Devendra Choudhary IAS
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Welcome, For you guy's here uploading soon all videos Audio or class regarding UPSC examination. Make your own strategy and be succeed. जूनून है तो सब है -🚨 devendrakumarind1@gmail.com
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Postlar arxiv
Dear Students,
UPSC has extended the Application date till 21st February. Apply well in time, so that there will not be any server issues.
Remainder:
UPSC CSE Pre application 2025
Last date: Today ( 6 PM , I think )
https://youtube.com/shorts/zF5rYoJ8OYE?si=p5dLe1pHLx58nzU2
mention your idea about periods like cycle in MAN? its from OSHO thoughts.
Repost from Prashant Tiwari
A society runs on self-discipline, not on force. Force is meant for the 2-4% of unruly individuals who do not follow rules and laws.
No amount of force can fix a society where 90-95% of people are undisciplined.
Where would you get so many sticks from?
क्या मैं अंदर आ सकता हूँ ? "
प्रेम ने ,
कितनी विनम्रता से ,
पूछा था मेरे जीवन से...
मैं मना नहीं कर पाया...
" अच्छा , तो अब चलता हूँ मैं । "
प्रेम ने ,
और भी अधिक विनम्रता से ,
जीवन से कहा था...
मैं ,
रोक नहीं पाया...
एक दिन शिकायत हमें "समय" और "संसार" से नहीं ,
"स्वयं" से होगी!
कि , "जिंदगी" सामने थी और हम "संसार" में उलझे रहे!!
@Devendra4india
चावल अगर कुमकुम के साथ मिल जाऐं तो किसी के मस्तक तक पहुंच जाते हैं
और दाल के साथ मिल जाऐं
तो खिचड़ी बन जाते है
अर्थात .....
हम कौन हैं उसके महत्व से ज्यादा..... किनकी संगत में हैं , यह बहुत महत्वपूर्ण है।
आज कुछ विशेष हैं और कल भी!
#EconomicSurvey
#EconomicSurvey202425
@devendra4india
#Budget202526
विहाय कामान्यः सर्वान्पुमांश्चरति निःस्पृहः।
निर्ममो निरहंकारः स शान्तिमधिगच्छति॥ (अध्याय 2, श्लोक 71)
Vihāya kāmān yaḥ sarvān pumāṁścarati niḥspṛhaḥ,
Nirmamo nirahaṅkāraḥ sa śāntim adhigacchati. (Chapter 2, Verse 71)
अर्थ: जो सभी इच्छाओं को त्यागकर, अहंकार और ममता से मुक्त होकर कार्य करता है, वही सच्ची शांति प्राप्त करता है।
One who renounces all desires and lives without attachment, ego, or a sense of ownership, attains true peace.
Repost from UPPCS ONE संकल्प से सिद्धि™
UPPSC ऑफिसियल कैलेंडर जारी 💐💐
PCS 2024 Mains- 29th June 2025
PCS 2025 Prelims - 12th October 2025
"संकल्प से सिद्धि" JOIN- @uppcs1
Disclaimer: Regarding this message , I've no confirmation and verified source. It's my request and your duty to verify.
Repost from Denik Jagran
कोटा में आत्महत्या करने वाली छात्रा कृति ने अपने सुसाइड नोट में लिखा था कि :- "मैं भारत सरकार और मानव संसाधन मंत्रालय से कहना चाहती हूं कि अगर वो चाहते हैं कि कोई बच्चा न मरे तो जितनी जल्दी हो सके इन कोचिंग संस्थानों को बंद करवा दें" ,
ये कोचिंग छात्रों को खोखला कर देते हैं।
पढ़ने का इतना दबाव होता है कि बच्चे बोझ तले दब जाते हैं।
कृति ने लिखा है कि वो कोटा में कई छात्रों को डिप्रेशन और स्ट्रेस से बाहर निकालकर सुसाईड करने से रोकने में सफल हुई लेकिन खुद को नहीं रोक सकी।
बहुत लोगों को विश्वास नहीं होगा कि मेरे जैसी लड़की जिसके 90+ मार्क्स हो वो सुसाइड भी कर सकती है,
लेकिन मैं आप लोगों को समझा नहीं सकती कि मेरे दिमाग और दिल में कितनी नफरत भरी है।
अपनी मां के लिए उसने लिखा- "आपने मेरे बचपन और बच्चा होने का फायदा उठाया और मुझे विज्ञान पसंद करने के लिए मजबूर करती रहीं।
मैं भी विज्ञान पढ़ती रहीं ताकि आपको खुश रख सकूं।
मैं क्वांटम फिजिक्स और एस्ट्रोफिजिक्स जैसे विषयों को पसंद करने लगी और उसमें ही बीएससी करना चाहती थी लेकिन मैं आपको बता दूं कि मुझे आज भी अंग्रेजी साहित्य और इतिहास बहुत अच्छा लगता है क्योंकि ये मुझे मेरे अंधकार के वक्त में मुझे बाहर निकालते हैं।"
कृति अपनी मां को चेतावनी देती है कि- ‘इस तरह की चालाकी और मजबूर करनेवाली हरकत 11 वीं क्लास में पढ़ने वाली छोटी बहन से मत करना,
वो जो बनना चाहती है और जो पढ़ना चाहती है उसे वो करने देना क्योंकि वो उस काम में सबसे अच्छा कर सकती है जिससे वो प्यार करती है।
इसको पढ़कर मन विचलित हो जाता है कि इस होड़ में हम अपने बच्चों के सपनो को छीन रहे है। आज हम लोग अपने परिवारों से प्रतिस्पर्धा करने लगे है कि फलां का बेटा-बेटी डॉक्टर बन गया,हमें भी डॉक्टर बनाना है।
फलां की बेटी-बेटा सीकर/कोटा हॉस्टल में है तो हम भी वही पढ़ाएंगे,चाहे उस बच्चे के सपने कुछ भी हो...हम उन्हें अपने सपने थोंप रहे है।
आज हमारे स्कूल(कोचिंग संस्थान) बच्चों को परिवारिक रिश्तों का महत्व नही सीखा पा रहे,उन्हें असफलताओं या समस्याओं से लड़ना नही सीखा पा रहे।
उनके जहन में सिर्फ एक-दूसरे से प्रतिस्पर्धा के भाव भरे जा रहे है जो जहर बनकर उनकी जिंदगियां छीन रहा है।
जो कमजोर है वो आत्महत्या कर रहा है व थोड़ा मजबूत है वो नशे की ओर बढ़ रहा है।
जब हमारे बच्चे असफलताओ से टूट जाते है तो उन्हें ये पता ही नही है कि इससे कैसे निपटा जाएं।
उनका कोमल हदय इस नाकामी से टूट जाता है इसी वजह से आत्महत्या बढ़ रही है। 🩶💔
I advise the students not to take such steps in your life.... But contact someone who can guide you properly in such conditions
Endi mavjud! Telegram Tadqiqoti 2025 — yilning asosiy insaytlari 
