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काम संहिता🙏
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सेक्स से जुड़ी हुई प्रेम से जुड़ी हुई सभी जानकारी के लिए सन्देश भेजे जय कामदेव कामसूत्र यौन स्थानों का सच्चा गुरु ग्रंथ है। अपने यौन जीवन में विविधता लाने के तरीके खोज रहे हैं? तब आप सही जगह पर आए हैं .. !!
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#स्त्री_और_प्रेम ......
स्त्री में प्रेम की तीव्रता कदापि नही होती (perhaps)जबकि पुरुष सिर्फ़ प्रेम की तीव्रता से ही संचालित होता है।
स्त्री बिना प्रेम के भी पुरुष के साथ असानी से रह जाती है जबकि पुरुष बिना प्रेम के नही रह सकता.. विद्रोही हो जाता है।
पुरुष सहज निर्लिप्त होता है जबकि स्त्री के प्रेम में अनेकों लिप्ततांए होती है। शायद यही वजह है कि पुरुष प्रेम में #प्रणोत्सर्ग तक कर देता है.. मगर स्त्री सामान्यतः नहीं।
कई वर्षों तक प्रेम में बने रहने और फिर ब्रेकअप होने के बाद ये अनुभव हुआ है मुझे की लगता है कि प्रेम मात्र पुरुष का विषय है।
इन्डोर्फिन हार्मोन के अनलिमिटेड सीक्रेशन से मस्तिष्क एक खुमारी व दीवानगी का शिकार हो जाता है एवं चेतन मस्तिष्क की गतिविधियां सीक्रेशन इम्पैक्ट को फोलो करने लगती है। ‘सेंसेस आफ एबसेंस व गेट इट एचीव ‘ का भाव इतना तीव्र हो जाता है कि पुरुष आत्महत्या अथवा हत्या जैसे कदम उठा लेता है।
अधिक संवेदना तो शायद नहीं पर हाँ..अधिक मजबूती के साथ स्त्री तसल्ली से जिंदा रहती है।
तभी वो पति व प्रेम में से किसी एक को चुनना हो तो पति को चुनती है...प्रेम को नहीं..।
ना प्रेम होने के बावजूद भी पति को शारीरिक संसर्ग के लिए आमंत्रण भी देती है व संतानोत्पति भी करती है। वह केवल #तात्कालिक_सुविधा देखती है ,बस ! ....प्रेम को पाने के लिए मरने - मारने तक नहीं जाती क्योंकि प्रेम एक आवेग के साथ बहता है । स्त्री मात्र सुविधाजनक वर्तमान में जीना पसंद करती है ।
स्त्री का प्रेम अंगीठी की आँच सा सीमित होता है जबकि पुरुष का प्रेम दावानल सा होता है .. सबकुछ स्वाहा करने सा ....।
क्या स्त्रियों में यह आवेग संभव है ?
पता नहीं ! शायद नहीं !!
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#स्त्री शरीर के सभी अंग मादकता, सेक्स और यौन सोंदर्य से परिपूर्ण है, इसीलिए स्त्री अपने हर अंग का शृंगार करती है..
