Deeni Rahnumayi
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📿 इस चैनल में अ़का़इद, मसाइल, ह़दीसें, दीनी व अखलाक़ी मजा़मीन को हिंदी ज़बान में पेश किया जाता है!
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मुसीबतों पर अज्र
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ईद मुबारक
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अस्सलामु अ़लइकुम व रह़मतुल्लाहि व ब-रकातुह🌹
ई़द की ढेरों खुशियां आपको और आपके अहले ख़ाना को मुबारक।
अल्लाह तआ़ला हमारे और आपके अ़मल कुबूल फ़रमाए, गुनाहों को माफ फ़रमाए। आमीन
फिलिस्तीन के मुसलमान की मदद फरमाए, उन्हें फतह़ नसीब फ़रमाए, उनकी शहादतों को क़बूल फ़रमाए, आमीन।
ग़ाज़ा में खतीब साह़स ने अपने घरों और मसाजिद के मलबे पर खड़े होकर अहले ईमान की एक जमाअ़त के सामने ई़द का खुतबा देते हुए फ़रमाया:
*"मुसलमानो! अपने रब के बारे में अच्छा गुमान रखो और जान लो की अल्लाह तआ़ला की ज़मीन पर फैसले अल्लाह तआ़ला ही के जारी होते हैं। तक़दीरें और फैसले अल्लाह तआ़ला के हाथ में हैं, इजराईल या अमेरिका के हाथ में नहीं, खबरदार! अपने रब के बारे में गुमान अच्छा रखें।"*
अल्लाहु अकबर! ईमान-बिलग़ैब का कैसा अ़जीब व गरीब मुज़ाहरा है।
अपनी जानें माल घर बार और अ़जी़ज़ व अका़रिब कुर्बान करके भी अल्लाह तआ़ला के हुज़ूर ऐसा तावाज़ो, ऐसी आ़जज़ी ऐसी मसकनत ऐसा सब्र, ऐसा शुक्र!
बिला शुबह ग़जा़ वालों की तरह कोई नहीं। इनमें अल्लाह तआ़ला के पसंदीदा लोगों की सिफात पूरे तोर पर मौजूद हैं, अल्लाह तआ़ला हमें इनकी मोह़ब्बत और हर क़िस्म की मदद करने की तौफीक़ अ़ता फ़रमाए। आमीन
*
एक गैर मुस्लिम लडकी का बकर इद के बारे मे बेहतरीन तब्सिरा ... दिल खुश हो गया 👌🏻👌🏻👌🏻*
*بقرعید کے حوالے سے ایک غیر مسلم لڑکی کی حیرت انگیز کہانی ...دل خوش ہوگیا 🙏🏻🙏🏻🙏🏻`*अल्फ़ाज़ बुलेटस हैं...!
यह क़त्ल कर सकते हैं, ज़ख़्मी कर सकते हैं, तोड़ सकते हैं, तबाह कर सकते हैं..!
