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क्या आप जानते हो?
ईद क्यों मनाई जाती है ??
जिस व्यक्ति ने इस्लाम की स्थापना की थी उस व्यक्ति का नाम था मोहम्मद
इस पैगंबर मोहम्मद के घर के सामने एक घर था जिसके अंदर एक व्यक्ति रहता था उसका नाम था अबू बकर।
इस आबू बकर की 6 साल की बेटी थी जिसका नाम था आयशा। मोहम्मद ने एक बार आयशा को घर के बाहर खेलते हुए देख लिया मोहम्मद को आयशा बहुत भा गई तब मोहम्मद की उम्र 56 साल थी।
मोहम्मद ने दूसरे दिन आयशा के पिता अबू बकर के पास जाकर कहा की रात को मेरे सपने में अल्लाह आए थे और अल्ला ने मुझे आदेश दिया है कि तू इस आयशा के साथ निकाह कर, तो तुम आयशा का निकाह मेरे साथ करने के लिए तैयार हो जाओ क्योंकि यह अल्लाह का आदेश है।
अबू बकर ने मोहम्मद से कहा की वो आयशा का निकाह उसके साथ करेगा पर मात्र एक शर्त पर की जब भी मोहम्मद की मृत्यु हो जाएगी तो उसके बाद पूरे इस्लाम का राज अबू बकर के हाथ में होगा।
मोहम्मद ने इसके लिए हां कर दी। अब 56 साल का मोहम्मद 6 साल की आयशा के साथ निकाह करने के लिए अपनी बारात लेकर जाता है उस त्यौहार को कहा जाता है "शबे बारात"
3 वर्ष के बाद जब आयशा 9 साल की हुई तब मोहम्मद ने आयशा के साथ संभोग करने की इच्छा जताई पर आयशा ने मना कर दिया।
जब तक आयशा सुहागरात के लिए नहीं मान जाती तब तक मोहम्मद ने आयशा को पूरे दिन भूखा रखने का निर्णय किया।
मोहम्मद आयशा को पूरे दिन भूखा रखता और रात को मात्र एक बार खाना देता। मोहम्मद की जो दूसरी बेगमें थी वह सभी मिलकर आयशा को समझाती की तुम सुहागरात के लिए हां कर दो पर आयशा एक महीने तक मानती नहीं है।
एक महीना बीत जाने के बाद जब आयशा भूख से बेहाल हो जाती है और वह भूख सहन नहीं कर पाती तो मुहम्मद के साथ सुहागरात मनाने के लिए हां कर देती है और बीज की रात मोहम्मद आयशा के साथ सुहागरात मनाता है।
जिस बीज की रात 59 वर्ष के मोहम्मद ने 9 साल की आयशा के साथ सुहागरात मनाई उस सुहागरात की खुशी में मुस्लिम ईद मनाते हैं।
मुस्लिम जो रोजा रखते हैं वो रोजा रख कर आयशा का साथ देते होते हैं कि जैसे आयशा एक महीने तक भूखी रही थी वैसे हम भी भूखे रहेंगे और मात्र रात को एक टाइम खाना खाएंगे।
ऐसा कहा जाता है कि आयशा चांद की तरह खूबसूरत थी तो वह चांद में आयशा को देखते हैं।
किसी महानुभाव को ईद पर कुछ ज्ञान देना चाहे हो स्वागत है
सनातन संस्कृति और विज्ञान 🚩
मैं SI मनोज तोमर के साथ हूं, और आप ? यदि आप भी SI तोमर के समर्थन में हैं तो RT करें
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कहते हैं कि वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप मुश्किल से मुश्किल परिस्थिति में भी अपने चेहरे पर उस तनाव को नहीं आने देते थे, लेकिन चेतक ने जब उनकी गोद में सिर रखकर प्राण त्यागे, तो महाराणा एक बालक की भांति रोने लगे थे
ये मित्रता ऐसी थी जो स्वाभिमान और स्वतंत्रता के लिए सर्वस्व न्योछावर कर गई
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काफिरों का क्या उन्हें तो हर बात मजाक में लगती है, हमारे साहब ने ऐसे किए थे चांद के दो टुकड़े
चांद के तो लौवे लगा दिए थे.. 🙄
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ले जाओ घर में बेगम बच्चे भूखे होंगे, आखिर भूखे पेट गालियां भी कैसे दोगे। 👇👇
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बदनाम भी उन्ही को करेंगे, और उन्ही के फेंके टुकड़ों पर भी पलेंगे, यू ही इनको नमक हराम नहीं बोला जाता।👇👇😂
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मुर्दा ग़ालिब... ये चाहती तो मार्केट से सारे कपड़े खरीद कर पहन सकती थी लेकिन इन्होंने खुद आधे कपड़े सिर्फ इसलिए पहने हुए है ताकि बचे हुए कपड़े से गरीब का भला हो सके ..
नमन है ऐसे महान लोगों को।🙏🙏🙏
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एक सऊदी अरब के निवासी ने इंस्टाग्राम पर एक सऊदी अरब के अस्पताल का वाकया शेयर किया है
एक पाकिस्तानी बुजुर्ग व्यक्ति जो सऊदी अरब में रहते थे
उन्हें चोट लगी वह बेहोश हो गए उन्हें हॉस्पिटल ले जाया गया
अगले दिन उन्हें जब होश आया तब वह अपने सामने खड़ी फिलिपीनो नर्स को पकड़ कर चूमने लगे
नर्स चिल्लाई अस्पताल से दूसरे लोग भाग कर आए क्योंकि सऊदी अरब में बेहद कठोर कानून लागू है वहां किसी महिला को जबरदस्ती चूमने का मतलब मौत की सजा
फिर जब एक वार्ड बॉय ने उस बुजुर्ग व्यक्ति को थप्पड़ मारा तब वह आश्चर्यचकित होते हुए पूछे क्या मैं जन्नत में नहीं आया ? क्या यह हूर नहीं है?
मतलब बेहोशी की हालत में उन सज्जन को यह लगा कि वह मर चुके हैं और जब उन्हें होश आया तब उन्हें लगा कि वह जन्नत में है और 76 साल की उम्र होने के बावजूद भी वह सामने खड़ी नर्स को जन्नत की हूर समझ लिया और उसे पकड़कर आगे की कार्रवाई करने का मन बनाने लगे
फिलहाल उन बुजुर्ग व्यक्ति के कारनामे को सऊदी अरब की धार्मिक पुलिस के हवाले कर दिया गया है वह अभी भी हॉस्पिटल में है धार्मिक पुलिस फैसला लेगी इन्हें क्या सजा देनी है
सोचिए यह मुल्ले मौलवी इनके दिमाग में कितना कचरा भर देते हैं
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