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काम संहिता🙏
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सेक्स से जुड़ी हुई प्रेम से जुड़ी हुई सभी जानकारी के लिए सन्देश भेजे जय कामदेव कामसूत्र यौन स्थानों का सच्चा गुरु ग्रंथ है। अपने यौन जीवन में विविधता लाने के तरीके खोज रहे हैं? तब आप सही जगह पर आए हैं .. !!
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हम सबको अपने जीवन में एक बार ही सही अपने से बड़ी उम्र की स्त्री से प्रेम करना चाहिए,हमें प्रेम करना चाहिए उनके मातृत्व से उनके अस्तित्व से हमें प्रेम की परिभाषा को महसूस करने के लिए उनसे प्रेम करना चाहिए,हमें समझने के लिए उनसे प्रेम करना चाहिए कि जो प्रेम की परिभाषा आज के युग में धीरे-धीरे धूमिल होती जा रही है ,प्रेम के अस्तित्व को समझने के लिए हमें अपने से बड़ी उम्र की स्त्री के साथ एक बार प्रेम करना चाहिए
यह प्रेम किसी उम्र के का मोहताज नहीं होगा यह मोहताज नहीं होगा समाज में दिए जाने वाले रिश्तो के नामों का , ये प्रेम मोहताज नहीं होगा एक दूसरे के मैसेज का, एक दूसरे के रिप्लाई का यह मोहताज नहीं होगा, एक दूसरे के समय का, यह प्रेम व्यापक रूप से खुद को परिभाषित करेगा एक पुरुष का प्रेम में स्त्री हो जाना है पुरुष के प्रेम की परिभाषा है यह प्रेम उस परिभाषा को परिभाषित करेगा........बड़ी उम्र की स्त्री जब अपने प्रेमी को अपने पुत्र के रूप में देखती है तो उसका वह प्रेम निश्चल होता है वह प्रेम जिसमें आप किसी बड़ी उम्र की स्त्री के गोद में सर रखकर थोड़ी देर सो सकें वह प्रेम जिसमें आप किसी स्त्री के कंधे पर सर रख के थोड़ी देर रो सके वह प्रेम जहां स्त्री आपको समझा सके कि आपका पुरुष होना इस बात को निर्धारित नहीं करता है कि आपकी शारीरिक संरचना क्या है बल्कि आपका पुरुष होना इस बात पर निर्भर करता है कि आप स्त्री का सम्मान किस हद तक करते हैं।
आधी रात तक ऑनलाइन रहने वाली औरतें जो कहीं ना कहीं समाज के ढकोसला से बहुत दूर जा चुकी हैं जिसे समाज में चरित्रहीन साबित करने के लिए एक भी मौका नहीं छोड़ा है ऐसी औरतें जो अकेली नहीं होती है जो तन्हा नहीं होती है बल्कि ये स्त्री तो उदास होती है इनकी उदासी की वजह इन्हें खुद नहीं पता, इनके पास एक भला पूरा परिवार है एक संस्कारी पति,मासूम और बेहद प्यारे बच्चे हैं,लेकिन फिर भी ये अधूरी है ऐसी स्त्री जब किसी के साथ प्रेम में होती हैं तो हो उनकी चरित्रहीनता प्रमाण नहीं है बल्कि ये तो उनसे जुड़े हुए पुरुषों की हार है हम समाज के दोहरे चरित्र को आज तक समझ नहीं पाए हमने स्त्री की संज्ञा में चरित्रवान का विशेषण अपने आप लगाया है लेकिन इस चरित्र की सीमा कौन तय करेगा, हमने ये कभी नही सोचा,
कभी मौका मिले तो जरूर प्रेम करना किसी ऐसी स्त्री से जो उम्रदराज़ हो 💐
प्रियतमा यह सिर्फ आपके लिए 💋💋💋
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जब कोई लड़की अपने परिवार वालों के खिलाफ जाकर प्रेम-विवाह करती है और भगवान ना करें कभी उसकी लाइफ में कोई प्रॉब्लम आती है तो.....
अपने घर वालों से शिकायत करने का उसका अधिकार नहीं रह जाता।
लेकिन,
कभी कभी माँ बाप के फैसले भी गलत हो जाते है।
और बहुत सी ऐसी बेटियां है जो उनकी इज्जत बचाने के चक्कर मे घुट घुट के मरती रहती है..
शायद ये जिंदगी मौत से भी बदतर हो जाती है...
इसीलिए मेरा मानना है कि.....
जब बेटियों को विदा किया करो तो उन्हें बताया करो कि हमने इंसान का बच्चा देखकर रिश्ता तय किया है, अगर जानवर निकल जाये तो वापसी का दरवाजा खुला है.....
उसको छोड़कर वापस आ जाना क्योंकि शादी दोबारा हो सकती है और ज़िन्दगी एक बार ही मिलती है.....
उसे खुदगर्ज़ों और लालची इंसानों के लिए मत गंवाना।
सभी माता-पिता से मेरी करबद्ध प्रार्थना है की बेटियां आखिर तक साथ देती है तो माता-पिता का भी परम कर्तव्य बनता है की लोकलाज एक तरफ रख कर बेटियों का हर हाल में साथ दे...