प्रकृति नें स्त्री के पूरे शरीर को संवेदनाओं से परिपूर्ण बनाया है। उसके शरीर के किसी भी जगह छुअन हो जाय तो वहां 1100 वाट का झटका लगता है। वहीं प्यार से वह किसी को छू दे तो निर्जीव मे भी प्रबल प्राणों का संचार होता प्रतीत होता ही है।
इसीलिए पूरे संसार के सभी फोरप्ले के अनुभवों को संकलित करने से पता चलेगा कि स्त्री के शरीर का कोई विशिष्ट अंग ही नहीं सभी अंग व उनके क्षेत्र फोरप्ले के लिए एक दूसरे से कम नहीं है।
💕
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पुरुष को देह चाहिए
थकन उतारने के लिए
स्त्री को रुह चाहिए
देह उतारने के लिए…
स्त्रियों ने शब्दकोश से
थकन शब्द मिटा दिया
और पुरुषों के शब्दकोश में
रुह शब्द को स्थान ही नहीं मिला…
स्त्री और पुरुष
दोनों अपने-अपने शब्दकोश अनुसार
प्रेम की प्रतिमाएँ गढ़ते हैं…
…और रुह की थकन
हमेशा अधूरी रह जाती है…
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जब हम किसी से प्यार करते हैं तो वहीं हमारे लिए सबकुछ हो जाता है हम उसे नाराज करना नहीं चाहते हैं हम उसी के अनुसार अपने आप को बना लेंते है हमारा इतना समर्पण हमें प्यार से भर देता है और लोग इसे हमारी कमजोरी समझ लेते हैं अनायास ही हम पर गुस्सा करते हैं किसी और का गुस्सा भी हम पर ही निकालते हैं और हम चुपचाप सबकुछ सहते रहते हैं इस तरह हम अपनी इज्जत खो देते हैं हम रिश्ते बचाने के लिए चुपचाप सबकुछ सहन कर लेते हैं फिर जब उन्हें हमेशा के लिए दूर जाना होता है तो ऐसा करने का उन्हें बहाना भी मिल जाता है जाने वाला यह कहता है कि वो ऐसा इसलिए कर रहा है ताकि हमें उससे नफ़रत हों जाए । मैं यह सब झेल चुका हूं और इतना समझ गया हूं कि कोई भी रिश्ता हों हमें अपनी इज्जत नहीं खोनी चाहिए क्योंकि जिस रिश्ते में हमारी इज़्ज़त हीं नहीं होगी वहां हमारे लिए कभी प्यार नहीं हो सकता है।बस एक बार आप उन्हें उनकी भी भाषा में जवाब दीजिए यकीन मानिए रिश्ता रहें या न रहें ताउम्र कोई मलाल नहीं रहेगा।
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मेरे पुरुष मित्रो..
यदि किसी रस्ते पर स्त्री पर नज़र पड़ते ही ग़र
तुम अपनी आँखों पर से क़ाबू खो देते हो।
अपना सारा रस्ता छोड़ -छाड़ कर
लाज-शरम सब भूल भालकर
उसके पीछे हो लेते हों।
ग़र झुंड में खड़े होकर उसकी संरचना पर
अपनी अभद्र व्याख्याएं करते हो।
उसकी संरचना के किसी अंश पर
अपनी आँखे चिपकाकर
बेशर्मी की सारी कलाएं करते हो।।
ग़र तुम उसको मर्दों के साथ देख कर
कोई ओछी सी कहानी गढ़ लेते हो।
उसके कपड़ो की लंबाई देख कर
उसके नाम के पीछे
एक घटिया सा तमगा मढ़ देते हो।।
गर तुम अपनी हीन कल्पना से
उसकी संरचना का चित्रण करते हो।
दूर खड़े होकर आंखों से
पल-पल चीर हरण करते हो।।
ग़र तुम्हारी नज़रें हरपल
उसके वस्त्रों के भीतर झाँके।
तुम्हारे हाथ उसे हरपल
छूने के मौके ताके।।
उसका अपनी उंगलियों से
माथे पर आई लटाओं को
कानों के पीछे ले जाना।
उसका अपनी आदत के कारणवश
दांतों से अपने होंठ दबाना।
उसका तुम्हारे संग हँसना , आना-जाना।।
ग़र तुम कोई इशारा समझो
ग़र तुम उसकी सारी सुंदरता
अपनी हवस के नीचे मसलों।
जीती जागती एक स्त्री को
महज़ एक हवस-पूर्ति की वस्तु समझों ।।
औऱ फ़िर यदि तुम ...
अपनी किसी फूहड़ सी परिकल्पना से
उसके चरित्र का निर्धारण करते हो
तो मैं ये लांछन लगाता हूँ तुम पर
कि 👉 तुम चरित्रहीन हो...
👉 स्त्री नहीं..
