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काम संहिता🙏
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सेक्स से जुड़ी हुई प्रेम से जुड़ी हुई सभी जानकारी के लिए सन्देश भेजे जय कामदेव कामसूत्र यौन स्थानों का सच्चा गुरु ग्रंथ है। अपने यौन जीवन में विविधता लाने के तरीके खोज रहे हैं? तब आप सही जगह पर आए हैं .. !!
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स्तन मर्दन बहुत हल्के हाथों से करें । गोलाई में घुमाते हुए और निप्पल को जीभ से हल्के से चूसे इससे स्त्री की योनि स्वाभाविक गीली होने लगती है।
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*ओरल सम्भोग*
एक लड़की, ओरल से*स काफी पसंद करती है. अगर आप चाहते हो कि वह बिस्तर पर आपका नाम ले-लेकर चिल्लाए तो ओरल से*स यह करवाने का बिलकुल सही तरीका है! ज़्यादा जोर लगाने की कोई ज़रुरत नहीं है, लेकिन हाँ! आप इतना जोर लगा सकते हो कि वह उत्तेजित हो जाए!
शुरुआत में जल्दबाजी ना करें
क्योंकि अगर शुरुआत में जल्दबाज़ी कर गए तो बीच में और अंत में करने जैसा कुछ बचेगा ही नहीं! तो इससे अच्छा है कि आप शुरुआत में से स करते वक़्त, आप जो भी करिए धीरे-धीरे करिए और फिर उसके बाद इजाज़त लेकर आगे बढ़िये और फिर जब लोहा गरम हो जाए, तब हथौड़ा मारिए !
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पत्नी क्या होती है
एक बार जरूर पड़े..
"मै डरता नही उसकी कद्र करता हूँ
उसका सम्मान करता हूँ।
-" कोई फरक नही पडता कि वो कैसी है
पर मुझे सबसे प्यारा रिश्ता उसी का लगता है।"
माँ बाप रिश्तेदार नही होते।
वो भगवान होते हैं।उनसे रिश्ता नही निभाते उनकी पूजा करते हैं।
भाई बहन के रिश्ते जन्मजात होते हैं ,
दोस्ती का रिश्ता भी मतलब का ही होता है।
आपका मेरा रिश्ता भी जरूरत और पैसे का है
पर,
पत्नी बिना किसी करीबी रिश्ते के होते हुए भी हमेशा के लिये हमारी हो जाती है
अपने सारे रिश्ते को पीछे छोडकर।
और हमारे हर सुख दुख की सहभागी बन जाती है
आखिरी साँसो तक।"
पत्नी अकेला रिश्ता नही है, बल्कि वो पूरा रिश्तों की भण्डार है।
जब वो हमारी सेवा करती है हमारी देख भाल करती है ,
हमसे दुलार करती है तो एक माँ जैसी होती है।
जब वो हमे जमाने के उतार चढाव से आगाह करती है,और मैं अपनी सारी कमाई उसके हाथ पर रख देता हूँ क्योकि जानता हूँ वह हर हाल मे मेरे घर का भला करेगी तब पिता जैसी होती है।
जब हमारा ख्याल रखती है हमसे लाड़ करती है, हमारी गलती पर डाँटती है, हमारे लिये खरीदारी करती है तब बहन जैसी होती है।
जब हमसे नयी नयी फरमाईश करती है, नखरे करती है, रूठती है , अपनी बात मनवाने की जिद करती है तब बेटी जैसी होती है।
जब हमसे सलाह करती है मशवरा देती है ,परिवार चलाने के लिये नसीहतें देती है, झगड़े करती है तब एक दोस्त जैसी होती है।
जब वह सारे घर का लेन देन , खरीददारी , घर चलाने की जिम्मेदारी उठाती है तो एक मालकिन जैसी होती है।
और जब वही सारी दुनिया को यहाँ तक कि अपने बच्चों को भी छोडकर हमारे बाहों मे आती है
तब वह पत्नी, प्रेमिका, अर्धांगिनी , हमारी प्राण और आत्मा होती है जो अपना सब कुछ सिर्फ हमपर न्योछावर करती है।"
मैं उसकी इज्जत करता हूँ तो क्या गलत करता हूँ।
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✨✨ परीक्षा ✨✨
परीक्षा ....