🙏🙏🙏🏻🙏🏻
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मासिक धर्म के 4 दिवसों में संभोग से पुरुष रुग्णता को प्राप्त होता है।
पांचवीं रात्रि में संभोग से कन्या,
छठी रात्रि में पुत्र,
सातवीं रात्रि में बंध्या पुत्री,
आठवीं रात्रि के संभोग से ऐश्वर्यशाली पुत्र,
नौवीं रात्रि में ऐश्वर्यशालिनी पुत्री,
दसवीं रात्रि के संभोग से अतिश्रेष्ठ पुत्र,
ग्यारहवीं रात्रि के संभोग से सुंदर पर संदिग्ध आचरण वाली कन्या,
बारहवीं रात्रि से श्रेष्ठ और गुणवान पुत्र,
तेरहवीं रात्रि में चिंतावर्धक कन्या एवं
चौदहवीं रात्रि के संभोग से सद्गुणी और बलवान पुत्र की प्राप्ति होती है।
पंद्रहवीं रात्रि के संभोग से लक्ष्मीस्वरूपा पुत्री और सोलहवीं रात्रि के संभोग से गर्भाधान होने पर सर्वज्ञ पुत्र संतान की प्राप्ति होती है।
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#महिलाओं की #योनि #चाटने के #फायदे
संभोग के दौरान योनि चाटना स्त्रियों की योनि चाटने से महिला काफी ज्यादा उत्तेजित होती है तथा योनि चाटने से रोगों से मुक्ति पा सकते हैं |
बहुत सारे लोगों का मानना होता है कि योनि चाटना बिल्कुल गलत होता है, क्योंकि उनका मानना होता है कि महिला के योनि में विविध प्रकार के विषैले पदार्थ होते हैं जिसके कारण यह सारे पदार्थ पुरुष के मुंह में जा सकते हैं |
जबकि महिला के योनि में किसी भी प्रकार के विषैले पदार्थ नहीं होते हैं, महिला जब हर रोज अपने शरीर को साफ करती है तब योनि से सारे पदार्थ बाहर निकल जाते हैं | इसलिए योनि चाटना बहुत ही फायदेमंद होता है,
हर एक महिला की ख्वाइश होती है कि उसके पार्टनर ने उसकी योनि को अच्छे से चाटना चाहिए। जब व्यक्ति संभोग करता है तो उन्हें महिलाओं की योनि जरूर चाटनी चाहिए। संभोग करते वक्त महिलाओं की योनि चाटने से उनका आनंद द्विगुणित हो जाता है।
योनि चूसने से महिलाओं को और भी ज्यादा मजा आता है। जब कोई व्यक्ति महिलाओं की योनि चूसता है तो संभोग करने में और भी ज्यादा मजा आता है। महिलाओं को ऐसे लगता है कि उसके पार्टनर ने उसकी योनि बहुत अच्छे से चूस के चाटनी चाहिए।
#योनि चाटने के फायदे :
आयुर्वेद के अनुसार महिलाओं की योनि चाटने से चूसने से हार्मोनल सिस्टम और सेल्स के रोगी ठीक होते है | योनि को चाटने से मानसिक दुर्बलता दूर होती है |
रात में या दिन में नींद ना आने की तकलीफ अनिंद्रा के कुछ लोगों ने यह भी स्वीकार किया है कि महिला कि योनी चाटने से चूसने से और उसका स्त्राव पीने के बाद उनकी अनिद्रा की बीमारी काफी हद तक ठीक हो गई है |
यह सारे फायदे हैं योनि चाटने के बारे में जिस से कि आप कई सारी बीमारियों से मुक्ति पा सकते हैं |
परंतु कुछ और चीजों पर ध्यान जरुर देना चाहिए आपको किसी भी अंजान स्त्री की योनि को चाटने की राय कभी नहीं देनी चाहिए क्योंकि यह जरुरी नहीं है कि वह स्त्री की योनि अच्छी हो ।
योनि से यूरिन का स्त्राव होता है इस यूरिन में काफी गंदे-गंदे बैक्टीरिया से पाए जाते हैं और बैक्टीरिया से आपको हानि भी हो सकती है योनि को साफ रखना काफी आवश्यक है क्योंकि योनि को चाटते समय अगर योनी साफ़ रहेगी तो आपको किसी बीमारी के होने का खतरा नहीं है इसलिए योनि चाटने समय इस चीज का ध्यान जरुर रखें |
अगर व्यक्ति कोई तनाव में होता है तो संभोग करते वक्त व्यक्ति का तनाव पूरी तरह से निकल जाता है। व्यक्ति अगर महिलाओं की योनि चाटता है तो उसका तनाव काफी प्रमाण में कम हो जाता है।
योनि चाटना यह कोई दवाई से कम नहीं होता है। योनि चाटने से बहुत से रोग ठीक हो जाते हैं। जैसे व्यक्ति कोई मानसिक विकार हो तो योनि चूसने से वह बहुत प्रमाण में ठीक हो जाता है। योनि चाटने से व्यक्ति के काफी से रोग और समस्या है कम हो जाते हैं। व्यक्ति का चिड़चिड़ापन व्यक्ति को ज्यादा क्रोध आना या फिर व्यक्ति को किसी प्रकार में मानसिक दुर्बलता होना या फिर कोई मानसिक भय होना इत्यादी रोग और समस्याएं योनि चाटने या फिर उसे चूसने से ठीक हो जाते हैं।