समझ सको तो समझ लो..🌹🙏
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श्लोक
आचार्य चाणक्य ने अपनी चाणक्य नीति में स्त्रियों की इच्छाओं का वर्णन एक श्लोक के माध्यम से किया है। श्लोक इस प्रकार है-
स्त्रीणां द्विगुण आहारो लज्जा चापि चतुर्गुणा ।
साहसं षड्गुणं चैव कामश्चाष्टगुणः स्मृतः ॥
इस श्लोक के अनुसार महिलाओं में पुरुषों कि अपेक्षा:भूख दो गुना, लज्जा चार गुना, साहस छः गुना, और काम आठ गुना होती है।
स्त्रियों में होती है दोगुनी भूख
आचार्य चाणक्य के उपरोक्त श्लोक के अनुसार महिलाओं की ताकत का वर्णन है। आचार्य चाणक्य के मुताबिक स्त्रियों में पुरुष के मुकाबले उनकी भूख दोगुनी होती हैं। आज की जीवनशैली में महिलाओं को कामकाज के कारण खानपां बिगड़ गया है लेकिन वह अपने भूख पर काबू रख लेती हैं।
महिलाओं में लज्जा होती है चार गुना
आचार्य चाणक्य की चाणक्य नीति के अनुसार स्त्रियों में शर्म यानी लज्जा पुरुषों से चार गुना ज्यादा होती है। महिलाओं में शर्म इतनी ज्यादा होती है कि वह किसी भी बात को कहने में कई बार सोचती हैं।
साहस छह गुना
चाणक्य नीति के अनुसार महिलाएं शुरू से ही साहसी होती हैं। वहीं स्त्रियों में पुरुष से छ: गुना साहस भी होता है। इसलिए ही स्त्रियों को शक्ति स्वरूप भी माना गया है।
कामेच्छा महिलाओं में पुरुषों से अधिक
आचार्य चाणक्य के अनुसार स्त्रियों में काम इच्छा भी पुरुषों से आठ गुना ज्यादा होती है, लेकिन उनमें लज्जा और सहनशीलता अत्यधिक होती है जिस वजह से वह इसको उजागर नहीं करतीं और अपने संस्कार को ध्यान में रखते हुए पूरी मर्यादा से परिवार को संभालने का कार्य करती हैं।
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पुरुष चाहे कितनी ही स्त्रियों से विवाह कर लें
#_या #_प्रेम ...‼️❤️‼️
स्त्री कभी उसे वेश्या की उपाधि नहीं देती
वो देर-सवेर पुरूष की भावना स्वीकारती ही हैं
और उसके सम्मान का मान रख ही लेती हैं...!!
लेकिन पुरूष अपनी प्रेमिका के जीवन में
दूसरे पुरूष को कभी नहीं स्वीकारता
क्यू के उसे सिर्फ उसी से प्रेम है !!
और पल भर में स्त्री को वेश्या की संज्ञा से
सुसज्जित कर देता हैं...!!
जानते हैं क्यूँ...!!
क्यूँकि पुरूष को अति प्रिय होता है अपना अहम
और स्त्री को सर्वोपरि होता है अपना प्रेम
निसंदेह पीड़ा तो स्त्री को भी होती है
क्यूँकि एक कोमल हृदय वह भी रखती हैं
फिर भी वह पुरुष को वेश्या नहीं कहती हैं
क्यूँकि वेश्या तो स्त्रियाँ होती हैं...!!
पुरुष तो पति होता हैं
प्रेमी होता हैं
मित्र भी होता हैं
कुछ भी करे कहे की तुमको जानता ही नहीं मै
पुरुष वेश्या कैसे होगा .....???
नही कभी नही...!!
वेश्या तो स्त्रियाँ होती हैं...!!
सदा से...!!
#___मै प्रेम हूं...!!
❤️❤️❤️❤️❤️❤️
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मैं चाहती हूँ
हाँ दिल से चाहती हूँ
अब के इश्क़ तुम्हें हो पहले
तुम तड़पो मुझसे मिलने को
बेचैन हो रातें तेरी
और ख़्याल सिर्फ़ मेरा हो…
अब के तुम इज़हार की सोचो
मेरी ना के डर को समझ तो पाओ
तुम्हें मैं जब इग्नोर करूँ
तुम मेरी एक नज़र को तरसो
तुम मेरी हाँ को तरसो
तुम सोचो मैं क्या सोचूँगी
जो कुछ मैंने महसूस किया है
वो भी सब महसूस करो तुम,
जो मैंने दिन काटे हैं
एक एक पल वैसे काटो तुम,
तब समझोगे क्या होता हैं
किसी के वफ़ा से खेला जाना
कुछ तो समझो,कुछ मान भी जाओ
कितना तड़पता है
एक सच्चा आशिक
प्यार में,
थोड़ा तड़प झेल कर देखो
कितना बेबस होता हैं
कोई प्यार मे…..
हाँ अब कि बार मैं चाहती हूँ
तुम भी तड़पो
उस अनकहे प्यार में….
