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Soch Manthan Study

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🇮🇳 शहीद सुखदेव थापर (संक्षिप्त विवरण) Sukhdev Thapar भारत के महान क्रांतिकारी थे, जिनका जन्म 15 मई 1907 को लुधियाना (पंजाब) में हुआ था। बचपन से ही उनमें देशभक्ति की भावना थी और युवावस्था में वे HSRA (Hindustan Socialist Republican Association) से जुड़ गए। उनके साथी भगत सिंह और राजगुरु के साथ उन्होंने ब्रिटिश शासन के खिलाफ क्रांतिकारी आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। लाला लाजपत राय की मृत्यु के बाद हुए विरोध आंदोलन में उनकी भूमिका रही और बाद में “लाहौर षड्यंत्र केस” में उन्हें गिरफ्तार किया गया। 23 मार्च 1931 को भगत सिंह और राजगुरु के साथ उन्हें फाँसी दे दी गई। उनकी शहादत भारत के स्वतंत्रता संग्राम में अमर योगदान का प्रतीक है। ✊ “इंकलाब जिंदाबाद”

“जिस बेटी को लोग साधारण समझते थे, उसने असाधारण इतिहास लिख दिया।” ✨ “499/500 सिर्फ अंक नहीं, वर्षों की मेहनत और संघर्ष की पहचान हैं।” 📚🔥 “हालात नहीं, हौसले तय करते हैं कि मंज़िल कितनी बड़ी होगी।” 💯 “दीपिका ने साबित कर दिया कि मेहनत करने वालों की पहचान एक दिन पूरा राज्य करता है।” 👑 “सपनों को सच करने के लिए शोर नहीं, लगातार मेहनत चाहिए।” 🌟 “एक बेटी की मेहनत ने पूरे हरियाणा का सिर गर्व से ऊँचा कर दिया।” ❤️ “जब इरादे मजबूत हों, तो इतिहास खुद बन जाता है।” 🔥 “499/500 — ये नंबर नहीं, एक नई प्रेरणा की शुरुआत है।” ✨ “किताबों से दोस्ती करने वालों को एक दिन दुनिया सलाम करती है।” 📖🏆 “मेहनत इतनी खामोशी से करो कि सफलता पूरे राज्य में आवाज़ बन जाए।” 💫

नाम : दीपिका जाति : जाटव वर्ग : अनुसूचित जाति जिला : रेवाड़ी राज्य : हरियाणा उपलब्धि : हरियाणा बोर्ड की 12वीं की परीक्षा में
नाम : दीपिका जाति : जाटव वर्ग : अनुसूचित जाति जिला : रेवाड़ी राज्य : हरियाणा उपलब्धि : हरियाणा बोर्ड की 12वीं की परीक्षा में कला वर्ग में 499/500 (99.80%) अंक लाकर पूरे हरियाणा राज्य में प्रथम स्थान प्राप्त करना।

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छत्रपति शाहूजी महाराज — एक राजा जिसने समाज बदल दिया --- 1️⃣ एक समय की बात है… भारत में एक ऐसा समाज था जहाँ जन्म ही इंसान की किस्मत तय करता था। कोई ऊँचा, कोई नीचा… और “नीचे” वालों के लिए शिक्षा, सम्मान—सब बंद। --- 2️⃣ इसी दौर में जन्म हुआ एक ऐसे शासक का, जिसने ये अन्याय देखा… और सोचा — “राज करना नहीं, समाज बदलना है।” ये थे — शाहूजी महाराज। --- 3️⃣ 1894 में जब उन्होंने कोल्हापुर की गद्दी संभाली, तो उनके सामने दो रास्ते थे: 👉 आराम से राज करो 👉 या समाज की जड़ें हिला दो उन्होंने दूसरा रास्ता चुना। --- 4️⃣ उन्होंने सबसे पहले शिक्षा पर वार किया… क्योंकि वो जानते थे — "अज्ञान ही असली गुलामी है।" 👉 गरीब और दलित बच्चों के लिए स्कूल खोल दिए 👉 पढ़ाई को मुफ्त कर दिया --- 5️⃣ सोचो उस समय… जब कुछ लोगों को स्कूल के दरवाज़े तक जाने नहीं दिया जाता था, तब एक राजा उन्हें किताबें दे रहा था। ये सिर्फ नीति नहीं, क्रांति थी। --- 6️⃣ फिर आया 1902… एक ऐसा फैसला जिसने इतिहास बदल दिया 👉 50% आरक्षण लागू किया आज जो reservation की बात होती है, उसकी शुरुआत यहीं से मानी जाती है। --- 7️⃣ समाज में हलचल मच गई… ऊँची जातियों ने विरोध किया लेकिन शाहूजी महाराज नहीं झुके। क्योंकि वो जानते थे — "बराबरी बिना संघर्ष नहीं मिलती।" --- 8️⃣ उन्होंने छुआछूत को भी खुलकर चुनौती दी 👉 दलितों को सार्वजनिक जगहों पर अधिकार दिलाए 👉 मंदिर प्रवेश की बात उठाई उस समय ये करना आसान नहीं था… लेकिन उन्होंने किया। --- 9️⃣ उन्होंने महिलाओं के लिए भी आवाज उठाई 👉 लड़कियों की शिक्षा 👉 विधवा विवाह का समर्थन जब समाज चुप था, तब वो बदलाव की बात कर रहे थे। --- 🔟 उनका साथ मिला एक और महान सोच वाले व्यक्ति को — डॉ. भीमराव आंबेडकर 👉 शाहूजी महाराज ने आंबेडकर जी को समर्थन दिया 👉 उनके विचारों को आगे बढ़ाने में मदद की --- 11. वो सिर्फ राजा नहीं थे… वो जनता के बीच रहने वाले नेता थे 👉 किसानों के लिए राहत 👉 मजदूरों के लिए बेहतर हालात उनका राज “सत्ता” नहीं, “सेवा” था। --- 6 मई 1922… एक महान अध्याय खत्म हुआ लेकिन उनकी सोच आज भी जिंदा है— हर उस जगह, जहाँ बराबरी की बात होती है। --- "जिस समाज में सबको बराबरी मिले, वही असली प्रगति है।" — शाहूजी महाराज