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𝗩𝗶𝗸𝗿𝗮𝗺 𝗦𝗶𝗹𝗮𝘆𝗰𝗵

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All Rajasthan competition exam

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📈 Аналитический обзор Telegram-канала 𝗩𝗶𝗸𝗿𝗮𝗺 𝗦𝗶𝗹𝗮𝘆𝗰𝗵

Канал 𝗩𝗶𝗸𝗿𝗮𝗺 𝗦𝗶𝗹𝗮𝘆𝗰𝗵 (@vikramsilaych) языкового сегмента Хинди является активным участником. Сейчас сообщество объединяет 17 116 подписчиков, занимая 11 729 место в категории Образование и 24 519 место в регионе Индия.

📊 Показатели аудитории и динамика

С момента создания невідомо проект демонстрирует стремительный рост, собрав аудиторию из 17 116 подписчиков.

Согласно последним данным от 30 июля, 2026, канал показывает стабильную активность. За последние 30 дней изменение числа участников составило -310, а за последние 24 часа — -13, при этом общий охват остаётся высоким.

  • Статус верификации: Не верифицирован
  • Уровень вовлечённости (ER): Средний показатель вовлечённости аудитории составляет 60.03%. В первые 24 часа после публикации контент обычно набирает 31.33% реакций от общего числа подписчиков.
  • Охват публикаций: В среднем каждый пост получает 10 285 просмотров. В течение первых суток публикация набирает 5 368 просмотров.
  • Реакции и взаимодействия: Аудитория активно поддерживает контент: среднее количество реакций на один пост — 12.
  • Тематические интересы: Контент сосредоточен на ключевых темах, таких как सेना, सिंह, परीक्षा, युद्ध, आयोग.

📝 Описание и контентная политика

Автор описывает ресурс как площадку для выражения субъективного мнения:
All Rajasthan competition exam

Благодаря высокой частоте обновлений (последние данные получены 31 июля, 2026) канал поддерживает актуальность и высокий уровень охвата публикаций. Аналитика показывает, что аудитория активно взаимодействует с контентом, что делает его важной точкой влияния в категории Образование.

17 116
Подписчики
-1324 часа
-787 дней
-31030 день
Архив постов
किसी साथी को पुछे गए प्रश्न

मेरा इंटरव्यू यू आर साहू बोर्ड भारतीय इतिहास में आपकी रुचि किसमे है मैंने बोला प्राचीन भारत मे एक्सपर्ट ने प्रथम सवाल 1.महाजनपद काल के बारे में पूछा महाजनपद क्यो कहते है 2 .महाजनपदो के नाम बताओ 3 गुप्त काल को सवर्ण काल क्यो कहते है 3 शून्य का आविष्कार आर्यभट्ट ने किया या विवाद है आप बच्चों को कैसे समझाओगे 5.अकबर और शेरशाह सूरी के प्रशासनिक कार्यो में क्या अंतर था शेरशाह ने क्या नवीन प्रयोग किए 6.पुरन्दर की संधि किसके मध्य हुई और किन बातें पर समझौता हुआ Exprt 2 1.ईश्वरचन्द्र विद्यासागर के बारे में बताइये २. दादा भाई नोरोजी की धन निष्काशन सिद्धात क्या था इंग्लैंड ही जाता था या और देश भी इसका फायदा उठाते थे 3.1919 का अधिनियम क्या था 4. स्वराज पार्टी का गठन कब और किसने किया इसके गठन करने का के पीछे क्या कारण था 5. रविन्द्र नाथ टैगोर के बारे में आप क्या जानते है दो तीन question और थे मुझे याद नही आ रहा है यू आर साहू ने कोई प्रश्न नही पूछा बोर्ड वर्क नही करवाया धन्यवाद

हिस्ट्री में 50 पोस्ट...

Ap 2025 में 900+ पोस्ट हो गई है...