कई व्यक्तियों को रात में या फिर दिन में नींद नहीं आती है। नींद ना आने से उनका तनाव बढ़ जाता है और फिर वह चिड़चिड़ा सा महसूस करते हैं उनके स्वभाव में भी चिड़चिड़ापन आ जाता है। इस अनिद्रा के बीमारी को आप छुड़ाना चाहते हो तो आपने अपने पार्टनर की योनि जरूर चाटनी चाहिए।
अपनी जीभ से महिलाओं के योनि को पूरे मज़े से और गहराई तक चाटनी चाहिए। इससे आप के रोग तो ठीक होंगे बल्कि आपके पार्टनर को भी उतना ही ज्यादा मज़ा आएगा। अगर आपके पार्टनर को आप अच्छे से मजा देते हो तो आप को संभोग करने में भी बहुत ज्यादा मजा आता है। योनि चाटने से महिलाएं उनकी चरम आनंद तक पहुंच जाती है।
नोट :- उपरोक्त लेखनी अध्यन पर आधारित है अतः आप अपने विवेकानुसार ही प्रयोग करें ।
धन्यवाद आपका दिल विश का प्रियतम
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💕💕 मैथुन - कर्म का पवित्र विधान 💕💕
🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸
🌺 पति अपनी कामना के अनुसार पत्नी को अभिमंत्रित करके जैसी संतान की इच्छा हो, उसके अनुसार खीर आदि भोजन करने के पश्चात उसके साथ शयन करे। यह क्रम समझना चाहिए।
💘 शयन काल में ' अमोऽहमस्मि' इत्यादि मंत्र से पत्नी का आलिंगन करें। इस मंत्र का भाव इस प्रकार है - देवि! मैं प्राण हूँ, तुम वाक हो। मैं साम हूँ, तुम ऋत हो। मैं आकाश हूँ, तुम पृथ्वी हो। अतः आओ हम दोनों दम्पति एक दूसरे का आलिंगन करें। एक साथ रेतस धारण करें। जिससे हमें पुरुषत्व विशिष्ट पुत्र का लाभ हो।
🌺 तत्पश्चात पत्नी के दोनों जांघों को फैलाएं। उस समय यह मंत्र पढ़ना चाहिए - विजिहीथां द्यावापृथिवी इति। हे उरू स्वरूप आकाश और पृथ्वी! तुम दोनों विलग होओ।
💘 इसके बाद पत्नी की योनि में अपना लिंग स्थापित करके उसके मुँह से मुँह मिलाकर अनुलोम क्रम से पत्नी के सम्पूर्ण शरीर का (केशादि पादान्त) तीन बार स्पर्श चुंबन करें। इस मार्जन काल में 'विष्णुर्योतिकलकपयतु' इत्यादि मंत्र का पाठ करें। जिसका भाव इस प्रकार है - प्रिय! सर्व व्यापी भगवान विष्णु तेरी जननेंद्रिय को पुत्र की उत्पत्ति में समर्थ बनावें। भगवान सूर्य तेरे अंगो को विभाग पूर्वक पुष्ट एवं दर्शनीय बनावें। विराट पुरुष भगवान प्रजापति मुझमें अभिन्न रुप में स्थित हों, तुझमे वीर्य का. आधान करें। भगवान घाता मुझमें अभिन्न भाव से स्थित हो तेरे गर्भ का धारण एवं पोषण करें। देवि! जिसकी भूरि भूरि स्तुति की जाती है, वह सिनी वाली (जिसमें चंद्रमा की एक कला शेष रहती है, वह अमावस्या) तुम हो, तुम यह गर्भ धारण करो। देव अश्विनी कुमार (सूर्य और चंद्रमा) अपने किरण रुपी कमलों की माला धारण करके मुझमें अभिन्न रुप में स्थित हो, तुझमें गर्भ का आदान करें। 💕💕
🌹🌹बृहदारण्यकोपनिषद ❤️❤️ 6/4/20- 2 1 🌺
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इस्लाम में एक बात की तो तारीफ करनी होगी
कि अगर सास तंग करे..तो बहू भी ससुर से निकाह करके सास को मजा चखा सकती है..........🤷♂️😃💃
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कार्य प्रसंग में मंत्री, गृह कार्य में दासी, भोजन कराते वक्त माता, रति प्रसंग में रंभा, धर्म में सानुकूल और क्षमा करने में धरित्री, इन छः गुणों से युक्त #पत्नी मिलना दुर्लभ हैं !!!
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Sex करते समय औरतों लड़कियों की गान फाड़ने का सपना देखने वाला खुद को मर्द कहने वाले पुरुष की खुद की गान फटने लगती है ज़ब लड़की शादी करने की जिद करती है
प्रेम उसी से करो जिस से शादी करने की ताकत हो
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सफलता लिंग की तरह होती
तो प्रयास योनि की तरह
और Boobs.....
