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काम संहिता🙏
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सेक्स से जुड़ी हुई प्रेम से जुड़ी हुई सभी जानकारी के लिए सन्देश भेजे जय कामदेव कामसूत्र यौन स्थानों का सच्चा गुरु ग्रंथ है। अपने यौन जीवन में विविधता लाने के तरीके खोज रहे हैं? तब आप सही जगह पर आए हैं .. !!
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*प्रेम से ज़्यादा शुद्ध और कुछ नहीं हैं जब प्रेम होता हैं तो परवाह होता हैं कभी भी उसको अनजाने में भी चोट ना पहुँचाने का प्रयत्न होता हैं प्रेम निस्वार्थ हैं वो प्रेम के बदले प्रेम भी नहीं माँगता ऐसा प्रेम ही सत्य हैं🌹🍹🎸💃😘💋
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#संभोग प्रेम की उच्चतम अवस्था है।
संभोग शब्द से सार्वजनिक रूप से नाक मुँह सिकोड़ने वाले लोग हद दर्जे के पाखंडी हैं।
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स्त्रीत्व का स्पर्श.........
जब भी देखो मनुष्य के मन में एक ही चीज घर करके बैठी रहती है । ऐसा कोई भी पल या समय नही होता जब पुरुषों के ख्यालो में स्त्री नही आती हो । उसके मन के आवरणों से कभी भी स्त्री मिट ही नही सकती । यह अहम सत्यता है । क्यों की एक पुर्ण शरीर में आधा पुरुष का होता है और आधा स्त्रीका शरीर होता है । दोनों अंतर मिलने से ही एक पुर्ण शरीर का निर्माण संभव होता है । इस लिये तुम जीतना भी करलो पुरुष के मन से स्त्रीको कभी भी नही हटा पाओगे ।
प्राय पुरुष स्त्री का भोग करता है । रोज उस से बिस्तर पर एक होने की कोसिस करते हो । सालों साल उससे संबंध रखते हो । पर कभी भी मनुष्य ने स्त्रीको समझने की, जानने की चाह नही करी । उसको पहचान ने की कोसिस नही करी । कभी भी इस तरफ ध्यान ही नही दिया । वह कभी भी स्त्रीत्व तक पहुँचने की सोच बनाई हि नही । स्त्री को समझने की, उसके तन को जानने का साहस पुरुषों में होना चाहिए । उसके लिये गहराईत्व में डुबने की कला चाहिये । उस गहराईत्व में उतरने का मार्ग का रहस्य का पता होना चाहिये । प्रेम की अनुभूति होनी चाहिए । परम सत्यता जानने की आकांक्षा होनी चाहिए ।
जबकि आज के मनुष्य केवल शरिर के तल पर ही मिट जाते है । वह नारीत्व के गहराईत्व में डुबने से, उतरने से डरते है । मनुष्य उसके उभारो की ऊँचाई देखकर ही गिर जाते हैं । स्त्रीको जानना है, उसको गहनता से देखना है तो उसकी गहराइयो में ऐसे डूबकी मारों जैसे समुन्द्र में हिरा खोजते समय मारते हो । तब तक गहराई के अंतिम तल तक नही पहुच जाते, तब तक तुम स्त्रीको पहचान ही नही पाओगे । उसके उपरी तल अर्थात शारिरीक तल से तुम उसे कभी भी जान ना पाओगे । उस के गहराई में उतरने पर ही उस का रहस्य का गुढता पता चलेगा ।
इसलिए जब भी स्त्री के नजदीक जाने का अवसर मिले तो उसके गहराई में जाने से मत चूक करना । यह जरूरी नहीं होता कि तुम उससे संभोग ही करो । उस स्त्री के संग कुछ समय ऐसा गुजारना, जहाँ तुम उसके शीर तल पर केन्द्रित ना होकर उसके शरीर के पार देखने का प्रयास करना । गहनता से उसका अध्ययन करना । उसके दिल की धडकन को तुम महसुस कर सको, सुन सको । उस स्त्रीके शारिरीक तल से जव तुम्हारी दृष्टि पार देखने में सक्षम हो जायेगी, तब तुम उस स्त्री के स्त्रीत्व को छू सकोगे । और जिस पल तुमने उसके स्त्रीत्व को छू लिया, उस दिन तुम उसे पुर्णतया जान जाओगे । उसके गहराईत्व में डुबने से तुमे भय नही आनंद आयेगा । स्त्री को यदि जानने में तुम सफल हो गये तो फीर तुम ने दुनिया पर फतेह हासिल कर ली ।
