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काम संहिता🙏
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सेक्स से जुड़ी हुई प्रेम से जुड़ी हुई सभी जानकारी के लिए सन्देश भेजे जय कामदेव कामसूत्र यौन स्थानों का सच्चा गुरु ग्रंथ है। अपने यौन जीवन में विविधता लाने के तरीके खोज रहे हैं? तब आप सही जगह पर आए हैं .. !!
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समय हो रहा है विस्तर पर कुश्ती लड़ने का ।
दूध सही से पीना नही तो हार जाओगे ।
दूध सही से पीने से प्रियत्मा में उत्तेजना बढ़ेगी
जिससे गीली होगी अखाड़ा
फिर तुम उसे सन्तुष्ट कर पाओगे।
अगर अखाड़ा गिला नही कर पाए तो
तुम उसे सन्तुष्ट नही कर पाओगे
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उपनिषद के ऋषियों ने आशीर्वाद दिया है नवविवाहित वधुओं को और कहा है कि तुम अपने पति को इतना प्रेम करना, इतना प्रेम करना, कि अंत में दस तुम्हारे पुत्र हों और ग्यारहवां पुत्र तुम्हारा पति हो जाए। उपनिषद के ऋषि यह कहते हैं कि स्त्री का पूरा प्रेम उसी दिन होता है, जब वह अपने पति को भी अपने पुत्र की तरह अनुभव करने लगती है। असल में, स्त्री अपने पुत्र को पूरा प्रेम कर पाती है; उसमें कोई फिर बौद्धिकता नहीं होती। और अपने बेटे के पूरे शरीर को प्रेम कर पाती है; उसमें कोई चुनाव नहीं होता। और अपने बेटे से उसे
कामवासना का कोई रूप नहीं दिखाई पड़ता, इसलिए प्रेम उसका परम शुद्ध हो पाता है। जब तक पति भी बेटे की तरह न दिखाई पड़ने लगे, तब तक स्त्री पूर्ण तृप्त नहीं हो पाती है।
लेकिन पुरुष की स्थिति उलटी है। अगर पत्नी उसे मां की तरह दिखाई पड़ने लगे, तो वह दूसरी पत्नी की तलाश पर निकल जाएगा। पुरुष मां नहीं चाहता, पत्नी चाहता है। और भी ठीक से समझें, तो पत्नी भी नहीं चाहता, प्रेयसी चाहता है। क्योंकि पत्नी भी स्थायी हो जाती है। प्रेयसी में एक अस्थायित्व है और बदलने की सुविधा है। पत्नी में वह सुविधा भी खो जाती है।
स्त्री का चित्त समग्र है, इंटिग्रेटेड है। स्त्रियों का नहीं कह रहा हूं। जब भी मैं स्त्री शब्द का उपयोग कर रहा हूं, तो स्त्रैण अस्तित्व की बात कर रहा हूं..!
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» स्त्री और पुरुष के प्रेम में फर्क है।
अपरिचित में एक आकर्षण है, क्योंकि उसके प्रेम में कोई कारण नहीं होता..!!