आप अल्फ़ाज़ की गोली से इंसान की रूह को मार कर उसे ज़िंदा लाश में तब्दील कर सकते हैं।
आप अल्फ़ाज़ की तलवार से जज़्बात को मजरूह कर उसकी चमक और उसकी इंसानियत को बुझा सकते हो।
एक इंसान के धड़कते दिल जो का'बे से ज़्यादा अहम है , को तोड़ना दरहक़ीक़त उसकी रूह को तबाह करना है, फिर वह नाउम्मीद, कमज़ोर , टूटा हुआ बगैर मक़सद के जीता हुआ मरता रहता है।
और अपनी पूरी ज़िंदगी गिल्ट, खौफ़, कश्मकश, तनाव और बे यक़ीनी के साथ बीताता है।
بہ شکریہ مفتی سراج سیدات
मुश्किलों का हल
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"स्विमिंग पूल के पानी में बहुत से लोग नहाते हैं। जाहिर सी बात है कि पानी में इन सभी के शरीर का कुछ ऐसा रहता है जो नुकसानदेह होता है। ऐसे में गर्मियों में इस पानी में नहाने से डायरिया, पेट दर्द, पेट में मरोड़, त्वचा संक्रमण जैसी परेशानियाँ शुरू हो जाती हैं। इसकी वजह है कि पूल के पानी को साफ रखने के लिए कई बार बहुत अधिक क्लोरीन की मात्रा मिलाई जाती है जो शरीर के लिए नुकसानदायक होती है।"
बहरहाल, बहुत सी आयतें और रिवायतें ऐसी बेपर्दगी के खिलाफ कुरान और हदीस में मौजूद हैं, इसलिए न खुद ऐसी जगहों पर जाएँ न महिलाओं को जाने दें क्योंकि औरत घर से निकलती है और शैतान उसके पीछे लग जाता है। नामहरम औरत को देखना नाजायज है ही, नामहरम मर्दों को भी देखना जायज नहीं है।
Nasir Mazahiri
*सुनो सुनो!!*
*स्विमिंग पूल*
(नासिरुद्दीन मज़ाहिरी)
tinyurl.com/DeeniRahnumayi
पहले बाहें खुलीं, फिर बग़ल तक हाथ खुलें, फिर पिंडलियाँ खुलीं, इसी पर बस नहीं हुआ तो घुटने खोल दिए, और अब तो जांघें भी खोलकर लोग मनोरंजन स्थलों में मिलने लगे। कमाल तो यह है कि ट्रेन और प्लेन में भी ऐसे नमूने मिलने लगे। बात अगर सिर्फ़ मर्दों की होती तो भी कड़वा घूँट समझ ना चाहते हुवे पी लेते लेकिन लड़कियों ने तो नग्नता और बेशर्मी के रिकॉर्ड बना दिए। दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, कोलकाता, मद्रास, चंडीगढ़ और थोड़ा बहुत लखनऊ और पटना में लड़कियों ने ऐसे-ऐसे अंदाज में बेशर्मी का प्रदर्शन शुरू कर दिया कि अब यूरोप और अमेरिका की मिसालें देना ही बेकार हो गया।
गर्मियों का चरम है इसलिये ऐसे मौसम में पर्दानशीनों, महजबीनों का पिकनिक और स्विमिंग के लिये घरों से निकलना शुरू हो गया है। ये अपने घरों से निकलकर सामूहिक स्विमिंग पूल पहुंचने लगी हैं। इन स्विमिंग पूलों में दुनियाभर के बदमाश भी पहुँचते हैं, लफंगे बाकायदा कैमरे लेकर जाते हैं, हर कली, हर गली, हर कोण, हर पल की वीडियो बनाते हैं। फिर ये वीडियो यूट्यूब पर अपलोड की जाती हैं ताकि दुनिया देखे और गुनाहगार हो। वे महिलाएं जिनके चेहरों को आम लोग आम दिनों में नहीं देख सकते, यहाँ स्विमिंग पूल में पानी से तर-ब-तर शरीर से चिपके कपड़ों की वजह से एक-एक अंग और हीस्सा स्पष्ट दिखाती फिरती हैं। खुद भी गुनाहगार होती हैं और वहां मौजूद सब आय्याशों को गुनाह का न्योता देती फिरती हैं। यही कासियत हैं, यही आरियात हैं। कपड़े ऐसे बारीक कि शरीर का एक-एक बाल दिखे, हर एक खाका दिखे, फिर भी उनकी सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ता। बात गैरों की नहीं, अपनों की कर रहा हूँ, वेद और इंजील वालों की नहीं, कुरान और कलमा वालों की कर रहा हूँ। जगह-जगह नग्नता के ये अड्डे सरकारी इजाजत से खुले हुए हैं। इन जगहों पर इज्जतदार, शरीफ लोग जा ही नहीं सकते। मिश्रित व्यवस्था होती है। वहां पहुंचकर कपड़े आप उनकी मर्जी वाले पहन सकते हैं। बल्कि छोटे नेकर और शॉर्ट लोवर आदि उनके पास रखे हुए हैं, वही पहनने की शर्त है। सोचें महंगी-महंगी फीस और लंबी-लंबी रकम देकर लोग जहन्नुम खरीद रहे हैं और अपनी हरकत को रोशनख्याली समझते हैं।
सुनो सुनो!!
