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Obunachilar
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काश ऐसा जुर्म करूं
सजा मिली है हर्जाने में
वृंदावन में जीवन बीते
मौत मिले बरसाने में...!
जिसे छू कर नही देखा, उसे पाने का अरमान है...
मेरी हकीकत कितनी मुश्किल है, सपने कितने आसान है...
✍✍
थोड़ी सी ख़ुशी भी काफ़ी है मेरे स्वभाव को,
आखिर पानी भी कितना चाहिए
काग़ज़ की नाव को.??
जरूरी तो नहीं हर चाहत का मतलब इश्क ही हो
कभी कभी अनजान रिश्तो के लिए भी दिल बेचैन हो जाता है!!
क्या करूँ तुम्हें दिल में रखूं या किसी शायरी में संवार दूं,
कुछ पल तो आ बैठ मेरे साथ तुझे अपने लफ़्ज़ों में उतार दूँ।
तमन्नाओं का मचलना लाज़मी है जिंदगी में...
हर ख्वाइश किसी की पूरी हो ये ज़रूरी तो नही.......
