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काम संहिता🙏
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सेक्स से जुड़ी हुई प्रेम से जुड़ी हुई सभी जानकारी के लिए सन्देश भेजे जय कामदेव कामसूत्र यौन स्थानों का सच्चा गुरु ग्रंथ है। अपने यौन जीवन में विविधता लाने के तरीके खोज रहे हैं? तब आप सही जगह पर आए हैं .. !!
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❤️ जो बसी है सबकी आंख में,
वो दबी है दो फांक में ।
बैठे हैं सब इसी की ताक में ,
इसके चक्कर में मिल गये है
मिल गए हैं बड़े-बड़े खाक में ।❤️
नज़रें बर कदम होश हर दम 🌹🙏💐
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संभोग करते क्षण में श्वास जितनी शांत और शिथिल होगी, संभोग का काल उतना ही लंबा हो जाएगा। अगर श्वास को बिलकुल शिथिल रहने का थोड़ा सा अभ्यास किया जाए, तो संभोग के क्षणों को कितना ही लंबा किया जा सकता है।
संभोग के क्षण जितने लंबे होंगे, उतने ही संभोग के भीतर से समाधि का जो सूत्र मैंने कहा है- निरहंकार भाव, ईगोलेसनेस और टाइमलेसनेस का अनुभव शुरू हो जाएगा।
श्वास अत्यंत शिथिल होनी चाहिए। श्वास के शिथिल होते ही संभोग की गहराई, अर्थ और नये उद्घाटन शुरू हो जाएंगे।
और दूसरी बात, संभोग के क्षण में ध्यान दोनों आंखों के बीच, जहां योग आज्ञाचक्र को बताता है, वहां अगर ध्यान हो तो संभोग की सीमा और समय तीन घंटों तक बढ़ाया जा सकता है। और एक संभोग व्यक्ति को सदा के लिए ब्रह्मचर्य में प्रतिष्ठित कर देगा। न केवल इस जन्म के लिए, बल्कि अगले जन्म के लिए भी।
तो दो बातें मैंने कहीं उस गहराई के लिए-श्वास शिथिल हो, इतनी शिथिल हो कि जैसे चलती ही नहीं; और ध्यान, सारा अटेंशन आज्ञाचक्र के पास हो, दोनों आंखों के बीच के बिंदु पर हो। जितना ध्यान मस्तिष्क के पास होगा, उतना ही संभोग की गहराई अपने आप बढ़ जाएगी।
जितनी श्वास शिथिल होगी, उतनी लंबाई बढ़ जाएगी। और आपको पहली दफा अनुभव होगा कि संभोग का आकर्षण नहीं है मनुष्य के मन में, मनुष्य के मन में समाधि का आकर्षण है। और एक बार उसकी झलक मिल जाए, एक बार बिजली चमक जाए और हमें दिखाई पड़ जाए अंधेरे में कि रास्ता क्या है, फिर हम रास्ते पर आगे निकल सकते हैं।
एक आदमी एक गंदे घर में बैठा है। दीवालें अंधेरी हैं और धुएँ से पुती हुई हैं। घर बदबू से भरा हुआ है। लेकिन खिलाड़ी खोल सकता है। उस गंदे घर की खिड़की में खड़े होकर भी वह देख सकता है--दूर आकाश को, तारों को, सूरज को, उड़ते हुए पंक्षियों को। और तब उस घर के बाहर निकलने में कठिनाई न रह जाएगी।
जिसे एक बार दिखाई पड़ गया कि बाहर निर्मल आकाश है, सूरज है, चांद है, तारे हैं, उड़ते हुए पंछी हैं, हवाओं में झूमते हुए वृक्ष और फूलों की सुगंध है, मुक्ति है बाहर, वह फिर अंधेरी और धुएँ से भरी हुई कोठरियों में बैठने को राजी नहीं होगा, वह बाहर निकल जाएगा। जिस दिन आदमी को संभोग के भीतर समाधि की पहली थोड़ी सी भी अनुभूति होती है, उसी दिन सेक्स का गंदा मकान, सेक्स की दीवालें, अंधेरे से भरी हुई व्यर्थ हो जाती है और आदमी बाहर निकल आता है।
इसलिए मैं कहता हूं कि संभोग के प्रति दुर्भाव छोड़ दें। समझने की चेष्टा, प्रयोग करने की चेष्टा करें, और संभोग को एक पवित्रता की स्थिति दे।
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खैरियत पूछो तो किससे जबकि मेरा नींद चैन तुम्हारे हैं
नजरें मिलाओ तो कैसे जबकि यह नजरें भी तुम्हारे हैं
किस नजर से देखो हर नजर में तो तू ही तू है
अब जाने दे अपनी आलिंगन से
सुबह हो गई प्रियत्मा
तेरे इस नैनो के झील
और मधुशाला की ओठ में
मैं तृप्त हो गया
तुम्हारी गर्म धधकती जवानी पर
स्खलन ने शांत कर दिया जानू।।
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उम्र बढ़ती है जिस्म तप के कंचन बन जाती है, संभोग का आनंद चौगुना हो जाता है 40+ महिलाओं पुरुषों के साथ ।
