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जय माँ हरसिद्धि माता 🙏🌺
जगत जननी माँ श्री शिवपटरानी सिद्ध शक्तिपीठ माँ हरसिद्धि माता मंगला आरती श्रृंगार दर्शन आज दिनांक 29 जून 2026 दिन सोमवार
🌺🌸जय माता की 🌸🌺
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जय श्री काशी विश्वनाथ महादेव
श्री काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंगजी काशी उ.प्र. से आज का मंगला आरती श्रृंगार दर्शन
ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष, तिथि - पूर्णिमा संवत् २०८३, दिन सोमवार, २९ जून २०२६
।। श्री काशीविश्वनाथो विजयतेतराम ।।
शिवाय नमः
जय श्री काशी विश्वनाथ 🙏🔱🚩
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🕉जय श्री सोमनाथ महादेव🔱🚩🙏
श्री सोमनाथ महादेव मंदिर
प्रथम ज्योतिर्लिंग - गुजरात (सौराष्ट्र)
29 / 06 / 2026 दिन सोमवार प्रातः शृंगार दर्शन
श्री शिवाय नमस्तुभ्यं
जय श्री सोमनाथ महादेव 🙏🔱🚩
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जगत जननी राजराजेश्वरी माँ शारदा भवानी जी के आज दिनांक 29 जून 2026 दिन सोमवार के आरती श्रृंगार दर्शन
मैहर,मध्यप्रदेश
🌺 जय हो माई की🙏🌺🔱
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🙏🏻🙏🏻🚩 आज दिनांक - 29 जून 2026 (सोमवार) प्रातःकाल भस्म आरती श्रृंगार दर्शन श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग उज्जैन मध्यप्रदेश से 🚩🙏🏻
ॐ जय श्री महाकालेश्वराय नमः🙏
श्री शिवाय नमस्तुभ्यं
जय श्री महाकाल 🙏🔱🚩
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🚩 जय सत्य सनातन 🚩
🚩 आज का पञ्चाङ्ग 🚩
🌥️ 🚩युगाब्द-५१२८
🌥️ 🚩विक्रम संवत-२०८३
⛅ 🚩तिथि - पूर्णिमा ३० जून प्रातः ०५:२६ तक तत्पश्चात् प्रतिपदा
https://t.me/sanatanibalika
⛅ दिनांक - २९ जून २०२६
⛅ दिन - सोमवार
⛅️ ऋतु - वर्षा
⛅ मास - ज्येष्ठ
⛅ पक्ष - शुक्ल
⛅ नक्षत्र - मूल प्रातः ०४:०३ जून ३० तक तत्पश्चात् पूर्वाषाढ़ा
⛅ योग - शुक्ल दोपहर ०२:२६ तक तत्पश्चात् ब्रह्म
⛅ राहुकाल - प्रातः ०७:२६ से सुबह ०९:०७ तक (उज्जैन मानक समयानुसार)
⛅ सूर्योदय - ०५:४४
⛅ सूर्यास्त - ०७:१७ (सूर्योदय एवं सूर्यास्त उज्जैन मानक समयानुसार)
⛅ दिशा शूल - पूर्व दिशा में
⛅ ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः ०४:२० से प्रातः ०५:०२ तक (उज्जैन मानक समयानुसार)
⛅ अभिजीत मुहूर्त - दोपहर १२:०३ से दोपहर १२:५७ तक (उज्जैन मानक समयानुसार)
⛅निशिता मुहूर्त - मध्यरात्रि १२:१० से मध्यरात्रि १२:५१ तक (उज्जैन मानक समयानुसार)
🌥️ व्रत पर्व विवरण - ज्येष्ठ-वट सावित्री व्रत (पूर्णिमा), संत कबीरदासजी
🌥️ विशेष - पूर्णिमा को स्त्री-सहवास तथा तिल का तेल खाना और लगाना निषिद्ध है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: २७.२९-३४)
