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GK, GS और सभी प्रतियोगिता परीक्षाओं से संबंधित जानकारी यहां दिया जाता हैँ! Group Handle SDM ROHIT KUMAR 67TH BPSC RANK 33th
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Obunachilar
Ma'lumot yo'q24 soatlar
-37 kunlar
-1730 kunlar
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इजराइल देश मे काम करने हेतु जिनके पास पासपोर्ट है 18 मई 2026 तक नियोज भवन छपरा मे Cv जमा कर दे 👉 वेतन 2 लाख रुपया
निवेदक 👉 सारण DM
BSSC के BSO परीक्षा में B.E/B.Tech/BCA/BBA/B.SC (Ag) इत्यादि के अभ्यर्थी अयोग्य है 👉 इनकी संख्या 34,263
सभी साथी एक होकर हमें आवाज उठाना होगा या अंतिम रास्ता कोर्ट का शरण है 👉 9728696861
आज बाबासाहेब की जयंती है, आज ही के दिन 14 April, 1891 को उनका जन्म हुआ था.
बाक़ी आप इस बोलती तस्वीर से कुछ देर बातें जरूर कीजिये. Blue Revolution के सार को यह तस्वीर बयां कर रही है. इस तस्वीर में इतिहास भी है, दर्शनशास्त्र भी मार्क्स भी, और हेगेल भी थीसिस भी, एंटी-थीसिस भी धर्म भी है, कर्म भी है और मर्म भी स्वर्ग भी है, नरक भी है.
परंपरा भी, और फैशन भी शायद कहीं, हम भी और आप भी और भारत भी
"Educate, Agitate, Organize"
इंटर नामांकन हेतु बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के ओएफएसएस पोर्टल पर 8 अप्रैल से आवेदन शुरू होगा। 350 रुपये शुल्क, 10–20 कॉलेज चयन व आवश्यक दस्तावेज अनिवार्य होंगे।
2022 मे बहाली 4 साल बाद परीक्षा ली गयी 1673 सीटों पर 8 लाख स्टूडेंट एग्जाम दिए और पेपर आउट के कारण सिविल कोर्ट PT परीक्षा रद्द कर दी गयी है ✍️
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कल सिविल कोर्ट का परीक्षा है
आज से 3 साल पहले का नोट्स है जब मै यूट्यूब पर पढ़ाना शुरू किया था 👉 इस परीक्षा मे 85 नंबर के प्रश्न 👉 हिंदी 35 | गणित 35 और अंग्रेजी 15 अंक के पूछे जायेंगे
आपके करीबी जो होंगे बोलियेगा देखकर जाये 👉 मैंने इंटरव्यू तक सफर तय किया है
यह काम आ सकता है
लिंक 👉 https://youtu.be/piWsps4d0wo?si=3FJBUo6jnj2wjiLS
https://youtu.be/hjEk-G67Xy4?si=2s12fsqS1Xw4CVr6
https://youtu.be/P1MZ6fzuIRY?si=Erk9KGWv1tXYFoLR
https://youtu.be/A_3LsA8dlSA?si=KGOfPuhn2mEa1xCU
https://youtu.be/tkZM8GK4J_k?si=6wK5PTnDRlRLKz37
https://youtu.be/wmQtsxSLjjQ?si=C_utIt1ylH1V_bxu
https://youtu.be/cJXakeUkL14?si=o8Bg26ks8-gHYuVn
बस भारतीय परंपराओं को याद रखते हुए एक छोटी-सी जिज्ञासा भी साथ आती है।
जब तक इंटरव्यू बोर्ड में कहीं न कहीं द्रोणाचार्य शैली की झलक रहेगी, तब तक एकलव्य को अपने अंगूठे का ख़तरा तो बना ही रहेगा।
टॉप 20 रैंक को देखकर तो ऐसा लग रहा है मानो इंटरव्यू बोर्ड में कहीं न कहीं द्रोणाचार्य परंपरा की छाया रही
जब इंटरव्यू मार्क्स सामने आएंगे—तभी समझ आएगा कि किसका तीर निशाने पर लगा और किसका अंगूठा “मेरिट” की वेदी पर चढ़ गया।
कई बार लिखना चाहा…रुक गया 👉 . आज नहीं रुकूंगा...