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कामुकता की एक झलक , औरत के शरीर ये अंग भी कमाल की उत्तेजना देता है आकर्षित करता है उसके नजदीक जाके उसके करीब आने को, जब कानो के पास एक मर्द का चुम्बन हो तो औरत भी खामोशी से बाहों में आती है ..
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वात्स्यायन के कामसुत्र के अनुसार चुम्बन के प्रकार :-
सम : जब प्रेमी जोड़ा आमने-सामने होकर एक-दूसरे के होठों को चूमता है
तिर्यक : जब स्त्री या पुरुष तिरछा होकर अपने होठों को गोलाकर करते हुए दूसरे के होठों का चुंबन करते हैं
उद्भ्रांत : जब दूसरे के सिर और ठुड्डी को पकड़कर मुंह को अपनी ओर मोड़कर चूमते हैं
पीडितक : सम, तिर्यक या उद्भ्रांत में अगर थोड़ी पीड़ा पहुंचाते हुए चुंबन लिया जाए
शुद्ध पीडितक : थोड़ा कष्ट देते हुए चुंबन में केवल होठों का इस्तेमाल
अवलीढ पीडितक: थोड़ा कष्ट देते हुए चूमने में जीभ की नोक का भी इस्तेमाल
अवपीडित : जब दूसरे के नीचे वाले होठ को अंगूठे और तर्जनी उंगली से पकड़कर गोल बनाकर केवल होठों से दबाया जाए
उत्तर चुम्बितक : जब स्त्री पुरुष के नीचे वाले होठ को चूम रही हो और पुरुष उसका ऊपर वाला होठ चूम रहा हो
संपुटक : दोनों होठों को अपने दोनों होठों के बीच में दबाकर दांतों से थोड़ा कष्ट पहुंचाते हुए चूमना
मृदु : स्त्री या पुरुष के माथे और आंखों पर प्यार भरा चुंबन
सम : पुरुष के सीने पर लिया जाने वाला चुंबन भी सम कहलाता है
पीडित : स्त्री के वक्ष और गालों का चुंबन
अंचित : स्त्री के वक्ष और दोनों बगलों पर लिया जाने वाला चुंबन
चलितक : नींद में सोए पुरुष को सेक्स के लिए जगाने वाला चुंबन
प्रतिबोधिक : बिस्तर पर सोती स्त्री के गालों पर प्यार भरा चुंबन
छाया चुंबन : आइना, दीवार या पानी में अपने चाहने वाले की छाया देखकर उसका चुंबन
संक्रांतक चुंबन : स्त्री की मौजूदगी में उससे प्यार जताने के लिए किसी बच्चे, फोटो या मूर्ति का चुंबन
पादांगुष्ठ चुंबन : पुरुष में काम भावना जगाने के लिए उसके पैर के अंगूठे का चुंबन
निमित्तक : जब स्त्री को किस करने के लिए बाध्य किया जाए और वह पुरुष के होठों पर केवल अपना होठ रख दे
स्फुतरिकत : स्त्री पुरुष के नीचे वाले होठ को अपने दोनों होठों से छूने की कोशिश करे
घट्टितक : इसमें स्त्री अपनी जीभ की नोक से पुरुष के होठों को रगड़ती है
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सेक्स के तीन चरण होते हैं :
फोरप्ले, (सहवास) और आफ्टरप्ले । ऋषि वात्स्यायन ने अपनी किताब कामसूत्र में फोरप्ले, और आफ्टरप्ले तीनों पर एक-एक चैप्टर लिखा है । यानी तीनों को बराबर महत्व दिया है। हालांकि आजकल के जमाने में पुरुषों की रुचि फोरप्ले और आफ्टरप्ले में कम और प्ले में ज्यादा होती है । दूसरी तरफ महिलाओं की रुचि आज भी फोरप्ले में ही ज्यादा है ।
