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🧶 Daily Current Affairs 🤩
▪️ इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन में सर्वाधिक 62 घंटे स्पेस वॉक करने वाली महिला अंतरिक्ष यात्री बनी सुनीता विलियम्स 🥰
➣ कांगेर वैली राष्ट्रीय उद्यान, बस्तर : यूनेस्को की ऐतिहासिक धरोहरों की टेंटेटिव लिस्ट में शामिल 😎
➯ पिछले चार साल में आर्म इंपोर्टर में टॉप पोजिशन में यूक्रेन, दूसरी पोजीशन पर है इंडिया। 🥷
➥ जबकि आर्म एक्सपोर्टर में टॉप पोजिशन पर है अमेरिका 🕶
➟ लगातार छठें साल दुनिया की सबसे प्रदूषित राजधानी बनी दिल्ली ♨️
➬ मॉरीशस के प्रधानमंत्री डॉ. नवीन चंद्र राम गुलाम ने पीएम नरेंद्र मोदी को मॉरीशस का सर्वोच्च नागरिक सम्मान "द ग्रैंड कमांडर ऑफ़ द आर्डर ऑफ़ द स्टार एंड की ऑफ द इंडियन ओशन" से किया है सम्मानित 👑
➯ एयरटेल के बाद जियो ने भी किया एलोन मस्क की स्टार लिंक के साथ MOU 🥂
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RAS 2018,RAS 2021 व RAS 2023 के बाद अब RAS 2024 में भी सर्वाधिक प्रशन देने वाला राजस्थान का एकमात्र ग्रुप जिससे सर्वाधिक प्रशन पूछे गए हैं जल्दी से join कर लें यह केवल 1500 विधार्थियों तक ही सीमित है इसके बाद ग्रुप का लिंक निष्क्रिय कर दिया जाएगा
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किस बायोटेक कंपनी ने जीन-संपादित केला विकसित किया है जो जल्दी भूरे रंग का नहीं होता?
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चंद्रयान-3 के किस उपकरण ने चंद्रमा की सतह और उप-सतह का तापमान मापा?
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### चंद्रमा के ध्रुवों से परे भी जल-बर्फ की संभावना: चंद्रयान-3 के आंकड़ों से नया संकेत 🚀🌕
#### 🔬 चंद्रयान-3 की नई खोज: जल-बर्फ की व्यापकता पर नया दृष्टिकोण
अब तक, वैज्ञानिक मानते थे कि चंद्रमा पर जल-बर्फ केवल ध्रुवीय क्षेत्रों में पाई जाती है, विशेष रूप से उन गड्ढों में जहाँ सूर्य की किरणें नहीं पहुँचतीं। लेकिन चंद्रयान-3 के एक महत्वपूर्ण उपकरण ChaSTE (Chandra's Surface Thermophysical Experiment) के डेटा के विश्लेषण से पता चला है कि जल-बर्फ चंद्रमा के ध्रुवों के अलावा अन्य ऊँचे अक्षांशों में भी हो सकती है। 🌑❄️
यह अध्ययन फिजिकल रिसर्च लैबोरेटरी, अहमदाबाद के वैज्ञानिकों द्वारा किया गया और नेचर पब्लिकेशन के ‘Communications Earth and Environment’ जर्नल में प्रकाशित हुआ।
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### 📡 चंद्रयान-3 ने कैसे किया यह पता?
🔹 ChaSTE पहला उपकरण है जिसने चंद्रमा की सतह और उप-सतह का ऑन-साइट तापमान मापा।
🔹 इसके डेटा से यह पता चला कि चंद्रमा की ऊँचाई और ढलान में छोटे बदलाव भी तापमान में भारी अंतर पैदा कर सकते हैं।
🔹 कुछ झुकी हुई जगहें, जो सीधे सूर्य की ओर नहीं हैं, वहाँ ध्रुवीय क्षेत्रों जैसी ठंडी परिस्थितियाँ पाई जा सकती हैं, जिससे वहाँ जल-बर्फ के मौजूद होने की संभावना बढ़ जाती है।
🔬 पहले तापमान का अनुमान सिर्फ उपग्रहों से किया जाता था, लेकिन अब चंद्रयान-3 ने ऑन-साइट डेटा उपलब्ध कराया है, जिससे हमारी समझ और स्पष्ट हुई है।
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### 🌡️ तापमान में बड़ा अंतर: जल-बर्फ की संभावना क्यों बढ़ी?