आती रहती है
पुरुष और स्त्री,
दोनों के हिस्से 🍀🍂
बस फर्क है,
तो इतना
पुरुष के हिस्से आती है
सागर पर सेतु बनाने की
असंभव को संभव कर जाने की।🍂🍀
और स्त्री के हिस्से,
आती है अग्निपरीक्षा
अपना अस्तित्व दिखाने की
विष का घूंट
हँस कर पी जाने की
बिना गलती
सजा पाने की ....
फिर भी....
परीक्षा आती तो है
स्त्री...
पुरुष...
दोनों के हिस्से
उन्हें अजमाने की
दोनों को श्रेष्ठ बनाने की।।✨✨✨✨
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मैं फ़्री सेक्स के पक्ष में हूँ |
कयोंकि ...........
फ़्री सेक्स एक लोकतान्त्रिक मूल्य है |
फ़्री सेक्स का मतलब क्या है ?
_
___
कुछ लोग समझते हैं फ़्री मतलब मुफ्त में सेक्स |
लेकिन ऐसा वे बेचारे अँग्रेज़ी भाषा
ना जानने की वजह से समझते हैं |
कुछ लोग फ़्री सेक्स का मतलब समझते हैं
जहाँ चाहा जिसके साथ चाहा सेक्स कर लेने को
फ़्री सेक्स कहते हैं |
इन लोगों की समझ भी दूषित है,
इसलिए वे ऐसा समझते हैं |
फ़्री सेक्स का मतलब है
हर इन्सान को अपने शरीर पर
अपना अधिकार होने को मान्यता देना |
भारत में ऐसा नहीं है |
ख़ास तौर पर
औरतों के शरीर पर पुरुषों का अधिकार है |
लड़की किसके साथ शादी कर के सेक्स करेगी
यह पिता तय करता है |
लड़की को अपनी शादी
कब करनी है
किसके साथ करनी है
करनी है या नहीं करनी
यह सब फैसले लेने के अधिकार को मान्यता देना ही
फ़्री सेक्स को मान्यता देना कहलाता है |
लेकिन भारतीय समाज के सारे नियम
पुरुषों के पक्ष में बनाये गये हैं |
इसलिए जैसे ही कोई फ़्री सेक्स की बात कहता है
पुरुषों के दिमाग में खतरे की घण्टी बजने लगती है कि
हमारा अधिकार समाप्त होने वाला है |
इसलिए भारत का पिछड़ा पुरुषवादी समाज
फटाफट अपने पक्ष में सनातन धर्म,
भारतीय सँस्कृति, परम्पराओं की दुहाईयाँ देने लगता है |
फ़्री सेक्स एक लोकतान्त्रिक मूल्य है |
हम लोग अभी असल में लोकतान्त्रिक बने नहीं हैं |
खाली दिखावा करते हैं |
अगर हम मानते हैं कि
हर बालिग़ व्यक्ति वोट दे सकता है |
तो एक बालिग़ लड़की
अपनी शादी का फैसला क्यों नहीं ले सकती ?
लड़की के अपने फैसले लेते ही
हमारा सनातन धर्म क्यों खतरे में पड़ जाता है ?