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कलवार सर 12-05-2026 1.अजमेर में कहाँ रुके हो 2.क्या खाया 3.बीएससी से आर्ट्स में कैसे 4.2 बार jrf हो तो पीएचडी क्यो नही की 5.पुरातात्विक स्त्रोत क्या होते है 6.विदेशी यात्रियों के विवरण कितने प्रमाणित है 7.महाराणा प्रताप के इतिहास के लिए समकालीन स्त्रोत 8.राजस्थान में कौन से जनपद 9.मालव जनपद के सिक्के कहाँ से मिले 10.मुहणोत नैणसी की 2 रचनाएं 11.क्या रामायण महाभारत को इतिहास मान सकते है 12.इनका भौतिक पक्ष क्या ह 13.बाबर के बारे में बताओ 14.क्या सांगा ने बाबर को भारत मे आमंत्रित किया था 15.इतिहास में पूर्वाग्रह का कारण क्या है 16.इतिहास के कौनसे पक्ष विज्ञान को लेकर समान है 17.पूरी तरह विज्ञान क्यों नही 19.भारतीय दर्शन 20.टॉपिक पढ़वाया....... शेरशाह सूरी की प्रशासनिक व्यवस्था- शेरशाह को अकबर का अग्रगामी क्यो कहते है, शेरशाह ने भू राजस्व सम्बंधित क्या सुधार किए, जब्ती और कनकुट या नस्क में क्या अंतर है, कानूनगों की पुस्तक का नाम, शेरशाह के समकालीन प्राथमिक स्त्रोत(मैने कहा दुर्भाग्य से हमे अब्बास खां सरवानी की तारीख़ ए शेरशाही ही मिलती है,इसके अलावा तवारीख ए दौलत ए शेरशाही जो हसन खां ने लिखी वो भी है जो शेरशाह के समकालीन मानी जाती है) एक शिक्षक किस तरह बच्चो के भविष्य को प्रभावित करता है? आप जा सकते हो बोर्ड का व्यवहार ठीक,बीच मे सहयोग किया।चाय की भी पूछा था....

हैदराबाद का भारतीय संघ में विलय कब किया गया था (एस आई भर्ती परीक्षा) 1. 13 सितंबर 1948 को 2.17 सितंबर 1948 3. 1 नवंबर 1948 4.17 दिसंबर 1948 उत्तर -3 व्याख्या- हैदराबाद का निजाम मीर उस्मान अली अपनी स्वतंत्र सत्ता बचाना चाहता था लेकिन सरदार पटेल के सुझाव पर 13 सितंबर 1948 को भारतीय सेना ने हैदराबाद के खिलाफ सैनिक कार्यवाही प्रारंभ की जिसे ऑपरेशन पोलो नाम दिया गया और 17 सितंबर को निजाम ने आत्म समर्पण कर दिया अंततः 1 नवंबर 1948 को हैदराबाद को भारतीय संघ में शामिल कर लिया गया

मेहरानगढ़ दुर्ग एक नजर में आज का सवाल जोधपुर की इमारतों का रंग नीला क्यों करवाया गया था???
मेहरानगढ़ दुर्ग एक नजर में आज का सवाल जोधपुर की इमारतों का रंग नीला क्यों करवाया गया था???

जोधपुर स्थापना दिवस पर जोधपुर जिले से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य 👆👆👆👆

राजस्थान उच्च न्यायालय -राजस्थान उच्च न्यायालय की स्थापना 1949 में जयपुर में की गई थी और इसका उद्घाटन 29 अगस्त 1949 को राजप्रमुख महाराजा सवाई मान सिंह ने किया था, बाद में 1956 में राजस्थान के पूर्ण एकीकरण के बाद सत्यनारायण राव समिति की सिफारिश पर इसे जोधपुर में स्थानांतरित कर दिया गया। प्रथम मुख्य न्यायाधीश कमला कांत वर्मा थे राज्य पुनर्गठन अधिनियम 1956 की धारा 51 की उपधारा (2) के अंतर्गत 31 जनवरी 1977 को जयपुर में एक पीठ का गठन किया गया था, जिसे 1958 में भंग कर दिया गया था । प्राच्य विधा प्रतिष्ठान - इसकी स्थापना जोधपुर में 1950 में संस्कृत मण्डल के रूप में की गई थी 1955 में संस्कृत मण्डल का पुनर्गठन करके प्राचीन विद्या प्रतिष्ठान के रूप में इसे बदल दिया गया राजस्थान संगीत नाटक अकादमी- इसकी स्थापना जोधपुर में 1957 में की गई थी आयुर्वेद विश्वविद्यालय- राजस्थान का प्रथम आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय जोधपुर में है जिसका नाम डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय है सरदार पटेल पुलिस विश्वविद्यालय जोधपुर में है राजस्थान विधि विश्वविद्यालय जोधपुर में है केंद्रीय ऊन विकास बोर्ड जोधपुर में है गमता गाजी की मीनार, इकमीनार मस्जिद, ग़ुलाब खां का मकबरा, तानापीर की दरगाह, धींगा गवर ( बेतमार) , चामुंडा माता का मेला का संबंध भी जोधपुर से है