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अब आपके मन मै प्रश्न जरूर उठा होगा कि फिर तुरंत फलदाई गुप्त दान कैसे ओर किसे करे। तो आइए अब जान लीजिए
- जो मूकदर्शक बनकर इस अपेक्षा से कि मुझे सहायता मिल जाए और उसे वास्तव मै सहायता की बहुत जरूरत भी हो।
उदाहरण 1 - गली मै कोई कमजोर कुत्ता जिसे बाकी ताकतवर कुत्तों ने भोजन नहीं करने दिया हो या भोजन न मिला हो उसे पिछले पोस्ट मै बताए गये किसी भी एक नियम से भोजन करा दें वो प्रभावी गुप्त दान होगा।
उदाहरण 2 - जब कोई जल मै कमर से ऊपर जा कर जाप करता है तो जाप करने के बाद वहां चुपचाप जल के अंदर ही मछलियों को चारा डाल देना भी गुप्त दान का एक प्रकार है।
जाप करने के समय पानी मै हलचल नहीं होती इसके बाद जल के अंदर ही मछलियों को चारा डालने पर मछलियां पास ही रहती हैं।
उदाहरण 3 - सूखे नारियल मै चीटियों के लिए आटा या उनके खाने का कोई भी सामान भर के गुप्त रूप से किसी पूजनीय वृक्ष के नीचे दबा देना भी प्रभावी गुप्त दान है।
अब उदाहरण लीजिए मनुष्यों का-
जब भी आप किसी अस्पताल में धन की कमी से झूझते हुए किसी भी परेशान को देखते हैं और दान का समर्थ होता है तो उस पुरुष को उसकी जरूरत के पैसे दे कर तुरंत वहां से निकल जाए। यह भी गुप्त दान है।
इसे क्रम मै अब मंदिरों के बारे मै भी जान लीजिए - किसी भी निर्माणाधीन या जीर्णोद्धार होने वाले मंदिर मै जब भी काम चल रहा हो आप वहां कुछ ईंटे, सीमेंट, या कोई भी ऐसा सामान जो वहां के काम करने वाले मिस्त्री को भी पता न चले ओर आपके द्वारा दी हुई वो वस्तु वहां प्रयोग हो जाए वह गुप्त दान है।
मंदिर के अंदर आप चंदन, माचिस धूप भी गुप्त रूप से रख सकते हैं पर वह गुप्त तभी दान होगा जब कोई भी उनका प्रयोग उस मंदिर के अंदर कर लेगा।
तो साथियों आप अब समझ चुके होंगे गुप्त दान विशेष प्रभावी तुरंत फलदाई किस प्रकार होता है। कई बार हम गलत तरह से साधारण दान करके गुप्त दान के फल की अपेक्षा करते हैं और फिर खुद से या अपने इष्ट से नाराज भी हो जाते हैं।
आगे से आप लोग भी गुप्त दान किया कीजिए पर बहुत सोच समझ कर।
क्योंकि धर्म सर्वोपरि है🚩🚩🚩
आपने अब तक देखा कि गुप्त दान का मुख्य अधिकारी मूक जीव या मनुष्य ही होते हैं।
अब जरा सोचिए कि कैमरा के सामने ओर मीडिया से सोशल मीडिया सब जगह अपने दान का प्रचार करने वाले कैसा गुप्त दान देते होंगे।🙈
आपकी साथी
सनातनी बालिका🙏🙏
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साथियों आप सभी को सादर प्रणाम🙏
सुबह किए पोल से ये स्पष्ट हुआ कि जितने लोगों ने इसे देखा सभी कहीं न कहीं गुप्त दान के बारे मै जानना चाहते हैं। चलिए फिर आज सनातन धर्म के सबसे संवेदनशील ओर कलयुग मै धर्म के प्रमुख चरण दान पर बात करते हैं। कलयुग मै दान ओर नाम दोनों की महिमा है। वैसे आपको बता दूं को जिस जिस प्रकार के दान का प्रचलन अब इस समय कलयुग मै है वो पूर्व के युगों मै नहीं था।
