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काम संहिता🙏
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सेक्स से जुड़ी हुई प्रेम से जुड़ी हुई सभी जानकारी के लिए सन्देश भेजे जय कामदेव कामसूत्र यौन स्थानों का सच्चा गुरु ग्रंथ है। अपने यौन जीवन में विविधता लाने के तरीके खोज रहे हैं? तब आप सही जगह पर आए हैं .. !!
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तेरे बदन पर मेरे दांतो के निशान आज भी है..
ये बिखरा हुआ बिस्तर भी रात की कहानी कह रहा है।।...
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हम बिस्तर होने से पहले 30 मिनट तक लज्जा छोड़
कर, तरह तरह से छेड़छाड़ अति आवश्यक होती है..
आज की सलाह
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मैं नहीं चाहता कि
तुम्हारा मुझसे कभी विवाह हो।
हाँ, सही सुना तुमने।
मैं कभी तुमसे विवाह नही करना चाहता।
क्योंकि मैने तुमसे प्रेम किया है।
शाश्वत प्रेम।
बिल्कुल सच्चा और परिशुद्ध।
विवाह करने पर
भोग विलास में लिप्त हो जाते है सभी।
मैंने सभी भोग विलासों को परे रखकर
सारी वासनाओ को दूर करके तुमसे प्रेम किया है।
मैं केवल चाहता हूँ निहारना
तुम्हारे माथे की वो छोटी सी बिंदिया
जो मुझे सारे संसार का केंद्र बिंदु लगती है।
तुम्हारी वो आंखे
जिनमे जब तुम काजल लगाती हो।
तो लगता है कि
बांध दिया है किसी ने
सफेद आसमान में उपस्थित काले चंद्रमा को।
मैं चाहता हूँ
अपने कंधे पर रखा हुआ तुम्हारा सर।
और कोई एकांत जगह।
और अंत मे
तुम्हारे हाथ मे मेरा हाथ
और दूर कही किसी अंधेरे रास्ते मे
मैं और तुम चलते जाए
और हो जाये सबकी नजरों से ओझल..
पर में विवाह चाहता हु
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महात्मा पुरुष स्त्रियों के प्रति कभी कठोर वर्ताव नहीं करते हैं। यह वचन है ..
"नहि स्त्रीषु महात्मनः क्वचिद् कुर्वन्ति दारुणम् ॥"( बाल्मीकि रामायण ४ / ३३ / ३६)
महापुरुषों के मत से जैसे अपनी स्त्री की रक्षा की जाती है, वैसे ही दूसरों की स्त्रियों की रक्षा करना चाहिये। जटायु रावण से यही बात कहता है
" यथा ऽऽत्मनस्तथान्येषां दारा रक्षया विपश्चिता (विमर्शनात्)।"( -बाल्मीकि रामायण ३/५०/५)
स्त्री को चाहिये कि वह अपने पति का त्याग कभी न करे पति का त्याग नारी के लिये क्रूरता पूर्ण कर्म है। पति को त्यागने की बात स्त्री के मन में कभी लानी भी नहीं चाहिये। ऐसा श्री राम अपनी माता कौशल्या से कहते हैं...