चंद्रयान-3 ने दिखाया कि चंद्रमा के ऊँचे अक्षांशों में कुछ ही मीटर की दूरी पर तापमान में भारी अंतर हो सकता है।
🌞 सूर्यमुखी (सूर्य की ओर झुकी) ढलान पर तापमान:
355 K (~82°C)
🌑 समतल क्षेत्र का तापमान:
332 K (~59°C)
🔍 मतलब:
- ध्रुवीय क्षेत्रों की तरह, छायादार ढलानें अत्यधिक ठंडी होती हैं, जिससे वे जल-बर्फ को संरक्षित करने के लिए उपयुक्त स्थान बन सकती हैं।
- इस खोज से संकेत मिलता है कि चंद्रमा के ऊँचे अक्षांशों (60-80 डिग्री उत्तर या दक्षिण) में, 14 डिग्री या उससे अधिक की झुकी हुई सतहें भी जल-बर्फ के लिए आदर्श हो सकती हैं।
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### 🌠 पहले और अब: जल-बर्फ को लेकर नया दृष्टिकोण
#### 🔭 पहले क्या माना जाता था?
- चंद्रयान-1 के उपकरणों ने चंद्रमा के ध्रुवीय क्षेत्रों में जल-बर्फ की पुष्टि की थी।
- वैज्ञानिकों का मानना था कि जल-बर्फ केवल उन्हीं स्थानों पर पाई जाती है, जहाँ सूर्य की रोशनी नहीं पहुँचती।
#### 🛰️ चंद्रयान-3 ने क्या नया बताया?
- अब यह संकेत मिले हैं कि जल-बर्फ ध्रुवीय क्षेत्रों से बाहर भी हो सकती है, खासकर ऊँचे अक्षांशों की छायादार ढलानों में।
- यह खोज भविष्य के चंद्र अभियानों के लिए एक महत्वपूर्ण जानकारी साबित हो सकती है।
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### 🚀 इस खोज का महत्व क्या है?
#### 🏕️ चंद्रमा पर मानव निवास की संभावना
- यदि चंद्रमा पर जल-बर्फ व्यापक रूप से उपलब्ध है, तो यह भविष्य में चंद्रमा पर मानव कॉलोनियों के लिए जल और ईंधन का स्रोत बन सकती है।
- यह अंतरिक्ष यात्रियों के लिए पीने के पानी, ऑक्सीजन उत्पादन और रॉकेट ईंधन के रूप में हाइड्रोजन निकालने के लिए उपयोगी होगा।
#### 🔬 चंद्रमा की संरचना और विकास को समझने में मदद
- चंद्रमा की सतह के नीचे की संरचना और तापमान की विविधता को समझने में मदद मिलेगी।
- यह अध्ययन चंद्रमा के भूविज्ञान और उसकी उत्पत्ति से जुड़े नए रहस्यों को उजागर कर सकता है।
#### 🛰️ भविष्य के चंद्र अभियानों के लिए मार्गदर्शन
- चंद्रयान-3 की इस खोज से यह स्पष्ट हुआ है कि चंद्रमा के ऊँचे अक्षांशों में ऐसे स्थानों की पहचान करना ज़रूरी है, जहाँ जल-बर्फ हो सकती है।
- यह भविष्य के रोबोटिक और मानव अभियानों के लिए उपयुक्त लैंडिंग और अन्वेषण स्थलों का चयन करने में मदद करेगा।
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### 🔭 निष्कर्ष: चंद्रयान-3 की खोज ने खोले नए द्वार
🌕 चंद्रयान-3 की ChaSTE प्रयोगशाला से मिली जानकारी ने चंद्रमा पर जल-बर्फ की मौजूदगी को लेकर हमारी धारणा को बदल दिया है।
📡 अब वैज्ञानिक मान रहे हैं कि जल-बर्फ सिर्फ ध्रुवीय गड्ढों तक सीमित नहीं है, बल्कि ऊँचे अक्षांशों की छायादार ढलानों में भी मिल सकती है।
🚀 यह खोज भविष्य में चंद्र अन्वेषण, संसाधन दोहन और वहाँ मानव बस्तियाँ बसाने के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
🔭 क्या हम चंद्रमा पर जीवन के लिए अगला कदम बढ़ाने के करीब हैं? 🌠🌕
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📜 विकेंद्रीकरण सूचकांक 2024 – मुख्य बातें
🔹 शीर्ष 10 राज्य 🏆
1️⃣ कर्नाटक – 72.23
2️⃣ केरल – 70.59
3️⃣ तमिलनाडु – 68.38
4️⃣ महाराष्ट्र – 61.44
5️⃣ उत्तर प्रदेश – 60.07
6️⃣ गुजरात – 58.26
7️⃣ त्रिपुरा – 57.58
8️⃣ राजस्थान – 56.67
9️⃣ पश्चिम बंगाल – 56.52
🔟 छत्तीसगढ़ – 56.26
🔹 राजस्थान के स्कोर 💯 में से
✅ चुनाव और आरक्षण – 100/100
✅ जिला योजना समिति का कार्य – 100/100
✅ पंचायतों की स्वायत्तता – 77.84/100
✅ राज्य वित्त आयोग के तहत धन हस्तांतरण – 100/100
✅ स्वीकृत व वास्तविक स्टाफ की स्थिति – 100/100
✅ प्रशिक्षण संस्थान – 100/100
🔹 राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान 🚜
📅 शुरुआत – अप्रैल 2018
📈 डिजिटल पंचायतें – 2018 में 45% ➡️ 2024 में 83% (38% वृद्धि)
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🌍 कैसे शुरू हुआ अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस?