Boobs motivation का काम करता
To be conti... Nude 😊
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हवस और वासना मे पत्नी की मल मूत्र वाली जगह भी ख़ुशी ख़ुशी चाटने वाला मर्द अपने ही गंदे वीर्य से पैदा होने वाले बच्चे के मल मूत्र कर देने मे उसे साफ करने मे बीवी या माँ या बहन की तरफ देखता है
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बेटी को ससुराल मे प्यारसम्मान मिलना चाहिए but अपने घर के लिए योग्य सुशील घरेलु संस्कारी बहु रूपी नौकरानी चाहिए फिर भले ही खुद की बेटी अपने ससुराल मे मुँह चलाती हो और ससुराल वालो को कुछ नहीं समझती हो
सोच बदलिए
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अंतिम जीत स्त्री की हो जाती है।
💐💐💐💐💐💐💐💐💐
एक स्त्री किसी पुरुष को कितना ही प्रेम करती हो तो भी कभी कोई स्त्री ने पुरुष के प्रति निवेदन नहीं किया है कि मैं तुम्हें प्रेम करती हूं। स्त्री कितना ही प्रेम करती हो तो भी वह प्रतीक्षा करती है कि पुरुष निवेदन करे। स्त्री पैसिव है, पैसिव का मतलब है, वह प्रतीक्षा कर सकती है--आक्रामक नहीं हो सकती है, आक्रमण नहीं करेगी, पहल नहीं करेगी। पुरुष को ही आक्रमण करना होगा, पुरुष को ही पहल करनी होगी।
पुरुष को ही पहला कदम उठाना होगा। स्त्री प्रतीक्षा करेगी। और बड़ी हैरानी की बात है, अगर स्त्री पहल करे और आक्रमण करे तो पुरुष के लिए कभी प्रीतिकर न हो पाएगी। क्योंकि आक्रमण करने वाली और पहल करने वाली स्त्री में पुरुष को पुरुष के ही दर्शन दिखाई देंगे। उसे स्त्री नहीं मिल सकेगी फिर वहां, स्त्री अनंत प्रतीक्षा है--मौन प्रतीक्षा, आक्रामक नहीं, अनाक्रामक। पुरुष आक्रमण है, एग्रेशन है।
वह जाएगा, पहल करेगा। लेकिन अगर कोई पुरुष प्रतीक्षा करे तो कोई स्त्री उसे पसंद नहीं करेगी, कभी प्रेम नहीं कर पाएगी। इसलिए कोई स्त्री ऐसे पुरुष को प्रेम नहीं कर पाती जो उसके पीछे छाया बन कर चलने लगे, उससे कभी प्रेम नहीं कर पाएगी क्योंकि उसमें उसे एक स्त्री ही दिखाई पड़ेगी।
मैं यह कह रहा हूं कि पॅाजिटिव, निगेटिव के; एक्टिव और पैसिव के, सक्रिय और निष्क्रिय के भेद को समझ लेना बहुत जरूरी है। हम एक पत्थर को पानी में फेंकते हैं, तो पत्थर पानी में गिरता है, फौरन गड्ढा बना लेता है। पत्थर एक्टिव है, सक्रिय है और पानी पैसिव है, वह फौरन गड्ढा बन जाता है। लेकिन बड़ा मजा यह है कि पत्थर नीचे गया कि पानी फिर अपनी जगह पर वापस लौट आता है। पैसिविटी, निष्क्रियता शक्तिहीन नहीं है।
अगर एक पहाड़ से पानी का झरना गिरता हो और नीचे पहाड़ पर पत्थर की चट्टानें पड़ी हों तो आज पत्थर की चट्टानें बहुत शक्तिशाली मालूम पड़ेंगी, क्योंकि झरना उन पर बिखर-बिखर जाएगा, टूटेगा और बिखर जाएगा और चट्टानें अकड़ी खड़ी रहेंगी; लेकिन सौ साल बाद झरना बह रहा होगा, चट्टानें रेत हो चुकी होंगी, उनका कोई पता न रह जाएगा। वह जो पहले दिन बहुत एग्रेसिव मालूम पड़ी थी चट्टानें, टूटने को बिल्कुल राजी नहीं, और पानी जो बिल्कुल ही विनम्र मालूम पड़ा था, कि पत्थर ने जैसा कहा वैसा हो गया था, वह सौ साल में जीत गया है। पुरुष की जीत प्राथमिक हो सकती है, अंतिम जीत स्त्री की हो जाती है
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वह चाहत के नगमें वह वादें वह कसमें।
कहाँ है बताओं सनम जी मुझे अब।।
तुम्हारी प्रतीक्षा जीवन यह बीता।
बताओ कब आओगे मेरे सनम अब।।
वह चाहत----------
न जाने कहाँ है वह सावन भी बैरी।
ना जाने कहाँ सनम वह बहारें।।
खिजाओ में बिखरी है यादें तुम्हारी।
बहारों को भी है प्रतीक्षा तुम्हारी।।
वह चाहत ---------
बताओ मुझे क्या करें हम यहाँ पर।
गुजरारे हम कैसे विरहा की रातें।।
यह जीवन भी प्रियतम अविरल इक धारा।
न कटती है काटें यह विरहा की रातें।।
वह चाहत---------
आंखों में सूरत है तेरी ओ प्रियतम।
भरे उसमें आंसू के गहरे यह सागर।।
जहाँ पर गुजारे थे हमने वो हर पल।
ओ सूनी है राहें वह सूना है पनघट।।
वह चाहत----------
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*मैं मानता हूँ पहले नारी अबला थी।*
माँ बाप से एक चिठ्ठी को मोहताज़।
*और बड़े परिवार के काम का बोझ।*
अब ऐसा है क्या ?