जिस दिन स्त्री के गहराई में डुबकर तुमने उस के स्त्रीत्व को स्पर्श या छू लिया । उस दिन से अचानक से वासना तिरोहित होने लगेगी । और जीवन प्रेम से भर उठेगा । जीवन बसन्त बन कर खिल उठेगा । उस स्त्रीत्वको पाते ही तुम एक परमसुख की अनुभूति करने करोगे । एक ऐसा आनंद मिलेगा जो तुम्हे जन्मों जन्मों तक आनंदित करता रहेगा । तुम मुस्कुराने लग जाओगे, खिल खिलाने लग जाओगे । और यही आनंद और मुस्कुराहट तुम्हे जीवन के परम सत्ता की अनुभूति देगी । जीवन के परमआनंद से तुम्हारा मिलन करवायेगा ।
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सेक्स का दमन ना करें:
हमने सेक्स को सिवाय गाली के आज तक दूसरा कोई सम्मान नहीं दिया। हम तो बात करने में भयभीत होते हैं। हमने तो सेक्स को इस भांति छिपा कर रख दिया है जैसे वह है ही नहीं, जैसे उसका जीवन में कोई स्थान नहीं है। जब कि सच्चाई यह है कि उससे ज्यादा महत्वपूर्ण मनुष्य के जीवन में और कुछ भी नहीं है। लेकिन उसको छिपाया है, उसको दबाया है। दबाने और छिपाने से मनुष्य सेक्स से मुक्त नहीं हो गया, बल्कि मनुष्य और भी बुरी तरह से सेक्स से ग्रसित हो गया। दमन उलटे परिणाम लाया है...।'
सेक्स को समझों : युवकों से मैं कहना चाहता हूँ कि तुम्हारे माँ-बाप तुम्हारे पुरखे, तुम्हारी हजारों साल की पीढ़ियाँ सेक्स से भयभीत रही हैं। तुम भयभीत मत रहना। तुम समझने की कोशिश करना उसे। तुम पहचानने की कोशिश करना। तुम बात करना। तुम सेक्स के संबंध में आधुनिक जो नई खोजें हुई हैं उसको पढ़ना, चर्चा करना और समझने की कोशिश करना कि क्या है सेक्स?
सेक्स का विरोध ना करें : सेक्स थकान लाता है। इसीलिए मैं तुमसे कहता हूँ कि इसकी अवहेलना मत करो, जब तक तुम इसके पागलपन को नहीं जान लेते, तुम इससे छुटकारा नहीं पा सकते। जब तक तुम इसकी व्यर्थता को नहीं पहचान लेते तब तक बदलाव असंभव है।
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जिस दिन दुनिया में सेक्स स्वीकृत होगा,
जैसा कि भोजन, स्नान स्वीकृत है.
उस दिन दुनिया में अश्लील पोस्टर नहीं लगेंगे.
अश्लील किताबें नहीं छपेंगी.
क्योंकि जैसे-जैसे वह स्वीकृति होता जाएगा.
अश्लील पोस्टरों को बनाने की कोई जरूरत नहीं रहेगी.🙏🙏
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होते हैं ...
कुछ पुरुष भी ऐसे जो अपना सर्वस्व वार देते हैं
स्त्री के प्रेम में
अपना पौरुष भी हार देते हैं
ना देह का लोभ होता है ना होता है कपट मन में
चरणों में भेंट चढ़ाने को
अपना अहम भी मार देते हैं
आलिंगन का लोभ नहीं, ना दर्शन की ही दरकार कोई
ख्यालों में रह कर भी
नजदीकियों सा प्यार देते हैं
जुस्तजू नही कुछ पाने की, उम्मीद भी ना हो निभाने की
बस रह कर मौन, हो कर गौण
अंतर्मन का करार देते हैं .... 🥀🖤 होते हैं ...
۪۪۪۪۪ٜ݊𖤌__________𖤌⃟۪۪۪۪۪ٜ݊𖤌__________🖤
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तुम एक इंतज़ार ही तो हो
वो जो दो धड़कनों के बीच में वक़्त होता है न
खाली सा, शांत सा, जिसमें शून्य रहता है
मगर जिसमें अगली धड़कन की उम्मीद होती है
तुम वो हो....
पलकें जब झपक कर खुलतीं हैं, तो किसी को ढूंढती हैं
किसी को पाती नहीं तो फिर बंद हो कर फिर खुलतीं हैं
ये जो बंद हो कर खुलने का सिलसिला है न, इसे तलाश कहते हैं
तुम वो हो...
