेक्ट्स में से एक झारसुगुड़ा जिले के इब वैली कोलफील्ड में होगा। अन्य 2 परियोजनाएं अंगुल जिले के तालचेर कोयला क्षेत्र में होंगी।
सुंदरगढ़ जिले में कंपनी ने11,368 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से 2X800 मेगावाट के एक सुपरक्रिटिकल पावर प्लांट की योजना बनाई है।
सुंदरगढ़, अंगुल आदि जिलों में कोयला खनन के कारण धूल से प्रभावित क्षेत्रों में जीवन की गुणवत्ता में सुधार के लिए एमसीएल सौर ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना करेगी और अपने कमांड क्षेत्रों में कोयला निकासी बुनियादी ढांचे को भी मजबूत करेगी।
कंपनी हरियाली विकसित करने, वनीकरण और कृषि के लिए सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाने के लिए नवीनतम तकनीकों को शुरू करने के लिए भी प्रतिबद्ध है।
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इस पर सद्गुरु ने बहुत ही रचनात्मक विचार व्यक्त करते हुए कहा कि वे स्वयं इस दिशा में काम करना चाहते हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि समूहों को एक विशेष क्षेत्र में विकसित किया जा सकता है ताकि उन्हें जातीय समूहों, किसानों और ग्रामीणों के प्रामाणिक व्यवहार को उजागर करके आसानी से नियंत्रित और बढ़ावा दिया जा सके। ऐसे समूहों को प्रबंधित करके विसंगतियों से बचा जा सकता है जिनमें दिलचस्प सांस्कृतिक विशेषताएं हैं। इस तरह के कदमों से अधिकारियों और एग्रीगेटरों को एक जवाबदेह पर्यटन अभियान के लिए तैयार किया जा सकता है।
सेलिब्रिटी शेफ रणवीर बराड़ ने यह जानना चाहा कि भारतीय पाक कला और पश्चिमी पाक कला के बीच के अंतर को किस तरह पाटा जा सकता है क्योंकि जहां भारतीय भोजन में स्वाद और पोषण पर ज्यादा जोर दिया जाता है वहीं दूसरी और पश्चिमी भोजन में वैज्ञानिक तरीकों और स्वास्थ्य पर विशेष जोर रहता है।
सद्गुरु ने इस सवाल पर अपने व्यक्तिगत अनुभवों का हवाला देते हुए कहा कि लोगों को ताजा भोजन खाने के महत्व के बारे में बताकर देसी और पश्चिमी व्यंजनों के बीच की खाई को पाटने में मदद मिल सकती है। यह गैर भारतीयों को भारतीय भोजन के महत्व के बारे में बताए जाने का सबसे प्रभावी तरीका होगा।
अंत में फैशन डिजाइनर सुश्री अनीता डोंगरे ने वर्तमान समय के सबसे महत्वपूर्ण विषय में से एक पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज हम आसानी से जो भी प्रचलन में है उसका अनुसरण करने लगते हैं और इसी क्रम में योग भी करते हैं लेकिन वास्तव में हमें योग की असली ताकत को पहचानने की जरुरत है कि आखिर यह किस तरह से हमारे तन और मन दोनों को मजबूत करता है।
सद्गुरु ने इस कथन से सहमति व्यक्त की कि आज बहुत से युवा आत्महत्या करने लगे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसा हमारी शिक्षा प्रणाली के कारण हो रहा है जिसमें विचारों और मन को नियंत्रित करने के मूल सिद्धांतों का अभाव है। उन्होंने कहा कि योगिक प्रणाली में हमारे शरीर और मस्तिष्क के बीच सही संतुलन बनाने की क्षमता है। योग एक शरीर के अंदर एक ऐसी प्रणाली को विकसित करता है तो बाहर और अंदर दोनों स्थितियों को नियंत्रित करती है।
सद्गुरु को अपने ज्ञान को साझा करने के लिए श्री प्रहलाद सिंह पटेल द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ सत्र का समापन हुआ।
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पर्यटन मंत्रालय ने "देखो अपना देश" श्रृंखला के तहत "भारत: एक सांस्कृतिक खजाना" शीर्षक से 34वां वेबिनार आयोजित किया
श्री प्रहलाद सिंह पटेल के नेतृत्व में आयोजित विशेष सत्र में सद्गुरु जग्गी वासुदेव ने पैनल चर्चा में भाग लिया
देखो अपना देश वेबिनार श्रृंखला का 34वां सत्र 20 जून 2020 को "भारत: एक सांस्कृतिक खजाना" शीर्षक से आयोजित किया गया। इस विशेष सत्र का नेतृत्व केन्द्रीय पर्यटन और संस्कृति राज्य मंत्री श्री प्रहलाद सिंह पटेल (स्वतंत्र प्रभार) ने किया जिसमें योगी, रहस्यवादी, कवि और दूरदर्शी सद्गुरु जग्गी वासुदेव जैसे प्रतिष्ठित प्रतिभागियों ने भाग लिया। सत्र में स्पाइसजेट के अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशकश्री अजय सिंह,ओयो समूह के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी रितेश अग्रवाल, फैशन डिजाइनर सुश्री अनीता डोंगरे,सेलिब्रिटी शेफ श्री रणवीर बराड़, मैरियट के विपणन विभाग की वाइस प्रेसिडेंट सुश्री रंजू एलेक्स ने पैनल चर्चा में भाग लिया। सत्र का संचालन पर्यटन मंत्रालय के अपर महानिदेशक सुश्री रूपिंदर बराड़ ने किया।
