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राजस्थान का एकीकरण ‼️
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प्रथम चरण : मत्स्य संघ 18 मार्च, 1948 ई.
मत्स्य संघ - अलवर, भरतपुर, धौलपुर, करौली व नीमराणा ठिकाना ( 4+ 1 )
सिफारिश - के. एम. मुन्शी की सिफारिश पर प्रथम चरण का नाम मत्स्य संघ रखा गया ।
राजधानी - अलवर
राजप्रमुख - उदयभान सिंह ( धोलपुर) ।
उपराजप्रमुख - गणेशपाल देव (करौली) ।
प्रधानमंत्री - शोभाराम कुमावत (अलवर) ।
उप-प्रधानमंत्री - युगल किशोर चतुर्वेदी व गोपीलाल यादव ।
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राजस्थान का एकीकरण 🔰
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▪️षष्ठ चरण : राजस्थान संघ 26 जनवरी, 1950 ई.
▪️राजस्थान संघ - वृहत्तर राजस्थान + सिरोही, आबू दिलवाडा (19+3)
▪️राजधानी - जयपुर
▪️महाराज प्रमुख - भूपालसिंह
▪️राजप्रमुख - मानसिंह द्वितीय
▪️प्रधानमंत्री/मुख्यमंत्री - हीरालाल शास्त्री
▪️26 जनवरी 1950 ई. को राजस्थान को बी श्रेणी में शामिल किया गया
▪️26 जनवरी 1 950 ई. को राजपूताना का नाम बदलकर राजस्थान रख दिया गया ।
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राजस्थान का एकीकरण 🔰
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▪️पंचम चरण : वृहत्तर राजस्थान ( संयुक्त वृहत्त राजस्थान) 15 मई, 1949 ई.
▪️वृहत्तर राजस्थान - वृहद राजस्थान + मत्स्य संघ ( 18+3 )
▪️सिफारिश - शंकरराव देव समिति की सिफारिश पर मत्स्य संघ को वृहत्तर राजस्थान में मिलाया गया ।
▪️राजधानी - जयपुर
▪️महाराज प्रमुख - भूपालसिंह (मेवाड) ।
▪️राज प्नमुख - मानसिंह द्वितीय (जयपुर)
▪️प्रधानमंत्री - हीरालाल शास्त्री (जयपुर)
▪️उद्घाटनकर्ता - सरदार वल्लभ भाई पटेल ।
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राजस्थान का एकीकरण ‼️
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▪️ चतुर्थ चरण : वृहद राजस्थान - 3० मार्च, 1949 ई.
▪️वृहद राजस्थान - संयुक्त राजस्थान + जयपुर, जोधपुर, जैसलमेर व बीकानेर + लावा ठिकाना ( 14+2 )
▪️राजधानी - जयपुर
▪️सिफारिश - श्री पी. सत्यनारायण राव समिति की सिफारिश पर जयपुर को राजधानी बनाया गया राजस्थान के एकीकरण की प्रक्रिया के दोरान राज्य की राजधानी के मुद्दे को सुलझाने के लिए बी आर. पटेल की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया था ।
▪️महाराज प्रमुख - भोपाल सिंह (मेवाड)
▪️राजप्रमुख - मानसिंह द्वितीय (जयपुर)
▪️उपराजप्रमुख - भीमसिंह (कोटा)
▪️प्रधानमंत्री - हीरालाल शास्त्री( जयपुर)
▪️उद्घाटनकर्ता - सरदार वल्लभ भाई पटेल
▪️न्याय का विभाग - जोधपुर
▪️शिक्षा का विभाग - बीकानेर
▪️वन विभाग - कोटा
▪️कृषि विभाग - भरतपुर
▪️खनिज - उदयपुर
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राजस्थान का एकीकरण ‼️
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🟫 तृतीय चरण : संयुक्त राजस्थान - 18 अप्रैल, 1948 ई.
⬜️ संयुक्त राजस्थान - राजस्थान संघ + उदयपुर ( 10+1 )
⬛️ राजधानी - उदयपुर
🟪 राजप्रमुख - भूपालसिंह (मेवाड)
🟦 उप-राजप्रमुख - भीमसिंह (कोटा)
🟩 प्रधानमंत्री - माणिक्यलाल वर्मा (मेवाड)
🟨 सिफारिश - पंडित जवाहरलाल नेहरू की सिफारिश पर माणिक्यलाल वर्मा को संयुक्त राजस्थान का प्रधानमंत्री बनाया गया ।
🟧 उद्घाटनकर्ता - पण्डित जवाहरलाल नेहरू
🟥 उद्घाटन - तीसरे चरण का उद्घाटन कोटा दुर्ग में किया गया
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राजस्थान का एकीकरण 🔰
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🟦 द्वितीय चरण
🟦 राजस्थान संघ - 25 मार्च, 1948 ई.
🟪 राजस्थान संघ/पूर्व राजस्थान - डूंगरपुर, बांसवाड़ा, प्रतापगढ़, शाहपुरा, किशनगढ़, टोंक, बूंदी, कोटा, झालावाड़ व कुशलगढ़ ठिकाना (9+ 1 )
🟧 राजधानी - कोटा
🟥 राजप्रमुख - भीमसिंह (कोटा)
🟦 उप राजप्रमुख - लक्ष्मण सिंह (डूंगरपुर)
🟪 प्रधानमंत्री - गोकुल लाल असावा (शाहपुरा)
🟩 उद्घाटनकर्ता - एन.वी. गाॅडगिल
🟨 उद्घाटन - दूसरे चरण का उद्घाटन कोटा दुर्ग में किया
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राजस्थान का एकीकरण ‼️
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प्रथम चरण : मत्स्य संघ 18 मार्च, 1948 ई.
