879
Obunachilar
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फ़िर से नया एक ख़्वाब लिखा है
राधा को बेहिसाब लिखा है
कभी लिख्खी पुष्प मालाएँ तो
कभी राधा को ग़ुलाब लिखा है
कभी लिखा प्यार राधा को
कभी लिखा ऐतबार राधा को
कभी लिखा करार इस मन का
कभी लिखा इन्तजार राधा को