जब पुरुष किसी स्त्री को प्रेम करता है, तो उसका प्रेम भी बौद्धिक होता है। वह उसे भी सोचता-विचारता है। उसके प्रेम में भी गणित होता है। स्त्री जब किसी को प्रेम करती है, तो वह प्रेम बिलकुल अंधा होता है। उसमें गणित बिलकुल नहीं होता।
इसलिए स्त्री और पुरुष के प्रेम में फर्क पाया जाता है। पुरुष का प्रेम आज होगा, कल खो सकता है।
स्त्री का प्रेम खोना बहुत मुश्किल है। और इसलिए स्त्री-पुरुष के बीच कभी तालमेल नहीं बैठ पाता। क्योंकि आज लगता है प्रेम करने जैसा, कल बुद्धि को लग सकता है न करने जैसा। और आज जो कारण थे, कल नहीं रह जाएंगे। कारण रोज बदल जाएंगे। आज जो स्त्री सुंदर मालूम पड़ती थी, इसलिए प्रेम मालूम पड़ता था; कल निरंतर परिचय के बाद वह सुंदर नहीं मालूम पड़ेगी। क्योंकि सभी तरह का परिचय सौंदर्य को कम कर देता है। अपरिचित में एक आकर्षण है। लेकिन स्त्री कल भी इतना ही प्रेम करेगी, क्योंकि उसके प्रेम में कोई कारण न था। वह उसके पूरे अस्तित्व की पुकार थी। इसलिए स्त्री बहुत फिक्र नहीं करती कि पुरुष सुंदर है या नहीं। इसलिए पुरुष सौंदर्य की चिंता नहीं करता।
यह जान कर आप हैरान होंगे। हम सबको खयाल में आता है कि स्त्रियां इतना सौंदर्य की क्यों चिंता करती है? इतने वस्त्रों की, इतनी फैशन की, इतने गहने, इतने जवाहरातों की? तो शायद आप सोचते होंगे, यह कोई स्त्री-चित्त में कोई बात है। बात उलटी है। उलटी बात है; उलटी ऐसी है कि स्त्री-चित्त यह सारा इंतजाम इसीलिए करता है, क्योंकि पुरुष इससे ही प्रभावित होता है।
पुरुष का कोई और अस्तित्वगत आकर्षण नहीं है। इसलिए स्त्री को पूरे वक्त इंतजाम करना पड़ता है। और पुरुष एक से ही कपड़े जिंदगी भर पहनता रहता है। उसे चिंता नहीं आती, क्योंकि स्त्री कपड़ों के कारण प्रेम नहीं करती। और पुरुष हीरे-जवाहरात न पहने, तो कोई अंतर नहीं पड़ता है। स्त्री हीरे-जवाहरात देखती ही नहीं। पुरुष सुंदर है या नहीं, इसकी भी स्त्री फिक्र नहीं करती। उसका प्रेम है, तो सब है। और उसका प्रेम नहीं है, तो कुछ भी नहीं है। फिर बाकी चीजें बिलकुल मूल्य की नहीं हैं। लेकिन पुरुष के लिए बाकी चीजें बहुत मूल्य की हैं।
सच तो यह है कि जिस स्त्री को पुरुष प्रेम करता है, अगर उसका सब आवरण और सब सजावट अलग कर ली जाए, तो नब्बे प्रतिशत स्त्री तो विदा हो जाएगी। और इसलिए अपनी पत्नी को प्रेम करना रोज-रोज कठिन होता चला जाता है, क्योंकि अपनी पत्नी बिना सजावट के दिखाई पड़ने लगती है। नब्बे प्रतिशत तो मेकअप है, वह विदा हो जाता है, जैसे ही हम परिचित होना शुरू होते हैं।
स्त्री ने कोई मांग नहीं की है पुरुष से, उसका पुरुष होना पर्याप्त है, और स्त्री का प्रेम है, तो यह काफी कारण है। उसका प्रेम भी इंटयूटिव है; इंटलेक्चुअल नहीं है, बौद्धिक नहीं है। और दूसरी बात, उसके प्रेम के इंटयूटिव होने के साथ-साथ उसका प्रेम पूरा है। पूरे का अर्थ है, उसके पूरे शरीर से उसका प्रेम जन्मता है।
