ru
Feedback
आर्ष पुस्तकालय

आर्ष पुस्तकालय

Открыть в Telegram

दुर्लभ ग्रंथों का एकमात्र स्थान

Больше
2 920
Подписчики
+124 часа
+57 дней
+4730 день
Архив постов
इन मेडम जी का एक वीडियो देखेंगे तो उसमें इन्होंने पट्टी लगाया है हाथ पर. और एक जगह पे वो पट्टी गले पर भी नहीं है. जहां पट्टी गले में लगाया है वहां सीधा सीधा दिख रहा है के इन्हें कुछ भी नहीं हुआ है. कुछ भी. फिर भी इन्होंने ऐसा क्यों किया? यह सब २०१३-१४ के आंदोलन में तो नहीं हुआ था. तब तो बीजेपी विपक्ष में थी ना. जब इस्लामी आतंक फैलाया गया था दिल्ली में तब भी ऐसा नहीं हुआ था. तो क्यों ये लोग ऐसा कर रहे हैं ये ही समझ नहीं आ रहा. ये तो सरासर मीडिया का दुरुपयोग सामान्य जनता के खिलाफ जान बूझकर हो रहा है. लोगों में आधी अधूरी और गलत जानकारी और वो भी आधिकारिक लोगों द्वारा फैलाई जा रही है. बच्चों को मारने पे जो लोग खुश हो रहे हैं मैं कहता हूं आपके जब बच्चे होंगे और तब उनको कभी लड़ना पड़े तो आप के साथ भी ईश्वर प्रदत्त न्याय के अनुसार यही होगा. क्योंकि आपने हिंसा का समर्थन किया है. तो तब कोई जवाबदेही मांगने का आपको अधिकार नहीं रहेगा. किस मुंह से जवाबदेही मांगोगे? और हां राममंदिर चोरी, आए दिन हजारों करोड़ों के घपले, फर्जी डॉक्टर, फर्जी हस्पताल कांड, स्मार्ट मीटर, और इथेनॉल पे कोई भी नहीं बोल रहा. जब तक देश में बीजेपी जैसी महा भ्रष्ट सत्ता है तबतक ये होता ही रहेगा. जितना कांग्रेस ने ७० साल में नहीं लूटा उससे ज्यादा तो ये लोग ने १२ साल में लूट लिया है. अब मेरे सामने कांग्रेस के गुणगान या बीजेपी के गुणगान ना गाएं. दोनों ही भ्रष्ट है पर वर्तमान में तो बीजेपी ही देश को बर्बाद करने पे तुली हुई है. शुद्ध हवा शुद्ध पानी जैसे मूलभूत अधिकार है हमें पर ये तक हमको मिल नहीं रहे हैं. पर आप लोग में अक्ल होती तो आप इन मुद्दों पे भी बोलते. पर धर्म के नाम पर अफीम बांट दी है बीजेपी ने तो आप उसी अफीम को चाटते रहिये. ईश्वर करे आपके घर में भी उसी प्रकार निरंतर चोरी होती रहे ईश्वर करे वो हर वस्तु आपके साथ हो जिसका मुद्दा मैंने ऊपर लिखा है. फिर भी आपको अक्ल नहीं आएगी. क्यों? क्योंकि आपको मैं सच बोलूंगा तो कड़वा लगूंगा, वामपंथी लगूंगा. खैर आप कॉपी पेस्ट मेसेज भी लिखते रहिए कोई बात नहीं. जल्द ही जैसे पिछले चुनावों में बीजेपी की सीट घटी है अब भी होंगी ही होंगी लिखकर ले लो. और हां विपक्ष नाकारा है इसी लिए ये मुद्दों पे कोई बोल नहीं रहा है. मैं विपक्ष में सिर्फ सरकार के ही हूं, क्योंकि वर्तमान में तानाशाही और मीडिया को कंट्रोल करके एकतरफा नैरेटिव ये ही बना रही है. और इनमें इतना घमंड है के लोगों को झूठा सिद्ध करना और आक्षेप लगाना तो इनके लिए कुछ भी नहीं है. सत्ता का अहंकार बहुत ज्यादा हो चुका है. ४ वर्ष में पानी खत्म होने जा रहा है पर आप लोग को पानी नहीं चाहिए आप लोग को बस मोदी ही चाहिए. खैर आप मोदी को वोट करिए, जबतक evm है तबतक मोदी आयेगा ही. खैर अब शुरू कर दो गाली देना वामपंथी इत्यादि कहना. cjp वाला या आप वाला या कांग्रेस का भी कह दो. अरे अरे देशद्रोही ही कह दो जी. जय आर्यावर्त.🙏 धार्मिक आर्यावर्तीय.