◾*सारी आज़ादी।*
मनोरंजन हेतु TV,
*कपड़े धोने के लिए वाशिंग मशीन,*
मसाला पीसने के लिए मिक्सी,
*रेडिमेड आटा,*
पानी की मोटर,
*पैसे हैं तो नौकर चाकर,*
घूमने को स्कूटी या कार
*फिर भी और आज़ादी चाहिये।*
◾आखिर ये मृगतृष्णा का अंत कब और कैसे होगा ?
*घर में कोई काम ही नहीं बचा।*
दो लोगों का परिवार।
*उस पर भी ताना।।*
कि रात दिन काम कर रही हूं।
*ब्यूटी पार्लर आधे घंटे जाना आधे घंटे आना और एक घंटे सजना नहीं अखरता।*
लेकिन दो रोटी बनाना अखर जाता है।
*कोई कुछ बोला तो क्यों बोला ?*
*बस यही सब वजह है घर बिगड़ने की।*
खुद की जगह
घर को सजाने में ध्यान दे तो ये सब न हो।
*समय होकर भी समय कम है परिवार के लिये।*
ऐसे में परिवार तो टूटेंगे ही।
*पहले की हवेलियां सैकड़ों बरसों से खड़ी हैं।*
और पुराने रिश्ते भी।
◾*आज बिड़ला सीमेन्ट वाले मजबूत घर कुछ दिनों में ही धराशायी।*
और रिश्ते भी महीनों में खत्म।
*इसका कारण है,*
घरों को बनाने में भ्रष्टाचार
और रिश्तों मे ग़लत सँस्कार।
*खैर हम तो जी लिये।*
सोचे आनेवाली पीढी।
*घर चाहिये या दिखावे की आज़ादी ?*
दिनभर घूमने के बाद रात तो घर में ही महफूज़ रहती है।
🙏🏻
◾*मेरी बात कइयों को हो सकता है बुरी लगी हो।*
विशेषकर महिलाओं को।
*लेकिन सच तो यही है।*
समाज को छोड़ो,
*अपने इर्द गिर्द पड़ोस में देखो।*
सब कुछ साफ दिख जायेगा।
*यही हर समाज के घर घर की कहानी है।*
जो युवा बहनें हैं और जिनको बुरा लगा हो वो थोड़ा इंतजार करो।
*क्योंकि सास भी कभी बहू थी के समय में देरी है।*
लेकिन आयेगा ज़रुर 🙏🏻
*मुझे क्या है... जो जैसा सोचेगा
सुख दुःख उन्हीं के खाते में आना है 🙏🏻*
बस तकलीफ इस बात की है कि
हमारी ग़लती से बच्चों का घर खराब हो रहा है।
*वे नादान हैं।*
क्या हम भी हैं ?
◾*शराब का नशा मज़ा देता है।*
लेकिन उतरता ज़रुर है।
*फिर बस चिन्तन ही बचता है कि क्या खोया क्या पाया ?*
पैसों की और घर की बर्बादी।
*उसके बाद भी शराब के चलन का बढ़ना आज की आधुनिक शिक्षा को दर्शाता है।*
अपना अपना घर देखो सभी।
*अभी भी वक्त है।*
नहीं तो व्हाटसप में आडियो भेजते रहना ।
जग हंसाई के खातिर।
*कोई भी समाजसेवक कुछ नहीं कर पायेगा।*
सिवाय उपदेश के।
◾*आपकी हर समस्या का निदान केवल आप ही कर सकते हो।*
सोच के ज़रिये।
*रिश्ते झुकने पर ही टिकते है।*
तनने पर टूट जाते है।
*इस खूबी को निरक्षर बुज़ुर्ग जानते थे।*
आज का मूर्ख शिक्षित नहीं।
*काश सब जान पाते।*
*बुरा लगा हो तो क्षमा । कृपया इसे अपने पर ना लेवे
🙏🏻🙏🏻
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गृहस्थी की नींव ही कमजोर पड़ रही है
बचाने के लिए हम ही तैयार नही है
आज हर दिन किसी न किसी का घर खराब हो रहा है ।
*इसके कारण और जड़ पर कोई नहीं जा रहा।*
*1, माँ बाप की अनावश्यक दखलंदाज़ी।*
*2, संस्कार विहीन शिक्षा*
*3, आपसी तालमेल का अभाव*
*4, ज़ुबान*
*5, सहनशक्ति की कमी*
*6, आधुनिकता का आडम्बर*
*7, समाज का भय न होना*
*8, घमंड झूठे ज्ञान का*
*9, अपनों से अधिक गैरों की राय*
*10, परिवार से कटना।*
*मेरे ख्याल से बस यही 10 कारण हैं शायद ?*
पहले भी तो परिवार होता था,
*और वो भी बड़ा।*
लेकिन वर्षों आपस में निभती थी ।
*भय भी था, प्रेम भी था, रिश्तों की मर्यादित , जवाबदेही भी।*
पहले माँ बाप ये कहते थे कि मेरी बेटी गृह कार्य मे दक्ष है।
◾और अब मेरी बेटी नाज़ो से पली है आज तक हमने तिनका भी नहीं उठवाया।*
तो फिर करेगी क्या शादी के बाद ?