अल्लाह तआला नहीं चाहता कि कोई औरत बगैर ज़रूरत घर से निकले, चूँकि खुद अल्लाह तआला का हुक्म है:
"और अपने घरों में आराम और सुकून से रहो और जमाना-ए-जाहिलियत की तरह मत घूमो।" (अल-कुरान, 33:33)
हजरत अली रज़ि अल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया: "अपनी जांघ मत खोलो और न किसी ज़िंदा या मुर्दा की जांघ को देखो।" (अबू दाऊद)
और सुनिए!
हजरत जर्रा बिन अब्दुर्रहमान बिन जरहद अपने वालिद से रिवायत करते हैं, वे कहते हैं कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने हमारे पास बैठकर मेरी जांघ खुली हुई थी तो आपने फरमाया: "क्या तुम्हें मालूम नहीं कि जांघ का हिस्सा परदा है?" (बुखारी)
हजरत हसन से रिवायत है कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया: "देखने वाले और जिसे देखा जाए, दोनों पर अल्लाह तआला की लानत हो।"
हजरत अबू सईद रज़ि अल्लाहु अन्हु रिवायत करते हैं कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया: "कोई मर्द किसी दूसरे मर्द के परदे की तरफ न देखे, औरत किसी दूसरी औरत के परदे की तरफ न देखे।" (मिश्कात)
बहुत से लोग सामूहिक मौकों पर तो परदे का खास एहतिमाम करते हैं लेकिन तन्हाई में बिल्कुल एहतियात नहीं करते। ऐसे मौकों पर भी रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का इरशाद मौजूद है:
"तुम लोग नंगे होने से बचो, क्योंकि तुम्हारे साथ वे (फरिश्ते) होते हैं जो तुमसे जुदा नहीं होते। वे सिर्फ उस वक्त जुदा होते हैं जब आदमी शौच करता है या अपनी बीवी के पास जाकर उससे हमबिस्तर होता है। इसलिए तुम उनसे शर्म करो और उनकी इज्जत करो।" (तिरमिज़ी)
बिनोरी टाउन कराची के उलेमा ने ऐसे स्विमिंग पूल में नहाने की कई बुराइयां लिखी हैं:
"कई बुराइयाँ पाई जाती हैं:
इसमें औरत का बगैर ज़रूरत घर से निकलना है जो कि जायज़ नहीं।
पब्लिक स्विमिंग पूल में नहाते वक्त अक्सर औरत का मर्दों को देखना होता है जो शरई रूप से मना है।
गीले कपड़े शरीर से चिपक जाते हैं और अंगों को दिखाते हैं, जबकि औरतों को पूरा शरीर छुपाने का हुक्म है।
पब्लिक स्विमिंग पूल में नहाना फितरत-ए-निस्वानी के खिलाफ है। इसलिए औरतों का पब्लिक स्विमिंग पूल में पर्दे के साथ नहाना जायज़ नहीं।"
उर्दू न्यूज़ 18 की वेबसाइट पर एक लेख में यह बताया गया है कि स्विमिंग पूलों में नहाने से मानव शरीर पर कौन-कौन से नकारात्मक प्रभाव पड़ते हैं। एक उद्धरण पढ़ें:
“⚠️ *परिंदों को पानी पिलाएं* ”
- गर्मी की शिद्दत और चिलचिलाती धूप में परिंदे पानी की तलाश में सरगर्दां (परेशान) रहते हैं और बहुत से परिंदे प्यास की शिद्दत की वजह से बेहोश हो जाते हैं और मर भी जाते हैं।
> पानी पिलाना बहुत बड़ा सदक़ा है, लिहाजा अपने घर की छत या बालकनी वगैरह में परिंदों के लिए पानी का इंतजाम करके रब की खुशनूदी हासिल करें...
#मनकूल
हिन्दी : महताब अहमद