photo content
+3

photo content

जब पुलिस गुंडा बन जाती है तो क्या ही होगा इस देश का?
जब पुलिस गुंडा बन जाती है तो क्या ही होगा इस देश का?

development of this calibre should not stop right?
development of this calibre should not stop right?

ये हमारे देश का बहुत बड़ा दुर्भाग्य है के पेपर लीक के कारण बच्चे आत्महत्या कर रहे हैं और हम सरकार को जवाबदेह मानने के जगह उन धरने पे बैठे लोग जो जवाब मांगने के लिए बैठे है उन्हें ही गाली दे रहे हैं. कभी कभी तो मुझे लगता है के left wing और वामपंथी को क्यों आजतक बीजेपी रोक ही नहीं पाई? कहीं ये बीजेपी का ही तो एजेंडा नहीं ? जैसे बीजेपी के बहुत सारे फैसले फर्जी और आपके ऊपर बलपूर्वक लगाए लगे थे उसी को ढकने के लिए मानो ये सब हो रहा है. जब मोदी राहुल ममता और विपक्ष के सभी का मजाक उड़ा सकता है तो वो सही है, उस बात पर किसी को कोई आपत्ति नहीं, पर यही बात विपक्ष वाले करें तो उसको इतना हाईलाइट क्यों किया जाता है? हम इतने एक तरफा कब से हो गए हैं? आर्यसमाज भी अब बीजेपी की टूलकिट और it cell बन चुका है. आर्यसमाज और समाजियों का काम था निष्पक्ष रहना, पर आजकल मैं देख रहा हूं सब आर्यसमाजी या आर्य कम हिन्दू बने हुए है. हिन्दू राष्ट्र यदि गलती से बन भी गया तो पण्डे तुम्हारा क्या हाल करेंगे ये सोचा भी है? हिन्दुत्व को अपना मत मानो, क्योंकि हिन्दुत्व जैसा कुछ नहीं होता. सावरकर को कभी पढ़ा है क्या? आप सब लोग हिन्दू क्यों बन रहे हो समझ में ही नहीं आ रहा है. देश कोई एक व्यक्ति की अंधभक्ति या अंधे निर्णयों पे नहीं चलना चाहिए. आप विरोध ही नहीं करोगे तो हो गया कल्याण. इतने सारे मुद्दे हैं, विपक्ष क्यों कुछ नहीं बोल रहा पता है? क्योंकि उसको भी पता है के इस्लाम के लिए कितनी योजनाएं लेकर आए हैं बीजेपी वाले. क्यों आप लोग मुझे विवश कर रहे हैं मरने के लिए. क्योंकि यदि मैंने बीजेपी की पोल खोल दी तो वो लोग मुझे भी मार देंगे. मैं एक से एक मुद्दे आपको बता सकता हूं, पर उसका क्या लाभ? आप भी आँखें बंद करके बैठे हुए है. खैर आप असत्य का समर्थन करिए मैं तो सत्य का समर्थन करूंगा. ज्यादा से ज्यादा क्या मैं मौन रहूंगा अब. क्योंकि अंधेर नगरी को चौपट राजा ही संभाल सकता है. वैक्सीन तो लगवा ही ली थी आप लोगों ने अंधभक्ति करके अब और मैं क्या ही कहूंगा आप लोगों को? ~ धार्मिक आर्यवर्तीय

क्यों चीनी क्म्यूनिष्ट स्वयं प्रत्येक नागरिक के बटुवे में यह सिक्के रखवा कर अपनी निर्धनता दूर कर लेती है ? हमारे देश के रुपयों से हम इन व्यर्थ के चाइनीस सिक्के खरीद कर न सिर्फ अपना और अपने देश का पैसा शत्रु मुल्क को भेज रहे हैं, अपितु अपने कमजोर और गिरे हुए आत्मविश्वास का भी परिचय दे रहे हैं । दिन भर टीवी पर हिन्दू विश्वासों का "मखौल उड़ाने वाले, सो-काल्ड को आपने कभी इस चाइनीज कम्यूनिष्ट अंध-विश्वास के विरुद्ध बोलते सुना है ?