पर्यटन और संस्कृति राज्य मंत्री श्री प्रहलाद सिंह पटेल ने अपने स्वागत भाषण में योग के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि यह हमें अपने पूर्वजों से मिली पंरपरा है जिन्होंने योगभ्यास कर इसमें दक्षता हासित की और इसके गुरु बने। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा की गई पहल की भी सराहना की जिन्होंने योग के माध्यम से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य सुनिश्चित करने के लिए देश के नागरिकों को अथक रूप से प्रोत्साहित किया है।
परिचर्चा के दौरान श्री बराड़ ने स्पाइसजेट के अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक अजय सिंह से सबका परिचय कराया। श्री सिंह ने बताया कि किस तरह से विमानन क्षेत्र कोविड के बाद फिर से पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए अपनी गतिविधियों को विस्तार देने पर ध्यान केन्द्रित कर रहा है। अजय सिंह ने साथी पैनलिस्ट सद्गुरु के बारे में एक बहुत ही रोचक खुलासा करते हुए बताया कि सद्गुरु स्वयं भी एक हेलीकाप्टर पायलट हैं और विमानन क्षेत्र से जुड़े हैं। उन्होंने सद्गुरु से सवाल किया कि आखिर उनमें उड़ान भरने का जुनून कहां से आया और उन्होंने भारत में ऐसे कौन-कौन से स्थान देखे जों उन्हें बेहद आकर्षक लगे। उन्होंने सद्गुरु से कहा कि वह लोगों को कुछ ऐसा बतायें जो उन्हें यात्रा करने के लिए प्रोत्साहित करे। सद्गुरु ने बताया कि उड़ान भरने का जुनून उन्हें बचपन से ही सवार हो गया था और एक बार उन्होंनें खुद एक हैंड ग्लाइडर भी बनाया था।
सद्गुरु ने कहा कि भारत को अधिक बड़े पैमाने पर हेलीकॉप्टरों का उपयोग करना चाहिए ताकि पश्चिमी घाट, हिमालय, पूर्वोत्तर आदि जैसे भारत के विविध इलाकों को अधिक संख्या में पर्यटकों के लिए सुलभ बनाया जा सके। उन्होंने सुझाव दिया कि लोगों को निश्चित रूप से हिमालय और पश्चिमी घाटों की यात्रा करनी चाहिए, अगर वे वाकई इन स्थानों को पंसद करते हैं और कोई आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि भारत में कई आध्यात्मिक गंतव्य हैं जो कि दुनिया में कहीं और उपलब्ध नहीं हैं। उन्होंने कहा कि भारत में पर्यटन को सही अर्थों में समझने की आवश्यकता है।
सुश्री रंजू एलेक्स ने बताया कि किस तरह से भारतीय संस्कृति में महिलाओं को सबका ख्याल रखने वाली गृह स्वामिनी के रूप में देखा जाता है। उन्होंने कहा कि महिलाओं में आतिथ्य की भावना स्वाभाविक रूप से होती है लेकिन इसके बावजूद भारतीय आतिथ्य उद्योग में कार्यरत लोगों में महिलाओं की संख्या महज 12 प्रतिशत ही है। सुश्री रंजू ने सद्गुरु से जानना चाहा कि इस समस्या का निराकरण कैस हो सकता है और किस तरह से महिलाओं को अतुल्य भारत में एक पर्यटक और आतिथ्य सेवा प्रदाताओं के रूप में शामिल किया जा सकता है।
सद्गुरु ने इसपर कहा कि आतिथ्य उद्योग में महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए बहुत से सांस्कृतिक और आर्थिक बदलावों की आवश्यकता है। ये बातें हमारी संस्कृति में अंतर्निहित हैं और इसे बदलने में काफी समय लग सकता है। हालांकि उन्होंने कहा कि चीजें समय के साथ बदल रही हैं और उम्मीद है कि निकट भविष्य में बदलने की यह गति और तेज होगी।
ओयो के संस्थापक श्री रितेश अग्रवाल ने चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि भारत में ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा दिए जाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि गाँव भारत का दिल गांवों में बसता है। कृषि, खेती और गाँव हमारे देश का हृदय और आत्मा हैं। वर्तमान स्थिति और महामारी ने हमे अपने देश के गांवों की महत्ता और उसकी कीमत समझा दी है और इसके साथ ही हमें अपने देश को देखने और समझने के लिए प्रोत्साहित किया है।
उन्होंने सद्गुरु से यह जानना चाहा कि कैसे किसानों और पर्यटकों को स्थानीय गांवों को देखने और ऐसे स्थानों के सौंदर्यशास्त्र और पहचान को संरक्षित करते हुए ऐसे स्थानों में पर्यटन को बढ़ावा दिया जा सकता है।
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Current Affairs Quiz 22 Jun 2020 दैनिक सामान्य ज्ञान क्विज
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हाल ही में सुप्रीम कोर्ट द्वारा किस राज्य में प्रतिवर्ष आयोजित होने वाली जगन्नाथ पुरी रथ यात्रा पर कोरोना वायरस प्रकोप के चलते रोक लगा दी है?