*शिक्षा के घमँड में आदर सिखाना और परिवार चलाने के सँस्कार नहीं देते।*
माँएं खुद की रसोई से ज्यादा बेटी के घर में क्या बना इसपर ध्यान देती हैं।
*भले ही खुद के घर में रसोई में सब्जी जल रही हो।*
ऐसे मे वो दो घर खराब करती है।
*मोबाईल तो है ही रात दिन बात करने के लिए।*
परिवार के लिये किसी के पास समय नहीं।
*या तो TV या फिर पड़ोसन से एक दूसरे की बुराई या फिर दूसरे के घरों में तांक झांक।*
जितने सदस्य उतने मोबाईल।
*बस लगे रहो।*
बुज़ुर्गों को तो बोझ समझते हैं।
*पूरा परिवार साथ बैठकर भोजन तक नहीं कर सकता।*
सब अपने कमरे में।
*वो भी मोबाईल पर।*
बड़े घरों का हाल तो और भी खराब है।
*कुत्ते बिल्ली के लिये समय है।*
परिवार के लिये नहीं।
◾सबसे ज्यादा गिरावट तो इन दिनों महिलाओं में आई है।*
दिन भर मनोरँजन,
*मोबाईल,*
स्कूटी..
*समय बचे तो बाज़ार*
*और ब्यूटी पार्लर।*
जहां घंटों लाईन भले ही लगानी पड़े ।
भोजन बनाने या परिवार के लिये समय नहीं।
*होटल रोज़ नये नये खुल रहे हैं।*
जिसमें स्वाद के नाम पर कचरा बिक रहा है।
*और साथ ही बिक रही है बीमारी और फैल रही है घर में अशांति।*
क्योंकि घर के शुद्ध खाने में पौष्टिकता तो है ही प्रेम भी है।
*लेकिन ये सब पिछड़ापन हो गया है।*
आधुनिकता तो होटलबाज़ी में है।
*बुज़ुर्ग तो हैं ही घर में चौकीदार।*
◾पहले शादी ब्याह में महिलाएं गृहकार्य में हाथ बंटाने जाती थी।
*और अब नृत्य सीखकर।*
क्योंकि महिला संगीत मे अपनी प्रतिभा जो दिखानी है।
*जिस की घर के काम में तबियत खराब रहती है वो भी घंटों नाच सकती है।👌🏻*
घूँघट और साङी हटना तो ठीक है।
*लेकिन बदन दिखाऊ कपड़े ?*
ये कैसी आधुनिकता है ?
*बड़े छोटे की शर्म या डर रही है क्या ?*
वरमाला में पूरी फूहड़ता।
*कोई लड़के को उठा रहा है।*
कोई लड़की को उठा रहा है
ये सब क्या है ?
*और हम ये तमाशा देख रहे है मौन रहकर।*
सब अच्छा है 👌🏻
◾ *माँ बाप बच्ची को शिक्षा दे रहे है।*
ये अच्छी बात है 🙏🏻
*लेकिन उस शिक्षा के पीछे की सोच ?*
ये सोच नहीं है कि परिवार को शिक्षित करे।
*बल्कि दिमाग में ये है कि कहीं तलाक वलाक हो जाये तो अपने पाँव पर खड़ी हो जाये।*
कमा खा ले।
*जब ऐसी अनिष्ट सोच और आशंका पहले ही दिमाग में हो तो रिज़ल्ट तो वही सामने आना है।*
साइँस ये कहता है कि गर्भवती महिला अगर कमरे में सुन्दर शिशु की तस्वीर टांग ले तो शिशु भी सुन्दर और हृष्ट पुष्ट होगा।
*मतलब हमारी सोच का रिश्ता भविष्य से है।*
बस यही सोच कि पांव पर खड़ी हो जायेगी, गलत है ।
*संतान सभी को प्रिय है।*
लेकिन ऐसे लाड़ प्यार में हम उसका जीवन खराब कर रहे हैं।
◾*पहले स्त्री छोड़ो, पुरुष भी कोर्ट कचहरी से घबराते थे।*
और शर्म भी करते थे।
*अब तो फैशन हो गया है।*
पढे लिखे युवा तलाकनामा तो जेब मे लेकर घूमते हैं।
*पहले समाज के चार लोगों की राय मानी जाती थी।*
और अब माँ बाप तक को जूते पर रखते है।
*अगर गलत है तो बिना औलाद से पूछे या एक दूसरे को दिखाये रिश्ता करके दिखाओ तो जानूं ?*
ऐसे में समाज या पँच क्या कर लेगा,
सिवाय बोलकर फ़जीहत कराने के ?