*फेंगशुई ठगी से बचें* जो दिखता है, वह बिकता है । यह कहावत फेंगशुई पर पूरी तरह सटीक है । हम भारतीयों को चमत्कार में बहुत विश्वास है । इसी चमत्कार की आशा में ४० वर्षों से गोरेपन की क्रीम बिक रही है, बच्चों को लम्बा बनाने वाले हैल्थ ड्रिंक बिक रहे है । और हम इसे खरीद भी रहे हैं । यदि मैं यहाँ फेंगशुई का विरोध कर रहा हूँ, तो घर के बाहर नींबू मिर्ची टाँगने को भी अंधविश्वास मानता हूँ । एक भ्रम है फेंगशुई । कछुआ पानी में डूबा कर रखने से कर्ज से मुक्ति, सिक्के वाला तीन टांगों वाला मेंढक रखने से धन का प्रभाव, चाइनीज ड्रैगन को कमरे में रखने से रोगों से मुक्ति, विंडचाइम लगाने से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह, प्लास्टिक के पिरामिड लगाने से वास्तुदोषों से मुक्ति, चाइनीज सिक्के बटुए में रखने से सौभाग्य में वृद्धि होगी ऐसा मानना अवैज्ञानिक है । # कई धनी घरों मे देखा गया है कि एक विचित्र सी सुनहरी गुड़िया रखी है । पूछने पर पता चला कि ये लाफिंग बुद्धा है । इसको घर मे रखने से सुख और समृद्धि आती है । धन की टोकरी उठाए, मोटे पेट वाला गोल मटोल सुनहरे रंग का पुतला, क्या सच में महात्माबुद्ध है ? किस प्रकार वह बुध्द सा सौम्य,शांत और सुडौल दीखता है ? # अब तो दुकानदार भी अपनी दुकान का शटर खोलकर सबसे पहले लाफिंग बुद्धा को नमस्कार करते हैं । और कभी-कभी तो अगरबत्ती भी लगाते हैं । # कई स्थानों पर एक छोटा सा कछुए जैसा खिलौना देखा, जिसकी पीठ पर कुछ लिखा था । पता चला कि इसे पानी मे रखने पर कर्ज से मुक्ति मिलती है । # एक चिकित्सक की मेज पर ड्रैगन जैसा कुछ दिखाई दिया । पता चला कि यह स्वास्थ्य और आयु बढ़ाने का उपाय है । क्या कोई आग उगलने वाली चाइनीज छिपकली अथवा ड्रेगन को देख कर प्रसन्नता अनुभव कर सकता है ? # एक स्थान पर सुनहरी बिल्ली का बैटरी से चलने वाला खिलौना था, जो अगला पंजा हिला रहा था । प्लास्टिक की सुनहरी बिल्ली जिसमें बैटरी लगाने के उपरान्त, उसका एक हाथ किसी को बुलाने की मुद्रा में आगे पीछे हिलता रहता था । सुनहरी बिल्ली के माध्यम से अपनी रूठे हुए भाग्य को वापस बुलाने के लिए इसे अपने घर, कार्यालय अथवा दुकान के उत्तर-पूर्व में रखिए । बिल्ली के सुनहरे पुतले को घर में सजाकर सौभाग्य की प्रार्थना करना मूर्खता नहीं तो और क्या है ? # एक होटल मे काँच के सुंदर बर्तन मे मिट्टी डाल कर बांस जैसा कोई पौधा लगाया हुआ था । पता चला कि गुड लक बैम्बू अर्थात सौभाग्य वाला बांस है । # फेंगशुई के बाजार में एक और विचित्र उत्पाद है - तीन टांगों वाला मेंढक, जिसके मुंह में एक चीनी सिक्का होता है । फेंगशुई के अनुसार उसे अपने घर में धन को आकर्षित करने के लिए रखना अत्यंत शुभ होता है । जब मैंने इस मेंढक को पहली बार देखा तो सोचा कि जो देखने में इतना भद्दा लग रहा है, वह मेरे घर में सौभाग्य कैसे लाएगा ? मेंढक का चौथा पैर काट कर उसे तीन टांग वाला बनाकर शुभ मानना किस सिरफिरे की कल्पना है ? क्या किसी मेंढक के मुंह में सिक्का रखकर घर में धन की बारिश हो सकती है ? संसार के किसी भी जीव विज्ञान के शास्त्र में ऐसे तीन टांग वाले ओर सिक्का खाने वाले मेंढक का उल्लेख क्यों नहीं है ? # फेंगसुई की दुनिया का एक और लोकप्रिय मॉडल है चीनी देवता - फुक, लुक और साऊ । फुक को समृद्धि, लुक को यश-मान-प्रतिष्ठा और साउ को दीर्घायु का देवता कहा जाता है । फेंगशुई ने बताया और हम भारतीयों ने अपने घरों में इन मूर्तियों को लगाना प्रारम्भ कर दिया है । मैंने देखा कि इंटरनेट पर मिलने वाली इन मूर्तियों की मूल्य भारत में ₹ २०० से लेकर ₹ १५,००० तक है । # एक और फेंगशुई उत्पाद है - तीन चाइनीज सिक्के जो लाल रिबन से बंन्धे होते हैं, फेंगशुई के अनुसार, रिबिन का लाल रंग इन सिक्कों की ऊर्जा को सक्रिय कर देता है और इन सिक्कों से निकली यांग (Yang) ऊर्जा आप के भाग्य को सक्रिय कर देती है । क्या चीन में गरीब लोग नहीं रहते? # दुनिया के अनेक देशों में कहीं न कहीं फेंगशुई का जाल फैला हुआ है । इसकी मार्केटिंग का तंत्र इंटरनेट पर उपलब्ध हजारों वेबसाइट के अतिरिक्त, TV कार्यक्रमों, न्यूज़ पेपर्स, और पत्रिकाओं तक के माध्यम से चलता है । अनुमानत: भारत में ही इस का कारोबार लगभग 200 करोड़ रुपए से अधिक का है । उसी के सहारे धीरे-धीरे भारत के उत्पाद मार्केट पर चीनी उत्पादों ने पचास प्रतिशत तक अधिकार कर लिया है । किसी छोटे शहर की गिफ्ट दुकान से लेकर सुपर माल्स तक चीनी उत्पाद आपको प्रत्येक स्थान पर मिल जायेगें । उन्होंने स्थानीय उत्पादों को लगभग समाप्त कर दिया है । चाइनीज उत्पादों का आक्रामक माल, भारत सहित विश्व के अलग-अलग देशों में इस कदर बेचा जाता है कि दूसरों की मौलिक अर्थ-व्यवस्था नष्ट हो जाती है । सस्ता और बड़ी मात्रा में होना उसका पैंतरा है अर्थात रणनीति ।

