Firibgarlarga uchmang! Telemetrio bunday kanallarni topadi va belgilaydi 👉 Belgini ko‘rmoqchi bo‘lsangiz, obuna bo‘ling 👈
काम संहिता🙏
Kanalga Telegram’da o‘tish
सेक्स से जुड़ी हुई प्रेम से जुड़ी हुई सभी जानकारी के लिए सन्देश भेजे जय कामदेव कामसूत्र यौन स्थानों का सच्चा गुरु ग्रंथ है। अपने यौन जीवन में विविधता लाने के तरीके खोज रहे हैं? तब आप सही जगह पर आए हैं .. !!
Ko'proq ko'rsatish2 477
Obunachilar
Ma'lumot yo'q24 soatlar
+237 kun
+3630 kun
2 878
Post ko'rishlar
~ 53824 soatlar
Ma'lumot yo'q48 soatlar
116.19%
Muloqot nisbati
Ma'lumot yo'q
Kuniga postlar
Postlar arxiv
2 477
मैने तो तुझे दिल से चाहा था
पर जिस्म मे भी उतरना था
मैने तो श्याम से बस तेरी ही इच्छा की थी
पर हवस भी तो बुझानी थी।।❤️❤️ विश
2 477
जब लड़का🕴️शादी कर के अपने घर🏘️ पहुँचा,
तो सबने पूछा क्या क्या मिला है दहेज में, कुछ देर तो लड़का🕴️ चुप रहा,
फिर जब उसे अपनी दुल्हन 💃की रोने की आहट हुयी तो उससे रहा नहीं गया,
वो बोला, आज मै दुनिया का अमीर आदमी🕺 बन गया, एक बाप ने मुझे अपनी जान से भी प्यारी बेटी💃 दे दी,
एक भाई ने अपनी हमजोली दे दी,
एक बहन👭 ने अपनी परछाई दे दी,
और तो और एक माँ🤱 जो दुनिया को सबकुछ दे सकती हैं पर अपनी संतान नहीं, ओ माँ ने अपने आँचल में खेली गुड़िया🚶🏽♀️ दे दी और क्या चाहिए मुझे।//
वाह ऐसी सोच रखने वाले लड़को🙆 को मेरा दिल से सैल्यूट👮,,आज के युवाओं में यह सोच होनी जरूरी है।
2 477
जिसे प्रेम मिलता है वह इस बात को समझ ही नहीं पाता कि सामने वाला उससे कितना प्रेम करता है।
वह अपनी ही धुन और नशे में होता है। वह समझता है यह मेरी खासियत है कि मुझे प्रेम मिल रहा है। पर वह सिर्फ उसकी ही खासियत नहीं होती उससे ज्यादा प्रेम करने वाले की खासियत होती है।
प्रेम करना काबिलियत है तो प्रेम ग्रहण करना भी काबिलियत है। जो मिल रहा है उसे श्रद्धा से, आदर से सिर झुका के ग्रहण करना चाहिए तभी वह आपको अपनी पूर्णता में मिलता है।
अक्सर प्रेम का जाने-अनजाने अनादर ही होता है।
2 477
युवती स्त्री के विषय में यह नीति कही गई है...