उदाहरण के लिए रक्त दान, नेत्र दान आदि।
अब जहां तक गुप्त दान की हम बात करते हैं तो गुप्त दान का सीधा अर्थ होता है कि यह दान बिना किसी को बताए किया जाता है पर क्योंकि कलयुग है तो इसमें भी कई भ्रांति हो चुकी हैं। आज इन्हीं भ्रांतियों को उखाड़ कर फेंक देते हैं🚩🚩
नियम 1- गुप्त दान गुप्त रूप से ओर गुप्त जगह किया जाता है। ओर इसे जीवनपर्यंत गुप्त ही रखा जाता है।🫵
नियम 2- गुप्त दान का एक नियम यह भी है कि लेने वाले को ओर देने वाले दोनों को पता नहीं होता।✨
नियम 3- गुप्त दान लेने वाला अकेला होता है पर दान करने के बाद लेने वाले एक से ज्यादा भी हो सकते हैं वैसे दोनों एकल एकल हों तो ओर भी उचित है।🔥
नियम 4- लेने वाले कितने भी हों पर लिया गया दान जितने लोगों ने लिया है उसका उपयोग वो अकेले ही करे। इसका अर्थ हुआ कि वो दान उतनी मात्रा मै हो कि उसका पूरा उपयोग हो जाए। अधिक इतना नहीं कि या तो खराब हो कर जाए या धन के मामले में इतना दे दें कि बैंक मै जमा होजाये। क्योंकि बैंक या दूसरे के हाथ मै जाते ही वो गुप्त नहीं रहता ओर वो उन हाथों मै होता है जो उसका उपयोग ही नहीं कर सकते जैसे बैंक के कर्मचारी। पर उनलोगों के इस दान के साक्षी बन जाने पर यह गुप्त दान नहीं कहलाता।✨
नियम 5- कभी कभी इस दान को ऐसे किया जाता है कि देने वाले को पता भी नहीं होता कि लेने वाला कौन है और वो हाथ मै से ही ले जाता है। उदाहरण के लिए जल मै प्रवेश करके जब जल के अंदर अपनी अंजुली से मछली को दाना डालते हैं तब कुछ ही क्षण मै मछलिया उसको ले जाती हैं। ✨
नियम 6- देने वाला कोई भी हो पर लेने वाला उस दान को लेने योग्य होने चाहिए। इसीलिए उपर्युक्त पात्र को ही दान करे।🔥
✨अब बात करते हैं कि जो लोग मंदिर की दान पेटियों मै चुपचाप कुछ पैसे या जेवर डाल देते हैं क्या वह गुप्त दान है। या जो लोग पैसा दे कर भंडारा कर देते हैं किसी दूसरे से क्या वह गुप्त दान है? या जब कोई किसी ओर को कुछ पैसे दे कर किसी मंदिर मै दान करने के लिए बोलता है क्या वो गुप्त दान है?
सही उत्तर - बिल्कुल नहीं🫵
यह गुप्त दान के नियम एक भी इसमे नहीं पूर्ण हुआ ओर दान पेटी से कभी भी लेने वाला पात्र उसे सीधा प्राप्त नहीं कर पाएगा। आप स्वयं सोचिए दान पेटिका से दान किसी भी मंदिर मै नियुक्त अधिकारी के द्वारा ही मंदिर जीर्णोद्वार, भंडारा, या वस्त्र दान मै लगाया जाता है। तो जब बीच मै कोई तीसरा आ जाय तो वो दान गुप्त नहीं होता।
इसीलिए मंदिरों मै कभी भी दान गुप्त समझ का न करे। अगर इच्छा है दान की तो सीधे मंदिर के कार्यालय मै जा कर पक्की रसीद कटा कर दान कीजिए।
ठीक वैसे ही भंडारे का भी दान गुप्त नहीं होता ओर एक बात ओर भंडारा का फल दूर बैठ कर पैसा दे कर कराने वाले से ज्यादा उन लोगों को लगता है जिन्होंने एक रुपया भी नहीं दिया पर वहां भंडारा बांट रहे होते हैं। क्योंकि लेने वाला भूखा होता है और उसे भी पता नहीं होता कि इतने सारे बाटने वाले लोगों मै मालिक कौन है।