शिवांश के अद्वैत मत में वदतो व्याघ्यात दोष कूट कूट कर भरा है अर्थात जो बात बोलते है उसी में दोष निकल आता है जैसे अद्वैत प्रत्यक्ष प्रमाण को यह बोल कर नकार देता है कि जैसे चंद्रमा प्रत्यक्ष में देखने पर थाली जितना लगता है लेकिन वास्तव में पृथ्वी जैसा विशाल है इसलिए प्रत्यक्ष ज्ञान भी मिथ्या है लेकिन वो प्रत्यक्ष ज्ञान किसे कहते है उसका सूत्र नहीं जानते प्रत्यक्ष खुद कहता है कि वही वास्तविक प्रत्यक्ष है जिसने दुरी के कारण कोई व्यभिचार दोष नहीं हो यदि चंद्रमा छोटा नजर आ रहा है तो वो छोटे के साथ साथ दूरी भी उन्हीं आंखों से दिखा रहा है कि चंद्रमा दूर है यदि अद्वैत वादी प्रत्यक्ष प्रमाण को नहीं मानते तब तो उनके गुरु ओर शास्त्र भी तो प्रत्यक्ष है तब तो वो भी मिथ्या ही सिद्ध हो जाते है और अद्वैत दर्शन भी प्रत्यक्ष व्याख्यान करने से अद्वैत का व्याख्यान भी मिथ्या ही सिद्ध होता है जबकि शास्त्र प्रत्यक्ष को परम प्रमाण कहा है प्रत्यक्षम किम प्रणामम अर्थात प्रत्यक्ष के सम्मुख किसी भी प्रमाण की जरूरत नहीं रहती