UPSC का result आया है. हर तरफ बधाइयाँ हैं, toppers के interviews हैं, success stories हैं...
ये सब होना चाहिए…जिन्होंने सालों की मेहनत के बाद ये मुकाम पाया है, उन्हें सच में दिल से मुबारक..
लेकिन आज मुझे कुछ और भी कहना है...!
कुछ जो मैंने कई बार लिखना चाहा,हर बार रुक गया.., सोचा लोग offend हो जाएंगे, लोग कहेंगे ये UPSC के खिलाफ है. इसे खुद निकालना नहीं आया तो आलोचना कर रहा है...!
लेकिन ये post UPSC के खिलाफ नहीं है. ये उस सोच के बारे में है जो हमने UPSC के इर्द-गिर्द बना ली है।
हमने UPSC को हौसला नहीं, हौवा बना दिया है...!
कब हुआ यह? किसने तय किया पता नहीं लेकिन धीरे-धीरे हमारे घरों में, हमारे समाज में, हमारी conversations में ये बात settle हो गई कि
सफलता मतलब UPSC.
पढ़ाई मतलब UPSC.
ज़िंदगी का मतलब UPSC
जिस घर में कोई IAS या IPS निकलता है, उस घर की इज़्ज़त पूरे मोहल्ले में बढ़ जाती है. ये गर्व स्वाभाविक है लेकिन इसी के साथ एक और message जाता है कि जो नहीं निकला, वो कम है...
और यही वो message है जो लाखों बच्चों को तोड़ रहा है..!
आज एक 18-19 साल के बच्चे से पूछो UPSC क्यों करना है? बहुत कम जवाब होंगे जो governance, policy, या public service से जुड़े होंगे।
ज़्यादातर जवाब होंगे
वो uniform देखी थी,वो respect देखा था,. एक video देखा था जिसमें IPS officer कितनी confidently बोल रहे थे..!
IAS, IPS बनने का सपना अब Reels से आता है. एक viral video, एक शानदार uniform, एक "collector sahab" वाला shot और एक 20 साल का बच्चा तय कर लेता है कि बस यही करना है. ये dream नहीं है, ये aesthetic है...
और उस image के पीछे की असली ज़िम्मेदारी रात 2 बजे किसी flood-affected ज़िले में काम करना, system की bureaucracy से लड़ना, political pressure झेलना वो Reels में नहीं आता
UPSC के results में Hindi Medium का representation हर साल गिरता जा रहा है. पर इसपर कोई बात नहीं करेगा.
वो बच्चे जो सबसे ज़्यादा मेहनत करते हैं. जिनके लिए English पहली बाधा है, content दूसरी, और coaching fees तीसरी. जो Patna,Delhi,Allahabad, Rewa के किसी कमरे में बैठकर दिन-रात पढ़ते हैं...
और irony ये है कि IAS, IPS का काम आम जनता से होता है. वो जनता जो Hindi में सोचती है, Bhojpuri में बोलती है, Maithili में रोती है. Public servant की भाषा और public की भाषा के बीच ये खाई system की देन है, मेधा की नहीं.
जिस अधिकारी को उनकी भाषा समझनी है, उनकी ज़िंदगी समझनी है उसे चुनने की process में उसी भाषा को कमज़ोर माना जा रहा है...!
हम में से कितने लोगों ने किसी Software Engineer के बारे में लिखा जो इस वक्त AI पर काम कर रहा है? जो देश का digital infrastructure बना रहा है? जो किसी startup में बैठकर किसानों के लिए, मरीज़ों के लिए, छोटे दुकानदारों के लिए कुछ बना रहा है?
शायद किसी ने नहीं.