राखिय नारि जदपि उर माहीं।
जुबती सास्त्र नृपति बस नाहीं ॥
रामचरितमानस -अरण्य काण्ड ।
स्त्री को चाहे हृदय में ही क्यों न रखा जाय, परन्तु युवती स्त्री तब भी वश में नहीं रहती जैसे शास्त्र और राजा शास्त्र चाहे जितना पढ़ा जाय, शास्त्र पर अधिकार नहीं हो सकता शास्त्र सदैव स्मृति में नहीं रहता। राजा की चाहे जितनी सेवा टहल की जाय, राजा भी सेवक के वश में नहीं रहता। जैसे राजा निरंकुश है वैसे ही युवती नारी निरंकुश होती है। वह किसी के अंकुश (नियंत्रण) को नहीं स्वीकारती, भले ही हम उसे अपने हृदय में स्थान दें- उससे अत्यन्त प्रेम एवं सम्मान दें। ऐसा उसके भीतर स्थित काम की ज्वाला के कारण होता है। क्या अग्नि किसी के वश में रहती है ? तो फिर कामाग्नि रूपी युवती को कैसे वश में रखा जा सकता है ? कामी पुरुषों में दीनता (बेबसी, विवशता) देखी जाती है। कहते हैं -अरण्य काण्ड
'कामिन्ह कै दीनता देखाई।'
नारद जी को स्त्री सुख से वचित किये जाने के कारणे का उल्लेख करते हुए राम जी उनसे कहते १- अति दारुन दुखद मायारूपी नारि ॥
२- मोह बिपिन कहुँ नारि बसन्ता ॥
३- नारि निबिड़ रजनी अंधियारी ।
४. अवगुन मूल सूलप्रद प्रमदा सब दुख खानि ॥ ५- दीप सिखा सम जुवति तन, मन जसि होसि पतंग ।। अरण्य काण्ड |
स्त्री माया की विग्रह (मूर्ति) है। यह अत्यन्त दारुण (हिंसक), दुःखद है। मोह रूपी वन को विकसित करने के लिये स्त्री वसन्त ऋतु है स्त्री मोहवर्धक है। स्त्री घोर अँधियारी रात्रि है अज्ञान, मूर्खता को रूप है। स्त्री अवगुणों की जड़ शोकप्रद तथा समस्त दुःखों की खान (स्रोत) है। युवती स्त्री का शरीर दीपक की लौ के समान पुरुष के पतंग कीट रूपी मन को जलाने वाला है। इसलिए पुरुष को स्त्री से दूर रहना ही चाहिये ।
2 477
प्रियतमा तुम कभी ऐसा न सोचना
की
ना ज़ाने क्यू ज़िन्दगी में आते हैं वो लोग,
वफाए कर नही सकते बातें हजार करते हैं..✍️💔
दिलवीश ❤️💋💋💋
2 477
संभोग करते समय थूक का प्रयोग चिकनाई के लिए नही करिए इससे इन्फेक्शन का डर होता है ,हालांकि चूसने और चाटने में तो प्रयोग हो ही जाता है।मगर ये हल्का मात्रा मे ही होना चाहिए
दिलविश❤️💋😘
2 477
मेरे लिए अब प्रार्थना करने
और तुम्हारे नाम के
दुहराव के बीच
कोई दुराव नहीं है
मेरे प्रार्थनाक्षर
तुम्हारे नाम के वर्णविन्यास को चूमते हैं
मेरी आकांक्षा है कि
सतत् प्रार्थना में ही रहूं
2 477
संभोग की पूर्णता ही समाधी है....
जो मनुष्य संभोग से उस मूलस्रोत (समाधी ) को देख लेता है । वह अमानुषी रतिको उपलब्ध हो जाता है।’ वह ऐसे संभोग को उपलब्ध हो जाता है, जो मनुष्यता के पार है ।
एक रति स्त्री में पाई जाती है । उस रति से क्षण भर का ही सुख मिलता है । केवल उसका हमे आभास ही होता है । फिर एक रति वह है, जो हमारी चेतना के मूलस्रोत में गिर जाती है । वह रति हमे अपने आप से मिलने से मिलती है ।
एक रति दूसरे से मिलने से हमे मिलती है । और एक रति हमे अपने आप अंदर मिलने से मिलती है । जब मनुष्य का अपने आपसे मिलना होता है, उस क्षण जो महाआनंद घटित होता है, वही समाधि है । वही असली रति है । परम आनंद की रती । संभोग में समाधि की झलक तभी मिलती है । जब समाधि में संभोग की पूर्णता होती है ।
2 477
संभोग क्रीड़ा के समय अपने सांसों पर ध्यान रखिए, सांस धीरे धीरे लीजिए जिससे वीर्यपात जल्दी नही होगा।
2 477
जो प्रेम में होते हैं वो छल नहीं समझ पाते
जो प्रेम में छल कर रहे होते हैं वो प्रेम नहीं समझ पाते!
2 477
कॉपी
फेसबुक एक ऐसी जगा है जहाँ प्यार भी...
नफ़रत भी होती है....
कुछ औरतो के लिए टाइम पास ही भी यही है...
कुछ ओरते दिल लगी भी यही करती है...