" भर्तुः किल परित्यागो नृशंस केवलं स्त्रियाः ।
स भवत्या न कर्तव्यो मनसापि विगर्हितः ।।"
(बा. रा. २/२४/१२ )
पत्नी का पति से अटूट सम्बन्ध है सीता जी अपने स्वामी राम जी से कहती हैं
"इह लोके च पितृभिर् या स्त्री यस्य महाबल। अद्भिर् दत्ता स्वधर्मेण प्रेत्यभावेऽपि तस्य सा ॥" - (बा. रा. २/२९/२८)
हे महाबल । पिता आदि के द्वारा जो कन्या जिस पुरुष को अपने धर्म के अनुसार जल से संकल्प कर दे दी जाती है, वह मरने के बाद पर लोक में भी उसी की स्त्री होती है। स्त्री का गुरु उस का पति होता है। 'नार्याः पतिर् गुरु ।' -( बा. रा. २/११८/२ )
अतएव स्त्री के लिये पति सेवा के अतिरिक्त दूसरे किसी तप का विधान नहीं है। यह सूक्ति है "पतिशुश्रूषणात् नार्यास्तपो नान्यद् विधीयते ॥" -(बा. रा. २/११८/९)
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🌷🌿प्यास का प्रेम और प्रेम की प्यास 🌷🌿
🌷🌿🌷:::::::::पुरुष ने किसी रात
गहरी नींद सोई स्त्री के कानों को छुआ
होठों को चूमा
स्त्री ने कहा
"सोने दो न"
और उसने आगोश फैला दिया
आलिंगन में कस लिया पुरूष को
पुरुष ने मन भर पीया स्त्री को
और करवट बदल कर सो गया
ऐसी ही किसी रात
स्त्री ने
नींद में कसमसाते पुरूष के कान छुए
बालों में हाथ फिराया
पुरूष ने हाथ झटक दिया
बड़बड़ाया, "सोने दो यार"
और पीठ करके सो गया
स्त्री ने मन की करवट बदली
सो गई
पुरुष के पास प्यास का प्रेम था
और नदी भर स्त्री थी
स्त्री के पास प्रेम की प्यास थी
और बहते-बहते सूख जाना
नियति में लिखा था::::::::::🌷🌿🌷
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CAR में सेक्स
विलासिता की कार लंबे समय से परिवहन के साधन में बदल गई है, इसलिए इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि जोड़े केबिन में कुछ मजा करने से पीछे नहीं हैं। यहाँ एक ही परेशानी है - यौन प्रयोगों के लिए जगह की भारी कमी है। हालाँकि, सही दृष्टिकोण के साथ, आप इसे बेबी स्मार्ट के अंदर भी कर सकते हैं। यहां मोबाइल पोजीशन का चयन किया गया है जिसे आपको लंबी यात्रा पर अपने साथ ले जाना चाहिए।
$EX IN THE CAR
A car from a luxury has long turned into a means of transportation, so it's no wonder that couples are not averse to having some fun in the cabin. Here is the only trouble - there is a sorely lack of space for sexual experiments. However, with the right approach, you can do this even inside the baby Smart. Here is a selection of mobile positions that you must take with you on a long journey.
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कितना खूबसूरत लिखा है.... 💓💓💓💓
कुछ तस्वीरें बहुत सुन्दर होती हैं। इतनी सुन्दर कि उनपर मोटी किताब लिख दी जाय फिर भी बात खत्म न हो... इस तस्वीर को ही देखिये, जाने कितने अनसुलझे प्रश्नों के उत्तर हैं इस तस्वीर में...
स्त्रियों के पांव बहुत सुन्दर होते हैं। इतने सुन्दर, कि सभ्यता उन पांवों की महावर वाली छाप अपने आँचल में सँजो कर रखती है। पुरुषों के पांव उतने सुन्दर नहीं होते...उभरी हुई नशें, निकली हुई हड्डियां, फ़टी हुई एड़ियां... ठीक वैसे ही, जैसे मोर के पांव सुन्दर नहीं होते...
मैं ठेंठ देहाती की तरह सोचता हूँ। एक आम देहाती पुरुष अपने पैरों को केवल इसलिए कुरूप बना लेता है, ताकि उसकी स्त्री अपने सुन्दर पैरों में मेहदी रचा सके। स्त्री के पांव में बिवाई न फटे, इसी का जतन करते करते उसके पांव में बिवाई फट जाती है।
स्त्री नख से शिख तक सुन्दर होती है, पुरुष नहीं। पुरुष का सौंदर्य उसके चेहरे पर तब उभरता है जब वह अपने साहस के बल पर विपरीत परिस्थितियों को भी अनुकूल कर लेता है।
ईश्वर ने गढ़ते समय पुरुष और स्त्री की लंबाई में थोड़ा सा अंतर कर दिया। पुरुष लंबे हो गए, स्त्री छोटी गयी। इस अंतर को पाटने के दो ही तरीके हो सकते हैं। या तो स्त्री पांव उचका कर बड़ी हो जाय, या पुरुष माथा झुका कर छोटा हो जाय... बाबा लिखते हैं, जब राजा जनक के दरबार में स्वयम्बर के समय माता भगवान राम को वरमाला पहनाने आयीं, तो प्रभु उनसे ऊंचे निकले। माता को उचकना पड़ता, पर प्रभु ने स्वयं ही सर झुका लिया। दोनो बराबर हो गए... वहीं से तो सीखते हैं हम सबकुछ... स्त्री पुरुष सम्बन्धों में यदि प्रेम है, समर्पण है, सम्मान है, तो बड़े से बड़े अंतर को भी थोड़ा सा उचक कर या सर नवा कर पाट दिया जा सकता है।
दरअसल सम्बन्धों में सत्ता देह के अनुपात की नहीं होती। दो व्यक्तियों के बीच बराबरी न सौंदर्य के आधार पर हो सकती है, न शारीरिक शक्ति के आधार पर... बस सम्वेदनाओं में समानता हो तो दोनों बराबर हो जाते हैं। सियाराम के सौंदर्य की बात तो कवियों की कल्पना से तय होती रही है, तत्व यह है कि वियोग के दिनों में वन वन भटक कर भी राम हर क्षण सीता के रहे, और स्वर्ण लंका की वाटिका में रह कर भी सीता हर क्षण बस राम की रहीं... दोनों की सम्वेदना समान थी, सो दोनो सदैव बराबर रहे...