वैसे तो कहने के लिए भारत के महाकाव्यों में
फ़्री सेक्स की कहानियाँ भरी पड़ी हैं |
स्वयंवर का अर्थ ही
अपनी मर्जी से वर खोजना होता है |
तो फ़्री का अर्थ है स्वतन्त्रता
और सेक्स का अर्थ है अपने शरीर,
प्रजनन और शादी के बारे में
स्वतन्त्र इन्सान के रूप में
फैसले लेने की आज़ादी का अधिकार |
हर इन्सान को सेक्स के बारे में
फैसला लेने का अधिकार होना ही
हमारे समाज के सभ्य होने की निशानी है |
दूसरे को अपना ग़ुलाम बना कर
उसे फैसला ना लेने देना पिछड़ापन है |
लड़कियों को अपने फैसले लेने दें
हम कब तक उनके सर पर बैठे रहेंगे ?
अगर मन में किसी तरह का प्रश्न उठे
इस मुद्दे से जुड़ा तो
आप अपने विचारों क़ो यहाँ रख सकते है |!|
आचार्य दिलविश💋
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जमीन पर दोनों हाथ और पैर रखने के बाद दाहिने पैर को आगे की ओर करना है, ताकि बायां पैर शरीर से 90 डिग्री के एन्गल पर रहे.
बाएं पैर को पीछे की ओर सीध में जमीन पर स्ट्रेच करना है, इस दौरान पैर का आगे वाला हिस्सा नीचे की ओर हो और उंगलियां पीछे की ओर.
आगे की ओर जाते हुए सांस बाहर करना है. शरीर के वजन को सपोर्ट देने के लिए हाथ का सहारा लेना है. यदि यह सुविधाजन न हो, तो स्ट्रेच करते हुए चादर या तकिये को दाहिने हिप के नीचे रखना चाहिए. इस समय शरीर को नीचे की ओर करना है.
इसके बाद सामान्य अवस्था में आ जाएं और दूसरी तरफ से भी ऐसा ही करें.
शवासन
इस योगासन को करने से व्यक्ति रिलैक्स महसूस करता है और उसका तनाव छूमंतर होने में सहायता मिलती है. इसे ऐसे किया जा सकता है-
जमीन पर योग मैट बिछाकर पीठ के बल लेट जाएं.
दोनों पैरों के बीच थोड़ी दूरी बनाए रखे और हाथों को भी सीधा शरीर से थोड़ा दूर रखें.
इस अवस्था में शरीर को बिल्कुल ढीला छोड़ दें और आंखों को बंद कर लें.
अब सिर्फ अपनी सांसों पर ध्यान केंद्रित करें.
इस स्थिति में जितनी देर तक इच्छा हो, रहा जा सकता है.
सारांश
कामेच्छा बढ़ाने में कुछ योगासनों की अहम भूमिका होती है. दरअसल, ये योगासन तनाव और चिंता को दूर करके जीवन जीने के तरीके में बदलाव लाने का काम करते हैं. सेतुबंध सर्वांगासन, शवासन और बालासन जैसी योगासनओं के नियमित अभ्यास से व्यक्ति की सेक्स लाइफ में सुधार आता है.
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कामेच्छा बढ़ाने वाले योगासन
#कामसूत्र_प्राचीन_भारतीय_काम_कला
योग में न सिर्फ तनाव को कम करने के गुण हैं, बल्कि यह वजन कम करने और पाचन में सुधार लाने में भी मददगार है. योग के लाभ सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं है, यह कामेच्छा बढ़ाने में भी अहम योगदान देता है.
इस लेख में कामेच्छा बढ़ाने के लिए योग के फायदे और विभिन्न योगासनओं के बारे में जानेंगे-
कामेच्छा बढ़ाने के लिए योग के फायदे
कामेच्छा बढ़ाने वाले योगासन
मार्जरी आसन और बीतिलासन
सेतुबंध सर्वांगासन
आनंद बालासन
एक पाद राजकपोतासन
बालासन
शवासन
योग के फायदे
योग का सबसे बड़ा फायदा तनाव को कम करना है. तनाव के कम होने के साथ व्यक्ति अपनी सेक्स लाइफ को भी खुलकर एंजॉय करने लगता है. आइए, विस्तार से कामेच्छा बढ़ाने के लिए योग के फायदों के बारे में जानते हैं-
शोध कहते हैं कि नियमित योगाभ्यास से शरीर में कॉर्टिसोल स्तर कम होता है और इसके परिणामस्वरूप तनाव का स्तर भी कम हो जाता है. तनाव के ज्यादा होने से शरीर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है और इनमें से एक है कामेच्छा का कम हो जाना.
