𝐎𝐟𝐟𝐢𝐜𝐞 𝐨𝐟 𝐏𝐚𝐧𝐜𝐡𝐚𝐲𝐚𝐭 𝐒𝐚𝐡𝐚𝐲𝐚𝐤 𝐔𝐧𝐢𝐨𝐧 𝐔𝐭𝐭𝐚𝐫 𝐏𝐫𝐚𝐝𝐞𝐬𝐡
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16वें वित्त आयोग से जुड़ी यह खबर निश्चित रूप से सकारात्मक संकेत है, लेकिन अभी यह अंतिम निर्णय नहीं है। यह भी संभव है कि केवल मानदेय के नियमित भुगतान का प्रावधान हो, कोई नया नियम बने, या केवल नाममात्र की बढ़ोतरी हो।
इसलिए हमें किसी भी भ्रम में नहीं पड़ना है।
हमारा लक्ष्य स्पष्ट है
*स्थायीकरण और सम्मानजनक वेतनमान* ✅
आगामी 6 माह तक हमारा पूरा ध्यान केवल दो मांगों पर रहेगा:
स्थायीकरण
वेतनमान
अन्य सभी मुद्दों को फिलहाल स्थगित रखकर हमें पूरी एकजुटता, अनुशासन और ऊर्जा के साथ अपने अभियान को आगे बढ़ाना है।
याद रखिए संघर्ष अभी समाप्त होने नहीं हुआ है। जब तक स्थायीकरण और वेतनमान का लिखित आदेश जारी नहीं होता, तब तक हमारा अभियान निरंतर जारी रहेगा। ✊
पंचायत सहायक यूनियन उत्तर प्रदेश 🔥
पंचायत सहायको के मानदेय सुरक्षा संबंध में 16th वित्त आयोग में माननीय मंत्री श्री ओम प्रकाश राजभर जी ने प्रस्ताव रखा
समस्त ब्लॉक जनपद अपनी अपनी टीम गठित कर ले विधानसभा चुनाव एवं मानसून सत्र को ध्यान ने रखते हुए आगामी 6 माह सिर्फ स्थाईकरण एवं वेतन वृद्धि मांगो हेतु धरना प्रदर्शन किए जायेगे।
इसलिए सभी साथी एकमत होकर सामंजस्य बनाकर ब्लॉक स्तरीय एवं हो सके तो कलस्टर स्तरीय लीडर भी बना के ताकि संपर्क और सूचना संचार तेजी से हो सके।
यूपी में 13,116 पंचायत सचिवों की भर्ती को मंजूरी!
उत्तर प्रदेश शासन (पंचायती राज विभाग) की बैठक में लिए गए मुख्य निर्णय ( 5 June 2026 )
हर पंचायत को स्वतंत्र सचिव: यूपी की सभी 58,000 ग्राम पंचायतों में काम तेज करने के लिए अब हर पंचायत में एक अलग सचिव तैनात होगा।
13,116 नए पद: पंचायती राज विभाग में कुल 13,116 ग्राम पंचायत अधिकारी के नए पद बनाए जाएंगे।
पहले साल 4,372 भर्तियां: यह भर्ती 3 साल में पूरी होगी।
पहले चरण में 4,372 पदों के सृजन को हरी झंडी मिल गई है।
कैडर अलग ही रहेगा: वीपीओ (VPO) और वीडीयो (VDO) को मिलाकर एक 'यूनिफाइड कैडर' बनाने का प्रस्ताव खारिज हो गया है, दोनों अलग ही रहेंगे।
अतिरिक्त चार्ज से राहत: वर्तमान में सिर्फ 16,000 कर्मचारी हैं और 42,000 पंचायतों में सचिव नहीं हैं। इस नई भर्ती से अतिरिक्त प्रभार का संकट खत्म होगा।
*जनगणना 2027 के प्रथम चरण (हाउस लिस्टिंग ऑपरेशन - HLO) हेतु क्षेत्रीय कार्यकर्ताओं को मानदेय के वितरण के संबंध में।*
* *यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि आवास सूचीकरण एवं आवास जनगणना (एचएलओ) में लगे *सभी फील्ड कार्यकर्ताओं को देय मानदेय अनुमोदित मानदंडों के अनुसार बिना किसी देरी के वितरित किया जाए।*
जानकार एडिशनल चीफ स्टैंडिंग काउंसिल ने कहा है कि इसी तरह का विवाद P.I.L. नंबर 559/2026 (आशीष कुमार सिंह बनाम स्टेट ऑफ़ U.P. और अन्य) में भी ध्यान खींच रहा है, जिसमें भी स्टेट का स्टैंड यह था कि चूंकि U.P. सरकार ने O.B.C. कैटेगरी से जुड़े रिज़र्वेशन के पहलुओं को तय करने के लिए एक O.B.C. कमीशन बनाया है; जब तक यह काम पूरा नहीं हो जाता, ग्राम प्रधान और ग्राम पंचायत सदस्यों का चुनाव नहीं हो सकता, क्योंकि रिज़र्वेशन पर फैसला इन चुनावों का हिस्सा होगा। यह हैरानी की बात है कि WRIC नंबर 23749/2026 में भी O.B.C. को नियुक्त किया गया था। सुप्रीम कोर्ट के रिट-C नंबर 981 ऑफ़ 2019 (विकास किशन राव गवली बनाम महाराष्ट्र राज्य) के कुछ निर्देशों के अनुसार, लेकिन आज तक OBC कमीशन ने अपनी रिपोर्ट जमा नहीं की है। 