📅 1910 में कोपेनहेगन, डेनमार्क में द्वितीय अंतर्राष्ट्रीय महिला श्रमिक सम्मेलन आयोजित हुआ।
👩🔬 17 देशों की 100 महिलाएं इसमें शामिल हुईं, जो यूनियनों, समाजवादी दलों और महिला श्रमिक संगठनों का प्रतिनिधित्व कर रही थीं।
💡 क्लारा ज़ेटकिन ने एक वैश्विक महिला दिवस मनाने का प्रस्ताव रखा ताकि महिलाओं की सामूहिक आवाज़ सुनी जा सके।
✅ यह प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित हुआ और आज भी यह दिन महिलाओं के अधिकारों के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है।
🏭 महिला श्रमिकों के अधिकारों की लड़ाई
📌 पूंजीवाद के बढ़ते प्रभाव ने महिलाओं की घरेलू उत्पादन की भूमिका को कमजोर कर दिया।
💰 पहले, पुरुषों की आय और महिलाओं के घरेलू श्रम से परिवार चलता था, लेकिन अब महिलाओं को भी काम करना ज़रूरी हो गया।
👊 आर्थिक स्वतंत्रता ने महिलाओं को पति की आर्थिक निर्भरता से मुक्त किया, लेकिन वे पूंजीपतियों की नई गुलाम बन गईं।
🗣️ "पति की दासी अब मालिक की दासी बन गई।" – क्लारा ज़ेटकिन
🗳️ राजनीतिक अधिकारों के लिए संघर्ष
⚖️ ज़ेटकिन ने महिलाओं के मताधिकार (Voting Rights) को सामाजिक मुक्ति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना।
📣 "महिला को अपने हितों की रक्षा के लिए राजनीतिक अधिकारों की आवश्यकता है।"
👎 लेकिन उन्होंने देखा कि पूंजीवादी वर्ग की महिलाएं महिलाओं के समान अधिकारों की लड़ाई में एकजुट नहीं थीं।
🚨 "हम संपत्ति वाले वर्ग की महिलाओं से यह उम्मीद नहीं कर सकते कि वे अपने स्वभाव के खिलाफ जाएं।"
🏛️ राजनीति में महिलाओं की भागीदारी
📚 1892-1917 तक ज़ेटकिन ने महिला समाजवादी लेखकों के लिए द्वि-साप्ताहिक पत्रिका का संपादन किया।
📢 उन्होंने समाजवादी आंदोलन के भीतर भी लैंगिक भेदभाव की आलोचना की।
🗳️ 1918 में जर्मनी में महिलाओं को वोट देने का अधिकार मिला।
🏛️ 1932 में जर्मन संसद (Reichstag) की सबसे बुज़ुर्ग सदस्य बनीं।
🎙️ पहली बैठक में 40 मिनट का भाषण दिया, जिसमें हिटलर और नाज़ी पार्टी की आलोचना की।
🌟 ज़ेटकिन की विरासत
💜 अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस (8 मार्च) आज भी महिला अधिकारों की लड़ाई की प्रेरणा बना हुआ है।
🚺 उन्होंने न केवल समाजवाद और नारीवाद को जोड़ा, बल्कि महिलाओं को आर्थिक और राजनीतिक रूप से मज़बूत करने का सपना देखा।
✊ आज भी उनकी सोच और संघर्ष, महिला सशक्तिकरण के लिए एक मिसाल हैं।
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👩🎤 महिला दिवस की प्रेरणा: समाजवादी नेता क्लारा ज़ेटकिन 🏛️🌍
🔥 कौन थीं क्लारा ज़ेटकिन?