जोधपुर ( शहर)- जोधपुर को सूर्यनगरी ,मरुस्थल का प्रवेश द्वार,राजस्थान की विधि नगरी हैंडीक्राफ्ट सिटी ,राजस्थान की सांस्कृतिक राजधानी के नाम से जाना जाता है जोधपुर की स्थापना राव जोधा के द्वारा1459 ईस्वी में की गई जसवंत जड़ -'राजस्थान का ताजमहल 'के रूप में सुशोभित जसवंत थड़ा राजस्थान जोधपुर में निर्मित मेहरानगढ की तलहटी में अवस्थित है इस स्मारक का निर्माण जोधपुर के महाराजा सरदार सिंह ने 1899 ईस्वी में अपने पिता जसवंत सिंह द्वितीय की स्मृति में करवाया था. वस्तुत: जसवंत थड़ा जोधपुर के राजपरिवार का स्मृति स्मारक है, जिसके परिसर में असंख्य छतरियां बनी हुई हैं छीतर पैलेस- राजस्थान में सूर्य नगरी के रूप में प्रतिष्ठित जोधपुर में स्थित है इस भव्य राजमहल का निर्माण जोधपुर के महाराजा उम्मेद सिंह ने करवाया था अकाल राहत कार्यों के अन्तर्गत निर्मित इस अनुपम राजमहल की नींव 18 नवम्बर, 1928 ईस्वी में रखी गई थी और इसका निर्माण कार्य 1940 ईस्वी में पूर्ण हुआ था मेहरानगढ़ दुर्ग - इस दुर्ग का निर्माण 1459 ईस्वी में चिडियाटुक पहाड़ी पर राव जोधा ने करवाया था इस दुर्ग को मयूर ध्वजगढ़ तथा गढ़ चिंतामणि के नाम से भी जाना जाता है इस दुर्ग की नींव में राजिया भांभी को जिंदा गाड़ दिया गया था इस दुर्ग में अभय सिंह द्वारा निर्मित फूल महल है इस दुर्ग सूरसिंह द्वारा निर्मित मोती महल है इस दुर्ग में किलकिला, शम्भूबाण, गजनी खां, नूसरत, नागपल्ली, गजक तथा कड़क बिजली जैसी तोपें है इस दुर्ग में भूरे खां की मजार है इस दुर्ग में तख्तसिंह द्वारा निर्मित श्रृंगार चौकी है जहां जोधपुर के शासकों का राजतिलक होता था दुर्ग में मानसिंह प्रकाश पुस्तकालय है रूडयार्ड किपलिंग ने मेहरानगढ़ दुर्ग को परियों व फरिश्तों से निर्मित माना है मण्डौर -मण्डौर का प्राचीन नाम माण्डव्यपुर था जो जोधपुर राठौड़ की प्राचीन राजधानी थी मुहणोत नैणसी ने गुर्जर प्रतिहारो की 26 शाखाओं का उल्लेख किया है जिनमें सबसे प्राचीन और महत्वपूर्ण मंडोर के प्रतिहार थे मंडोर में गुर्जर प्रतिहार वंश की स्थापना हरिश्चंद्र ने की तथा उन्होंने मंडोर को अपनी राजधानी बनाया एक थम्बा महल भी मण्डोर ही है जिसका निर्माण महाराजा अजीतसिंह ने करवाया था इस महल को प्रहरी मीनार के नाम से भी जाना जाता है मण्डौर में जोधपुर के राठौड़ शासकों की छतरियां है उत्तर भारत का एकमात्र रावण मंदिर मंडोर में है वीरपुरी का मेला मण्डोर में श्रावण मास के अंतिम सोमवार को लगता है बालसमंद झील- इस झील का निर्माण 1159 ईस्वी में बालकराव परिहार के द्वारा मण्डौर में करवाया था कायलाना झील - यह एक प्राकृतिक झील है जिसका आधुनिकीकरण 1872 में सर प्रताप सिंह ने करवाया था इस जेल के किनारे ही भारत का पहला मरू उद्यान केंद्र माचिया सफारी अवस्थित है इस झील में जल की व्यवस्था राजीव गांधी लिफ्ट नहर के द्वारा उपलब्ध करवाई जा रही है माचिया सफारी मृगवन - यह जोधपुर में स्थित है जिसकी स्थापना 1985 में हुई थी काजरी (CAZRI)- Central arid zone research institute की स्थापना 1959 में आस्ट्रेलिया तथा यूनेस्को के सहयोग से जोधपुर में की गई थी वर्तमान में काजरी के पांच उपकेंद्र है - बीकानेर ,जैसलमेर, पाली ,भुज तथा लद्दाख इस संस्थान का उद्देश्य मिट्टी का विश्लेषण, वन ,पशु और फसल से संबंधित अनुसंधान करना है आफरी (AFRI) - यह शुष्क वन अनुसंधान केंद्र है जिसकी स्थापना 1985 में जोधपुर में हुई थी जिसका उद्देश्य वनों का अनुसंधान करना है डोली धवा अभयारण्य - यह जोधपुर में स्थित है जो काले हिरणों के लिए प्रसिद्ध है बोरानाडा - यहां राज्य का दुसरा निर्यात संवर्धन औधोगिक पार्क स्थापित किया गया था ( पहला - सीतापुरा दूसरा - बोरनाडा तीसरा - नीमराना) बोरनाडा में हस्तशिल्प और ग्वारगम पार्क भी स्थित है अजीत भवन - यह राजस्थान का प्रथम हैरिटेज होटल है चोखेलाव महल - चोखेलाव महल सूर्य नगरी के नाम से प्रसिद्ध जोधपुर में स्थित मेहरानगढ़ किले में स्थित है इस महल का निर्माण मारवाड़ के शासक मालदेव के समय हुआ था मालदेव को फारसी इतिहासकारो ने हशमत वाला शासक कहा है 1541-42 के दौरान मालदेव ने राव जैतसी को पाहेबा के युद्ध में पराजित किया था 5 जनवरी 1544 को जैतारण के पास लडे़ गये प्रसिद्ध सुमेल गिरी के युद्ध में यह दिल्ली के शासक शेरशाह सूरी के हाथों पराजित हुआ था इस युद्ध में इस के सेनानायक जेता और कुपां भी मारे गए थे इस तथ्य को उल्लेखित करना प्रासंगिक होगा कि याहया बिन अहमद सरहिंदी ने अपनी पुस्तक तारीख ए शेरशाही मैं लिखा है कि इस युद के जीतने के पश्चात शेरशाह सूरी ने कहा था कि मैं एक मुट्ठी भर बाजरे के लिए हिंदुस्तान की बादशाहत खो देता