ओवरऑल सेक्सुअल फंक्शन में सुधार लाने में भी योग मदद कर सकता है. शोध के अनुसार, जो लोग नियमित तौर पर योग का अभ्यास करते हैं, उनकी सेक्स लाइफ उन लोगों की तुलना में ज्यादा अच्छी होती है, जो नियमित तौर पर योग का अभ्यास नहीं करते हैं.
योग शरीर को सुनने और समझने का एक रास्ता है, साथ ही योग यह भी बताता है कि किस तरह से अपने मन को नियंत्रित किया जा सकता है.
नियमित योग का अभ्यास करने से व्यक्ति आज के बारे में सोचता है, जो उसकी सेक्स लाइफ को बूस्ट करने के लिए जरूरी है. व्यक्ति जितना अधिक अपने पार्टनर के साथ आज में जिएगा, उसकी सेक्स लाइफ उतनी ही अच्छी होती है. सेक्स और योग दोनों मिलकर शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक स्तर पर लाभ पहुंचाते हैं.
योग करने से महिलाओं को पेल्विक दर्द से निजात मिलता है, जो अंततः सेक्सुअल फंक्शन में सुधार लाने का काम करता है.
शोध कहते हैं कि पुरुषों में प्री-मैच्योर इजैक्यूलेशन की समस्या को ठीक करने में भी योग मददगार साबित हुआ है.
कामेच्छा बढ़ाने वाले योगासन
कामेच्छा और सेक्स लाइफ को बूस्ट करने में सेतुबंध सर्वांगासन और बालासन जैसी योगासन मददगार हैं. आइए, विस्तार से कामेच्छा बढ़ाने वाले योगासनों के बारे में जानते हैं-
मार्जरी आसन और बीतिलासन
ये दोनों आसन अमूमन साथ में किए जाते हैं, जिससे रीढ़ की हड्डी में लचक आती है. इन योगासनों को करने से तनाव का स्तर कम होने में मदद मिलती है और व्यक्ति जल्दी मूड में आ जाता है. इन योगासन को इस तरह से किया जा सकता है -
जमीन पर दोनों हाथ, घुटने व पैर रखकर शरीर को ऊपर की ओर उठाना है. कलाई कंधों के नीचे और घुटने हिप्स के साथ एक सीध में होने चाहिए. रीढ़ की हड्डी और वजन को पूरे शरीर में बराबरी में बांट लेना है.
अब सांस लेते हुए ऊपर की ओर देखते हुए पेट को जमीन की तरफ लेकर जाना है. इस समय स्ट्रेच करते हुए आंखें, ठोढ़ी और छाती ऊपर की ओर होनी चाहिए.
फिर सांस को बाहर छोड़ते हुए ठोढ़ी को छाती की ओर ले जाना है और पेट को रीढ़ की हड्डी की ओर. इस समय रीढ़ की हड्डी छत की ओर गोल होनी चाहिए.
सेतुबंध सर्वांगासन
इस योगासन को करने से पेल्विक फ्लोर को मजबूती मिलती है. पेल्विक मांसपेशियों के मजबूत होने से सेक्स के दौरान होने वाले दर्द को कम करने में मदद मिलती है. सेतुबंध सर्वांगासन को इस तरह से किया जाना चाहिए -
पीठ के बल लेट जाएं.
दोनों घुटनों को मोड़ लेने के बाद पैर जमीन पर होने चाहिए.