बारिश को ही देख लो, जहाँ गिरती है भिगा देती हैं
मगर पता है, बारिश कम हो तो उमस भड़क जाती है
उस उमस से जो प्यास जगती है न एक सूखे गले मे
तुम वो हो...
सड़क को देखा है कभी, हमेशा चलती रहती है
लोग रुकते हैं, कहीं मुड़ने के लिए, किसी और सड़क से जुड़ने के लिए
वो इंतज़ार जो वो सड़क करती है किसी के लौटने का
तुम वो हो...
हाँ, तुम एक इंतज़ार ही तो हो...
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प्रेमिका खुली जुल्फ़ों में बेफ़िक्री से घूमती है,,,
वो पत्नी है ..
जिम्मेदारियों को समेट अक्सर जूडा बांध लिया करती है...
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स्त्री प्रेम नहीं करती वो पूजा करती है उस पुरूष की जो उसे सम्मान देता है स्त्री सौंप देती है अपना सब कुछ उस पुरूष को जिसके स्पर्श और भाव से वो संतुष्ट होती है स्त्री छूना चाहती है प्रेम में उस पुरूष को जिसके कांधे पर सिर रख ख़ुद को सुरक्षित महसूस करती है स्त्री होकर भी नहीं हो पाती उस पुरूष की जो ख़ुद के पौरुष की ताकत हर वक्त दिखाते रहते है कभी उसके तन पर तो कभी उसके कोमल मन पर
स्त्री नफरत करती है उस पुरूष से जो उसके अस्तित्व को पहुंचाते है ठेस स्त्री लड़ना नहीं चाहती पर लड़ जाती है उस पुरूष से जिस पर अपना अधिकार समझती है बड़बोली होती है स्त्रियां पर खामोश हो जाती है तब जब प्रेम में किसी वस्तु की तरह ठुकरा दी जाती है उस पुरूष द्वारा जिससे वो प्रेम करती हैं और कभी पलटकर नहीं देखती उस पुरूष को जो प्रेम के नाम पर या तो उसके शरीर से प्रेम करते हैं या उसके यौवन से।
क्योंकि स्त्रियाँ प्रेम नहीं करती पूजा करती है प्रेम में उस पुरूष की जो उनका सम्मान करते हैं जो उन्हें तब तक नहीं करते स्पर्श जब तक वो छू नहीं लेते उसका मन वो करने नहीं लगती उनसे प्रेम क्योंकि स्त्रियाँ पुरूष के पौरुष से नहीं उस व्यक्ति से करती है प्रेम जो परमेश्वर नहीं होता बल्कि होता है प्रेमी बस एक प्रेमी जो पढ़ना जानता हो उसका मौन जिसकी दृष्टि में हर वक्त वो देखे,ढलती आयु में भी अपना सौंदर्य और यौवन।
🙏🙏🙏🙏
किरण वर्मा जी की कलम से 😊
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अगर आप सही तरह की ब्रा नहीं पहनती हैं तो इससे कितनी समस्याएं हो सकती हैं?
- सही ब्रा साइज न होने के कारण आपके कंधों में तकलीफ हो सकती है।
- ये ब्रा फैट बढ़ने का कारण बन सकता है।
- इसके कारण आपके ब्रेस्ट्स में तकलीफ हो सकती है।
- भागते-दौड़ते या फिजिकल एक्टिविटी करते समय आपको परेशानी हो सकती है।
- आपके पॉश्चर में समस्या हो सकती है।
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एक शादी_शुदा स्त्री, जब किसी पुरूष से मिलती है...
उसे जाने अनजाने मे अपना दोस्त बनाती है....
तो वो जानती है की
न तो वो उसकी हो सकती है....
और न ही वो उसका हो सकता है....
वो उसे पा भी नही सकती और खोना भी नही चाहती..
फिर भी वह इस रिश्ते को वो अपने मन की चुनी डोर से बांध लेती है....
तो क्या वो इस समाज के नियमो को नही मानती?
क्या वो अपने सीमा की दहलीज को नही जानती?
जी नहीं....!!
वो समाज के नियमो को भी मानती है....
और अपने सीमा की दहलीज को भी जानती है...
मगर कुछ पल के लिए वो अपनी जिम्मेदारी भूल जाना चाहती है...!!
कुछ खट्टा... कुछ मीठा....
आपस मे बांटना चाहती है ..
जो शायद कही और किसी के पास नही बांटा जा सकता है...