फोरप्ले ज्यादा होने के कई फायदे हैं । ज्यादा फोरप्ले करने से स्त्री की उत्तेजना में इजाफा होता है । अगर कोई स्त्री फोरप्ले में ज्यादा वक्त बिताएगी तो सहवास की शुरुआत में या उसके दौरान होने वाले दर्द से उसे छुटकारा मिल सकता है और आनंद में भी इजाफा हो सकता है । अपने देश में ज्यादातर पुरुष फोरप्ले में जितना चाहिए, उतना वक्त नहीं बिताते और जल्दबाजी करके सहवास करने लगते हैं । इससे स्त्रियों को दर्द होता है और इसके बाद सहवास में उनकी दिलचस्पी कम हो जाती है । अगर हर पुरुष फोरप्ले में ज्यादा समय बिताने लगे तो स्त्रियों की दर्द की समस्या गायब हो जाएगी ।
कई बार फोरप्ले में ज्यादा वक्त लगाने से पुरुष के प्राइवेट पार्ट में ढीलापन आ जाता है । अगर वह फिक्र करने लगेगा कि इरेक्शन वापस आएगा या नहीं और उसका ध्यान उसी पर बना रहेगा तो उत्तेजना की संभावना कम हो जाएगी। मिसाल के तौर पर मैं आपसे सवाल पूछूं कि क्या आप सांस ले रहे हैं? यही सवाल मैं दोबारा पूछूं कि क्या आप सचमुच सांस ले रहे हैं ? पहले अहसास नहीं था, अब आपको अहसास हो गया। मतलब प्राइवेट पार्ट पर जितना ज्यादा ध्यान लगाओगे, उतना ही इरेक्शन कम आएगा । जितने बेफिक्र रहोगे, उतना ही ज्यादा आएगा ।
याद रहे, आदमी का इरेक्शन मरते दम तक कम नहीं होता, अगर वह बेफिक्र है, लेकिन अगर वह चिंता करेगा तो ऐंगज़ाइअटी उसके सेक्स रिस्पॉन्स को कम कर देगी । अगर उस दौरान दिमाग से चिंता न हटे तो पुरुष को लंबी सांसें लेनी चाहिए । कहते हैं कि इससे 50 फीसदी ऐंगज़ाइअटी अपने आप खत्म हो जाती है । लंबे समय के फोरप्ले के दौरान तनाव का आना और चले जाना आम बात है । यह किसी बीमारी का लक्षण नहीं है । तनाव का आना-जाना व्यक्ति की मानसिक स्थिति पर निर्भर है । याद रखें ,एक बार नाकामयाब होने का मतलब यह नहीं है कि आप हमेशा ही नाकामयाब होंगे ।
30 से 40 मिनट बाद आप दोबारा सेक्स करे इससे आपका समयभी बढेगा और इरेक्ट भी काफी समय तक रहेगा
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सच कहूं गर्मी की काली रात में सफेद कपड़ों में चमकता तुम्हारा सांवला बदन और नग्न पीठ मन करता है बस जीभ फेर कर उस स्याम बदन से जो पसीना रिस रहा उसका पान करू।
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*तजुर्बो से इश्क़ नहीं होता,*
* व्यापार होता है.....*
*खामियां हो नजरअंदाज, *
*तो इश्क़ बेहिसाब होता है...
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क्या होता है शीघ्रपतन?
सेक्स के दौरान चरम सुख पर पहुंचने से पहले ही पुरुष का स्पर्म निकल जाना ही शीघ्रपतन है । इसकी सबसे बड़ी वजह मानसिक कमजोरी है। जो व्यक्ति सेक्स को लेकर जितना कम जानता है, वह सेक्स के दौरान शीघ्रपतन का शिकार उतनी जल्दी होता है । अगर सेक्स की सीमा को लंबे समय तक ले जाना है,तो पुरुषों को मानसिक रुप से जागरुक और मज़बूत होना पड़ेगा । उन्हें स्वंय पर नियंत्रण करने की ज़रुरत है ।भारत के लगभग 30 से 40 प्रतिशत पुरुषों को यह समस्या है।
वैसे, यह भी सच है कि हर पुरुष अपनी जिंदगी में कभी न कभी शीघ्रपतन की समस्या से गुजरता है, क्योंकि यह कोई बीमारी नहीं बल्कि एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, जो उम्र के साथ होती ही है ।
इलाज क्या है ?