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प्रेम में पड़ी युवतियां खिल जाती है कमल पुष्प के समान,स्वभाव में आ जाती है चंचलता,अल्हड़पन और मस्ती।उनके होंठ गुलाब की पंखुड़ियों जैसे हर पल मुस्कान से भरे रहते है साथ ही आ जाता है बदलाव तन की बनावट में.. उभर आते है अंग.. यौवन का चरम पर होना मानो संकेत दे रहा कि वह प्रेम में है और खुश है..उनके बोलने में आ जाती है मधुरता..वह पूरी प्रेममय हो जाती है,खो जाती है प्रेम के सपनों में...वह चाहती है खुलकर जीना।
-। दिलजीत
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संभोग में तंत्र साधना आत्मज्ञान,संतुष्टि और ध्यानस्थ होने का एक प्रबल साधन है यह अत्यन्त प्राचीन कलात्मक विज्ञान है हर व्यक्ति को इसका थोड़ा सा ज्ञान तो होना ही चाहिए यह दो शरीर के साथ आत्मा को भी जोड़ता है। भैरवी तंत्र यह ऊर्जा के स्थानांतरण की श्रेष्ठ साधना है।
दिलजीत
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जंगल को सप्ताह में 1 बार जरूर सही से साफ करिए ताकि चाटने में प्रेमी को और चूसने में प्रियतमा को परेशानी भी नही हो और बीमारी भी नहीं हो।
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यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता: !
यत्रेतास्तु न पूज्यन्ते सर्वास्तत्राफला: क्रिया: !!
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बहक न जाए जो पी कर, वो रिन्द ही क्या है
बस एक सिम्त उड़ा जा रहा हूँ वहशत में
ख़बर नहीं कि ख़ुदी क्या है, बेख़ुदी क्या है
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गुप्ताजी के घर शर्माजी आये। गुप्ताजी अपने बच्चों की *पहचान* कराने लगे।
ये मेरी बेटी *रानी।* शादी से पहले हम मुंबई में 'रानी बाग़' में घूमा करते थे, उसकी याद में इसका नाम रानी रखा।
*शर्माजी:* वाह, प्यारी बिटिया है।
*गुप्ताजी:* ये मेरा बेटा *ताज।* शादी के 5 साल बाद दूसरे हनीमून पे हम आगरा गए थे, उसकी याद में।
*शर्माजी:* बहुत खूब, बहुत सोच कर नाम रखा है आपने।
*गुप्ताजी:* और ये मेरा छोटा बेटा *कोहिनूर।*
*शर्माजी:* क्या बात है! मतलब आप लंदन में कोहिनूर हीरा देख आये?
*गुप्ताजी:* अरे नहीं! हम तो इस्तेमाल कर रहे थे *लेकिन इस ब्राण्ड ने धोखा दे दिया।*😂😂😂😂😂😂
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सुनो !
मृग तृष्णा में क्यूं भटकुं,
अगर धरती पर अमृत कहीं है तो..
वह तुम्हारे इन गुलाबी अधरों में है।..
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लेक्चर के बीच में प्रोफेसर ने पूछा- कितने छात्र भूत में यकीन करते हैं?
करीब 50 छात्रों के हाथ खड़े हो गये।
प्रोफेसर - बहुत अच्छे, अब यह बताओ कि कितने छात्रों ने भूत को देखा है?
लगभग 20 हाथ खड़े हो गये।
प्रोफेसर - बहुत अच्छे, अच्छा अब यह बताओ कि भूत को कितने लोगो ने बहुत करीब से देखा है?
लगभग 5 हाथ खड़े हो गये।
प्रोफेसर - शाबाश, अच्छा अब यह बताओ कितने लोगों ने भूत को चूमा है?
केवल एक लड़के का हाथ खड़ा हुआ और उसका नाम पांडे था।
प्रोफेसर - मैंने आज तक खुद नहीं सुना कि किसी ने ऐसा किया हो, पांडे, इधर मेरे पास आ जाओ।
पांडे उठ कर प्रोफेसर के पास चला गया।
प्रोफेसर - तो तुम कह रहे हो कि तुमने भूत को चूमा है, ज़रा पूरी डीटेल से बात बताओ।
पांडे - *भूत?????* सॉरी सर, पीछे बैठा था कुछ अलग ही चूत सुनाई दिया।
😝😝😝😝😝😝😝😂😂😂😂😂😂😂😂
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सुनो प्रियतमा! जब तुम्हारी याद आती है ना तब खूब रोते है हम पर हां तुम्हे तो पता भी नहीं चलेगा ना..क्योंकि अब हमारी बात नहीं होती।♥️🖤
विष❤️😢
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