BSc Nursing Utkarsh
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आज प्रिय सुनील विश्नोई से भेंट हुई।राज्य प्रशासनिक सेवा (RAS) में 47 वें स्थान पर चयनित…कई विद्यार्थियों का चयन हुआ परन्तु सुनील की उपलब्धि कुछ अलग है, सुनील ने मेरे साथ मेरे EA ( एक्जीक्यूटिव असिस्टेंट) के रूप में कार्य किया है।अपने कार्य के प्रति समर्पण, अनुशासन, विनम्रता और निरंतर मेहनत के बल पर उन्होंने यह मुकाम प्राप्त किया है।
यह सफलता केवल सुनील की व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि उन सभी युवाओं के लिए प्रेरणा है जो बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने का साहस रखते हैं।
सुनील को इस गौरवपूर्ण उपलब्धि हेतु हार्दिक बधाई एवं उज्ज्वल प्रशासनिक जीवन के लिए अनंत शुभकामनाएँ।
📚 जयपुर सेंटर की वनडे एवं सिविल सेवा अभ्यर्थियों की फैकल्टी के साथ सामूहिक चर्चा
चर्चा में विद्यार्थियों के हित, उनकी बेहतर तैयारी एवं आगामी परीक्षाओं में उत्कृष्ट परिणाम सुनिश्चित करने को लेकर विस्तृत योजना पर चर्चा की गई।
साथ ही शिक्षण गुणवत्ता, मार्गदर्शन और विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने हेतु महत्वपूर्ण सुझावों पर विचार-विमर्श किया गया।
"सफलता के सौ सौपान"
शृंखला-1 खुद को निर्देशित करें
धरती अपनी धुरी पर केन्द्रित है इसीलिए यहाँ सबकुछ व्यवस्थित चल रहा है। गौतम बुद्ध ने ध्यान को केंद्रित कर बुद्धत्व पा लिया। कोई तालाब दीवारों की परिधि में बंधकर ही पानी रोक सकता है। मधुमक्खियों का संख्याबल फूलों के आसपास केन्द्रित रहकर ही शहद बना सकता है। हवाएं एक ही दिशा में केन्द्रित होकर बहती हैं तो एक सकारात्मक बल बन जाती है लेकिन उसका बहुदिश चक्रवाती रूप नकारात्मक ताकत में बदल जाता है। पूरे शहर की दिनचर्या व्यवस्थित चलती है जब तक वह किसी घड़ी पर केन्द्रित है। धरती या ब्रह्मांड में मौजूद हर चीज हर तत्व एक उपयोगी या सृजनात्मक कारक तभी बन पाता है जब वह किसी प्राकृतिक या मानव निर्मित नियम पर केंद्रित है।
आप चाहते है कि जीवन में सफलता के कदमों की आहट बहुत जल्दी आपके कानों में पड़े तो भटकना बन्द कर दीजिए। कोई ना भी निर्देशित करे तो भी अपने लक्ष्य की तरफ जाने वाले रास्ते के सारे उसूल या नियम अच्छे से जान लीजिए तथा उन पर प्रथम दिन से ही अमल शुरू कर दीजिए। किसी के बहकावे में आकर रास्ता बदल दिया तो नियम टूटेगा। किसी की गाली से आप विचलित हो गए और दो दिन दुःखी रहे तो सतत केन्द्रित रहने का नियम टूटेगा। आँखों को धोखा देने वाले दृश्य आपका रास्ता बदल सकते हैं। जीभ धीरे-धीरे आपके शरीर को ही बदल सकती है। त्वचा को दुःख उतना महसूस हो सकता है जितना वस्तुतः है नहीं। कई वाक्य या शब्द बोलने पर आपका काम हो सकता है, कई जगह उनका समुचित प्रयोग ना हो तो बना हुआ काम भी बिगड़ सकता है। जीवन जीने या आगे बढ़ने के बेहतरीन तरीके का अनुसन्धान करते रहिए। थोड़ा कहीं रुको तो भी कुछ सीखने के लिए ही रुको। संसार में बहुत कुछ बिखरा पड़ा है उसमें अच्छा तलाशना ही आपको विरले इन्सान की श्रेणी में स्थापित करेगा।
याद रखिए! आपसे बेहतर गाइड आपको संसार में कम ही मिलेंगे लेकिन रोज की ठोकरों से संभल कर प्रतिदिन आपको बेहतर बनना पड़ेगा। हर दिन एकबार सुनिश्चित कर लीजिए कि आप इस संसार रूपी जंगल में चल रहे है, हर चुनौती से पार भी पाना है लेकिन हर थोड़ी देर बाद दिशासूचक यंत्र को जरूर देख लीजिए। वरना मीलों भटकने के बाद मूल रास्ते पर लौटना लगभग नामुमकिन होता है।
✒️डॉ अर्जुन सिंह साँखला, प्राचार्य, लक्की इंस्टीट्यूट ऑफ प्रोफेशनल स्टडीज, जोधपुर (राज)
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