5. स्टेट इलेक्शन कमीशन की ओर से पेश वकील का कहना है कि इलेक्टोरल रोल 10.06.2026 को पहले ही पब्लिश हो चुका है; और इसलिए वे चुनाव कराने की स्थिति में हैं और स्टेट सरकार को चुनाव कराने के लिए ज़रूरी लॉजिस्टिक्स देना है; लेकिन स्टेट सरकार के ऊपर बताए गए स्टैंड की वजह से, चुनाव कराने में रुकावट आ रही है। 6. 25.05.2026 और 26.05.2026 के विवादित ऑर्डर को देखने से यह साफ़ है कि ये ऑर्डर एक्ट, 1947 के सेक्शन 12(3-A) के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए पास किए गए हैं, जिसे गैर-संवैधानिक माना गया है और इसलिए ये ऑर्डर साफ़ तौर पर गैर-कानूनी हैं। 7. ऊपर बताई गई बातों को देखते हुए, पिटीशनर के वकील को OBC कमीशन को पार्टी बनाने की इजाज़त है और ऊपर बताई गई बातों को देखते हुए, विवादित ऑर्डर गैर-कानूनी हैं, इसलिए प्रधानों को एडमिनिस्ट्रेटर के तौर पर बने रहने की इजाज़त नहीं दी जा सकती। हालांकि, राज्य सरकार को आखिरी मौके के तौर पर, उन्हें OBC की रिपोर्ट रिकॉर्ड में लाने के लिए एक डिटेल्ड एफिडेविट फाइल करने की इजाज़त है। कमीशन, अगर कोई हो, और दूसरी डिटेल्स, जिसमें चुनाव कराने का टाइम फ्रेम साफ-साफ बताया गया हो, ऐसा न होने पर रेस्पोंडेंट नंबर 2 अगली तय तारीख पर कोर्ट के सामने पेश होगा। रेस्पोंडेंट नंबर 2 जो पर्सनल एफिडेविट फाइल करेगा, उसमें वह बताएगा कि किन हालात में उसने विवादित ऑर्डर जारी किए हैं, जबकि विवादित ऑर्डर में बताए गए प्रोविजन को इस कोर्ट की डिवीजन बेंच पहले ही गैर-कानूनी मान चुकी है, ऐसा न होने पर यह माना जा सकता है कि उसने इस कोर्ट की डिवीजन बेंच के फैसले के खिलाफ पहली नजर में कंटेम्प्ट किया है। 8. इस केस को 13.07.2026 को दोपहर 02:00 बजे लिस्ट करें। 25 जून, 2026/एस.प्रकाश WRIC नंबर 23749 of 2026 4 (सिद्धार्थ नंदन
ब्रेकिंग न्यूज़ | प्रयागराज
प्रधानों को प्रशासक बनाने के फैसले पर हाईकोर्ट की रोक
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कार्यकाल समाप्त होने के बाद ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने के फैसले पर रोक लगा दी है। हाईकोर्ट ने इस मामले में सरकार के फैसले को असंवैधानिक बताया है।
यह आदेश अरविंद राठौर की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया। याचिका में कार्यकाल खत्म होने के बाद प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने के फैसले को चुनौती दी गई थी।
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद प्रदेश में पंचायतों के प्रशासनिक संचालन को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई को होगी।
#Breakingnews #AllahabadHighCourt
उत्तर प्रदेश की 16 करोड़ से अधिक ग्रामीण जनसंख्या तक पंचायत सहायको की पहुंच और प्रभाव
इस रिपोर्ट में देखिए कैसे पंचायत सहायक बनते हैं सबसे बड़े सरकार और गांवों के बीच के सबसे अहम सेतु👇🏻
🖇️ https://psunionup.site/impact
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