वो उस शख्स से कुछ एहसास बांटना चाहती है...
जो उसके मन के भीतर ही रह गए है कई सालों से...
थोडा हँसना चाहती है...
खिलखिलाना चाहती हैं...
वो चाहती है की कोई उसे भी समझे बिन कहे...
सारा दिन सबकी फिक्र करने वाली स्त्री चाहती है की कोई उसकी भी फिक्र करे...
वो बस अपने मन की बात कहना चाहती है...
जो रिश्तो और जिम्मेदारी की डोर से आजाद हो...
कुछ पल बिताना चाहती है...
जिसमे न दूध उबलने की फिक्र हो,न राशन का जिक्र हो....न EMI की कोई तारीख हो....
आज क्या बनाना है,
ना इसकी कोई तैयारी हो....
बस कुछ ऐसे ही मन की दो बातें करना चाहती है....
कभी उल्टी_सीधी ,बिना सर_पैर की बाते...
तो कभी छोटी सी हंसी और कुछ पल की खुशी...
बस इतना ही तो चाहती है....
आज शायद हर कोई इस रिश्ते से मुक्त एक दोस्त ढूंढता है....
जो जिम्मेदारी से मुक्त हो...,
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तुम्हारा स्पर्श
मेरे जिस्म की नहीं
मेरी आत्मा की ज़रूरत है
तुम्हारा अहसास..
मेरा मेरे होने का अहसास है
तुम्हारी हंसी .
मेरे होंठो कि मुस्कान है
तुम्हारी आवाज़..
मेरी आत्मा का सकून है
तुम्हारे शब्द
मेरे अर्थ की पहचान है
तुम्हारी खामोशी..
मेरी धड़कन की चुप है
तुम्हारा प्रेम..
मेरी आत्मा का लिबास है
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पुरुषों की रुचि स्त्री शरीर के प्रति रहस्यवाद की तरह रही है वह सब जानना चाहता है जो गुप्त है जो छुपा है
।वह चाहता है धीरे धीरे सब कुछ उसके समक्ष हो
जितना होता है उससे आगे वह कल्पना में देख लेता है।
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संभोग होली
अपने प्रियतमा को जीभ से पूरे जिस्म को चाटिए ,लिंग और योनि को चूसिए और चाटिए जो सफेद रंग निकलेगा उससे पवित्र रंग और आनंद किसी और में कहां ।
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जीवन में सभी रंग से रंग कर देखना,
मगर मन को
रंग ने के
लिए
समर्पण
जैसा
कोई रंग
नही।
🌹🙏🌹
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क्रोध की ऊर्जा को प्रेम से बदल दें!
आप गुस्से में हैं! अचानक क्रोध हावी हो गया हो! किसी को नुकसान पहुँचाना चाहते हों, कष्ट देना चाहते हों, मारना चाहते हों, कोई चीज नष्ट करना चाहते हो या कोई हिंसा ही करना चाहते हों!
ऐसे में बस एक क्षण के लिए खुद को रोक लीजिए। एक छोटा सा प्रयोग कीजिए। तत्काल, किसी प्यारी घटना को, मित्र को, अपनी पत्नी को, प्रेमी या पति को या अपने बच्चे को, या कोई जानवर ही क्यों न हो जिसे आपने प्रेम किया है उसे बस एक क्षण के लिए याद कीजिए।
अब उस क्षण में उसी प्रेम के साथ बह जाइए। शुरू में आपको लग सकता है। यह तो अभिनय जैसा कुछ है। लेकिन, आपका मन यह नहीं समझता है। वह रियलिटी और कल्पनाओं में अंतर नहीं कर सकता। यही वजह है आप उसी क्षण गहरे प्रेम में उतर सकते हैं।
आपके ऐसा करते ही आपके एक अंदर ऊर्जा जाग गई है, वह इस बिंदु पर पहुँच गई है जहाँ उसे अभिव्यक्ति चाहिए, बाहर निकलने का मार्ग चाहिए।
आप जैसे ही प्रेम के क्षणों को याद करेंगे। उसी क्षण वह प्रेम ऊर्जा आपमें प्रविष्ट हो जाएगी। फिर चाहकर भी क्रोध न कर सकेंगे।
जैसे ही विनाश को आप सृजन में बदल देंगे। वैसे ही आपमें बहुत कुछ बदल जाएगा।
Kontent 18 yoshdan oshgan foydalanuvchilar uchun mavjud
Xizmatga kirish orqali siz 18 yoshdan oshganingizni tasdiqlaysiz.