पुरुष के पूरे शरीर से प्रेम नहीं जन्मता; उसका प्रेम बहुत कुछ जेनिटल है। इसलिए जैसे ही पुरुष किसी स्त्री को प्रेम करता है, प्रेम बहुत जल्दी कामवासना की मांग शुरू कर देता है। स्त्री वर्षों प्रेम कर सकती है बिना कामवासना की मांग किए।
सच तो यह है कि जब स्त्री बहुत गहरा प्रेम करती है, तो उस बीच पुरुष की कामवासना की मांग उसको धक्का ही देती है, शॉक ही पहुंचाती है। उसे एकदम खयाल भी नहीं आता कि इतने गहरे प्रेम में और कामवासना की मांग की जा सकती है..! मैं सैकड़ों स्त्रियों को, उनके निकट, उनकी आंतरिक परेशानियों से परिचित हूं। अब तक मैंने एक स्त्री ऐसी नहीं पाई, जिसकी परेशानी यह न हो कि पुरुष उससे निरंतर कामवासना की मांग किए चले जाते हैं। और हर स्त्री परेशान हो जाती है। क्योंकि जहां उसे प्रेम का आकर्षण होता है, वहां पुरुष को सिर्फ काम का आकर्षण होता है। और पुरुष की जैसे ही काम की तृप्ति हुई, पुरुष स्त्री को भूल जाता है।
स्त्री को निरंतर यह अनुभव होता है कि उसका उपयोग किया गया है, शी हैज बीन यूज्ड, प्रेम नहीं किया गया, उसका उपयोग किया गया है। पुरुष को कुछ उत्तेजना अपनी फेंक देनी है। उसके लिए स्त्री का एक बर्तन की तरह उपयोग किया गया है। और उपयोग के बाद ही स्त्री व्यर्थ मालूम होती है। लेकिन स्त्री का प्रेम गहन है, वह पूरे शरीर से है, रोएं-रोएं से है। वह जेनिटल नहीं है, वह टोटल है।
कोई भी चीज पूर्ण तभी होती है, जब वह बौद्धिक न हो। क्योंकि बुद्धि सिर्फ एक खंड है मनुष्य के व्यक्तित्व का, पूरा नहीं है वह, इसलिए स्त्री असल में अपने बेटे को जिस भांति प्रेम कर पाती है, उस भांति प्रेम का अनुभव उसे पति के साथ कभी नहीं हो पाता। पुराने ऋषियों ने तो एक बहुत हैरानी की बात कही है।
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खुशबु तेरे प्यार की मुझे महका जाती है ,
तेरी हर बात मुझे बहका जाती है ,
सांस तो बहुत वक़्त लेती है आने जाने में
हर सांस से पहले तेरी याद,
दिल को धड़का जाती है.....!!!
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खुशबु तेरे प्यार की मुझे महका जाती है ,
तेरी हर बात मुझे बहका जाती है ,
सांस तो बहुत वक़्त लेती है आने जाने में
हर सांस से पहले तेरी याद,
दिल को धड़का जाती है.....!!!
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जी स्पॉट को उत्तेजित करने के लिए सेक्स पोजिशन
यदि आप संभोग के दौरान जी स्पॉट उत्तेजना का अनुभव करने की उम्मीद कर रहे हैं, तो कुछ सेक्स स्थिति हैं जो इसमें आपकी मदद कर सकती हैं। इन सेक्स पोजिशन से आप पता लगा सकेगें कि आपको किस प्रकार की उत्तेजना सबसे अधिक पसंद है। जबकि कई सेक्स पोजिशन हैं जो जी स्पॉट को उत्तेजित करने में आपकी मदद कर सकते हैं।
#काउगर्ल पोज
यह पोजिशन लड़िकयों के फेवरेट में से एक होता है। इस पोजिशन की मदद से आप अपने महिला साथी के जी स्पॉट को उत्तेजित कर सकते हैं। इसमें महिला उल्टे होकर बेड पर लेट जाती है। वहीं पुरूष महिला के ऊपर अपने घुटनों के बल आकर इंटरकोर्स की शुरूआत करता है।
#डॉगी स्टाइल पोजिशन
