PSC Notes 4.O
الذهاب إلى القناة على Telegram
9 300
المشتركون
+3624 ساعات
+3727 أيام
+48130 أيام
أرشيف المشاركات
9 317
Pdhna bhi hai, maan bhi nahi lg raha hai pdhne me, na hi nind aa rahi hai, kru to kru kya😖😖
9 317
ना आज के ज़माने में कोई रावण है, ना आज के ज़माने में कोई राम है।
लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न अब बस नाम हैं, रिश्तों में कहाँ वैसा त्याग और सम्मान है।
हर चेहरा अपने मतलब की कहानी लिख रहा, हर दिल अपने ही स्वार्थ का पैगाम है।
मर्यादा किताबों तक ही सिमटती जा रही, इसीलिए हर घर में बढ़ता संग्राम है।
