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Answer writing practice for Auditor/AAO/67th Bpsc mains in paid group.
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67th pre ke liye... Chapter wise sabhi subjects ko tyari krne ke liye ek plan leke aa rha hu ..jo bilkul free hoga..

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बिहार में किसान आंदोलन नोट्स.pdf

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अंतरिक्ष के आर्थिक उपयोग की संभावनाएँ वर्तमान समय में विश्व की कई कंपनियाँ अंतरिक्ष की वाणिज्यक दौड़ में शामिल हुई हैं। इन कंपनियों ने विश्व को अंतरिक्ष के आर्थिक उपयोग के लिये सोचने को प्रोत्साहित किया है। वर्तमान में वैश्विक अंतरिक्ष उद्योग का आकार 350 बिलियन डॉलर है। इसके वर्ष 2025 तक बढ़कर 550 बिलियन डॉलर होने की संभावना है। इस प्रकार अंतरिक्ष एक महत्त्वपूर्ण बाज़ार के रूप में विकसित हो रहा है। इसरो ने अंतरिक्ष के क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण उपलब्धियाँ हासिल की हैं किंतु भारत का अंतरिक्ष उद्योग 8 बिलियन डॉलर के आस-पास है, जो वैश्विक बाजार का केवल 2 प्रतिशत ही है। भारत के अंतरिक्ष उद्योग के इस आकार में ब्रॉडबैंड तथा DTH सेवाओं का हिस्सा करीब दो-तिहाई है। यह भी ध्यान देने योग्य है कि भारत द्वारा उपयोग किये जा रहे एक तिहाई ट्रांसपोंडर विदेशी उपग्रहों से लीज़ पर लिये गए हैं तथा भारत में जैसे-जैसे संचार के क्षेत्र की मांग में वृद्धि होगी, उसी अनुपात में विदेशी ट्रांसपोंडरों की संख्या में वृद्धि होगी। उपर्युक्त परिस्थिति से ऐसा आभास होता है कि भारत अंतरिक्ष के वाणिज्यिक उपयोग में अभी काफी पीछे है तथा इस क्षेत्र में अधिक विकास करने की आवश्यकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार ने NSIL (New Space India Limited) की वाणिज्यिक प्रतिबद्धता को दोहराया है। ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि वर्ष 2030 तक वैश्विक स्तर पर 17 हज़ार छोटे उपग्रहों को प्रक्षेपित किया जाएगा। इसके लिये इसरो SSLV (Small Satellite Launch Vehicle) के निर्माण की योजना पर कार्य कर रहा है।PSLV तथा SSLV मिलकर भविष्य में उपलब्ध होने वाले बाज़ार के लिये कम लागत पर लोजिस्टिक उपलब्ध करा सकते हैं। इसीलिए अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने तमिलनाडु के कुलसेकरपट्टिनम के पास थूथुकुडी (Thoothukudi) में अपने दूसरे अंतरिक्ष केंद्र का निर्माण कर रहा है ताकि PSLV और SSLV के लिए समर्पित स्पेस सेंटर बनाया जा सके और विश्व अंतरिक्ष बाजार में पकड़ बनाई जा सके।

जाने-माने वैज्ञानिक डॉ समीर वेंकटपति कामत को DRDO का नया चेयरमैन बनाया गया हैं। डॉ. कामत ने 1985 में आईआईटी खड़गपुर से मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग में बीटेक ऑनर्स की डिग्री प्राप्त की थी। आईआईटी से बीटेक करने के बाद वे अमेरिका चले गए और फिर 1988 में द ओहियो स्टेट यूनिवर्सिटी से सामाग्री विज्ञान और इंजीनियरिंग में पीएचडी की डिग्री हासिल की। देश की रक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए डॉ.कामत ने कई तरह के बेहतरीन उपकरण और प्रणालियों को तैयार किया। नई नियुक्ति से रक्षा अनुसंधान को अधिक उद्योग-अनुकूल बनाने और छोटे और मध्यम उद्योगों को विनिर्माण क्षेत्र में बढ़ने में मदद करने जैसे नए सुधारों में मदद मिलेगी

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