✨️𝆺𝅥⃝᪵̽𝆺꯭𝅥̽⟬꯭𝄄꯭꯭꯭꯭𝅥𝆬 𝐃𝚲𝐒𝐓𝚲𝐍-𝚵-𝐌𝐎𝐇𝚲𝐁𝐁𝚲𝐓𝆺꯭𝅥🌼𝆺꯭𝅥༊꯭♡︎࿐
Kanalga Telegram’da o‘tish
Mohabbat ke is haseen safar mein aapka dil se swagat hai... ❤️ Yahan har lafz ek ehsaas hai, Har shayari ek kahani hai. Aapke aane se mehfil aur bhi haseen ho gayi, Dastan E Mohabbat mein aapka tah-e-dil se istqbal hai. ✨🌹 𝗢𝘄𝗻𝗲𝗿- @ll_Oye_Mallick_ll
Ko'proq ko'rsatish1 724
Obunachilar
-324 soatlar
-847 kun
-19130 kun
Postlar arxiv
Wo shakhs mujhe mehfil mein baithte hi bhool jata hai kya main uske liye itna bhi khaas nahi main to is duniya ki bheed mein bhi use dhoond loon kya use meri is mohabbat par aitbaar nahi koi tujh se rooth jaaye to tu manane nahi aata ye duniya zaalim hai murshad, ise teri naraazgi se fark nahi padta magar tu ek baar us mehfil mein hamein yaad to kar hum us bhari mehfil mein bhi tujhe sabse khaas bana denge
❤️❤️❤️❤️❤️❤️
हम बताए तो कौन पूछेगा.......😔🤌 अगर छुपाए तो कौन पूछेगा....... 💯💯
हम तो वो हैं...... 👌😊
जिन के बारे मे...!!! 😔
मर भी जाए तो कौन पूछेगा..!!!!!👌🤌🙂
Ye ladkiyan jo yeh Kah rhi h ki 1kachauri 2 samosa in mardo ka kya bharosa 🤌😔
Inhi mardo me unke bhi baap or Bhai aate hai 👍🙁🙁
Kya unpe bhi bharosa nhi h 👍🥺
sayad bhul gyi h jise ye sab bol rhi h 🤌
Vhi mard 12 ghante 24ghante tk kam kr ke or itni mehnat
Krta h 🥺👍
apne pariwar ki jimmedariya uthata hai 👍👍🤌
Unki raksha krta hai 💯💯🥺
Or unhe hi aisa bol rhi hai 👏👏😏🤌..............
@it's me..............🥺
Ye labz the isko proper shayri me dhala hai........ ⬇️⬇️
Ek gunah mere dil se anjaane mein ho gaya
Jo aitbaar na kar saka mujhe usse pyaar ho gaya
Mujhe mera gurur pyara tha use apni azadi
Inhi do lafzon ke chakkar mein do zindagiyan hui barbaad hi
Mene to maafi mang kar apna gurur bhi mita diya
Uske kadmon mein maine apna mazaar bana diya
Magar us shakhs ko meri maafi nahi meri ruksati chahiye thi
Use mere sath kaid nahi bas apni woh aazadi chahiye thi
Sochti hoon agar main chali gayi to is aazadi ka kya karoge
Jab aasmaan soona lagega tab is khaali-pan mein kaise rahoge
Pankh toot jayenge tumhare saare sapne rooth jayenge
Jab hum hi na rahenge to ye azadi ke jashn bhi chhut jayenge
Laut aao , is aazaad aasmaan se behtar ye pyari si kaid hai
Tumhare bina ab is zindagi mein na koi sahara na koi umeed hai...
🩸❣️🩸❣️🩸❣️🩸❣️🩸❣️🩸❣️🩸
किं मैं किस पे चिल्लाऊं 🙁🥺
किसको बताऊं 😐
किं मैं परेशान हुं🥺🥺
और परेशान भी खुद से हूँ💔💔🤌
खामोशी
खामोशी भी इबादत है,
जब लब खामोश, दिल बोलता है।
न तू रहा, न मैं रहा,
बस एक सुकून-सा डोलता है।
वो इसी खामोशी में मिला,
जहाँ शोर भी सजदा करता है।
फना हो गए हम खुद में,
जब वो हममें बसता है।
“Mera bahut dil karta hai ki main tumhare paas rahun.
Tumhari chhoti-chhoti shararatein dekhu.
Tumhe bahot zyada pyaar doon aur itna pyaar doon ki tum har waqt khush raho.
Har waqt tumhare chehre par hasi ho.