• *वैदिक त्रैतवाद : ईश्वर, जीव और प्रकृति का यथार्थ स्वरूप* • --------------------------------- वैदिक दर्शन को समझने की कुंजी ईश्वर, जीव और प्रकृति - इन तीन अनादि सत्ताओं का यथार्थ ज्ञान है। जब तक इन तीनों का स्वरूप स्पष्ट नहीं होता, तब तक वेद एवं वैदिक ग्रंथों का अनेक स्थलों पर अभिप्राय भी पूर्णतः समझ में नहीं आता। वैदिक दर्शन के अनुसार जो पदार्थ (द्रव्य, सत्ता, वस्तु अथवा Substratum) चेतन होते हैं, वे न तो किसी उपादान-कारण (Material Cause) से उत्पन्न कार्य (Effect) होते हैं और न ही वे किसी कार्य-पदार्थ के उपादान-कारण होते हैं। दूसरे शब्दों में, चेतन सत्ताएँ न किसी अन्य पदार्थ से बनी हैं और न ही उनसे कोई नया पदार्थ उत्पन्न होता है। ऐसी केवल दो ही चेतन सत्ताएँ हैं - 1. ईश्वर (परमात्मा, ब्रह्म, परमेश्वर) 2. जीव (जीवात्मा अथवा आत्मा) इन दोनों के अतिरिक्त कोई तीसरी चेतन सत्ता नहीं है। न ईश्वर किसी अन्य पदार्थ से बना है, न जीव; और न ही इन दोनों में से कोई अन्य पदार्थ उत्पन्न होता है। अब तीसरी सत्ता की चर्चा करते हैं। वह चेतन नहीं, बल्कि जड़ है। उसे प्रकृति कहते हैं। वैदिक दर्शन के अनुसार सत्त्व, रज और तम - इन तीन अत्यंत सूक्ष्म एवं अविभाज्य पदार्थों के समूह का नाम प्रकृति है। यह प्रकृति भी किसी अन्य पदार्थ से उत्पन्न नहीं हुई है। इसे किसी ने बनाया नहीं है। यह भी ईश्वर और जीव के समान अनादि, अनुत्पन्न, अविनाशी तथा नित्य सत्ता है। अर्थात् जैसे ईश्वर और जीव अनादि, अनुत्पन्न और नित्य हैं, वैसे ही प्रकृति भी अनादि, अनुत्पन्न और नित्य है। इस प्रकार वेद तथा समस्त वैदिक दर्शन तीन अनादि सत्ताओं को स्वीकार करते हैं - 1. ईश्वर 2. जीव 3. प्रकृति इन तीनों में प्रकृति की एक विशेषता है, जो ईश्वर और जीव में नहीं है। प्रकृति में परिणाम (Transformation) की क्षमता है। जब कोई समर्थ चेतन सत्ता उस पर कार्य करती है, तब वह अपने स्वरूप में परिवर्तित होकर असंख्य पदार्थों के रूप में प्रकट हो सकती है। उदाहरण के लिए, गेहूँ के आटे में रोटी बनने की सम्भावना विद्यमान रहती है; किन्तु वह अपने-आप रोटी नहीं बन जाता। किसी बुद्धिमान चेतन कर्ता के प्रयत्न से ही वह रोटी का रूप धारण करता है। इसी प्रकार प्रकृति भी अपने-आप सृष्टि नहीं बन जाती। सर्वज्ञ, सर्वशक्तिमान् ईश्वर अपने अनन्त ज्ञान एवं सामर्थ्य से प्रकृति पर कार्य करता है और उससे इस सृष्टि की रचना करता है। दर्शनशास्त्र का एक मूल सिद्धान्त है कि जो पदार्थ अनेक अवयवों अथवा घटकों के संयोग से उत्पन्न होता है, वह एक समय के पश्चात् पुनः अपने कारणरूप में परिणत हो जाता है। इसी को प्रलय अथवा विनाश कहते हैं। यहाँ विनाश का अर्थ किसी पदार्थ का सर्वथा अभाव हो जाना नहीं है, बल्कि उसका अपने मूल कारण में परिणत हो जाना है। वास्तव में किसी भी अस्तित्ववान् पदार्थ का पूर्ण अभाव कभी नहीं होता। जिसकी सत्ता है, उसकी सत्ता का सर्वथा अभाव असम्भव है। अतः प्रकृति का भी कभी अभाव नहीं होता। सृष्टि का प्रलय होने पर समस्त कार्य-पदार्थ पुनः अपने उपादान-कारण अर्थात् प्रकृति में अव्यक्त अवस्था को प्राप्त हो जाते हैं। इसी कारण सृष्टि-चक्र अनादिकाल से निरन्तर चलता आ रहा है। ईश्वर प्रकृति से सृष्टि की रचना करता है, एक नियत काल तक उसका पालन एवं संचालन करता है और फिर उपयुक्त समय पर उसे पुनः प्रकृति में परिणत कर देता है। वैदिक दर्शन तीन अत्यन्त महत्त्वपूर्ण प्रश्नों का सरल एवं तर्कसंगत समाधान प्रस्तुत करता है— 1. सृष्टि की रचना कौन करता है? - ईश्वर। 2. ईश्वर सृष्टि की रचना किसके लिए करता है? - जीवात्माओं के लिए, ताकि वे अपने पूर्व कर्मों का फल भोग सकें तथा पुरुषार्थ द्वारा नये शुभ एवं निष्काम कर्म, ज्ञान प्राप्ति और उपासना कर मोक्ष प्राप्त कर सकें। 3. ईश्वर सृष्टि की रचना किस पदार्थ (Raw Material) से करता है? - प्रकृति से। इस प्रकार ईश्वर, जीव और प्रकृति - ये तीनों अनादि, अनुत्पन्न, अविनाशी तथा नित्य सत्ताएँ हैं। इनका कोई कारण नहीं है; अतः ये अकारण (Causeless) हैं। दो चेतन हैं - ईश्वर और जीव। एक जड़ है - प्रकृति। ईश्वर कभी जीव या प्रकृति नहीं बनता। जीव कभी ईश्वर या प्रकृति नहीं बनता। प्रकृति कभी ईश्वर या जीव नहीं बनती। अर्थात् ये तीनों अपने-अपने स्वरूप में नित्य, स्वतन्त्र तथा परस्पर सर्वथा भिन्न सत्ताएँ हैं। यही वैदिक त्रैतवाद का मूल सिद्धान्त है। आधुनिक युग में महर्षि दयानन्द सरस्वती ने वेद तथा आर्ष-ग्रन्थों के प्रमाण, तर्क एवं युक्ति के आधार पर इस वैदिक दर्शन का पुनः प्रतिपादन किया। आर्यसमाज इसी शाश्वत वैदिक त्रैतवाद के प्रचार-प्रसार के लिए समर्पित है। --भावेश मेरजा