गांव के बुजुर्ग कहते हैं, पुरुष की प्रतिष्ठा उसकी स्त्री तय करती है और स्त्री का सौंदर्य उसका पुरुष... दोनों के बीच समर्पण हो तभी उनका संसार सुन्दर होता है।
वैसे सौंदर्य की परिभाषा में तनिक ढील दें तो मनुष्य के सबसे सुंदर अंग उसके पांव ही होते हैं। इतने सुंदर, कि उन्हें पूजा जाता है।
#आभार
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स्त्री का आकर्षण स्तन से है, स्त्री कितनी भी सुंदर हो अगर स्तन सुडोल और आकर्षक न हो तो सुंदरता अधूरी रहती है , स्तन के बाद नयन नक्श , रंग का कोई प्रभाव नहीं सुंदरता में। इसलिए आप देखते होंगे स्त्री ब्रा का चुनाव ध्यान से करती है ।
शायद आप का अनुभव भी यही होगा।
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आपको एक रहस्य की बात बताता हूं --
स्त्री को जिस प्रकार का प्रेम चाहिए होता है ,
उसी के अनुरूप , उसे पुरुष को ढालना पड़ता है।
(बशर्ते कि पुरुष संभ्रांत वर्ग का हो)
संभ्रांत वर्ग के पुरुष ही स्त्रियों का सम्मान कर पाते हैं।
ऐसा नहीं है कि धर्म और मर्यादा का पालन करने वालों के अंदर भावनाएं नहीं होती। बल्कि उनकी भावनाएं तो अत्यंत उच्च कोटि की होती हैं।
◾निम्न वर्ग का पुरुष सीधे कामवासना पर उतर आता है।
संभ्रांत वर्ग के पुरुष ...स्त्री की मनोवृति के अनुसार ही आगे बढ़ते हैं।
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यहां हम आपको यह बता देना चाहते हैं कि उत्तेजना के लिये कोई भी तरीका चुना जाए लेकिन जरूरी यह है कि उसे सतत् और दृढ़ लय के साथ बनाए रखे . कई बार जब कोई दूसरा महिला में उत्तेजना नहीं पा रहा होता है तब भी ज्यादातर महिलाएं अपने यौन अंगों को स्वयं उत्तेजित कर सकती हैं. क्योंकि भगशिश्न की उत्तेजना के अनुभव से योनि में कुछ तरंगे सी हलचल करने लगती हैं. जिससे तीव्र उत्तेजना की प्राप्ति होती है. वहीं इसके विपरीत भगशिश्न चरमोत्कर्ष के पश्चात छूने पर असहज सा महसूस कराती है.
जब आप हस्तमैथुन को लेकर सहज हो जाएं तो प्रयास करें की शीशे के सामने हस्तमैथुन करें. ऐसे में आप देख सकते हैं कि उत्तेजना के दौरान आपके अंग कैसी प्रतिक्रिया देते हैं. इससे जहां आनंद की अनुभुति में बढ़ोत्तरी होगी वहीं आप अपने सेक्सी लुक का लुत्फ भी उठा सकेंगी.
महिला हस्तमैथुन के प्रसिध्द तरीके:-
ज्यादातर महिलाएं , ज्यादातर समय हस्तमैथुन के लिये बेड या सोफे में टांगे फैला कर लेटना या पीठ के बल टिकना पसंद करती हैं. उनका फोकस मुख्यतः भगशिश्न पर होता है. पर कइयों को प्रवेश में मजा आता है. विशेषकर जब वे ज्यादा उत्तेजित हो जाती हैं. इन पोजीशनों में वे भगशिश्न को ज्यादा अच्छी तरीके से पा सकती हैं और छूने के विभिन्न तरीकों पर प्रयोग कर सकते हैं.