मत्स्य संघ - अलवर, भरतपुर, धौलपुर, करौली व नीमराणा ठिकाना ( 4+ 1 )
सिफारिश - के. एम. मुन्शी की सिफारिश पर प्रथम चरण का नाम मत्स्य संघ रखा गया ।
राजधानी - अलवर
राजप्रमुख - उदयभान सिंह ( धोलपुर) ।
उपराजप्रमुख - गणेशपाल देव (करौली) ।
प्रधानमंत्री - शोभाराम कुमावत (अलवर) ।
उप-प्रधानमंत्री - युगल किशोर चतुर्वेदी व गोपीलाल यादव ।
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🔰अनंत दर्शन शंकर को 'एम. एस. स्वामीनाथन पर्यावरण संरक्षण पुरस्कार' से किया गया सम्मानित...🌸
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✨अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस - 12 अगस्त
▪️शुरुआत - 12 अगस्त 2000 को
▪️ थीम 2024- क्लिक से प्रगति तक: सतत विकास के लिए युवा डिजिटल रास्ते।
▪️राष्ट्रीय युवा दिवस (12 जनवरी)
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🐘🐘🐘🐘🐘 विश्व हाथी दिवस - 12 अगस्त
वर्ष 2024 की थीम --- "प्रागैतिहासिक सौंदर्य, धार्मिक प्रासंगिकता और पर्यावरणीय महत्व का मानवीकरण" !!
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राष्ट्रीय झील संरक्षण योजना में शामिल राजस्थान की झीलें - 6 🔰
▪️पुष्कर झील - अजमेर
▪️आना सागर झील - अजमेर
▪️फतेह सागर झील - उदयपुर
▪️पिछोला झील - उदयपुर
▪️नक्की झील - माउंट आबू
▪️मान सागर झील - जयपुर
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लूनी नदी
उपनाम- साबरमती/सरस्वती/लवणवती(प्राचीन नाम) साक्री(पुष्कर में)
मारवाड़ की गंगा,अंत:सलिला(कालिदास ने)आधी खारी,आधी मीठी नदी
उद्गम-नाग पहाड़,आनासागर,अजमेर से उद्गम के बाद आनासागर झील से गुजरती है।
उद्गम स्थल पर यह नदी अजमेर में सागरमाती कहलाती है।गोविंदगढ़(अजमेर)में सरस्वती नामक धारा मिलने के बाद इसका नाम लूनी हो जाता है।
प्रवाह क्षेत्र-8 जिले क्रमशःअजमेर,नागौर,ब्यावर,पाली जोधपुर ग्रामीण,बालोतरा,बाड़मेर,सांचौर
लूनी की कुल लंबाई 495 किलोमीटर।राजस्थान में 330 किलोमीटर है।
लूनी पश्चिमी राजस्थान की सबसे लंबी नदी है।
लूनी नदी द्वारा कच्छ के रण में प्रवेश करते समय कई जल धाराएं बन जाती है जिससे दलदल का निर्माण होता है इसे ही सांचौर में"नेहड़"कहते हैं।
लूनी नदी के प्रवाह क्षेत्र को"गौडवाड़ प्रदेश"कहते हैं।
सांचौर जिले में लूनी नदी के बाढ़ के पानी को रेल/नाड़ा कहते हैं।
लूनी नदी में प्रदूषण का कारण पाली,जसोल,बालोतरा आदि स्थानों की रंगाई सफाई उद्योगों के कारण लूनी नदी का जल प्रदूषित होता है।
तिलवाड़ा सभ्यता-लूनी नदी के किनारे
मल्लीनाथ पशु मेला(तिलवाड़ा)-लूनी नदी के किनारे
जसवंतसागर बांध-लूनी नदी पर
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राजस्थान अति महत्वपूर्ण जीके🔰
1. किस मिट्टी को रेगूर मिट्टी के नाम से जाना जाता है - काली मिट्टी
2. राजस्थान में संरक्षित वन सर्वाधिक किस जिले में पाए जाते हैं - बारां
3. जनगणना 2011 के अनुसार किन जिलों में जन घनत्व 401 से 500 के मध्य था - अलवर, दौसा
4. जनगणना 2001 से 2011 तक राजस्थान में बाल लिंगानुपात में क्या अंतर था - 21
5. बंध बरेठा बांध तथा मोती झील किस जिले में है - भरतपुर
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🔷 बेणेश्वर महादेव का मंदिर-नेवरपुरा/नवाटापुरा (डूंगरपुर)
▪️ बेणेश्वर का अर्थ होता है-’’डेल्टा की मल्लिका’’ या ’’मृत आत्माओं का मुक्ति स्थल’’।
▪️यह मंदिर सोम, माही व जाखम नदियों के त्रिवेणी संगम पर स्थित हैं।
▪️यहाँ पर विश्व का एकमात्र मिट्टी का बना हुआ पांच तरफ से खण्डित शिवलिंग है।
▪️इस शिवलिंग को पुजारी के अलावा अन्य कोई नहीं छू सकता हैं।
▪️यहाँ पर मेला माघ पूर्णिमा को लगता हैं जिसे आदिवासियों का कुम्भ/भीलों का कुम्भ/ वागड़ का पुष्कर भी कहते हैं।
▪️ यहाँ पर आदिवासी अपनें पूर्वजों की अस्थियों का विसर्जन करते हैं।
