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📈 Telegram kanali UJJWAL IAS AYODHYA®™ analitikasi

UJJWAL IAS AYODHYA®™ (@ujjawaliasayodhya) Hind til segmentidagi kanali faol ishtirokchi. Hozirda hamjamiyat 19 774 obunachidan iborat bo'lib, Taʼlim toifasida 10 096-o'rinni va Hindiston mintaqasida 21 531-o'rinni egallagan.

📊 Auditoriya ko‘rsatkichlari va dinamika

невідомо sanasidan buyon loyiha tez o‘sib, 19 774 obunachiga ega bo‘ldi.

01 Iyul, 2026 dagi oxirgi ma’lumotlarga ko‘ra kanal barqaror faollikka ega. Oxirgi 30 kunda obunachilar soni 98 ga, so‘nggi 24 soatda esa 24 ga o‘zgardi va umumiy qamrov yuqori darajada qolmoqda.

  • Tasdiqlash holati: Tasdiqlanmagan
  • Jalb etish (ER): Auditoriya o‘rtacha 22.67% darajada jalb etiladi. Nashrdan keyingi dastlabki 24 soatda kontent odatda umumiy obunachilar sonining 19.27% ini tashkil etuvchi reaksiyalarni to‘playdi.
  • Post qamrovi: Har bir post o‘rtacha 4 482 marta ko‘riladi; birinchi sutkada odatda 3 810 ta ko‘rish yig‘iladi.
  • Reaksiyalar va o‘zaro ta’sir: Auditoriya faol: har bir postga o‘rtacha 8 ta reaksiya keladi.
  • Tematik yo‘nalishlar: Kontent टेस्ट, सफलता, मेहनत, तैयारी, सीरीज kabi asosiy mavzularga jamlangan.

📝 Tavsif va kontent siyosati

Muallif resursni shaxsiy fikrni ifoda etish maydoni sifatida ta’riflaydi:
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Yuqori yangilanish chastotasi (oxirgi ma’lumot 02 Iyul, 2026 da olingan) sababli kanal doimo dolzarb va katta qamrovli bo‘lib qoladi. Analitika auditoriya kontent bilan faol hamkorlik qilishini, uni Taʼlim toifasidagi muhim ta’sir nuqtasiga aylantirishini ko‘rsatadi.

19 774
Obunachilar
+2424 soatlar
+787 kunlar
+9830 kunlar
Postlar arxiv
📌01 DECEMBER KVT FULL MOCK TEST PAPER ANSWERKEY
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📌01 DECEMBER LT-GRADE HOMESCIENCE TEST PAPER ANSWER KEY
📌01 DECEMBER LT-GRADE HOMESCIENCE TEST PAPER ANSWER KEY

कंप्यूटर_का_परिचय_नोट्स.pdf6.07 KB

यह समय आपके सपनों को पंख देने का है! उत्तर प्रदेश पुलिस की वेकेंसी आने वाली है और साथ ही SSC GD की वेकेंसी आ गई है—यह दोहरा मौका है अपने भविष्य को मजबूत बनाने का। आप सभी मेहनत कर रहे हैं, बस थोड़ा और मेहनत, और आत्मविश्वास… सफलता निश्चित है!