ज्यादातर महिलाएं लय बनाए रखना पसंद करती हैं. वहीं कुछ रुकना फिर शुरू करना पसंद करती हैं. यहां एक बात यह भी बता देना जरूरी है कि तीव्र उत्तेजना के लिये जैसे ही आवेग को पाते जाते हैं , आप अपने पैरों की एड़ियों पर दबाव डाल कर जांघों के बीच के हिस्से को उठाकर तनाव का प्रयास करें इससे उत्तेजना की तीव्रता में काफी इजाफा होगा.
इसके अलावा एक और तरीका है जो ज्यादा उपयोग किया जाता है वह कि पलंग या सोफे के हत्थे पर तकिया लगा कर उसके ऊपर बैठ जाएं. फिर टांगे फैलाकर थोड़ी दृढ़ता से बैठे. अब भगशिश्न को अपने हाथों से उत्तेजित करें.
अंत में यह महत्वपूर्ण नहीं है कि किस तरीके से आप स्वयं को ज्यादा उत्तेजित करते हैं, जरूरत है कि आप अपने पार्टनर से यह बातें बांटे कि किस तरीके में आप बेहतर महसूस करती हैं. साथ ही उसे करके दिखाएं कि सेक्स प्ले के दौरान वह किस तरह से आपको उत्तेजित कर सकता है. इससे आपको पूर्ण संतुष्टि मिलने के साथ-साथ उसे भी उत्तेजना का पूरा अवसर मिलेगा.
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महिला हस्तमैथुन के तरीके
इसमें न तो लज्जा महसूस करें और न ही डरें. हस्तमैथुन या यौन अंगों को स्वयं उत्तेजित करना लड़कों तथा लड़कियों द्वारा की जाने वाली सामान्य क्रिया होती है. विज्ञान द्वारा यह सिद्ध किया जा चुका है कि इससे कोई हानि नहीं होती है. यहां महिलाओं द्वारा यौन अंगों को स्वयं उत्तेजित करने के तरीके बताए जा रहे हैं जो उन्हें बेहद संवेदनशील अनुभव देने के साथ प्रबल उत्तेजना प्रदान करेंगे , चाहे वह अकेले हो या फिर अपने पार्टनर के साथ.
महिलाएं यदि यौन अंगों को कभी स्वयं उत्तेजित नहीं की हैं तो इस बात की भी संभावना रहती है कि सेक्स क्रिया के दौरान उन्हें पर्याप्त उत्तेजना से वंचित रहना पड़े. औसत तौर पर पुरुष 12-13 वर्ष की उम्र के दौरान हस्त मैथुन शुरू कर देते हैं. इसके विपरीत महिलाएं तरुणाई (13 से 19 वर्ष ) के अंतिम दौर में हस्त मैथुन शुरू करती हैं, लेकिन यह मामला इतना ढंका और छिपा होता है कि किसी से भी चर्चा में भी सामने नहीं आने दिया जाता है. पूर्ण तरुण होने पर हस्तमैथुन का मामला खुले रहस्य की ओर झुकाव लेने लगता है. ज्यादातर लोग इस मामले पर पर्दा ही पड़े रहना देना चाहते हैं. लेकिन अब कुछ ऐसे युवा तैयार हो रहे हैं जो इन वर्जनाओं को तोड़ कर हस्तमैथुन के तरीकों पर चर्चा कर रहे हैं और खुलेतौर पर हिस्सा ले रहे हैं. इसलिये आप यदि अपने लिये इस धीमें और आनंददायी सेक्स को लेकर पक्के (sure) नहीं है तो यहां हम आपको बता रहे हैं कि यह कैसे होता है.