◾*सबसे खतरनाक है औरत की ज़ुबान।*
कभी कभी न चाहते हुए भी चुप रहकर घर को बिगड़ने से बचाया जा सकता है।
*लेकिन चुप रहना कमज़ोरी समझती है।*
आखिर शिक्षित है।
*और हम किसी से कम नहीं वाली सोच जो विरासत में लेकर आई है।*
आखिर झुक गयी तो माँ बाप की इज्जत चली जायेगी।
*इतिहास गवाह है कि द्रोपदी के वो दो शब्द ..*
*अंधे का पुत्र भी अंधा* ने महाभारत करवा दी।
*काश चुप रहती।*
गोली से बड़ा घाव बोली का होता है।
◾*आज समाज सरकार व सभी चैनल केवल महिलाओं के हित की बात करते हैं।*
पुरुष जैसे अत्याचारी और नरभक्षी हों।
*बेटा भी तो पुरुष ही है।*
एक अच्छा पति भी तो पुरुष ही है।
*जो खुद सुबह से शाम तक दौड़ता है, परिवार की खुशहाली के लिये।*
खुद के पास भले ही पहनने के कपड़े न हों।
*घरवाली के लिये हार के सपने देखता है।*
बच्चों को महँगी शिक्षा देता है।
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◾इमोशनली स्ट्रॉन्ग बनें-
ग़ुस्सैल पत्नी को क़ाबू में रखने और उसके साथ निभाने के लिए आपका चुप रहना बहुत ज़रूरी है. इसके लिए आपका भावनात्मक रूप से मज़बूत होना आवश्यक है. अगर आप ऐसा कर पाते हैं, तो उसे एहसास दिला सकते हैं कि उसका क्रोधित होना सिवाय ऊर्जा को ज़ाया करने के और कुछ नहीं है. लेकिन अगर वह आपको भी ग़ुस्सा दिलाने में क़ामयाब हो जाती है, तो इसका सीधा-सा अर्थ है कि उसका आपके इमोशंस पर कंट्रोल है.
मनोवैज्ञानिक आभा के अनुसार, “बेहतर होगा कि उसे इमोशंस पर कंट्रोल करने की सलाह देने की बजाय अपना मुंह बंद रखें और निरंतर मुस्कुराते रहें. हो सकता है शुरू-शुरू में आपका मुस्कुराना उसे और ग़ुस्सा दिला दे, क्योंकि उसे लग सकता है कि आप उसका मज़ाक उड़ा रहे हैं या उसे गंभीरता से नहीं ले रहे हैं, पर धीरे-धीरे आपकी यही बात उसे ग़ुस्से पर क़ाबू रखने को मजबूर कर देगी.
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गुस्सैल पत्नी के साथ कैसे निभाएं
How To Deal With Aggressive Wife
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ग़ुस्सा आना इंसानी स्वभाव का हिस्सा है. हम में से हर किसी को कभी न कभी, किसी न किसी बात पर ग़ुस्सा आता ही है. लेकिन जब यही ग़ुस्सा स्वभाव ही बन जाए, तो रिश्तों पर असर डालता है. पति-पत्नी के रिश्ते में भी कई बार ऐसा देखा गया है कि किसी एक का मिज़ाज ज़्यादा गर्म होता है, ऐसे में रिश्ते में सामंजस्य बनाए रखने के लिए दूसरे पार्टनर (How To Deal With Aggressive Wife) पर यह ज़िम्मेदारी बढ़ जाती है कि वो अपने ग़ुस्सैल पार्टनर का साथ समझदारी से निभाए.
ग़ुस्से से निपटना एक चुनौती है, विशेषकर जब वो वैवाहिक जीवन में दरार उत्पन्न करने की वजह बन रहा हो. पत्नी अगर ग़ुस्सैल है, तो भी उसके साथ निभाना पड़ेगा ही, इसके लिए ज़रूरी है कि कुछ ख़ास बातों का ख़्याल रखा जाए, ताकि उसके साथ निभाना आसान हो जाए और आपके रिश्तों में कटुता भी न आए.
◾जानने का प्रयास करें कि किस बात से वह नाराज़ होती है- पति-पत्नी का एक-दूसरे के स्वभाव को जानना बेहद ज़रूरी है. पत्नी हर बात पर तो क्रोधित नहीं होती होगी, ज़ाहिर है बिना वजह कोई नहीं भड़कता. उन बातों और स्थितियों पर ग़ौर करें और उनका आकलन करें, जिनसे आपकी पत्नी को ग़ुस्सा आता है. अगर उन्हें समझ लिया जाए और ऐसी स्थिति उत्पन्न होने से बचाया जा सके, तो पत्नी के ग़ुस्से से सामना करने से बचा जा सकता है.
◾अपने व्यवहार को चेक करते रहें-
हो सकता है आपकी कुछ ऐसी आदतें और व्यवहार हों, जो उसे नापसंद हो. आपके लिए उन आदतों व व्यवहार को बदलना बेशक मुमकिन न हो, पर पत्नी के सामने वे काम या बातें न ही करें, जिनसे उसके अंदर खीझ पैदा होती हो.
◾ग़लती मान लें-
ग़लतियां सबसे होती हैं, पत्नी चाह रही है कि आप अपनी ग़लती मान लें, तो इसमें बुराई ही क्या है? इस तरह उसे भी अच्छा लगेगा और आपको भी उसके क्रोध से जल्दी छुटकारा मिल जाएगा. जब भी बात ग़लती की हो, तो अपने ईगो को एक तरफ़ रख दें. बात तुरंत संभल जाएगी.