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उज्ज्वल संस्थान के होनहार छात्र मनोज यादव जी, आपको UPPCS का प्री क्वालीफाई करने पर हार्दिक शुभकामनाएँ। RO/ARO में कुछ ही नंबर
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उज्ज्वल संस्थान के होनहार छात्र मनोज यादव जी, आपको UPPCS का प्री क्वालीफाई करने पर हार्दिक शुभकामनाएँ। RO/ARO में कुछ ही नंबर से रुक जाना किसी का भी हौसला तोड़ सकता था, लेकिन आपने हार मानना सीखा ही नहीं। थकान के पलों में भी खुद को संभाला… रातों की नींद, अपने आराम, अपनी खुशियों तक को किनारे रखकर आपने अपने लक्ष्य को सबसे ऊपर रखा — और यही अटूट मेहनत आज आपको यहाँ तक लेकर आई है। इस बार आपका प्री क्वालीफाई होना सिर्फ एक परिणाम नहीं, आपके हजारों त्यागों, अनगिनत घंटों की पढ़ाई, अकेलेपन में की गई मेहनत और रोज़ उठकर फिर से लड़ने की ताकत का प्रतिफल है। आपने साबित कर दिया कि सच्ची मेहनत— चाहे जितना समय ले, लेकिन कभी खाली नहीं जाती। हमें सिर्फ उम्मीद नहीं— पूरा विश्वास है कि आपकी यह तपस्या इस बार अवश्य ही सफल होगी। आपकी यह यात्रा आपके परिवार, गाँव और उज्ज्वल संस्थान—सभी के लिए गर्व का विषय है। मनोज जी, इस बार आपकी सफलता निश्चित है—आप जरूर चमकेंगे। आपकी सफलता की अग्रिम शुभकामनाएँ।💐💐💐

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प्रिय गुरुजी इंद्रजीत यादव जी, UPPCS में 8 बार मेंस लिखने की आपकी अद्भुत उपलब्धि पर हार्दिक बधाई और अनगिनत शुभकामनाएँ। आपका संघर्ष, आपका धैर्य और आपकी निरंतरता हम सबके लिए प्रेरणा है। इस बार हम पूरी उम्मीद लगाए बैठे हैं कि 2025 का इंतज़ार भी न करना पड़े—2024 में ही आपकी मेहनत रंग लाए और आप SDM बनकर अपने परिवार का तथा अपने गाँव का नाम रोशन करें। आपने बार-बार प्री क्वालीफाई किया, 8 बार मेंस दिया, दो बार इंटरव्यू भी दिया—सिर्फ 1–2 अंकों से रुक जाना इस बात का प्रमाण है कि आप सफलता के बिल्कुल द्वार पर खड़े हैं। इस बार भगवान से यही प्रार्थना है कि यह द्वार पूरी तरह खुल जाए और आपका नाम फाइनल लिस्ट में हो। गुरुजी, आपका संघर्ष सिर्फ आपका नहीं—आपके घर-परिवार की मेहनत, क़ुर्बानियाँ और उनकी चुपचाप की गई तपस्या भी इसमें शामिल है। गरीबी की दीवारों से टकराते हुए, संसाधनों की कमी के बावजूद भी, आपने अपने सपनों को कभी छोटा नहीं होने दिया। परिवार की उम्मीदें, माता-पिता का त्याग, और घर की साधारण परिस्थितियों से उठकर इतना बड़ा सफ़र तय करना—यह किसी योद्धा से कम नहीं। RO/ARO मेंस भी आपका इंतज़ार कर रहा है—इस बार कुछ अंक का फर्क नहीं पड़ेगा। आपकी मेहनत, आपका जुनून और परिवार का आशीर्वाद मिलकर आपको आपकी मंज़िल तक जरूर पहुँचाएगा। छोटे से गाँव से निकलकर, सीमित साधनों में इतने बड़े सपने सँजोना और उन्हें पूरा करने की जिद… यह वही जिद है जो इस बार आपको सफलता के शिखर तक ले जाएगी। गुरुजी, इस बार पूरी ताकत लगा दीजिए— यह फाइनल सेलेक्शन आपका है। आपके संघर्ष की जय हो। आपकी सफलता की जय हो।

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संस्थान में सीटेट प्राथमिक व जूनियर स्तर का नया बैच प्रारम्भ हो गया है। बैच में प्रतिदिन क्लास के साथ मॉक टेस्ट सीरीज व प्रीवियस ईयर प्रश्नों की टेस्ट सीरीज आयोजित की जा रही है। किसी भी जानकारी के लिये संस्थान के न0-9451223855 पर काल करके जानकारी प्राप्त कर सकते है।