अगर देखा जाए तो इस शीघ्रपतन का इलाज बाहरी न होकर घरेलू है । सबसे पहले आप अपनी जीवनशैली को बदलें और अपने खान-पान पर विशेष ध्यान दें । भोजन में ऐसी चीजों का इस्तेमाल करें, जो आपकी इस समस्या का निदान कर सकते हैं ।
उड़द दाल की खिचड़ी
उड़द दालऔर चावल कीखिचड़ी का सेवन देसी घी के साथसुबह और शाम करें। खिचड़ी खाने के बाद एक गिलास गुनगुना मीठा दूध पी लेंऔर यही प्रक्रिया लगभग एक महीने तक जारी रखें । लेकिन यह ध्यान रखें कि आप जितना खा सकते हैं सिर्फ उतना ही खाएं ।
तरबूज
तरबूजका नमक लगाकर सेवन करें या फिर तरबूज के छोटे-छोटे टुकड़े कर लें और नमक औरअदरकपाउडर मिलाएं और सेवन करें । तरबूज के अंदर फाइटोन्यूट्रिएंट्स होते हैं जो सेक्स ऊर्जा यानिकामेच्छाबढ़ाने में मदद करते हैं और शीघ्रपत से भी राहत देते हैं ।
अश्वगंधा
अश्वगंधा पाउडर 5 ग्राम की मात्रा में लें और उसमें उसी बराबर मात्रा में मिश्री मिलाएंऔर गुनगुने दूध के साथ एक बार सुबह और एक बार शाम में इसका सेवन करें और ऐसा लगातर 3 महिनों तक करते रहें ।
हरा प्याज़
इस समस्या से निजात पाने के लिए हराप्याज़ सबसे बेहतर साबित हो सकता है। हरे प्याज के बीजों को पीस लें और पानी में मिलाएं और इसके बादइस मिश्रण को सुबह, दिन और रात में भोजन करने से पहले पी लें । यह प्रक्रिया आपको एक महीने तक दोहरानी है ।
अदरक-शहद का मिश्रण
जब भी रात को सोने जाएं उससे पहले एक चम्मच अदरक पीस लें और उसमें आधा चमम्चशहद मिलाएं और अब इस मिश्रण को जीब द्वारा चाटें । यह मिश्रण शरीर में गर्मी पैदा करेगा, जिससे रक्त का प्रवाह बेहतर होगा ।
भिंडी पाउडर
रात को जब सोने जाएं तो उससे पहले गुनगुने दूध में 10 ग्राम भिंडी पाउडर मिलाकर पी लें । ऐसा लगातार एक महीने तक करें ।
लहसुन
किसी भी प्रकार की सेक्स समस्या हो, लहसुन उसमें बहुत लाभकारी होता है । ठीक इसी तरह शीघ्रपतन की समस्या में भी लहसुन एक चमत्कारी विकल्प है । प्रतिदिन आपको 3 से 4 कच्चेलहसुनकी कलियों का सेवन करना है ।इसका रोज़ सेवन करने शीघ्रपतन में राहत मिलेगी ।
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क्या एक औरत की पहचान मात्र उसका एक अंग ही है,,
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औरत की योनि से जुड़ा सबसे बड़ा ऑब्सेशन है सेक्स। जब भी सेक्स की बात आती है तो सारा ध्यान आ कर जहां रूक जाता है, वो है योनि।
जब बात मर्द की होती है तो हम ताक़त, हिम्मत और कई संज्ञाओं से उसकी तुलना करते हैं लेकिन बात जब औरत की होती है तो आज भी कहीं ना कहीं उसके भावनात्मक पहलुओं से अधिक उसके जिस्मानी पहलुओं पर ज़्यादा बात होती है।
ब्यूटी विद ब्रेन्स (Beauty with brains) इतनी बड़ी बात क्यों है? क्योंकि लड़की की पहचान आज भी सुंदर लड़की, गोरी लड़की, भरे शरीर वाली लड़की, कुछ इस तरह की जाती है।
शारीरिक रूप से औरत का एक अंग है योनि, जिससे हमारा समाज ऑब्सेस्ड है और ये मनोग्रस्तियां सिर्फ़ सेक्स तक सीमित नहीं है, कहीं ना कहीं औरत की पूरी पहचान ही एक अंग तक सिमट कर रह गई है।
आज की आधुनिक दुनिया में भी हमारे समाज में कई जगह योनि की पूजा की जाती है।
कई छोटे-छोटे गांव और कस्बों में कई मंदिर हैं जहां कुंवारी कन्याओं को देवी बनाकर बिठाया जाता है और लोग उनकी पूजा करने आते हैं। कुंवारी कन्याएं उन्हें कहा जाता है जो वर्जिन होती हैं।
कुछ लोग मानते हैं कि जो औरत, कुंवारी कन्या की पूजा करती है उसकी मां बनने की कामना पूरी हो जाती है। सभी लोगों की अपनी-अपनी मान्यताएं हैं जिनका हम पूरा सम्मान करते हैं लेकिन सवाल ये है कि क्या ये सही भी है?