हक़ीक़त हूँ कोई कहानी नहीं हूँ
तेरी आँख का ख़ुश्क पानी नहीं हूँ।।
हूँ ठहरा हुआ एक लम्हा-ए-साहिल
मैं मौजों में बहती रवानी नही हूँ।।
इश्क़ करना मेरी जरूरत है
किसी की चाहत बनना चाहती हुआ!!
हूँ यादों की मीठी कोई झील जैसे
किसी प्यास जैसी कहानी नही हूँ।।
वफाओं की राहों की मंज़िल हूँ मैं ही
हो भटकी हुई, वो जवानी नही हूँ।।
उम्र कही है भगति करलो
पर दिल कहता मस्ती मेरी जरूरत है
दुआओं में अक्सर क़ज़ा चाहती हो
मैं ऐसी थकी ज़िंदगानी नही हूँ।।आशु
जो मुझको छुए वो महकने लगे है
मैं सन्दल हूँ मैं रात रानी नहीं हूँ।।
बिस्तर की सिलबट हु ❤❤
2 477
तारीफ़ लिखने बैठा था उनके मखमली हुस्न की....
कलम ही रुक गई उनके कमर की सिलवटें देखकर....
2 477
स्त्री-मन एक तरफ़ जहां बहुत सरल है,
वहीं बहुत जटिल भी है. स्त्री और पुरुष केवल शारीरिक रूप से ही नहीं,
बल्कि मानसिक रूप से भी काफ़ी भिन्न हैं.
कई बार स्त्री जो कहती है, उसका मतलब वह नहीं होता है,
जो वो कहना चाहती है.
चाहे कभी भी स्त्री खुलेतौर पर यह ना कहे, पर अगर स्त्री को कोई बात सबसे ज़्यादा बुरी लगती है, तो वह है दूसरी स्त्री की प्रशंसा. फिर वह स्त्री चाहे आपकी मां-बहन, दोस्त-सहकर्मी या पड़ोसन ही क्यों न हो. इसलिए अब आगे किसी भी स्त्री की प्रशंसा करने से पहले दो बार सोचिएगा ज़रूर या फिर यदि आप किसी की प्रशंसा कर भी रहे हैं, तो साथ ही अपनी पत्नी की प्रशंसा भी कर देें. स्त्री, ख़ासकर एक पत्नी कभी भी नहीं चाहेगी कि उसका पति किसी और की तारीफ़ करे. हो सकता है कि वो इस बात को कभी सबके सामने ज़ाहिर न करे, लेकिन इसे आपको समझना होगा.
सभी स्त्रियां चाहती हैं कि उन्हें किसी भी ज़रूरत या किसी भी चीज़ के लिए अपने पार्टनर से कहना न पड़े. वे चाहती हैं कि पुरुष बिना कहे ही उनकी सारी ज़रूरतों को समझ ले और उन्हें पूरा कर दे. फिर वह ज़रूरत प्यार की हो, सहारे की या फिर कोई और. ऐसा इसलिए है कि स्त्रियां ख़ुद भी ऐसी ही होती हैं, वे बिना कहे ही अपने साथी की सारी ज़रूरतों को समझ लेती हैं. स्त्रियों के लिए प्यार मांगने के लिए नहीं होता है. वे बिना मांगे मिलनेवाले प्यार में विश्वास रखती हैं.
स्त्री स्पर्श की भाषा में बहुत विश्वास रखती है. हल्की-सी छुअन भी उसे रोमांचित कर सकती है या फिर किसी के ग़लत इरादों के बारे में बता सकती है. स्त्री के स्पर्श के मायने काफ़ी अलग हैं. पति का उनका स़िर्फ हाथ पकड़ना या ऑफिस से आने के बाद उन्हें बांहों में भर लेना, उनके लिए किसी ऐसे संवाद से कम नहीं, जिसमें शब्द न हो. इसलिए वे समय-समय पर चाहती हैं कि उनका साथी उन्हें प्यार से छूए या फिर बांहों में भर ले.
