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बलवन्त राय मेहता समिति- (1957)
इसका गठन जनवरी 1957 में प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के समय योजना आयोग द्वारा किया गया तथा इसकी रिपोर्ट नवम्बर 1957 में आई ।
👉 यह पंचायती राज पर गठित प्रथम समिति थी । इसके अध्यक्ष बलवंत राय मेहता थे। जिन्हें लोकतांत्रिक विकेन्द्रीकरण का जनक माना जाता है। अर्थात् इन्हें पंचायतीराज व्यवस्था का वास्तुकार ( शिल्पी) कहा जाता है । इन्होंने लोकतांत्रिक विकेन्द्रीकरण पर बल दिया।
सिफारिशें-
👉
त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था का समर्थन किया। जिसमें गाँव के स्तर पर ग्राम पंचायत, खण्ड या ब्लॉक स्तर पर पंचायत समिति तथा जिला स्तर पर जिला परिषद् की सिफारिश की।
ग्राम पंचायत के सदस्यों का चुनाव प्रत्यक्ष रूप से किया जाये, लेकिन पंचायत समिति और जिला परिषद् के सदस्यों का चुनाव अप्रत्यक्ष रूप से किया जाये।
👉 • पंचायत समिति को कार्यकारी निकाय तथा जिला परिषद को सलाहकारी, समन्वयकारी एवं पर्यवेक्षण संस्था के रूप में स्थापित किया जाये ।
जिला कलेक्टर को जिला परिषद् का अध्यक्ष बनाना चाहिए। राज्य सरकारों द्वारा स्थानीय निकायों को धन के पर्याप्त स्रोत उपलब्ध करवाये जाने चाहिए ।
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👉 वैदिक काल (अथर्ववेद) में पंचायत का मुखिया- ग्रामणी
👉 बौद्धकाल में ग्राम का मुखिया- ग्रामयोजक
👉 मौर्यकाल में ग्राम सभा का मुखिया- ग्रामीक
👉 मुगलकाल में ग्राम का मुखिया- मुकद्दम
👉 मुगलकाल में नगर प्रमुख- कोतवाल
ग्राम पंचायत व्यवस्था का व्यवस्थित रूप चोल साम्राज्य में मिलता है। जिसमें पंचायत को 'ऊर' कहा गया है।
👉 इसी प्रकार रामायण एवं महाभारत काल में स्थानीय प्रशासन 'पुर' एवं 'जनपद' नामक दो स्तरों पर विभाजित था।
वर्तमान में पंचायत का मुखिया- सरपंच
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