औरते मानसिक तौर भी कहीं ना कहीं इस बात से ग्रसित हैं कि औरत की शक्ति या महिला उत्पीड़न को अगर किसी प्रतीक से दिखाया जा सकता है तो वो है योनि।
हां, ये सही है कि योनि, औरत को आदमी से अलग करती है, योनि औरत को जननी भी बनाती है लेकिन महिला जेंडर की पूरी परिभाषा इसके ही ईर्द-गिर्द क्यों गढ़ी जाती है?
योनि सिर्फ़ शारीरिक तौर पर आपको अलग करती है। कई किन्नर और ट्रांसवुमन हैं, लेकिन उनके पास ज़रूरी नहीं कि वजाइना हो। और ऐसे ही कुछ ट्रांसमेन के पास वजाइना है, लेकिन उनका जेंडर महिला नहीं। तो आज के समय में ये कहना कि सिर्फ वजाइना से महिला जेंडर है, गलत है।
योनि से जुड़े नारीवाद को सिर्फ़ औरत से जोड़ना बंद करना होगा। वजाइना से जुड़े नारे और वजाइना की जगह फूल की पेटिंग लगाकर पूरे फेमिनिज़्म को दर्शाना इसे बस एक अंग तक सीमित कर देता है। असली नारीवाद सबको साथ लेकर चलने की बात करता है इसे योनि की वॉल्व से ना बांधें।
संभोग सिर्फ योनि के ईर्द-गिर्द नहीं घूमता
औरत की योनि से जुड़ा सबसे बड़ा ऑब्सेशन है सेक्स। जब भी सेक्स की बात आती है तो औरत की सिर्फ़ एक ही चीज़ पर सारा ध्यान आ कर रूक जाता है, योनि। वैसे भी हमारे आधे से अधिक समाज में आज भी औरत के हर अंग पर उसके पति का अधिकार माना जाता है ख़ासकर उसे शादी से पहले संबंध बनाने की मनाही है क्योंकि फिर वो कुंवारी कैसे रहेगी?
और हमारे समाज में वैसे भी एक औरत पवित्र (pure) है या अपवित्र (polluted) ये आपका आचार-विचार या व्यवहार तय नहीं करता, योनि करती है। कइयों को सेक्स के नाम पर केवल यही पता होता है कि लिंग और योनि का संभोग।
कई लोगों को अपने ही इस ऑर्गेन की जानकारी नहीं है
योनि के पांच हिस्से होते हैं – क्लिटॉरिस (भगशिश्न), योनि मुख, सर्विक्स (गर्भाशय ग्रीवा), गुदा और पेरिनम (योनिमुख के बीच का हिस्सा) तो हम इसे औरत की पूरी पहचान क्यों बना देते हैं। योनि से जुड़े हमारे समाज की ऐसी विचारधाराओं पर अंकुश तभी लग सकता है जब हम ख़ुद भी औरत को सिर्फ उसके ‘body assets’ से नहीं बल्कि उसकी ताकत, शालीनता, निर्भीकता, शक्ति, दया-भावना से पहचानेंगे।
डिस्क्लेमर – इस आर्टिकल पर सेक्स और सेक्सुअलिटी के सम्बन्ध में बात इसलिए की गई है कि पूर्वाग्रहों, कुंठाओं से बाहर आ कर, इस विषय पर संवाद स्थापित किया जा सके, और एक स्वस्थ समाज का विकास किया जा सके | यहाँ किसी की भावनाएं भड़काने, किसी को चोट पहुँचाने, या किसी को क्या करना चाहिए ये बताने का प्रयास हरगिज़ नहीं किया जाता है ...
