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कोई भी बुक अभी नहीं खरीदे।।।।क्योंकि आंकड़े अभी भी पूरी तरीके से अपडेट नही है।
हरिमोहन सक्सेना ,हिंदी ग्रंथ अकादमी की बुक्स आने में समय लगेगा।।।तब तक पुराना मैटर ही पढ़े व उसी में जहां जहां लगे की यहां करेक्शन होना चाहिए...वहां हाईलाइट करके रखे...
क्योंकि बुक्स एक बिजनेस है,जब वेकैंसी आती है तो दूसरे दिन से ही बुक्स भी मार्केट में आने लगती है क्योंकि इनसे वो करोड़ों रुपए कमाते है, उनके लिए वो मैटर नही करता की बुक्स के अंदर कितनी गुणवत्ता देनी है। बस उसने हिसाब से बुक्स का कवर अच्छा और अपडेट होना चाहिए। इसलिए हर कदम जल्दबाजी में नही लेना है। जिस तरह 1 रुपया भी हम सोच समझ कर खर्च करते है वैसे ही बुक्स भी सोच समझ कर 10 जगह डिस्कस करके ही लेनी है ।
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थोड़ी देर में 2nd ग्रेड प्रथम पेपर मनोविज्ञान के सिलेबस पर सार्थक चर्चा करेंगे..👍
तैयार हो सारे...
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बीते 9 जनवरी को हमने यूट्यूब पर पूरे 7 साल पूरे किए.....
मैं आपके बीच बहुत कम active रहता हूं फिर भी आपने हमारे बीच एक प्यार का रिश्ता बनाया है ,विश्वाश का रिश्ता बनाया है .... मैं चाहूंगा जब भी आपको कभी बड़े प्लेटफार्म पर मौका मिले...खूब प्यार बांटना और दूसरे को भी अपनापन लगे ऐसा विश्वाश बांटना ....
आप हमेशा जुड़े रहे...बहुत कुछ सीखेंगे,सिखाएंगे,पर कभी भी निराश होकर हारेंगे नही...चाहे वो जिंदगी हो या एग्जाम....
#Nk
#Alwaysmotivation
❤️❤️❤️❤️
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यह कैसी मानसिकता है आपकी , जिस इंसान ने आपको जीना सिखाया , जिस इंसान ने आपको चलना सिखाया ,आज आप ईतने बड़े हो गए हो की मौका मिलने पर आप उसे ही नीचा दिखाने पर तुले हो । जिंदगी में हमेशा आगे बढ़ना पर उतना आगे नहीं बढ़ना की अपनों का हाथ और साथ दोनों छूट जाए।
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एक बार स्वामी विवेकानंद जी के पास एक व्यक्ति आया और बोला महाराज मैं अपने जीवन में खूब मेहनत करता हूँ फिर भी आज तक मैं कभी सफल व्यक्ति नहीं बन पाया। स्वामी विवेकानंद जी ने कहा ठीक है आप मेरे इस पालतू कुत्ते को थोड़ी देर तक घुमाकर लाये तब तक आपके समस्या का समाधान ढूँढ़ता हूँ। इतना कहने के बाद वह व्यक्ति कुत्ते को घुमाने के लिए चला गया। कुछ समय बीतने के बाद वह व्यक्ति वापस आया तो स्वामी जी ने उस व्यक्ति से पूछा की यह कुत्ता इतना हाँफ क्यों रहा है जबकि तुम थोड़े से भी थके हुए नहीं लग रहे हो आखिर ऐसा क्या हुआ ?
इस पर उस व्यक्ति ने कहा कि मैं तो सीधा अपने रास्ते पर चल रहा था जबकि यह कुत्ता इधर उधर रास्ते भर भागता रहा और कुछ भी देखता तो उधर ही दौड़ जाता था. जिसके कारण यह इतना थक गया है । इसपर स्वामी विवेकानन्द ने मुस्कुराते हुए कहा बस यही तुम्हारे प्रश्नों का जवाब है. तुम्हारी सफलता की मंजिल तो तुम्हारे सामने ही होती है. लेकिन तुम अपने मंजिल के बजाय इधर उधर भागते हो जिससे तुम अपने जीवन में कभी सफल नही हो पाए. यह बात सुनकर उस व्यक्ति को समझ में आ गया था। की यदि सफल होना है तो हमे अपने मंजिल पर ध्यान देना चाहिए।
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Like kr dena video ko...mene bola nhi h iska mlb ye nhi ki kre nhi .....aapki moral duty bnti h
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नई reet को लेकर काफी कॉमेंट्स आ रहे है
मिलते है थोड़ी देर में सार्थक चर्चा पर
तैयार हो सारे
New स्टूडेंट्स जरूर देखे व पुराने साथी सभी सहयोग करे ताकि विधार्थी किसी भी तरह से भटके नही
Endi mavjud! Telegram Tadqiqoti 2025 — yilning asosiy insaytlari 