क्योंकि उसके पास वो uniform नहीं है। वो "sahab" नहीं कहलाता.
लेकिन देश उससे भी चलता है. उससे भी बनता है. और आने वाले वक्त में शायद उनसे ज़्यादा बनेगा...!
हर काम की अपनी गरिमा है. हर योगदान की अपनी value है. एक exam उस value का एकमात्र पैमाना नहीं हो सकता.
और वो aspirants जो 5, 6, 7 साल दे चुके हैं...!
जिनकी उम्र जा रही है. Savings जा रहे हैं. रिश्ते जा रहे हैं. जो अब depression में हैं सिर्फ इसलिए क्योंकि हमने, इस समाज ने, उन्हें यकीन दिला दिया कि यही एकमात्र रास्ता है। यही एकमात्र पहचान है.
ये हमारी सबसे बड़ी गलती है।
उन सबके लिए जो इस बार नहीं निकले.
तुम्हारी मेहनत झूठी नहीं थी.
वो रातें झूठी नहीं थीं.
वो संघर्ष झूठा नहीं था.
तुम्हारी intelligence किसी merit list से कम नहीं है.
तुम्हारी worth किसी exam के result से तय नहीं होती.
तुम्हारा भविष्य अभी खत्म नहीं हुआ.
जिस देश को तुम serve करना चाहते थे उस देश को तुम्हारी ज़रूरत है.
एक exam का result तुम्हारी पूरी ज़िंदगी की परिभाषा नहीं है.
तुम उससे कहीं बहुत कहीं ज़्यादा हो ❣️
Er Pintu ( Patna Law College Student )
यह मेरा व्यक्तीगत विचार है -
माननीय श्री Nitish Kumar जी का यह पोस्ट केवल एक औपचारिक धन्यवाद संदेश नहीं है, बल्कि यह बिहार की वर्तमान और भविष्य की राजनीति के बारे में एक गहरा संकेत देती हुई दिखाई देती है। राजनीति में अक्सर नेता अपने वक्तव्यों के माध्यम से सीधे निर्णय नहीं बताते, बल्कि संकेतों और प्रतीकों के जरिए अपनी स्थिति स्पष्ट करते हैं।
सबसे पहले, उन्होंने पिछले दो दशकों से जनता के विश्वास और समर्थन का उल्लेख किया है। मेरे अनुसार यह केवल आभार व्यक्त करना नहीं है, बल्कि यह एक प्रकार से अपने राजनीतिक सफर का ऐतिहासिक संदर्भ प्रस्तुत करना है। वर्ष 2005 के बाद बिहार की राजनीति, शासन की प्राथमिकताएँ, विकास की भाषा और प्रशासनिक शैली काफी हद तक उनके नेतृत्व से जुड़ी रही है। इसलिए जब वे दो दशकों के विश्वास की बात करते हैं, तो वे यह भी संकेत देते हैं कि बिहार के राजनीतिक परिवर्तन के दौर में उनकी भूमिका केंद्रीय रही है, जिसे हम और आप जानते भी है।
दूसरा और अधिक महत्वपूर्ण संकेत उनके उस कथन में दिखाई देता है जिसमें उन्होंने यह इच्छा व्यक्त की है कि वे बिहार विधानमंडल के दोनों सदनों के सदस्य रहने के बाद अब Rajya Sabha के सदस्य बनना चाहते हैं। मेरे विचार से यह केवल एक व्यक्तिगत इच्छा का बयान नहीं है, बल्कि यह राजनीतिक संक्रमण का संकेत देता है। भारतीय राजनीति में कई बार वरिष्ठ नेता प्रत्यक्ष सत्ता से हटकर ऐसी भूमिका ग्रहण करते हैं जहाँ वे सक्रिय प्रशासनिक जिम्मेदारी के बजाय राजनीतिक दिशा और मार्गदर्शन प्रदान करते हैं।