41D97700-D4EE-4734-8259-48FDC3B3901B.pdf

PSI Syllabus 2021.pdf

इस भर्ती का किसी के पास सिलेबस हो तो भेजना... 7891182504 पर

NEET पेपर हुआ था नासिक से आउट नासिक से गुड़गांव और गुड़गांव से जयपुर के जमवारामगढ़ इलाके में दो भाइयों के पास पहुँचा, जमवारामगढ़ से डिजिटल तरीके से सीकर पहुँचा, सीकर से जम्मू कश्मीर और कश्मीर से असम पहुँचा, अब CBI करेगी मामले की जाँच

भटनेर किला - राजस्थान का सबसे पुराना किला , यह हनुमानगढ़ में स्थित है। आज से करीब 1735 साल पहले यानी 285 ईस्वी में भाटी वंश के राजा भूपत सिंह ने इस किले का निर्माण करवाया था, इसलिए इसका नाम 'भटनेर किला' पड़ा। इस किले को 'हनुमानगढ़' के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि साल 1805 में बीकानेर के राजा सूरत सिंह ने यह किला भाटियों से जीत लिया था। उस दिन मंगलवार था और चूंकि मंगलवार का दिन भगवान हनुमान को समर्पित है, इसलिए इसका नाम हनुमानगढ़ रखा गया।

मोकासा- मराठा सरदारों को उनकी सैनिक सेवा के बदले नकद के स्थान पर जो जागीर दी जाती थी यह सैनिक और असैनिक दोनों सेवाओं के बदले दी जाने वाली जागीर सरंजाम - मराठा सैनिकों को केवल सैनिकों सेवा के बदले दी जाने वाली जागीर

मराठों द्वारा वसूले जाने वाले चौथ में सहोत्रा का हिस्सा कितने प्रतिशत होता था अ) 66% ब) 6% स) 25% द) 3% उत्तर - ब मराठों में चौथ की आय का बंटवारा :- बबती अर्थात 1/4 भाग राजा के लिए ,सहोत्रा अथवा 6% पन्त सचिव के लिए, नाडगुंडा अथवा 3% राज्य की इच्छा पर तथा शेष मौकासा अथवा 66% मराठा सरदारों को घुड़सवार रखने के लिए दिया जाता था