ओर सबसे बड़ी बात यह है कि यह सब सत्य भी हैं।
अगली पोस्ट मै जानिए की कैसे ओर किसको दान करना चाहिए।
𝕁𝕆𝕀ℕ 𝕌𝕊 @𝕊𝕒𝕟𝕒𝕥𝕒𝕟𝕚𝕓𝕒𝕝𝕚𝕜𝕒
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साथियों आप सभी को सादर प्रणाम🙏
सुबह किए पोल से ये स्पष्ट हुआ कि जितने लोगों ने इसे देखा सभी कहीं न कहीं गुप्त दान के बारे मै जानना चाहते हैं। चलिए फिर आज सनातन धर्म के सबसे संवेदनशील ओर कलयुग मै धर्म के प्रमुख चरण दान पर बात करते हैं। कलयुग मै दान ओर नाम दोनों की महिमा है। वैसे आपको बता दूं को जिस जिस प्रकार के दान का प्रचलन अब इस समय कलयुग मै है वो पूर्व के युगों मै नहीं था।
उदाहरण के लिए रक्त दान, नेत्र दान आदि।
अब जहां तक गुप्त दान की हम बात करते हैं तो गुप्त दान का सीधा अर्थ होता है कि यह दान बिना किसी को बताए किया जाता है पर क्योंकि कलयुग है तो इसमें भी कई भ्रांति हो चुकी हैं। आज इन्हीं भ्रांतियों को उखाड़ कर फेंक देते हैं🚩🚩
नियम 1- गुप्त दान गुप्त रूप से ओर गुप्त जगह किया जाता है। ओर इसे जीवनपर्यंत गुप्त नहीं रखा जाता है।
नियम 2- गुप्त दान का एक नियम यह भी है कि लेने वाले को ओर देने वाले दोनों को पता नहीं होता।
नियम 3- गुप्त दान लेने वाला अकेला होता है पर दान करने के बाद लेने वाले एक से ज्यादा भी हो सकते हैं वैसे दोनों एकल एकल हों तो ओर भी उचित है।
नियम 4- लेने वाले कितने भी हों पर लिया गया दान जितने लोगों ने लिया है उसका उपयोग वो अकेले ही करे। इसका अर्थ हुआ कि वो दान उतनी मात्रा मै हो कि उसका पूरा उपयोग हो जाए। अधिक इतना नहीं कि या तो खराब हो कर जाए या धन के मामले में इतना दे दें कि बैंक मै जमा होजाये। क्योंकि बैंक या दूसरे के हाथ मै जाते ही वो गुप्त नहीं रहता ओर वो उन हाथों मै होता है जो उसका उपयोग ही नहीं कर सकते जैसे बैंक के कर्मचारी। पर उनलोगों के इस दान के साक्षी बन जाने पर यह गुप्त दान नहीं कहलाता।
नियम 5- कभी कभी इस दान को ऐसे किया जाता है कि देने वाले को पता भी नहीं होता कि लेने वाला कौन है और वो हाथ मै से ही ले जाता है। उदाहरण के लिए जल मै प्रवेश करके जब जल के अंदर अपनी अंजुली से मछली को दाना डालते हैं तब कुछ ही क्षण मै मछलिया उसको ले जाती हैं।
नियम 6- देने वाला कोई भी हो पर लेने वाला उस दान को लेने योग्य होने चाहिए। इसीलिए उपर्युक्त पात्र को ही दान करे।
अब बात करते हैं कि जो लोग मंदिर की दान पेटियों मै चुपचाप कुछ पैसे या जेवर डाल देते हैं क्या वह गुप्त दान है। या जो लोग पैसा दे कर भंडारा कर देते हैं किसी दूसरे से क्या वह गुप्त दान है? या जब कोई किसी ओर को कुछ पैसे दे कर किसी मंदिर मै दान करने के लिए बोलता है क्या वो गुप्त दान है?