इस पोस्ट का सबसे गहरा अर्थ मुझे उस वाक्य में दिखाई देता है जिसमें उन्होंने कहा है कि “जो नई सरकार बनेगी उसका मेरा पूरा सहयोग और मार्गदर्शन रहेगा।” यह कथन अपने भीतर कई राजनीतिक संभावनाएँ समेटे हुए है। इसका एक अर्थ यह हो सकता है कि आने वाले समय में वे प्रत्यक्ष सत्ता के केंद्र में रहने के बजाय राजनीतिक संरक्षक या फिर संतुलनकारी शक्ति की भूमिका निभाना चाहते हैं। बिहार जैसी गठबंधन आधारित राजनीति में ऐसी भूमिका हमेशा अत्यंत प्रभावशाली होती है, क्योंकि यहाँ सत्ता का संतुलन कई दलों और नेतृत्वों के बीच बना रहता है।
मेरे विश्लेषण में यह भी महत्वपूर्ण है कि इस पूरे वक्तव्य में उन्होंने अपने और जनता के बीच संबंध को केवल राजनीतिक समर्थन के रूप में नहीं, बल्कि विश्वास और साझेदारी के रूप में प्रस्तुत किया है। यह उस राजनीतिक शैली को दर्शाता है जिसमें नेता अपने लंबे शासनकाल को एक प्रकार की राजनीतिक विरासत के रूप में स्थापित करने की कोशिश करता है।
यदि व्यापक दृष्टि से देखा जाए तो पिछले लगभग दो दशकों में बिहार की राजनीति के कई निर्णायक मोड़ों—चाहे वह शासन की शैली हो, गठबंधन की संरचना हो या विकास की राजनीति—इन सभी में श्री Nitish Kumar जी की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। इसी कारण कई राजनीतिक विश्लेषक यह मानते हैं कि इस अवधि की बिहार की राजनीति पर उनकी छाप इतनी गहरी रही है कि उस दौर को उनके नाम से पहचाना जाने लगा है।
मेरे अनुसार उनके इस पोस्ट का सार यह है कि वे अपने लंबे राजनीतिक सफर को एक विरासत के रूप में स्थापित करते हुए भविष्य में अपनी भूमिका को एक मार्गदर्शक, संरक्षक और राजनीतिक अनुभव के स्रोत के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं। इसलिए यह वक्तव्य केवल धन्यवाद का संदेश नहीं है, बल्कि यह बिहार की राजनीति में एक संभावित नए चरण की प्रस्तावना भी प्रतीत होता है।
हाँ, थोड़ा दुःख तो है। पिछले लगभग बीस वर्षों का उनका सफर मैंने बहुत करीब से देखा है। मैंने बिहार को बदलते हुए देखा है, एक नए बिहार को बनते हुए देखा है। जिस दौर में राज्य ने प्रशासन, सड़क, शिक्षा और कानून-व्यवस्था के स्तर पर बदलाव महसूस किया, उस पूरे समय के केंद्र में श्री Nitish Kumar जी का नेतृत्व रहा।
मेरी दृष्टि में उनकी सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि इतने लंबे राजनीतिक और प्रशासनिक कार्यकाल के बावजूद उन पर व्यक्तिगत भ्रष्टाचार का कोई दाग नहीं लगा। भारतीय राजनीति में यह बात बहुत कम नेताओं के बारे में कही जा सकती है।
इसी कारण आज जब उनके सक्रिय नेतृत्व के एक चरण के बदलने की चर्चा होती है, तो स्वाभाविक रूप से मन में एक भावुकता भी आती है। एक युग जैसे धीरे-धीरे समाप्त होता प्रतीत होता है। आगे बिहार की बागडोर जिसके भी हाथ में जाएगी, उसके सामने चुनौतियाँ भी बड़ी होंगी और अपेक्षाएँ भी।
अब आने वाले समय के लिए बस यही कहा जा सकता है — अगले मुख्यमंत्री के लिए “राम ही रखवार”।
जय बिहार जय जय बिहार
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Endi mavjud! Telegram Tadqiqoti 2025 — yilning asosiy insaytlari 