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👉1. सूर्य कमजोर होगा तो आत्म विश्वास की कमी रहेगी, मान सम्मान मे कमी रहेगी, बोलते समय मुँह से थूक निकलेगा ।
👉2. मंगल जब कमजोर होंगे तो गुस्सा बढ़ेंगे और चिरचिरे होंगे, BP की परेसानी, भाई बंधु से रिश्ते खराब।
👉3. गुरु जब कमजोर होंगे तो बुजुर्ग का सम्मान नहीं करेंगे, जंक फूड ज़्यादा खाएंगे, मोटापा बढ़ेगा, ज्ञान का अभाव रहेगा। विद्या प्राप्ति मे परेसानी, अधूरा ज्ञान।
👉4.राहु जब कमजोर होंगे तो मोबाइल में ज़्यादा व्यस्त रहेंगे, काल्पनिक दुनिया में खोये रहेंगे।
👉5. शनि जब कमजोर होंगे तो पैर घिस कर चलेंगे, एकांत में बैठने लगते हैं, पैर मे समस्या, रोजगार मे परेसानी, उम्र से पहले सफेद बाल ।
👉6. चंद्र जब कमजोर होंगे तो कुछ पूछने पर रोने लगेंगे, मन बैचैन रहेगा, मानशिक शांति का अभाव।
👉7. केतु कमजोर तो हर किसी से अपने दुख का रोना रोने लगते है, अपने आप को बेचारा समझते है, बिल्कुल अलग थलग पड़ जाते है, दुसरो से सहानुभूति की उम्मीद।
👉8. बुध जब कमजोर होंगे तो कंफ्यूजन रहेगा और एकाग्रता में कमी होती है, मैमोरी, ज्यादा बोलने की आदत ।
👉9. शुक्र जब कमजोर होंगे तो प्रेम जीवन मे परेसानी, साफ सफाई का अभाव, चहेरे मे रौनक नही।
🙏🏻 पंडित राम गोपाल
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जब हम किसी से #प्यार करते हैं तो वहीं हमारे लिए सबकुछ हो जाता है हम उसे नाराज करना नहीं चाहते हैं हम उसी के अनुसार अपने आप को बना लेंते है हमारा इतना समर्पण हमें प्यार से भर देता है और लोग इसे हमारी कमजोरी समझ लेते हैं अनायास ही हम पर गुस्सा करते हैं किसी और का गुस्सा भी हम पर ही निकालते हैं और हम चुपचाप सबकुछ सहते रहते हैं इस तरह हम अपनी इज्जत खो देते हैं हम रिश्ते बचाने के लिए चुपचाप सबकुछ सहन कर लेते हैं फिर जब उन्हें हमेशा के लिए दूर जाना होता है तो ऐसा करने का उन्हें बहाना भी मिल जाता है जाने वाला यह कहता है कि वो ऐसा इसलिए कर रहा है ताकि हमें उससे नफ़रत हों जाए । मैं यह सब झेल चुका हूं और इतना समझ गया हूं कि कोई भी रिश्ता हों हमें अपनी इज्जत नहीं खोनी चाहिए क्योंकि जिस रिश्ते में हमारी इज़्ज़त हीं नहीं होगी वहां हमारे लिए कभी प्यार नहीं हो सकता है।बस एक बार आप उन्हें उनकी भी भाषा में जवाब दीजिए यकीन मानिए रिश्ता रहें या न रहें ताउम्र कोई मलाल नहीं रहेगा
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कामना में डूबी स्त्री की आँखें लाल
और होंठ नीले होते हैं..
जब तुम इन नीले होंठों को चूमते हो
तो नाभि के पास खिंच जाती हैं दो लकीरें
एक होती है लज्जा
और एक अधैर्य की
तुम्हारे स्पर्श से उपजी कंपकपाहट
और श्वास की सित्कार से
स्त्री एक स्वप्न को जन्म देती है
उस स्वप्न में वो तुम्हारा हाथ पकड़
पानी पर चल रही है नंगे पांव..।।
सुनो पुरुष...
नदी पार करने के बाद
स्त्री के पैरों को भी चूम लेना
ये पैर तुम्हारे पास
सदियों की दूरी नापकर आये हैं...।।
- श्री राघवेन्द्रम् (अंश स्त्री रहस्य २०२०)
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संसार में कुछ भी अकारण नहीं होता,
सुंदर अंगो पर उगने वाले इन अनचाहे बालों के पीछे भी प्रकृति की कुछ तो मंशा रही होगी।..
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