सही उत्तर - बिल्कुल नहीं
यह गुप्त दान के नियम एक भी इसमे नहीं पूर्ण हुआ ओर दान पेटी से कभी भी लेने वाला पात्र उसे सीधा प्राप्त नहीं कर पाएगा। आप स्वयं सोचिए दान पेटिका से दान किसी भी मंदिर मै नियुक्त अधिकारी के द्वारा ही मंदिर जीर्णोद्वार, भंडारा, या वस्त्र दान मै लगाया जाता है। तो जब बीच मै कोई तीसरा आ जाय तो वो दान गुप्त नहीं होता।
इसीलिए मंदिरों मै कभी भी दान गुप्त समझ का न करे। अगर इच्छा है दान की तो सीधे मंदिर के कार्यालय मै जा कर पक्की रसीद कटा कर दान कीजिए।
ठीक वैसे ही भंडारे का भी दान गुप्त नहीं होता ओर एक बात ओर भंडारा का फल दूर बैठ कर पैसा दे कर कराने वाले से ज्यादा उन लोगों को लगता है जिन्होंने एक रुपया भी नहीं दिया पर वहां भंडारा बांट थे होते हैं। क्योंकि लेने वाला भूखा होता है और उसे भी पता कि इतने सारे बाटने वाले लोगों मै मालिक कौन है।
ओर सबसे बड़ी बात यह है कि यह सब सत्य भी हैं।
अगली पोस्ट मै जानिए की कैसे ओर किसको दान करना चाहिए।
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॥ जप हेतु स्थान का महत्व ।।
गृहे चैकगुणः प्रोक्तः गोष्ठे शतगुणः स्मृतः । पुण्यारण्ये तथा तीर्थे सहस्र गुण मुच्यते ॥ अयुतः पर्वते पुण्यं नद्यां लक्ष गुणो जपः। कोटि देवालये प्राप्ते अनन्तं शिवसंनिधौ ।।
अर्थात् :--
अपने घर में जप करने से एक गुना, गोशाला में सौ गुना पुण्यमय वन या वाटिका तथा तीर्थ में हजार गुना, पर्वत पर दस हजार गुना, नदी-तट पर लाख गुना, देवालय में करोड़ गुना तथा शिवलिंग के निकट अनन्त गुना पुण्य फल प्राप्त होता है।
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॥ जप हेतु स्थान का महत्व ।।
गृहे चैकगुणः प्रोक्तः गोष्ठे शतगुणः स्मृतः । पुण्यारण्ये तथा तीर्थे सहस्र गुण मुच्यते ॥ अयुतः पर्वते पुण्यं नद्यां लक्ष गुणो जपः। कोटि देवालये प्राप्ते अनन्तं शिवसंनिधौ ।।
अर्थात् :--
अपने घर में जप करने से एक गुना, गोशाला में सौ गुना पुण्यमय वन या वाटिका तथा तीर्थ में हजार गुना, पर्वत पर दस हजार गुना, नदी-तट पर लाख गुना, देवालय में करोड़ गुना तथा शिवलिंग के निकट अनन्त गुना पुण्य फल प्राप्त होता है।
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जय माँ हरसिद्धि माता 🙏🌺
जगत जननी माँ श्री शिवपटरानी सिद्ध शक्तिपीठ माँ हरसिद्धि माता मंगला आरती श्रृंगार दर्शन आज दिनांक 28 जून 2026 दिन रविवार
🌺🌸जय माता की 🌸🌺
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ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे
माँ गढ़कालिका माता जी का आज 28 जून 2026 दिन रविवार प्रातः आरती श्रृंगार दर्शन 🙏🔱🌺
मेरी प्यारी माँ🙏❤️
जय माँ गढ़कालिका 🙏🔱
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जगत जननी राजराजेश्वरी माँ शारदा भवानी जी के आज दिनांक 28 जून 2026 दिन रविवार के आरती श्रृंगार दर्शन
मैहर,मध्यप्रदेश
🌺 जय हो माई की🙏🌺🔱
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🕉जय श्री सोमनाथ महादेव🔱🚩🙏
श्री सोमनाथ महादेव मंदिर
प्रथम ज्योतिर्लिंग - गुजरात (सौराष्ट्र)
28 / 06 / 2026 दिन रविवार प्रातः शृंगार दर्शन
श्री शिवाय नमस्तुभ्यं
जय श्री सोमनाथ महादेव 🙏🔱🚩
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🙏🏻🙏🏻🚩 आज दिनांक - 28 जून 2026 (रविवार) प्रातःकाल भस्म आरती श्रृंगार दर्शन श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग उज्जैन मध्यप्रदेश से 🚩🙏🏻
ॐ जय श्री महाकालेश्वराय नमः🙏
श्री शिवाय नमस्तुभ्यं
जय श्री महाकाल 🙏🔱🚩
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