शुरुआती दौर वालों के लिए:-
यदि आप हस्तमैथुन के लिये नई हैं तो अपना समय और स्थान सावधानी पूर्वक चयन करें और एक दृश्य निर्मित करें. इसके लिये बेहतर आइडिया है कि यह तब किया जाय जब आपके घर के सभी लोग बाहर हों . इससे आपमें एक आत्मबोध तो होगा ही साथ ही आपको किसी तरह का डर भी नहीं होगा. इसकी शुरुआत के लिये अपना फोन बंद कर दें, साथ ही यह सुनिश्चित कर लें की आपको किसी तरह की जल्दबाजी नहीं हो. यदि आप दबाव में हैं तो इस दौरान नहाना लाभदायक होगा. धीमा और शांत संगीत बजाएं और अपनी उधेड़बुन से दूर हों. अब आप सेक्सी सोचने और अनुभव करने में सक्षम हैं वह भी बिना रुकावट या बिना दोषी होने की अनुभूति के साथ और यह अनुभूति प्रतिदिन की हस्तमैथुन बिना सोच से बेहतर होगी. ज्यादातर महिलाएं इस वक्त हाथ में लिये जा सकने वाले आइने से अपने गुप्तांगों और जननागों को देखना पसंद करती हैं. यह महत्वपूर्ण भी है कि आप अपने शरीर के बारे में अच्छा और बेहतर ज्ञान रखें, अन्यथा सुना सुनाया फूहड़पन आपको दिमागी अंधेरे की ओर ले जाएगा. इसलिए अब आइना देखना शुरू कीजिए . अब जब संतुष्ट हो जाएं और उत्तेजना का एहसास होने लगे तो शीशे को एक किनारे रख दो और अपने शरीर को छूना शुरू करें. स्तनों, पेट और जांघों को थपथपाते हुए सहलाएं और हर उस जगह अपना हाथ फेरे जहां आपको आनंद की अनुभूति मिलती है. आनंद की प्राप्ति में बाधक बन रही हर सोच व डर को बाहर निकाल दें. आप चाहें तो सहलाने के दौरान मसाज आयल का प्रयोग कर सकते हैं. इसके साथ ही कोई अच्छे स्निग्ध द्रव का प्रयोग करें जब आप अपने भगशिश्न को उत्तेजित कर रहीं हों.
अपनी कल्पनाशीलता का प्रयोग करें. यह हस्तमैथुन के तरीकों की वह चाभी है जिसकी ओर लोग अक्सर ध्यान नहीं देते हैं. जबकि हमारे सेक्सुअल आनंद का ज्यादातर जिम्मेदार हमारा दिमाग ही होता है. किसी ऐसे व्यक्ति के बारे में सोचे जिसके साथ सेक्स करने की इच्छा रखती हों या अपने पार्टनर को कल्पनाओं में लाएं. अब उस तरीके के बारे में सोचे कि किस तरह से उसके साथ सेक्स करने की इच्छा है साथ ही उस जगह की कल्पना करें जहां सेक्स करना आपको सबसे आनंददायी लगता है. इस तरह आप अन्य कामुक दृश्यों की कल्पना कर उत्तेजना को आसानी से प्राप्त कर सकते हैं. जैसे-जैसे आपकी कल्पनाशीलता बढ़ती जाएगी आप तीव्र उत्तेजना का अनुभव करने लगेंगी. अब जब सनसनी सी महसूस होने लगे तो बड़े ही सौम्य तरीके से जननेन्द्रियों को छुएं. बाह्य भगोष्ठ को थपथपाते हुए सहलाएं, दबाएं और रगड़े वह भी तब तक की जब तक की आप को यह न पता चल जाए कि किस तरीके से ज्यादा आनंद की प्राप्ति होती है. अब अपनी उंगलियों को थूक से गीला करें या फिर कोई स्निग्ध द्रव (lubricant) लगाएं. अब सहलाने की क्रिया भगशिश्न पर फोकस करें. अपनी उंगलियां भगशिश्न पर फिराएं, सहलाने के दौरान दबाव और दिशा बदलने का प्रयास करें. कभी किनारे-किनारे तो कभी वृत्ताकार घुमाएं और देखें कि किसमें ज्यादा मजा आता है. अब जब आप तीव्र उत्तेजित हो जाते हैं तो आप देखेंगे कि भगशिश्न की टोपी (clitoral hood) पीछे खिंच गई है. अब आप खुले भगशिश्न के सिरे को सहलाकर ज्यादा आनंद की प्राप्ति कर सकतीं है. कई महिलाएं इस प्वाइंट को लेकर काफी संवेदनशील होती हैं.
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और तकलीफ तब भी होती है की तुम किसी को चाहो और वो तुम्हे हर बार किसी छोटी थोड़ी देर की खुशी के लिए अनदेखा करे 😭😭😢
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और तकलीफ तब भी होती है की तुम किसी को चाहो और वो तुम्हे कहे के में जा रहा हु या जा रही हु 😞😭😢
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