ईश्वर करें कि - १) आपके घर में लगातार वैसी ही चोरी हो , जैसे राम मंदिर में हों चुकी है। २) आपके बच्चों के भविष्य पे भी प्रश्नचिन्ह लगे और कोई रसूख और पैसे वाला गलत तरीको से उनके अवसर भी उनसे छीन लें। ३) आपको और आपके प्रिय जनों को भी जल्द ही लाठियों का भरपूर प्रसाद मिले। प्रसन्न ही होंगे आप तो। ये सब देश हित में ही तो होगा।

यदि मैं ऊपर उल्लिखित प्रभावशाली व्यक्तियों के सावरकर संबंधी विचारों को एक साथ रखूँ, तो सावरकर "वीरता, शौर्य, साहसिकता और देशभ
यदि मैं ऊपर उल्लिखित प्रभावशाली व्यक्तियों के सावरकर संबंधी विचारों को एक साथ रखूँ, तो सावरकर "वीरता, शौर्य, साहसिकता और देशभक्ति की पराकाष्ठा" हैं। - रासबिहारी बोस DAI AJIA SHUGI (Greater Asianism) MARCH 1939 ISSUE ASIATIC SOCIETY TOKYO PUBLICATION Rash Behari Bose the Indian Samurai was a fan of Veer Savarkar.

who is responsible for GD agarwal's death? who he was standing against? was his cause really noble? was he hinduphobic? was he not peaceful? what was his fault? he was not a hindu? he cared less for ganga? selective outrage is very bad. now they have taken out sonam vangchuk. previously when they detained him and put in jail forcefully. then if he was really anti-national, why it could not be proved in court?

photo content

photo content