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CTET जूनियर स्तर पेपर एवं उत्तरकुंजी

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संस्थान में केन्द्रीय विद्यालय/नवोदय विद्यालय प्राथमिक शिक्षक का नया बैच सुबह 07 बजे से और दूसरा बैच सुबह 11.30 बजे से चल रहा है। इस बैच में प्रतिदिन क्लास के साथ प्रतिदिन मॉक टेस्ट सीरीज आयोजित की जा रही है। क्लास + नोट्स + प्रैक्टिस

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महत्वपूर्ण करंट अफेयर्स ‼️ डूरंड रेखा‼️ पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर संघर्ष फिर से शुरू हो गया है, तालिबान ने पाकिस्तान पर डूरंड रेखा के निकट हवाई हमले करने का आरोप लगाया है। ऐतिहासिक उत्पत्ति: डूरंड रेखा ब्रिटिश भारत और अफगानिस्तान के बीच तत्कालीन विदेश सचिव सर हेनरी मोर्टिमर डूरंड और अफगानिस्तान के अमीर अब्दुर रहमान खान द्वारा खींची गई थी। यह सीमा पश्चिम में ईरान से शुरू होकर पूर्व में चीन तक लगभग 2,600 किलोमीटर लंबी है। यह मार्ग काराकोरम पर्वतमाला और कई रेगिस्तानों से होकर गुज़रता है। एंग्लो-अफगान युद्ध: 1800 के दशक में, अफगानिस्तान का स्थान रणनीतिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण हो गया था। ऐसा इसलिये हुआ क्योंकि रूस और ब्रिटिश साम्राज्य दोनों मध्य एशिया में अपना प्रभाव बढ़ाने के लिये प्रतिस्पर्द्धा कर रहे थे। अंग्रेज़ों ने 1839 में अफगानिस्तान पर आक्रमण किया, लेकिन प्रथम आंग्ल-अफगान युद्ध के दौरान उन्हें पीछे धकेल दिया गया। ब्रिटिश सेना ने वर्ष 1878 में अफगानिस्तान पर दोबारा हमला किया। उन्होंने द्वितीय एंग्लो-अफगान युद्ध जीता और गंडमक की संधि (1879) पर हस्ताक्षर करवाए, जिसके तहत उन्हें अफगानिस्तान की विदेश नीति पर नियंत्रण प्राप्त हुआ। वर्ष 1893 में, सर हेनरी मोर्टिमर डूरंड और अमीर अब्दुर रहमान खान डूरंड रेखा बनाने पर सहमत हुए। इसने पश्तून जनजातीय क्षेत्रों को विभाजित कर दिया, बलूचिस्तान को ब्रिटिश भारत के अधीन कर दिया तथा रूस और ब्रिटेन के बीच बफर के रूप में वाखान कॉरिडोर की स्थापना की। तीसरा एंग्लो-अफगान युद्ध (1919) रावलपिंडी की संधि के साथ समाप्त हुआ, जिसने अफगानिस्तान के विदेशी मामलों पर नियंत्रण बहाल कर दिया तथा डूरंड रेखा की पुनः पुष्टि की। 1947 के बाद की स्थिति: विभाजन के समय पाकिस्तान को यह सीमा विरासत में मिली, लेकिन अफगानिस्तान ने इसे औपनिवेशिक निर्माण बताते हुए इसे मान्यता देने से इनकार कर दिया। पश्तूनिस्तान विवाद: दोनों देशों के पश्तून समुदायों द्वारा स्वतंत्र पश्तूनिस्तान की मांग ने द्विपक्षीय तनाव को और बढ़ाया। तालिबान का रुख: तालिबान सहित अब तक की किसी भी अफगान सरकार ने डूरंड रेखा को वैध नहीं माना और पश्तून-बहुल क्षेत्रों पर दावा जारी रखा है।

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