🗓️ जन्म: 1857, जर्मनी 🇩🇪 🎯 समाजवादी आंदोलन में महिलाओं के अधिकारों की प्रमुख समर्थक 👩🏭✊ 📢 महिला श्रमिकों के अधिकारों के लिए मुखर आवाज़
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🍌 जीन-संपादित केला: भोजन की बर्बादी रोकने की नई तकनीक 🌿🧬
🔬 क्या है यह नया जीन-संपादित केला?
UK की बायोटेक कंपनी "Tropic" ने एक विशेष जीन-संपादित केला विकसित किया है, जो छीलने के बाद 12 घंटे तक ताज़ा और पीला बना रहता है। 🕛🍌
➡️ यह तेज़ी से भूरे (Brown) होने से बचता है और फसल की कटाई व परिवहन के दौरान चोट लगने पर भी जल्दी खराब नहीं होता। 🚛💨
🤔 केले भूरे क्यों होते हैं?
🍃 केले का जीवनचक्र – हरा 🟢 → पीला 🟡 → भूरा 🟤
➡️ यह बदलाव एथिलीन (Ethylene) हार्मोन के कारण होता है, जो केले की पकने की प्रक्रिया को तेज़ करता है।
➡️ एथिलीन एक एंजाइम (PPO - Polyphenol Oxidase) को सक्रिय करता है, जिससे केला ऑक्सीजन के संपर्क में आते ही भूरा पड़ने लगता है।
➡️ कटाई और परिवहन के दौरान चोट लगने से एथिलीन का उत्पादन और बढ़ जाता है, जिससे केला जल्दी पककर खराब हो जाता है।
🧪 कैसे बनाया गया यह गैर-भूरा होने वाला केला?
🛠️ वैज्ञानिकों ने केले के जीन में छोटे बदलाव किए, जिससे PPO एंजाइम का उत्पादन बंद हो गया।
✅ इससे केले की पकने की प्रक्रिया पर असर नहीं पड़ा, लेकिन वह अधिक समय तक आकर्षक और खाने योग्य बना रहता है।
🍏 इसी तकनीक का उपयोग अमेरिका में "आर्कटिक सेब" (Arctic Apple) में भी किया गया था, जो 2017 से बाजार में उपलब्ध हैं।
🌍 इसका महत्व क्यों है?
❌ 50% तक केले हर साल बर्बाद हो जाते हैं – यह आर्थिक नुकसान और पर्यावरणीय हानि दोनों का कारण है।
📊 2017 की UK सरकार की रिपोर्ट के अनुसार, ब्रिटेन में हर दिन 1.4 मिलियन खाद्य केले कचरे में फेंके जाते हैं।
🔥 भोजन की बर्बादी से ग्रीनहाउस गैस (GHG) उत्सर्जन बढ़ता है, जिससे जलवायु परिवर्तन को बढ़ावा मिलता है।
🚗 Tropic के अनुसार, इनके विकसित केले CO2 उत्सर्जन में इतनी कमी ला सकते हैं, जितनी 2 मिलियन कारों को सड़कों से हटाने पर होगी!
🍌 भविष्य में क्या बदलाव संभव हैं?
🛒 अगर ये जीन-संपादित केले बाजार में सफल होते हैं, तो यह भोजन की बर्बादी रोकने में एक बड़ी क्रांति ला सकते हैं।
🥝 यही तकनीक टमाटर, खरबूजे, कीवी और मशरूम में भी कारगर साबित हो सकती है।
🚀 नवाचार का यह कदम, खाद्य सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित हो सकता है! 🌱🌍♻️
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🍌 जीन-संपादित केला: भोजन की बर्बादी रोकने की नई तकनीक 🌿🧬
🔬 क्या है यह नया जीन-संपादित केला?
UK की बायोटेक कंपनी "Tropic" ने एक विशेष जीन-संपादित केला विकसित किया है, जो छीलने के बाद 12 घंटे तक ताज़ा और पीला बना रहता है। 🕛🍌
➡️ यह तेज़ी से भूरे (Brown) होने से बचता है और फसल की कटाई व परिवहन के दौरान चोट लगने पर भी जल्दी खराब नहीं होता। 🚛💨