दोनों हाथ और हथेली जमीन पर फ्लैट और उंगलियां फैली हुई होनी चाहिए.
अब कूल्हों व कमर को ऊपर की ओर उठाना है, लेकिन कंधे और सिर जमीन पर ही होने चाहिए.
कुछ सेकंड इसी अवस्था में रहें और सामान्य गति से सांस लेते रहें. फिर वापस सामान्य अवस्था में आ जाएं.
आनंद बालासन
यह रिलैक्स करने वाली मुद्रा है, जो ग्लूट्स और पीठ के निचले हिस्से को स्ट्रेच करती है. यह मिशनरी पोजीशन का एक वेरिएशन भी है. इसे ऐसे किया जा सकता है-
पीठ के बल लेट जाना है.
सांस बाहर निकालते हुए पैरों को ऊपर उठाना है और फिर घुटनों को मोड़ते हुए पैरों की उंगलियों को मुंह की ओर लाना है.
फिर दोनों हाथों से पैरों के अंगूठे पकड़ लें और ठुड्डी को छाती से लगाएं, लेकिन ध्यान रहे कि सिर को ऊपर नहीं उठाना है.
अब सांसअंदर लेते हुए दोनों घुटनों को बाहर की ओर फैलाना है.
कुछ सेंकड इसी अवस्था में रहें और सामान्य गति से सांस लेते रहें.
एक पाद राजकपोतासन
इस योगासन के कई वेरिएशन हैं, जो हिप्स की स्ट्रेचिंग के लिए परफेक्ट हैं. टाइट हिप्स से सेक्स अनकम्फर्टेबल हो जाता है, साथ ही व्यक्ति विभिन्न सेक्स पोजीशन भी नहीं ट्राई कर पाता. इस आसन को ऐसे किया जाता है-
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वक्षस्थल को दें सही आकार
#कामसूत्र_प्राचीन_भारतीय_काम_कला
आयुर्वेदिक उपचार : अरंडी के पत्ते, घीग्वार (ग्वारपाठा) की जड़, इन्द्रायन की जड़, गोरखमुंडी एक छोटी कटोरी, सब 50-50 ग्राम। पीपल वृक्ष की अन्तरछाल, केले का पंचांग (फूल, पत्ते, तना, फल व जड़) , सहिजन के पत्ते, अनार की जड़ और अनार के छिलके, खम्भारी की अन्तरछाल, कूठ और कनेर की जड़, सब 10-10 ग्राम। सरसों व तिल का तेल 250-250 मिलीग्राम तथा शुद्ध कपूर 15 ग्राम। यह सभी आयुर्वेद औषधि की दुकान पर मिल जाएगा।
निर्माण विधि : सब द्रव्यों को मोटा-मोटा कूट-पीसकर 5 लीटर पानी में डालकर उबालें। जब पानी सवा लीटर बचे तब उतार लें। इसमें सरसों व तिल का तेल डालकर फिर से आग पर रखकर उबालें। जब पानी जल जाए और सिर्फ तेल बचे, तब उतारकर ठंडा कर लें, इसमें शुद्ध कपूर मिलाकर अच्छी तरह मिला लें। बस दवा तैयार है। असामान्य व अविकसित स्तन
प्रयोग विधि : इस तेल को नहाने से आधा घंटा पूर्व और रात को सोते समय स्तनों पर लगाकर हलके-हलके मालिश करें।
लाभ : इस तेल के नियमित प्रयोग से 2-3 माह में स्तनों का उचित विकास हो जाता है और वे पुष्ट और सुडौल हो जाते हैं। ऐसी युवतियों को तंग चोली नहीं पहननी चाहिए और सोते समय चोली पहनकर नहीं सोना चाहिए। इस तेल का प्रयोग लाभ न होने तक करना चाहिए।
* फिटकरी 20 ग्राम, गैलिक एसिड 30 ग्राम, एसिड आफ लेड 30 ग्राम, तीनों को थोड़े से पानी में घोलकर स्तनों पर लेप करें और एक घंटे बाद शीतल जल से धो डालें। लगातार एक माह तक यदि यह प्रयोग किया गया तो 45 वर्ष की नारी के स्तन भी नवयौवना के स्तनों के समान पुष्ट हो जाएंगे।
