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Vogue for ssc

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Dear students, In this group , I'll provide you some NOTES, PDfs, PRACTICE SETs related to your upcoming exams

Ko'proq ko'rsatish
2 047
Obunachilar
-124 soatlar
+127 kunlar
+8130 kunlar
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Foreign words latest with detailed explanation.pdf

PRONOUN with detailed explanation.pdf

Noun latest with detailed explanation.pdf

SUPERFLUOUS updated with detailed explanation.pdf

Superfluous with detailed explanation.pdf

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Foreign words updated pdf with detailed explanation.pdf

Noun updated pdf with detailed explanation.pdf

Unseen passages with answer key ( SSC,NDA,BANK, DSSSB).pdf

❤️❤️❤️
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भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने 13 वर्षों से कोमा में रह रहे 32 वर्षीय हरीश राणा के लिए मार्च 2026 में देश की पहली निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दी है। गाजियाबाद निवासी राणा, जो 2013 की दुर्घटना के बाद से अचेत थे, उनका लाइफ सपोर्ट सिस्टम हटाने के निर्देश AIIMS को दिए गए। 1st case of Euthanasia(इच्छामृत्यु) in India 😧

Eng test.pdf

PREPOSITION with answekey New-1.pdf

आज किताबो से दूर भागने वाले, कल काम की तलाश में भागेंगे

Articles with answer keys.pdf

Test on verbs with answer key.pdf

DEAR CANDIDATES GREETINGS OF THE DAY !!! FROM SUPER EDUCATION POINT WE GOT YOUR ENQUIRY FOR THE DE.EL.ED COURSE HERE ARE THE DETAILS FOR THE SAME COURSE - DE.EL.ED DURATION:-2 YEAR (2026-2028) ELIGIBILTY : 12th with 50% In 10th Hindi mandatory In 12th English mandatory Fees - Talk to Authority Including: Books /Classes/Registration Fee/Examination fee/Marksheet/ Examination fees Board SCERT Board of Haryana Gurugram Classes Available online/offline Non Attending Note :Admission online/offline available For more details call 8287886768 ( Ravi sir) REGARDS SUPER EDUCATION POINT SOUTH DELHI

एक स्वस्थ_पुरुष के किसी स्त्री के साथ संबंध बनाने के बाद जो वीर्य स्राव होता है, उसमें लगभग 40 मिलियन तक शुक्राणु मौजूद होते हैं। आसान शब्दों में कहें तो अगर उन सबको सही जगह यानी गर्भाशय तक पहुंचने का मौका मिल जाए, तो 40 मिलियन बच्चे जन्म ले सकते हैं। लेकिन हकीकत यह है कि ये सभी शुक्राणु माँ की कोख की ओर मानो पागलों की तरह दौड़ते हैं, और इस लंबी दौड़ में केवल 300 से 500 तक ही टिक पाते हैं। बाकी रास्ते में ही थककर, हारकर खत्म हो जाते हैं। ये 300 से 500 वही शुक्राणु होते हैं जो गर्भाशय तक पहुंचने में सफल हो पाते हैं। और उनमें से भी केवल एक सबसे शक्तिशाली और सक्षम शुक्राणु होता है, जो अंततः अंडाणु से मिलकर निषेचन करता है। क्या आप जानते हैं वह भाग्यशाली, मजबूत और विजेता शुक्राणु कौन था? वह आप थे… मैं था… हम सब थे! ज़रा सोचिए, जब आपने अपनी पहली दौड़ लगाई थी तब न आपकी आँखें थीं, न हाथ-पैर, न चेहरा—फिर भी आप जीत गए। उस समय आपके पास कोई डिग्री नहीं थी, कोई दिमागी समझ नहीं थी, फिर भी आप विजेता बने। कितने ही भ्रूण माँ की कोख में ही खो गए, लेकिन आप सुरक्षित रहे और आपने पूरे 9 महीने पूरे किए। और आज… आज जब ज़िंदगी में कोई मुश्किल आती है तो आप घबरा जाते हैं, थोड़ी सी परेशानी में निराश हो जाते हैं। लेकिन क्यों? आपको क्यों लगता है कि आप हार गए हैं? आपने खुद पर भरोसा क्यों कम कर दिया है? अब तो आपके पास दोस्त हैं, परिवार है, ज्ञान है, अनुभव है—फिर भी आप मायूस क्यों हैं? आप शुरुआत में जीते थे, अंत में भी जीत सकते हैं, और बीच के हर मोड़ पर जीत सकते हैं। बस परमात्मा (प्रकृति) पर विश्वास रखें और सच्ची लगन से अपने लक्ष्य के लिए पूरी मेहनत करें—वह आपको हारने नहीं देगा। जिस तरह लाखों शुक्राणुओं में से आपको जीतने का अवसर मिला था, उसी तरह आज भी वही शक्ति आपको कामयाबी तक जरूर पहुंचाएगी।

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