◾उसकी बात सुनें-
वह शायद इसलिए क्रोधित हो रही हो कि कोई भी उसकी बात सुनने को तैयार नहीं है. न ऑफिस में बॉस, न घर में बच्चे और न ही आप. इस दुनिया में अनेक लोग इसी वजह से डिप्रेशन में रहते हैं कि उन्हें सुनने-समझनेवाला कोई नहीं है. जब वह क्रोधित हो, तो उसकी स्थिति व मानसिक अवस्था को समझकर ही उसकी बात सुन लें.
◾शांत होने का समय दें-
जब आपको लगे कि आपकी पत्नी को ग़ुस्सा आ रहा है, तो कोई प्रतिक्रिया या उसे चुप कराने की कोशिश करने की बजाय उसे शांत होने का व़क्त दें. बीच में बोलने या उसे बुरा कहने से बात और बढ़ेगी ही. हो सकता है आप उसकी बात न सुनते हों, इसलिए उसे अधिक ग़ुस्सा आता हो. वह जो भी कहना चाहती है, अगर आप उसे वह कहने का मौक़ा दें, उसकी बातों को ध्यान से सुनें, उसकी राय को महत्व दें, तो हो सकता है उसे क्रोध का सहारा न लेना पड़े. उसे स्पेस दें, ताकि उसे अपनी ग़लतियों का एहसास हो और हो सकता है, वह आपसे आकर ‘सॉरी’ भी कह दे.
मनोवैज्ञानिक स्मिता शाह का मानना है कि जिस इंसान को बहुत ज़्यादा ग़ुस्सा आता है या जो एकदम भड़क उठता है, वह उतनी ही जल्दी शांत भी हो जाता है. इसलिए अगर किसी बात पर आपकी पत्नी का पारा गरम हो गया है, तो उसे शांत होने का समय दें. हालांकि ऐसा करना मुश्किल है, पर कोशिश करें कि उस समय आपके चेहरे पर एक मुस्कान बनी रहे. फिर देखिए कैसे आपकी पत्नी शांत हो जाएगी! हो सकता है कि वह शर्मिंदगी भी महूसस करे.
◾धैर्य बनाए रखें-
अपनी ग़ुस्सैल पत्नी के साथ निभाने के लिए आपको धैर्य बनाए रखना होगा. आपको कई बार इस बात की हैरानी भी होगी कि आख़िर इतनी छोटी-सी बात पर पत्नी को ग़ुस्सा क्यों आया या वह इस तरह से रिएक्ट क्यों कर रही है. लेकिन ऐसे में उसे रोकने या टोकने का मतलब होगा उसके ग़ुस्से को और बढ़ाना. बेहतर यही होगा कि अपना धैर्य न खोएं. हो सके तो उसके सामने से हट जाएं या दूसरे कमरे में चले जाएं. इससे कम से कम आपकी सहनशीलता तो आपका साथ नहीं छोड़ेगी.
◾घर से बाहर चले जाएं-
अगर वह बेहद ग़ुस्से में हो, तो अच्छा यही होगा कि आप घर से बाहर चले जाएं. जब तक आप वापस लौटेंगे, वह शांत हो चुकी होगी. पर अगर उसे किसी और पर ग़ुस्सा आ रहा है, तो आप दोनों ही वॉक पर चले जाएं. इससे उसे और आप दोनों को ही रिलैक्स होने में मदद मिलेगी. आमतौर पर पत्नी को यह बात अच्छी लगती है कि उसका पति उसे सपोर्ट कर रहा है. अगर आपकी पत्नी किसी मुद्दे पर ग़लत भी हो, तो ग़ुस्से के व़क्त उसकी आंखें खोलने का या बहस करने का प्रयास न करें, बल्कि सही व़क्त का इंतज़ार करें. अगर उसे लगता है कि उसका पति उसे सपोर्ट कर रहा है, तो उसे बहुत तसल्ली होगी और उसके हार्मोंस भी संतुलित होंगे, जिससे उसे अपने क्रोध पर नियंत्रण करने में मदद मिलेगी.
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दिसम्बर में महीने में शादी करने से सबसे बड़ा नुकसान, एक महीने में ही बीवी एक साल पुरानी हो जाती है!!
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पुरुष घटिया है उसने हमेशा स्त्री को सेक्स की नजर से देखा है। उसने हमेशा स्त्री को सिर्फ विस्तर की चादर समझा है ।
परंतु आपमें से किस किस ने देखा है की कुछ पुरुष और स्त्री जो उपरोक्त बात कहते हैं की कुछ गलत पुरुष को छोड़कर आपने देखा है की स्त्री को घसीटते हुए होटल के कमरे में ले जाते ? आपने देखा है की बंदूक की नोक पर मुस्कुराती हुई नंगी सेल्फी लेते हुए ? आपने देखा है वीडियो सेक्स की बनाते समय लड़की डर से कांप रही है ? आपने देखा है की चैट में जबरदस्ती नंगी फोटो भेजते हुए ? क्या अपने देखा है की फ्लेवर की कंडोम जबरदस्ती मुंह में चूसते हुए,अगर जबरदस्ती है तो दांत काट सकती है न।
फिर कहते हो की मर्द धोखेबाज है।
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Xizmatga kirish orqali siz 18 yoshdan oshganingizni tasdiqlaysiz.