* गम्भारी की छाल 100 ग्राम व अनार के छिलके सुखाकर कूट-पीसकर महीन चूर्ण कर लें। दोनों चूर्ण 1-1 चम्मच लेकर जैतून के इतने तेल में मिलाएं कि लेप गाढ़ा बन जाए। इस लेप को स्तनों पर लगाकर अंगुलियों से हलकी-हलकी मालिश करें। आधा घंटे बाद कुनकुने गर्म पानी से धो डालें। जो भी परिणाम मिले, उसकी सूचना कृपया हमें जरूर दें।
* छोटी कटेरी नामक वनस्पति की जड़ व अनार की जड़ को पानी के साथ घिसकर गाढ़ा लेप करें। इस लेप को स्तनों पर लगाने से कुछ दिनों में स्तनों का ढीलापन दूर हो जाता है।
* बरगद के पेड़ की जटा के बारीक नरम रेशों को पीसकर स्त्रियां अपने स्तनों पर लेप करें तो स्तनों का ढीलापन दूर होता है और कठोरता आती है।
* इन्ही के साथ सर्वोत्तम यह भी रहेगा कि रात को सोने से पहले किसी भी तेल की 10 मिनट तक मालिश करें। या तो स्वयं करें या अपने पति से कराएं, मालिश के दिनों में गेप न करें, रेगुलर करें व दो माह बाद चमत्कार देखें। स्तनों की मालिश हमेशा नीचे से ऊपर ही करें।
* स्तनों की शिथिलता दूर करने के लिए एरण्ड के पत्तों को सिरके में पीसकर स्तनों पर गाढ़ा लेप करने से कुछ ही दिनों में स्तनों का ढीलापन दूर हो जाता है। कुछ व्यायाम भी हैं, जो वक्षस्थल के सौन्दर्य और आकार को बनाए रखते हैं।
001 असगंध और शतावरी को बारीक पीसकर चूर्ण बनाकर लगभग 2-2 ग्राम की मात्रा में शहद के खाकर ऊपर से दूध में मिश्री को मिलाकर पीने से स्तन आकर्षक हो जाते हैं
002 कमलगट्टे की गिरी यानी बीच के भाग को पीसकर पाउडर बनाकर दही के साथ मिलाकर प्रतिदिन 1 खुराक के रूप में सेवन करने से स्तन आकार में सुडौल हो जाते हैं।
003 जैतून के तेल की स्तनों पर धीरे-धीरे मालिश करने से करने से स्तनों की सुन्दरता बढ़ जाती है।
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लिंग को मोटा और लंबा करने के घरेलु उपाय गोखरू
गोखरू एक देसी दवा है और ज्यादातर गर्म इलाकों में पाई जाती है। यह एक बहुत ही प्राचीन और अद्भुत जड़ी बूटी है जिसका मुख्य काम शरीर को मजबूत और कमजोर करना है। बहुत सारे शोधों में यह पाया गया है कि गोखरू टेस्टोस्टेरोन के स्तर को बढ़ाता है। वृषण और प्रोस्टेट जैसे पुरुष प्रजनन ऊतकों के विकास में टेस्टोस्टेरोन एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, साथ ही साथ माध्यमिक यौन विशेषताओं जैसे बढ़ी हुई मांसपेशियों और हड्डियों के द्रव्यमान और शरीर के बालों की वृद्धि को बढ़ावा देता है।
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Xizmatga kirish orqali siz 18 yoshdan oshganingizni tasdiqlaysiz.