Bahut mohabbat hai tumse,
aur itni mohabbat hai tumse ki ek taraf tum ho, aur doosri taraf saari duniya,
to main saari duniya ko thukra kar tumhe apna bana loon.” ❤️
🦋🦋🦋🦋🦋
Ego और attitude जैसा कुछ नहीं है मेरे अंदर ,,
*कोई प्यार से बात करै तो बहुत बोलती हूं ✌️❤️*
माना कि तुम जैसे किस्मत मिलते हैं लेकिन हम जैसे किस्मत वालो को मिलते हैं
मैं तुम्हें पाना नहीं चाहता—
मैं चाहता हूँ,
जब तुम थककर लौटो,
तो तुम्हारी सारी बेचैनी
मुझमें अपना घर पहचान ले।
हाँ…
मुझे तुम्हारा शरीर प्रिय है।
तुम्हारी गर्दन की वह नर्म वक्रता,
कंधों पर ठहरी हुई शाम,
तुम्हारी कमर की धीमी-सी लय,
और तुम्हारे बालों में बसी
वह अपनी-सी ख़ुशबू—
मुझे सब कुछ प्रिय है।
मगर मैं तुम्हारे बदन को
सिर्फ़ देखने की चीज़ नहीं मानता,
मैं उसे उस भूगोल की तरह पढ़ता हूँ
जिसकी हर राह
आख़िरकार तुम्हारे पास आकर रुकती है।
तुम्हारी त्वचा पर
जब मेरी निगाह ठहरती है,
तो इच्छा जन्म लेती है—
मगर मेरी इच्छा की आख़िरी सीमा
तुम्हारा शरीर नहीं…
वह तुम्हारी रूह तक जाती है।
मैं चाहता हूँ—
तुम्हारे माथे की थकान को चूमूँ,
तुम्हारी पलकों पर ठहरी उदासी
अपने होंठों से धीरे से मिटा दूँ,
और तुम्हारी हथेली में
अपनी हथेली रखकर
कुछ देर तुम्हारी धड़कन सुनता रहूँ।
जब रात
तुम्हारे भीतर की स्त्री को
धीरे-धीरे जगाए,
तो मैं तुम्हारी देह की गर्मी से
पीछे न हटूँ—
बल्कि उसे उसी श्रद्धा से महसूस करूँ
जैसे कोई प्यासा मुसाफ़िर
बरसों बाद नदी के किनारे पहुँचा हो।
मुझे तुम्हारी कमर से प्रेम है,
तुम्हारी साँसों की उस उठती-गिरती लय से प्रेम है,
तुम्हारी त्वचा पर दौड़ती
उस महीन-सी सिहरन से प्रेम है
जो मेरे करीब आने पर
तुम्हारे भीतर जन्म लेती है।
लेकिन इन सबसे अधिक
मुझे उस पल से प्रेम है—
जब तुम अपनी सारी झिझक छोड़कर
मेरे सीने पर सिर रख देती हो।
क्योंकि उसी क्षण
तुम्हारा शरीर
सिर्फ़ शरीर नहीं रहता…
वह मेरा भरोसा बन जाता है।
और मैं?
मैं तुम्हारा मालिक नहीं बनना चाहता,
मैं तुम्हारा आश्रय बनना चाहता हूँ।
एक ऐसी जगह,
जहाँ तुम्हारी इच्छाएँ
बिना शर्म साँस ले सकें,
जहाँ तुम्हारी ख़ामोशियाँ
बिना शब्दों के सुनी जा सकें,
जहाँ तुम अपने होने को
किसी सफ़ाई के बिना जी सको।
तुम चाहो
तो मेरे और करीब आओ,
और अगर कभी न चाहो—
तो मेरी बाँहें
तुम्हें रोकने वाली दीवार नहीं,
तुम्हें सुरक्षित रखने वाला आसमान बनें।
मेरी सबसे बड़ी चाहत
तुम्हें भोगना नहीं है…
तुम्हारे लिए वह जगह बनना है
जहाँ तुम्हारा तन भी निश्चिंत हो
और तुम्हारी रूह भी।
मैं चाहता हूँ,
कभी मेरी बाँहों में
तुम्हें ऐसा सुकून मिले
जैसे बारिश के बाद
मिट्टी को अपनी ख़ुशबू मिलती है।
कभी मेरे होंठ
तुम्हारे माथे पर ठहरें
और तुम्हें महसूस हो—
दुनिया चाहे जितनी कठोर हो,
मेरे पास तुम सुरक्षित हो।
कभी हमारी साँसें
एक-दूसरे में घुलती रहें,
रात हमारी नज़दीकियों में
धीरे-धीरे पिघलती रहे,
और उसके बाद
तुम मेरी बाँहों में
आँखें बंद करके
इतनी शांत हो जाओ
जैसे कोई नदी
समुद्र तक पहुँचकर
अपना बहना भूल गई हो।
मुझे तुम्हारा शरीर चाहिए—
हाँ…
मगर उस तरह
जैसे किसी घर की दीवारें प्रिय होती हैं,
क्योंकि उनके भीतर
कोई अपना रहता है।
तुम्हारी देह
मेरे लिए मंज़िल नहीं—
वह वह दरवाज़ा है
जिससे होकर
मैं तुम्हारी रूह तक पहुँचना चाहता हूँ।
और अगर कभी
प्रेम मुझसे पूछे—
“तुम्हें उससे आखिर चाहिए क्या?”
तो मेरा जवाब बस इतना होगा—
“मैं तुम्हें छूकर
तुम्हारी रूह तक पहुँचना चाहता हूँ,
और तुम्हारी रूह तक पहुँचकर
इतना अपना हो जाना चाहता हूँ
कि एक दिन
तुम मुझे सिर्फ़ अपना प्रेमी नहीं…
अपना घर कहो।”
........ ✍️