डॉगी स्टाइल सेक्स के दौरान आप अपने जी स्पॉट को उत्तेजित होता हुआ महसूस कर सकते हैं। इसमें महिला अपने घुटनों के बल झुकी हुई होती है। उसके पीछे से पुरूष इंटरकोर्स करना प्रारंभ करता है। जिससे आपका ये स्पॉट हिट होता है और आप समझ जाते हैं ये कहां स्थित है।इसमे चुम्मा लेने में परेशानी है पर बूब्स को पुश करना आसान है।
#क्लोज्ड मिशनरी पोजिशन
इस पोजिशन में आप बेड पर सीधे लेट जाते हैं। क्लोज्ड मिशनरी पोजिशन में महिला के पैर सटे हुए होते हैं। इसमें महिला के ऊपर पुरूष इंटरकोर्स की स्थिति में आता है। इस दौरान महिलाएं उत्तेजित हो जाती हैं जिससे उन्हें उस स्थान का पता चल जाता है।
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ये ब्रह्मा जी भी न अन्याय करते हैं
एक इनकी कामूक रचना जिसे देखते है
खड़ा हो जाता है मेरा बिना हड्डी वाला अंग
और एक मैं काला कलूटा
जिसे देखते ही कर लेती है आंखे बंद
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जब प्रियत्मा इस कदर खड़ी हो और तुम पीछे से जाओ
बाँह पकड़ के सहलाओ ,कान पर गर्दन पर पीठ पर
चुम्बन लो और अपने खड़े लिंग को थम्ब पर चुभाओ
इससे जो आनन्द और प्रसन्नता प्रियत्मा को आएगी वो
उफ़्फ़फ़फ़ ... अनुभव शेयर करो।
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फोटो के सिवाय इतनी सुंदर,गोरी वदन, गुलाबी ओठ,
गाल देखा नहीं सोचता हूँ कितना गुलाबी होगा मोहतरमा
का 2 जांघ के बीच का हिस्सा और दोनों पहाड़ का
निप्पल उफ़्फ़फ़
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बडी ही खूबसूरत है आँखें तुम्हारी !
बिजलियाँ गिराती है आँखें तुम्हारी !!
समंदर सी गहरी है आँखें तुम्हारी !
नशा है, जाम है, यह आँखें तुम्हारी !!
लगाती मुझपे इल्ज़ाम है आँखें तुम्हारी !
मेरी सुबह, शाम है, आँखें तुम्हारी !!
इजहार जब करती है आँखें तुम्हारी !!
क़ातिल है,शातीर है, आँखें तुम्हारी !!
गुमसूम सी रहती है आँखें तुम्हारी !
बहोत कुछ कहती है आँखें तुम्हारी !!
देती दिलका पैगाम है आँखें तुम्हारी !
मेरा चैन है, सुकून है आँखें तुम्हारी !!
✍..........
"चाँद
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सेक्स के दौरान अगर आपकी पार्टनर उफ..आह या आउच जैसी आवाजें निकाले तो यह मत मान लीजिए कि आपने उसे संतुष्ट कर दिया है। यह जरुरी नहीं कि आपकी साथी आपके साथ सेक्स का आनंद ले रही हो। यह दिखावा भी हो सकता है क्योंकि हाल ही में ब्रिटेन के शोधकर्ताओं ने एक शोध में इस बात का खुलासा किया है कि लगभग 25 प्रतिशत महिलाएं सेक्स के दौरान आवाजें निकालकर चरम आनंद को पाने का दिखावा करती हैं।
शोध में यह भी बताया गया है कि महिलाएं सेक्स के दौरान इसलिए कराहती या आह..ऊह करती है ताकि उनके पुरुष साथी सेक्स में और तेजी लाए। शोधकर्ताओं ने 18 से 48 वर्षीय 71 महिलाओं पर यह शोध किया। शोध में शामिल महिलाओं से पूछा गया कि सेक्स के दौरान उनके द्वारा निकाली गयी आवाजों का ऑर्गेज्म से कोई संबंध है। इसके जवाब में महिलाओं का कहना था कि इस तरह कि आवाजें सिर्फ अपने पुरुष साथी की सेक्स प्रक्रिया में ज्यादा तेजी लाने और जल्द स्खलन के लिए होती है। ताकि इस प्रक्रिया को जल्द ख़त्म किया जा सके।