2 477
🙏💝🙏
🌺 तुम नंगे हो जाओ, 🌺
🙏कपडे उतारने की बात नहीं कह रहा हूँ;🙏
मन के आवरणों को हटाने की बात कह रहा हूँ। लेकिन जब भी ऐसी कोई बात होती है तो तुम्हारे ख्यालो में स्त्री ही आती है! क्योकि ये बात जानकर तुम हैरान होगे कि तुम्हारी पत्नी भी स्त्री ही है! तुम रोज उसे बिस्तर पर साथ पाते हो पर फिर भी उसे समझने की, जानने की चाह कभी नही की! अभी तुम्हे स्त्रीत्व तक पहुँचने में देर है; स्त्री को समझने का, उसके तन को जानने का दम चाहिए। अदभुत साहस चाहिए, प्रेम की अनुभूति चाहिए। परम की आकांक्षा चाहिए।
जबकि लोग उसके उभारो की ऊँचाई देखकर गिर जाते हैं। उसकी गहराइयो में ऐसे डूबते हैं कि मरकर के वापस आते हैं। इसलिए जब भी तुम्हें स्त्री के नजदीक जाने का अवसर मिले तो चूकना मत! जरुरी नहीं कि हर बार तुम सेक्स में हो जाओ, कुछ समय ऐसा भी गुजारना; जहाँ तुम शरीर के पार देखने की कोशिश करना; शायद तुम उसके दिल की धडकन सुन सको, शायद तुम उसके स्त्रीत्व को छू सको, और जिस पल तुमने उसके स्त्रीत्व को छू लिया! तब अचानक से वासना तिरोहित होगी, और प्रेम का आगमन होगा, तुम एक परमसुख की अनुभूति करोगे, एक ऐसा आनंद जो तुम्हे जन्मों जन्मों तक गुदगुदाता रहेगा, तुम मुस्करा उठोगे, खिल जाओगे, और यही खिलावट तुम्हे जीवन के परम सत्ता की अनुभूति देगी, जीवन के परम आनंद से तुम्हारा मिलन होगा।
2 477
स्त्री ,
होती है एक क़िताब की तरह,
जिसे देखते हैं सब,
अपनी-अपनी,
ज़रुरतों के हिसाब से....
कोई सोचता है उसे,
एक घटिया और सस्ते,
उपन्यास की तरह...
तो कोई घूरता है,
उत्सुक-सा,
एक हसीन रंगीन ,
चित्रकथा समझकर...
कुछ पलटते हैं,
इसके रंगीन पन्ने ,
गुज़ारने के लिए,
अपना खाली वक़्त...
तो कुछ रख देते हैं,
सजाकर,
घर की लाइब्रेरी में,
किसी बड़े लेखक की
कृति की तरह...
बनाकर केवल एक,
स्टेटस् सिम्बल ....
कुछ ऐसे भी है ,
जो इसे रद्दी समझकर ,
पटक देते हैं,
घर के किसी कोने में.....
तो कुछ बहुत उदार होकर,
पूजते हैं मन्दिर के,
आले में रखकर,
किसी धर्म ग्रन्थ की तरह...
स्त्री होती है,
एक क़िताब की तरह,
जिसे,
पृष्ठ दर पृष्ठ
कोई पढ़ता ही नही,
समझता नही....
आवरण से लेकर,
अंतिम पृष्ठ तक,
सिर्फ़ देखता है,
टटोलता है....
और वो रह जाती है
अनबांची...
अनअभिव्यक्त,
अभिशप्त सी...
ब्याहता होकर भी
कुआंरी सी...
विस्तृत होकर भी,
सिमटी सी...
छुए तन में,
अकुलाता सा,
एक
अनछुआ मन लिए...
2 477
प्रेम
राह में पड़े
दस के नोट जैसा होता है
हम इधर उधर देख कर चतुराई से
पैर रख देते है उस पर
प्रेम भी ऐसे ही मिल जाता है...अचानक
और हम नादान
इधर उधर देख कर
अपना हृदय
डाल देते है पर....ईश्वर देख कर मुसकुराता है चोरी
हमारी.....
और हर चोरी की सज़ा
मुक़र्रर है......!!
राधे राधे 💞💞 🙏🙏
Kontent 18 yoshdan oshgan foydalanuvchilar uchun mavjud
Xizmatga kirish orqali siz 18 yoshdan oshganingizni tasdiqlaysiz.