और अक्सर जब आप कॉल गर्ल के साथ हमविस्तर होते हैं तो वो ज्यादा आवाज निकालती हैं।
इसके दूसरी और 25 प्रतिशत महिलाओं का कहना था कि वह सिर्फ ऑर्गेज्म का दिखावा करने के लिए नियमित रूप से ऐसी आवाजें निकालती हैं। 90 प्रतिशत महिलाओं ने कहा कि वे चरम आनंद तक पहुंच ही नहीं जा पाती जबकि 87 प्रतिशत का कहना था कि अपने पार्टनर के प्रति प्रेम को बनाये रखने के लिए ऐसा करती है।
शोधकर्ताओं ने महिलाओं के इस व्यवहार के पीछे का कारण बताते हुए कहा कि इसकी वजह सेक्स और अन्य मामलों में पुरूषप्रधान मानसिकता हो सकता है, जिसकी वजह से महिलाएं अपनी संतुष्टि के साथ समझौता करते हुए अपने पुरूष साथी का ख्याल रखती हैं।
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पत्ती पत्ती गुलाब हो जाती ,
हर कली वेख्वाब हो जाती ,
तूने डाली न मयकश नजरे,
वरना शबनम भी शराब हो जाती.....
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खुशबु तेरे प्यार की मुझे महका जाती है ,
तेरी हर बात मुझे बहका जाती है ,
सांस तो बहुत वक़्त लेती है आने जाने में
हर सांस से पहले तेरी याद,
दिल को धड़का जाती है.....!!!
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खुशबु तेरे प्यार की मुझे महका जाती है ,
तेरी हर बात मुझे बहका जाती है ,
सांस तो बहुत वक़्त लेती है आने जाने में
हर सांस से पहले तेरी याद,
दिल को धड़का जाती है.....!!!
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पढ़ कर जरूर शेयर कीजियेगा।
जब स्त्री_चरित्रहीन हो और खुद के धन के अहंकार में पति और उसके परिवार वालों को यातना दे
तिरस्कार करे अपमान करे
तो इस कलयुग में शास्त्र वचन क्या कहते हैं?
उत्तर --
स्त्री चरित्रहीन तभी होती है ...जब पुरूष_छक्का हो !
प्रेमालाप , foreplay , रोमांस , शेष कामकलाओं मे चूतिया हो !
भोजन वस्त्र आभूषण आदि से रहित हो !
संभोग के समय ...ब्रह्म वार्ता छौंकता हो !
उसका या उसके मायके वालों का अपमान करता हो!
नोट --
तबियत से घुटाई , पिलाई , आदि ....काम-क्रीडायें हो जायें तो
कोई भी स्त्री ...कहीं नहीं जाती !
90% चूतियों को तो...
Clit , G Spot , Orgasm आदि का ही नहीं पता !
मूर्खों !
पेटीकोट का नाडा खोलने से पहले
आलिंगन चुम्बन द्वारा... अपनी लुगाई को गर्म करो !
उसकी सिसकारियां निकलवा दो!
आ न मेरे राजा! uhh ahh
अब बर्दाशत नहीं हो रहा ... जल्दी से करो न... please
पप्पू के पापा ...लभ जू
ऐसा बोलकर... जब वो... आपका कान चाटने लगे तो
समझ जाओ कि
अब झंडा फहराने का समय आ गया हैं !
करके देखो ...
और मुझे अपना अपना video बनाकर भेजो
कोई गलती होगी तो
हम उसका समाधान बता देंगे!
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पलट जाओ जानेमन
मधुरस पाने की है तमन्ना
न रूठो तुम इस कदर
जरूरत है मेरी भी तेरे विस्तर पर।।
Kontent 18 yoshdan oshgan foydalanuvchilar uchun mavjud
Xizmatga kirish orqali siz 18 yoshdan oshganingizni tasdiqlaysiz.
